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                <title>Tribal Development - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>झारखण्ड का बजट: अंतिम पायदान पर खड़े समाज के विकास का सच्चा आईना बने</title>
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                        <![CDATA[झारखण्ड का बजट तभी ऐतिहासिक होगा जब वह अंतिम पायदान पर खड़े दलित, आदिवासी, मूलवासी और गरीब समाज के विकास का वास्तविक प्रतिबिंब बने। शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित बजट ही राज्य को सामाजिक न्याय का मॉडल बना सकता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/opinion/jharkhands-budget-should-become-a-national-model-of-social-justice/article-18249"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/c136e8c6-8a8c-45a8-9bf2-8712d983adce_samridh_1200x720-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p>झारखण्ड की इस पावन धरती पर खनिजों की अनमोल चमक है — कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, यूरेनियम। लेकिन इसी माटी में सदियों से शोषण, विस्थापन और अधिकार-वंचना का खून बहता रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की लगभग 26.21% आबादी अनुसूचित जनजाति और लगभग 12% अनुसूचित जाति से है। यानी हर तीन में से एक झारखण्डवासी उस समुदाय से है, जिसे इतिहास ने विकास की दौड़ में सबसे पीछे धकेल दिया।</p>
<p>आज जब राज्य का वार्षिक बजट लाखों करोड़ की योजनाओं का खाका खींचता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है — क्या बजट की पहली पंक्ति में वे लोग हैं, जो सदियों से अंतिम पायदान पर खड़े हैं?</p>
<p>झारखण्ड देश के खनिज उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन मानव विकास सूचकांक में देश के पिछड़े राज्यों में शुमार है। यह विडंबना तभी खत्म होगी, जब बजट की प्राथमिकता खनिज नहीं, मनुष्य होगी; लाभ नहीं, अधिकार होगा; और विकास का मतलब विस्थापन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण होगा।</p>
<p>यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित, डेटा-आधारित, पारदर्शी और समुदाय-संचालित बजट बने, तो झारखण्ड न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा, बल्कि पूरे देश के लिए सामाजिक न्याय का जीवंत मॉडल भी बनेगा। ऐसा बजट ही दलित-आदिवासी-मूलवासी एवं अन्य कमजोर वर्गों के अंतिम पायदान पर बैठे नागरिकों तथा उच्च जाति के सबसे गरीब परिवारों के सर्वांगीन, चहुमुखी और समग्र विकास का वास्तविक मार्ग प्रशस्त करेगा।</p>
<p><strong>विकास बनाम वंचना: एक कठोर सच</strong></p>
<p>झारखण्ड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में अग्रणी है, लेकिन जिन जिलों से ये खनिज निकलते हैं — पश्चिम सिंहभूम, गुमला, पाकुड़, लातेहार — वहीं गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और पलायन की दर सबसे ऊँची है। विकास की गाड़ी तेज़ चली, लेकिन अंतिम डिब्बा छूट गया। यह विरोधाभास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिक संकट है। अब समय आ गया है कि बजट इस नैतिक संकट का समाधान बने।</p>
<p><strong>1. शिक्षा: अधिकार, दान नहीं</strong></p>
<p>आदिवासी-दलित बहुल क्षेत्रों में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 25-35% तक पहुँच चुकी है। बालिका शिक्षा की स्थिति और भी दर्दनाक है। यदि बजट में शिक्षा पर 30% से कम आवंटन होता है, तो यह सामाजिक न्याय की अधूरी प्रतिबद्धता होगी।</p>
<p>बजट में हर आदिवासी प्रखंड में आवासीय विद्यालय अनिवार्य हों। प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा — संथाली, मुंडारी, हो, कुरुख — में हो, ताकि बच्चे की सीखने की क्षमता बढ़े और सांस्कृतिक पहचान बरकरार रहे। उच्च शिक्षा में दलित-आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 100% छात्रवृत्ति, कोचिंग सहायता और तकनीकी संस्थानों में आरक्षित सीटों का सख्त क्रियान्वयन हो।</p>
<p>“दलित-आदिवासी कौशल मिशन” के तहत ₹1000-2000 करोड़ का वार्षिक प्रावधान कर आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्किल सेंटरों को उद्योगों से जोड़ा जाए, ताकि प्रशिक्षण के साथ रोजगार भी सुनिश्चित हो। शिक्षा केवल साक्षरता नहीं — यह सामाजिक गतिशीलता का सबसे मजबूत पुल है। यही वह सीढ़ी है, जिस पर चढ़कर अंतिम पायदान का बच्चा भी शिखर छू सकता है।</p>
