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                <title>forest patta - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>हजारीबाग में राजस्व कार्यशाला आयोजित, प्रमंडलीय आयुक्त पवन कुमार ने दिए अहम निर्देश</title>
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                        <![CDATA[हजारीबाग समाहरणालय में आयोजित राजस्व कार्यशाला में प्रमंडलीय आयुक्त पवन कुमार ने दाखिल-खारिज, जमाबंदी, भूमि अतिक्रमण और राजस्व कानूनों पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/revenue-workshop-organized-in-hazaribagh-divisional-commissioner-pawan-kumar-gave/article-17470"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/whatsapp-image-2025-12-15-at-18.06.12_f0d42be8_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग :</strong> प्रमंडलीय आयुक्त, पवन कुमार की अध्यक्षता में आज समाहरणालय के सभागार में राजस्व कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयुक्त ने कार्य के दौरान आने वाली चुनौतियों को सफलतापूर्वक संपन्न करने के तरीकों से सभी को अवगत कराया। कार्यशाला के दौरान आयुक्त ने लंबित दाखिल खारिज के मामले, दोहरी जमाबंदी, गैर मजूरवा भूमि को कब्जा मुक्त कराने सहित अन्य विषयों की जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">आयुक्त ने कहा कि विभिन्न प्रावधानों की जानकारी नहीं रहने के कारण कई बार त्रुटिपूर्ण आदेश पारित हो जाते हैं। जिसका लाभ जमीन के अवैध कब्जाधारियों को मिल जाता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को भू-अर्जन, मुआवजा, जमाबंदी के सारे प्रावधानों से अवगत कराया। साथ ही  बिना किसी ऑब्जेक्शन वाले दाखिल खारिज को 30 दिन में निष्पादित करने का निर्देश दया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यशाला के दौरान आयुक्त ने रेवेन्यू एक्ट, सीएनटी एक्ट, वन पट्टा, लैंड सीलिंग एक्ट, जंगल झाड़ी जमीन, इंडियन फारेस्ट एक्ट 1927, इंडियन फारेस्ट एक्ट 1980, कैंटोनमेंट एरिया, नोटिफाइड एरिया, खासमहाल जमीन की प्रकृति व प्रक्रिया, वाटर बॉडीज एक्ट, परिशोधन पोर्टल, खतियान एवं रजिस्टर 2 की प्रविष्टियों का महत्व, फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट सहित अन्य बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक एवं उदाहरण देकर प्रकाश डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कार्यशाला से पूर्व उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर आयुक्त का स्वागत किया। इसके पूर्व आयुक्त के सर्किट हाउस पहुंचने पर एवं सर्किट हाउस से हजारीबाग रवाना होने से पहले उन्हें जिला प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यशाला में आयुक्त  पवन कुमार, उपयुक्त  आदित्य रंजन, उप विकास आयुक्त  सादात अनवर, अपर समाहर्ता  विनोद कुमार, निदेशक डीआरडीबी राजीव रंजन, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर  हेमा प्रसाद, अनुमंडल पदाधिकारी  राजेश कुमार के अलावा भू-अर्जन पदाधिकारी, एलआरडीसी, सभी अंचल अधिकारी मौजूद थे।</p>]]>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>हजारीबाग</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 18:11:52 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Susmita Rani]]>
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                <title>नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की जमीन ग्रामीणों को वापस, 1250 एकड़ वन पट्टा का वितरण</title>
