<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://samridhjharkhand.com/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A4%BE/tag-12773" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Samridh Jharkhand RSS Feed Generator</generator>
                <title>संथाल परगना - Samridh Jharkhand</title>
                <link>https://samridhjharkhand.com/tag/12773/rss</link>
                <description>संथाल परगना RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कुलेश भंडारी के नेतृत्व में पाहाड़िया गांवों में मजबूत हो रहा वाइल्ड फूड फॉरेस्ट अभियान</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दुमका के पाहाड़िया गांवों में वाइल्ड फूड फॉरेस्ट अभियान पारंपरिक वन-ज्ञान और सामुदायिक संरक्षण को नई दिशा दे रहा है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/wild-food-forest-campaign-is-getting-stronger-in-pahadia-villages/article-17468"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-12/famous-tribal-foods-of-jharkhand-_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>दुमका : </strong>जिले की घाटी पंचायत (बरमसिया) के पाहाड़िया बहुल गांवों में इन दिनों वाइल्ड फूड फॉरेस्ट्स इन ट्राइबल झारखंड अभियान के तहत एक सशक्त और ज़मीनी पहल लगातार आकार ले रही है। इस पहल का नेतृत्व कुलेश भंडारी कर रहे हैं, जो लंबे समय से संथाल परगना क्षेत्र में समुदाय आधारित संरक्षण और पारंपरिक वन-ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए सक्रिय हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ खुले मैदान में संवाद किया गया। बच्चों ने कविता पाठ किया, पारंपरिक खेल खेले और जंगल से मिलने वाले खाद्य पौधों, साग-सब्ज़ियों और कंद-मूल पर चर्चा हुई। किसी मंच या औपचारिक भाषण के बजाय लोगों के साथ बैठकर उनकी बात सुनना इस पहल की खास पहचान रही।</p>
<p>कुलेश भंडारी ने कहा कि पाहाड़िया समुदाय केवल जंगल का उपयोग करने वाला समाज नहीं, बल्कि उसका मूल संरक्षक रहा है। जब बच्चों को शुरू से ही जंगल, मिट्टी और अपने पारंपरिक ज्ञान से जोड़ा जाता है, तब संरक्षण अपने आप मजबूत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाइल्ड फूड फॉरेस्ट कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव-गांव लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है।</p>
<p>इस अभियान के ज़मीनी क्रियान्वयन में आलोक कुमार मांझी ने सह-समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर गतिविधियों का संचालन किया और स्थानीय ज्ञान को सामने लाने में सहयोग किया। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि पहले जंगल से मिलने वाला भोजन गांव की रोजमर्रा की ज़रूरतों का हिस्सा था, जो समय के साथ कम होता गया। ऐसे में यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है।</p>
<p>यह अभियान द पोलिनेशन प्रोजेक्ट फाउंडेशन (अमेरिका) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। वाइल्ड फूड फॉरेस्ट पहल अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि घाटी पंचायत से निकलकर आसपास के कई गांवों में लगातार विस्तार ले रही है और धीरे-धीरे एक व्यापक जन-आधारित आंदोलन का रूप ले रही है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दुमका</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/wild-food-forest-campaign-is-getting-stronger-in-pahadia-villages/article-17468</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/wild-food-forest-campaign-is-getting-stronger-in-pahadia-villages/article-17468</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 16:13:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2025-12/famous-tribal-foods-of-jharkhand-_samridh_1200x720.jpeg"                         length="47829"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Anshika Ambasta]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड: संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ का मामला गंभीर, केंद्र सरकार ने झारखंड HC में कही बड़ी बात</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[झारखंड हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका जमशेदपुर निवासी दानियल दानिश ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज आदि झारखंड के बॉर्डर इलाके से बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड आ रहे हैं।