<p><strong>2. भूमि और वनाधिकार: सम्मान का प्रश्न</strong></p>
<p>सदियों से जंगल-जमीन से जुड़ा समाज आज भी अपने ही संसाधनों पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। वनाधिकार कानून (FRA) के तहत हजारों दावे अभी भी लंबित हैं। जब तक सामुदायिक और व्यक्तिगत पट्टे नहीं बाँटे जाते, विकास अधूरा रहेगा।</p>
<p>बजट में “FRA मिशन फंड” के तहत कम से कम ₹500 करोड़ का विशेष प्रावधान हो। लघु वनोपज — तसर, महुआ, साल बीज, लाख — के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और स्थानीय प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित हों। खनिज रॉयल्टी और DMF फंड का कम से कम 40% स्थानीय समुदायों के विकास पर खर्च हो।</p>
<p>सिंचाई, सौर पंप, सूक्ष्म जलाशयों में निवेश बढ़े। महिला स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण और विपणन सहायता दी जाए। विकास का मॉडल विस्थापन का नहीं, स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के अधिकार का हो। तभी न्यायपूर्ण विकास संभव होगा।</p>
<p><strong>3. स्वास्थ्य: जीवन का अधिकार</strong></p>
<p>दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएँ आज भी नाममात्र की हैं। मातृ मृत्यु दर और कुपोषण गंभीर समस्या बने हुए हैं। स्वास्थ्य बजट में 25% वृद्धि हो। हर 20,000 आबादी पर एक पूर्ण सुसज्जित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बने, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर, दवाइयाँ और एम्बुलेंस अनिवार्य हों।</p>
<p>“पोषण सुरक्षा मिशन” के लिए ₹1000 करोड़ का वार्षिक प्रावधान हो। मोबाइल मेडिकल यूनिट, मातृ-शिशु स्वास्थ्य मिशन और मानसिक स्वास्थ्य व नशा मुक्ति केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हों। स्वास्थ्य कोई दया नहीं, संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन का अधिकार है। बजट में यह भावना साफ झलकनी चाहिए।</p>
<p><strong>4. रोजगार और पलायन: मजबूरी नहीं, विकल्प</strong></p>
<p>झारखण्ड से लाखों युवा रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं। यह सिर्फ आर्थिक नहीं, सामाजिक विखंडन की त्रासदी है। “दलित-आदिवासी उद्यमिता कोष” के लिए ₹2000 करोड़ का प्रावधान हो। खनिज आधारित उद्योगों में 75% स्थानीय रोजगार अनिवार्य किया जाए।</p>
<p>मनरेगा को जल संरक्षण और उत्पादक परिसंपत्तियों से जोड़ा जाए। हस्तशिल्प, बांस, तसर और कृषि आधारित लघु उद्योगों के लिए विशेष स्टार्टअप कोष बने। रोजगार ऐसा हो, जो पलायन रोके, आत्मसम्मान बढ़ाए और युवाओं को अपनी मिट्टी से जोड़े।</p>
<p><strong>5. सामाजिक न्याय और सुरक्षा</strong></p>
<p>अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के बावजूद न्याय प्रक्रिया लंबी और जटिल है। कानूनी सहायता और फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए विशेष कोष हो। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन में 50% वृद्धि हो। सभी छात्रवृत्ति और सामाजिक योजनाओं का 100% समयबद्ध DBT सुनिश्चित हो। न्याय कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए।</p>
<p><strong>आवास, सड़क और बुनियादी ढाँचा</strong></p>
<p>सुरक्षित पक्का घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी — ये सुविधाएँ नहीं, गरिमापूर्ण जीवन के अनिवार्य तत्व हैं। आदिवासी-दलित बस्तियों में पक्के घरों का निर्माण, हर घर जल योजना का पूर्ण विस्तार, हर टोला को सड़क से जोड़ना और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बजट की प्राथमिकता बने।</p>
<p><strong>पारदर्शिता और जनभागीदारी</strong></p>
<p>बजट बनाना पर्याप्त नहीं, उसका सही उपयोग ज़रूरी है। इसलिए ग्राम सभा आधारित पार्टिसिपेटरी बजटिंग लागू हो। सभी योजनाओं की ऑनलाइन ट्रैकिंग, वार्षिक सामाजिक लेखा परीक्षा और जिला स्तर पर स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य हों।</p>
<p><strong>अंतिम शब्द: बजट एक नैतिक दस्तावेज़ है</strong></p>
<p>झारखण्ड का बजट मात्र आय-व्यय का ब्यौरा नहीं, यह तय करता है कि राज्य किसके साथ खड़ा है। यदि अंतिम पायदान पर खड़े दलित, आदिवासी, मूलवासी और गरीब समाज को केंद्र में रखकर बजट नहीं बना, तो विकास की चमक सिर्फ शहरों तक सिमट जाएगी।</p>
<p>आज ज़रूरत है ऐसे बजट की — जहाँ प्राथमिकता खनिज नहीं, मनुष्य हो; लाभ नहीं, अधिकार हो; विकास का अर्थ विस्थापन नहीं, सशक्तिकरण हो। तभी झारखण्ड की आत्मा पूरी होगी। तभी बजट ऐतिहासिक कहलाएगा।</p>