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                        <![CDATA[हमारे महान पूर्वजों ने इस राज्य के लिए कुर्बानी दी ताकि यहां के आदिवासी-मूलवासी हमेशा सुरक्षित रहें। अलग राज्य तो मिला लेकिन जो लोग इस राज्य को लूटने वाले थे वही सत्ता में बैठ गए। राज्य गठन के बाद 20 वर्ष तक उन लोगों ने ही राज किया। इसका परिणाम हुआ कि लोग भूख से मरने लगे।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/distribution-of-1250-acres-of-forest-patta-back-to-the/article-11080"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/hemant-soren-(9).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची</strong>: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को सदा सदा के लिए रद्द कर दिया गया है, इसके साथ ही जमीन भी ग्रामीणों को वापस कर दी गयी है. इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर एक्स देते हुए सीएम हेमंत ने लिखा है कि “जल, जंगल और जमीन झारखण्ड की पहचान है। अलग-अलग कारणों से कई बार यहां के लोग विस्थापित होते गए। उद्योग, फैक्ट्री, माइनिंग के नाम पर विस्थापन हुआ। नए-नए कानून बनाकर आदिवासी-मूलवासियों को भगाया जाता रहा है। लेकिन हम लोगों ने इसका अलग रास्ता बनाया है कि कैसे हम अपने जल, जंगल और जमीन बचाएंगे। इस दिशा में हमने पहला कदम बढ़ाया। नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया है। इसको लेकर पूर्व में कितने आंदोलन हुए, कई लोग मारे गए। लेकिन वह लड़ाई हम लोगों ने छोड़ी नहीं। आज जैसे ही मुझे मौका मिला मैंने उस फायरिंग रेंज की सारी भूमि ग्रामीणों को वापस कर दी। आज देश की सूची में आदिवासियों की पहचान नहीं है। इसलिए झारखण्ड सरकार ने आदिवासी सरना धर्मकोड विधानसभा से पारित करके भेजा, लेकिन भारत सरकार द्वारा इस पर आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। अगर सरना धर्म कोड मिल जाए, यहां के आदिवासियों के लिए कोड मिल जाए तो, हम देश के आदिवासी सुरक्षित हो जाएंगे। अब डिसमिल में नहीं, अब वन पट्टा एकड़ का बनेगा, वो व्यक्तिगत हो या सामुदायिक। इन वनपट्टों के माध्यम से आप खेती का कार्य कर सकते हैं। अब तक लोहरदगा और गुमला में आपकी सरकार ने 22 हजार एकड़ भूमि का वनपट्टा वितरित किया है और आज 1250 एकड़ वन पट्टा का वितरण भी किया जा रहा है।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">जल, जंगल और जमीन झारखण्ड की पहचान है। अलग-अलग कारणों से कई बार यहां के लोग विस्थापित होते गए। उद्योग, फैक्ट्री, माइनिंग के नाम पर विस्थापन हुआ। नए-नए कानून बनाकर आदिवासी-मूलवासियों को भगाया जाता रहा है। लेकिन हम लोगों ने इसका अलग रास्ता बनाया है कि कैसे हम अपने जल, जंगल और जमीन… <a href="https://t.co/XFUP7FAfwF">pic.twitter.com/XFUP7FAfwF</a></p>
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) <a href="https://twitter.com/HemantSorenJMM/status/1831664310914863307?ref_src=twsrc%5Etfw">September 5, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<h3><strong>झारखंड गठन के बाद लूटरों को मिली सत्ता</strong></h3>
<p>आगे उन्होंने लिखा कि हमारे महान पूर्वजों ने इस राज्य के लिए कुर्बानी दी ताकि यहां के आदिवासी-मूलवासी हमेशा सुरक्षित रहें। अलग राज्य तो मिला लेकिन जो लोग इस राज्य को लूटने वाले थे वही सत्ता में बैठ गए। राज्य गठन के बाद 20 वर्ष तक उन लोगों ने ही राज किया। इसका परिणाम हुआ कि लोग भूख से मरने लगे। पूर्व की डबल इंजन सरकार में आम दिनों में लोग हाथ में राशन कार्ड लेकर भूख से मरे। हमने लाखों लोगों को हरा राशन कार्ड से जोड़ने का काम किया। हमें सरकारी राशन दुकान से राशन खरीदने नहीं दिया जाता था। यह कार्य सिर्फ हमारी योजनाओं को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। कई बार लोगों की शिकायत आयी कि हरा राशन कार्ड से अनाज नहीं मिल रहा है, इसका कारण यही था कि ये हमें सरकारी दुकान से राशन खरीदने नहीं देते थे तो हमें बाजार से खरीदना पड़ता था,  जिससे वितरण में थोड़ा विलंब होता था।</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 17:58:01 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Devendra Kumar]]>
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