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/the-issue-of-bangladeshi-infiltration-in-jharkhand-santhal-pargana-is/article-11082"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-09/1600x960_373620-jharkhand-high-court-02.png" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने संथाल परगना में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को एक बार फिर सुनवाई की। केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कहा कि संथाल परगना में बांग्लादेशियों की घुसपैठ की स्थिति अलार्मिंग है। इसकी वजह से इलाके की डेमोग्राफी प्रभावित हो रही है। आदिवासी आबादी के प्रतिशत में गिरावट भी गंभीर विषय है। घुसपैठिए झारखंड के रास्ते देश के अन्य राज्यों में घुसकर वहां की आबादी को प्रभावित कर सकते हैं। केंद्र सरकार इस मामले में अपने सभी स्टेकहोल्डर आईबी, बीएसएफ आदि से विचार-विमर्श के बाद कोर्ट में जल्द ही एक कंप्रिहेंसिव जवाब दाखिल करेगी।</p>
<p>झारखंड हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर तय की है। गुरुवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता वर्चुअल मोड में जुड़े।</p>
<p>उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में आईबी को प्रतिवादी की सूची से हटाया जाए, क्योंकि उसके पास कई गोपनीय सूचनाएं होती हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से आवेदन दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने इस याचिका पर 22 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, इंटेलिजेंस ब्यूरो, यूआईएडीएआई और बीएसएफ की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई थी।</p>
<p>पूर्व की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आदेश दिया गया था कि घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित कराने में स्पेशल ब्रांच की मदद लेकर कार्रवाई करें। संथाल परगना प्रमंडल के सभी छह जिलों के उपायुक्तों को भी आदेश दिया गया था कि लैंड रिकॉर्ड से मिलान किए बिना आधार, राशन, वोटर और बीपीएल कार्ड जारी नहीं करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन दस्तावेजों के आधार पर राशन, वोटर या आधार कार्ड बनाए गए हैं, वो जायज ही हों, ये नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में भी हकमारी हो रही है।</p>
<p>झारखंड हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका जमशेदपुर निवासी दानियल दानिश ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज आदि झारखंड के बॉर्डर इलाके से बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड आ रहे हैं। इससे इन जिलों में जनसंख्या में कुप्रभाव पड़ रहा है। इन जिलों में बड़ी संख्या में मदरसे स्थापित किए जा रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों के साथ वैवाहिक संबंध बनाया जा रहा है।</p>
<p>उनके अधिवक्ता ने राष्ट्रीय जनगणना के हवाले से हाईकोर्ट के समक्ष जो डाटा पेश किया है, उसके मुताबिक साल 1951 में संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत से घटकर साल 2011 में 28.11 प्रतिशत हो गई है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठ है। अगर इस सिलसिले पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति गंभीर हो जाएगी।