<p>दलित, आदिवासी और मूलवासी समाज के बिना झारखण्ड अधूरा है। बजट की हर पंक्ति में यह संदेश साफ दिखे — राज्य की प्राथमिकता खनिज नहीं, मनुष्य है; मुनाफा नहीं, गरिमा है; और विकास विस्थापन नहीं, सशक्तिकरण है। ऐसा बजट ही झारखण्ड को न सिर्फ आर्थिक रूप से समृद्ध, बल्कि सामाजिक न्याय का राष्ट्रीय मॉडल बनाएगा।</p>
<p><strong>लेखक: विजय शंकर नायक</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:31:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>Chaibasa News : सूचना आयुक्त पद के लिए अरुणाभा कर ने पेश की दावेदारी, 34 वर्षों का प्रशासनिक व सामाजिक अनुभव</title>
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                        <![CDATA[जमशेदपुर निवासी मनरेगा लोकपाल अरुणाभा कर ने झारखंड सूचना आयुक्त पद के लिए आवेदन किया, 34 वर्षों का प्रशासनिक, न्यायिक व सामाजिक अनुभव।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/chaibasa/chaibasa-news-arunabha-kar-submitted-claim-for-the-post-of/article-17543"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/630106cc8165a56b2311e7efc5585d3c_1971883892_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पूर्वी सिंहभूम :</strong> झारखंड सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से विज्ञापित सूचना आयुक्त पद के लिए जमशेदपुर निवासी मनरेगा लोकपाल अरुणाभा कर ने रविवार को अपनी दावेदारी पेश की है। शासन, न्याय, पत्रकारिता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 34 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले अरुणाभा कर को इस पद के लिए एक सशक्त दावेदार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकपाल के रूप में अर्जित अनुभव सूचना झारखंड सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।<br /><br />अरुणाभा कर वर्तमान में पश्चिमी और पूर्वी सिंहभूम जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लोकपाल के रूप में कार्यरत हैं। इस दौरान उन्होंने शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया। मनरेगा से जुड़ी कई शिकायतों के समाधान से ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के प्रति विश्वास बढ़ा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार हुआ।<br /><br />वर्ष 2020 में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चयनित होकर वे पूर्वी सिंहभूम जिला की स्थायी लोक अदालत में जूरी सदस्य बने। इस भूमिका में उन्होंने बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन और दूरसंचार से जुड़े हजारों विवादों का आपसी सहमति से निपटारा किया। कोरोना काल में भी उनका योगदान सराहनीय रहा, जिससे आम लोगों को त्वरित न्याय मिला।<br /><br />सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अरुणाभा कर झारखंड स्टेप अप ट्रस्ट के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं। संस्था के माध्यम से उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी विकास पर निरंतर कार्य किया है। सारंडा क्षेत्र में आदिवासी आजीविका पर किए गए उनके शोध को झारखंड सरकार ने फेलोशिप देकर सम्मानित किया था।<br /><br />अरुणाभ कर एक वरिष्ठ पत्रकार भी हैं।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>चाईबासा</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 13:07:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>राज्य स्थापना दिवस पर उलिहातु में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने धरती आबा बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि</title>
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                        <![CDATA[खूंटी में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पूर्व विधायक कोचे मुंडा ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/khoonti/on-state-foundation-day-governor-and-chief-minister-paid-tribute/article-17078"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-11/resized-image---2025-11-15t192112.735.