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/the-issue-of-bangladeshi-infiltration-in-jharkhand-santhal-pargana-is/article-11082</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/the-issue-of-bangladeshi-infiltration-in-jharkhand-santhal-pargana-is/article-11082</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 18:16:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2024-09/1600x960_373620-jharkhand-high-court-02.png"                         length="477058"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Sujit Sinha]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Opinion: शादी की दावतों में बिहार में महाभारत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="font-weight:400;">बिहार अपने बहुलतावादी समाज, समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास वगैरह के चलते अति विशिष्ट है। इस राज्य को एक अन्य वजह भी खास बनाती है। वह है बिहारियों की अपने खानपान को लेकर अदभुत निष्ठा। बिहारी भोजन की मात्रा और गुणवत्ता के सवाल पर कभी समझौता करना पसंद नहीं करते। यह एक इस तरह का ऐसा बिन्दु है जिस पर बिहार में जाति, धर्म, वर्ग के बंधन टूट जाते हैं। बिहारी को उसका पसंदीदा सुस्वादु भोजन मिल जाए तो वह परम आनंद की स्थिति में होता है। अन्यथा वह सख्त नाराज भी हो जाता है। फिर बात सिरे से बिगड़ भी</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/opinion-mahabharat-in-bihar-at-wedding-feasts/article-8463"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2021-06/maxresdefault-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="font-weight:400;">बिहार अपने बहुलतावादी समाज, समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास वगैरह के चलते अति विशिष्ट है। इस राज्य को एक अन्य वजह भी खास बनाती है। वह है बिहारियों की अपने खानपान को लेकर अदभुत निष्ठा। बिहारी भोजन की मात्रा और गुणवत्ता के सवाल पर कभी समझौता करना पसंद नहीं करते। यह एक इस तरह का ऐसा बिन्दु है जिस पर बिहार में जाति, धर्म, वर्ग के बंधन टूट जाते हैं। बिहारी को उसका पसंदीदा सुस्वादु भोजन मिल जाए तो वह परम आनंद की स्थिति में होता है। अन्यथा वह सख्त नाराज भी हो जाता है। फिर बात सिरे से बिगड़ भी सकती है। इस बात की पुष्टि हाल ही में देखने-सुनने को मिली।</p>
<p style="font-weight:400;">बिहार में विवाह और दूसरे समारोहों में अतिथियों को मछली या मिष्ठान पर्याप्त मात्रा में न मिलने के कारण महाभारत हो गया। जब सारे भारत में कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क और सोशल डिस्टेनसिंग जैसे नियमों का पालन करने का हर स्तर पर आहवान किया जा रहा है, तब बिहार एक अन्य अहम मसले से जूझ रहा है। अब देखें कि बिहार के गोपालगंज में एक शादी समारोह के दौरान खाने में मछली परोसने को लेकर तगड़ा विवाद हो गया । जिसमें दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट भी हुई। मालूम चला है कि मछली के मुड़े यानी उसके सिर का हिस्सा खाने को लेकर दो पक्षों में खूनी झड़प हुई। इसमें दोनों ही ओर से 11 लोग घायल हुए हैं।</p>
<p style="font-weight:400;">स्वादिष्ट भोजन करने का आकर्षण सारे भारतीयों में रहता है। वे लजीज भोजन पर टूट पड़ते हैं। मौका चाहें विवाह समारोह का हो या कोई अन्य। सबसे पहले और अधिक से अधिक भोजन अपनी प्लेट में भर लेने की कवायद में अच्छे-भले लोग भी कई बार बहुत टुच्ची हरकतें करने लगते हैं। ये सब देखना-सुनना कदापि  सुखद नहीं लगता। बिहार के मिथलांचल क्षेत्र में दावत में मछली या मांस का न परोसा जाना मेहमानों को बहुत बुरा लग सकता है।</p>
<p style="font-weight:400;">इधर तो भोजन का मतलब ही होता है कि सामिष भोजन तो मिलेगा ही। मिथलांचल का तो ब्राहमण भी सामिष भोजन ही करना पसंद करता है। मिथलांचल में दरभंगा, मधुबनी, मुंगेर, कोसी, पूर्णिया और भागलपुर प्रमंडल तथा झारखंड के संथाल परगना प्रमंडल के साथ साथ नेपाल के तराई क्षेत्र के कुछ भाग भी शामिल हैं।</p>
<p style="font-weight:400;">बिहारी समाज के स्वादिष्ट व्यजनों के प्रेम पर किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। दिक्कत सिर्फ  इतनी है कि बिहारी समाज का कम से कम एक हिस्सा लजीज भोजन न मिलने पर नाराज भी हो जाता है। फिर वह लड़ने–झगड़ने तक लग जाता है। बेशक बिहारी समाज को अपने में बदलाव तो लाना ही होगा। वहां की शादियों में धन की फिजूलखर्ची  को रोका जाना चाहिए। वहां पर विस्तृत भोजन परोसने के क्रम में वधू पक्ष को लाखों रुपए की चपत लग जाती है।</p>