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>खूंटी : </strong>भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं झारखंड राज्य स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर शनिवार उनकी जन्मस्थली उलिहातु में दिनभर उत्सव का उल्लास छाया रहा। पूरा इलाका ‘धरती आबा’ के जयकारों से गूंज उठा। इस पावन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न राज्यों से आए आगंतुकों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।<br /><br />कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार एवं मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम,सांसद कालीचरण मुंडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा, तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया, विधायक विकास सिंह मुंडा, राज्य के मुख्य सचिव सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि दी।</p>
<h4><strong>गौरवपूर्ण रहा है जनजातीय समाज का इतिहास: राज्यपाल</strong></h4>
<p>उलिहातु के बिरसा मुंडा कॉम्प्लेक्स में आयोजित राजकीय समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि जनजातियों का इतिहास हमेशा गौरवपूर्ण रहा है। इस समाज ने देश की आजादी में कई कुर्बानियां दी है। हमें उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली में स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी जैसी प्रतिमा भगवान बिरसा मुंडा की बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि उलिहातु को आदर्श ग्राम बनाया जाएगा। इससे यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से सैलानी यहां आएंगे। राज्यपाल ने कहा कि हमें अपनी मातृभूमि, मातृभाषा और संस्कृति से प्यार करना चाहिए।<br /><br />मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है। हमारे कई वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर झारखंड राज्य को जन्म दिया है। हमारे वीर शहीदों ने ही हम राज्यवासियों को राह दिखाया एवं मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि जिनके संघर्ष, अथक प्रयास और बलिदान से इस राज्य का निर्माण हुआ है उनके सपनों का झारखंड बनाना हम सभी कर्तव्य है। वर्तमान समय में हम सभी के कंधों में इस राज्य को सजाने और संवारने की एक बड़ी जिम्मेवारी है।</p>
<h4><strong>आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों का सर्वांगीण विकास हमारी प्रतिबद्धता</strong></h4>
<p>मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि हमारी सरकार राज्य के गांव-गांव पहुंचकर सभी वर्ग-समुदाय के लोगों के दु:ख, तकलीफ को समझने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास को दृष्टिगत रखते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का संचालन कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की विकास योजनाओं में आदिवासी तथा जनजातीय समुदायों को सबसे ऊपर रखा जा रहा है।<br /><br />मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अपने कार्यों का 50 प्रतिशत खर्च माताओं, बहनों, बेटियों तथा गांव, गरीब, किसान के कल्याणार्थ कर रही है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि हमारी सरकार रांची के राज्य मुख्यालय से नहीं बल्कि गांव से चलने वाली सरकार है। प्रत्येक परिवार के घर आंगन तक विकास योजनाओं का पहुंचाने का कार्य निरंतर चलता रहा है, आगे भी चलता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस सभा में उपस्थित हमारे कई ऐसे युवा हैं जिनका उम्र राज्य गठन के बाद हुआ है। आज हमारा राज्य 25 वर्ष का युवा राज्य है। हम युवा वर्ग के साथ मिलकर इस राज्य को अपने बल पर आगे बढ़ाते हुए देश के अग्रणी राज्यों के श्रेणी में लाकर खड़ा करेंगे, इसी लक्ष्य के साथ हमारी सरकार कार्य योजनाओं को मूर्त रूप दे रही है।<br /><br />मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से कुछ वर्ष पहले तक यहां के लोगों को इलाज और पढ़ाई के लिए महाजनों या पैसे वाले लोगों से उधार लेना पड़ता था, लेकिन अब हमारी सरकार इन परिस्थितियों को बदलने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धीरे-धीरे महिलाओं को मजबूत बनाने को लेकर विशेष कार्य कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम हो रहा है। आने वाले दिनों में खेल, पर्यटन, रोजगार तथा आधारभूत संरचनाओं के विकास पर कई महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे, जिसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।<br /><br />मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की सोच है कि एक-एक झारखंड वासियों के घर-परिवार में खुशहाली आए, लोगों के चेहरों पर मुस्कान हो तथा समस्त राज्यवासी झारखंड के समग्र विकास का सहभागी बने। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी को पुनः राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी तथा धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को शत-शत नमन किया।<br /><br />इस अवसर प राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा सहित जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>खूंटी</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 19:25:26 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Mohit Sinha]]>
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                <title>आदिवासी विकास भाजपा की प्राथमिकता: पाहन</title>
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                        <![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: झारखंड प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक राम कुमार पाहन ने विपक्ष पर जनता को बरगलाने का आरोप लगाया है। पाहन ने प्रतिपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता आदिवासियों का विकास व सम्मान की रक्षा करना है।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पाहन ने कहा कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश एवं राज्य का जितना विकास हुआ, उतना बीते 55 वर्षों में नहीं हुआ है। आदिवासियों के विकास का भी व्यापक काम हुआ है। राज्य में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद हर क्षेत्र में</h5>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/politics/tribal-development-bjps-priority-identity/article-1268"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2019-04/22_05_2017-ram-kumar-pahan-mla-jharkha.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>रांची: झारखंड प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक राम कुमार पाहन ने विपक्ष पर जनता को बरगलाने का आरोप लगाया है। पाहन ने प्रतिपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता आदिवासियों का विकास व सम्मान की रक्षा करना है।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;">पाहन ने कहा कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश एवं राज्य का जितना विकास हुआ, उतना बीते 55 वर्षों में नहीं हुआ है। आदिवासियों के विकास का भी व्यापक काम हुआ है। राज्य में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद हर क्षेत्र में विकास के कार्य हुए हैं। सरकार ने आदिवासियों के विकास के लिए कई नई योजनाएं शुरू की है। केंद्र सरकार ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण के लिए सबसे अधिक 95 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया। जनजातीय समुदाय की विरासतों को संरक्षित करने के लिए उनकी पारंपरिक संस्कृति, कला और बोली-भाषा के प्रोत्साहन संबंधी गतिविधियों के लिए सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना की जा रही है।</h5>
<h5 style="text-align:justify;">पाहन ने कहा कि अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के युवाओं को उद्योग लगाने के लिए 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक लोन सुनिश्चित किया गया। इस वर्ग के युवाओं की छात्रवृत्ति बढ़ाकर ढाई लाख रुपये की गई। बीते पांच वर्षों में पांच करोड़ सात लाख एसटी-एससी के विद्यार्थियों को 15,918 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई। उन्होंने दावा किया कि आदिवासियों के कल्याण हेतु बजट में बढ़ोत्तरी की गई है। सबसे अधिक बजट का प्रावधान रघुवर सरकार ने किया। उनकी समस्याओं को सुलझाने के दृष्टिकोण से कई योजनाएं भी चलाई जा रही है। उनकी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। सरना स्थलों और आदिवासी समाज के महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौंदर्यींकरण भी पूरे राज्य में किया गया। यूपीएससी में पीटी परीक्षा पास करने के बाद मेंस परीक्षा की तैयारी करने के लिए आदिवासी युवक-युवतियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी राज्य सरकार कर रही है।</h5>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Apr 2019 19:31:28 +0530</pubDate>
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