<p style="font-weight:400;">इसके बावजूद मेहमान नाखुश ही बने रहते हैं। सुनकर भी कितना कष्ट होता है कि गोपालगंज में आई बारात में खाने के लिए बैठे लोगों को पहले राउंड में दो-दो पीस मछली दी गई। जिसके बाद मछली के मुड़े की फरमाइश की गई, जिसे नहीं दिए जाने पर हंगामा बढ़ा। बस इसके बाद ही जमकर मारपीट शुरू हो गई।</p>
<p style="font-weight:400;">कुछ मीडिया खबरों पर यकीन करें तो पिछले ही दिनों राज्य में आई एक बारात में सब्जी को लेकर विवाद में गोलीबारी तक हो गई थी। जिसमें गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। पहले तो यह सवाल स्थानीय प्रशासन से पूछा जाना चाहिए कि जब कोरोना की दूसरी लहर से राज्य और देश हांफ रहा था तब उन्होंने इतने बड़े स्तर पर शादी के आयोजन की अनुमति कैसे दे दी या वहां पर  इतने बड़े स्तर पर विवाह का आयोजन कैसे हो गया?</p>
<p style="font-weight:400;">मूलतः महाराष्ट्र से संबंध रखने वाले लेकिन कई बार बिहार से भी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए समाजवादी नेता और चिंतक मधु लिमये कहते थे कि उन्होंने बिहारियों से बढ़कर कोई भोजन भट्ट नहीं देखा। वहां पर तो अगर आप किसी को पूरी-हलवा की दावत के लिए आमंत्रित करे तो वह उफनती कोसी नदी को पार करके आ जाएगा। एक बार बिहारी जब भोजन करने लगता है तो फिर वह भोजन के साथ कायदे से न्याय करता है।</p>
<p style="font-weight:400;">बिहारी भोजन करने में पर्याप्त समय भी लेता है। वह चपाती, सब्जी, चावल, मांस, मछली, दही वगैरह की बार-बार मांग करेगा। वह आमतौर पर अल्पाहारी तो बिलकुल ही नहीं होता। भोजन को बर्बाद नहीं करेगा। ये उसे बचपन से ही घर में सिखाया जाता है कि भोजन को बर्बाद करने से ईश्वर भी नाराज होता है। बिहारी को भोजन के पश्चात मीठा खाना भी पसंद है।</p>
<p style="font-weight:400;">अगर उसे भोजन के बाद कोई मनपसंद मिठाई मिल जाए तो वह अपने मेजबान का बहुत कृतज्ञ हो जाता है। उसे लगता है कि मेजबान ने उसका दिल से सम्मान किया है। यहां तक तो सब ठीक है। आखिर स्वादिष्ट भोजन और उसके बाद कौन मिष्ठान नहीं पाना चाहता। सभी तो चाहते हैं कि उन्हें भोजन के बाद कुछ मिठाई मिल जाए। पर यह उचित नहीं माना जा सकता है कि बिहारी शादी समारोह में मछली कम मिलने पर झगड़ा कर लिया जाए।</p>
<p style="font-weight:400;">औसत बिहारी परिवारों की गृहणियों के दिन का बहुत सारा वक्त तो भोजन पकाने और उसकी योजना बनाने में ही गुजर जाता है। मतलब साफ है कि बिहारी अपने घर में भी स्वादिष्ट भोजन करना पसंद करता है। वह घर से बाहर ही स्वादिष्ट भोजन करने की फिराक में नहीं रहता। वह घर  में लिट्टी-चोखा बार-बार खाता है।  लिट्टी सत्तू और मसाले के मिश्रण से बनती है।</p>
<p style="font-weight:400;">जहां तक चोखा की बात है तो आलू और् बैंगन (जिसका चोखा बनाना है) को आग में पका लिया जाता है। इसके बाद इसके छिलके को हटा कर उसे नमक, तेल, हरी मिर्च, प्याज, लहसुन इत्यादि के साथ गूंथ लिया जाता है। लिट्टी- चोखा का स्वाद अतुलनीय होता है। इसे तो बिहारी रोज ही खाते या खाना पसंद करते हैं।</p>
<p style="font-weight:400;">यह याद रखें कि बिहारी आम के भी रसिया होते हैं।  चंपारण जिले (अब तो पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण दो जिले हो गये हैं) की जब भी बात होती है, तब महात्मा गांधी के वहां के नील की खेती करने वाले किसानों के पक्ष में निलहा आन्दोलन का ख्याल तुरंत जेहन में आ जाता है। उस असाधारण आंदोलन के संबंध में आज भी सारा देश पढ़ता रहता है। वहां के  जर्दालु आम का स्वाद और खुशबू अद्वितीय होती है। इसे खाने के बाद इंसान एक बार तो कह देता है कि ‘इससे बेहतर आम कभी नहीं चखा।’</p>
<p style="font-weight:400;">जहां दशहरी, लंगड़ा, मालदह, चौसा, मलिहाबादी, सहारनपुरी, बादामी, तोतापरी, केसर आदि आमों की प्रजातियों से सारा देश परिचित है, जर्दालु आम के बारे में बिहार से बाहर के लोगों को लगभग कोई जानकारी नहीं है। बिहारी इन्हें खूब खाते हैं और इसके कम मिलने पर किसी से लड़ते भी नहीं हैं। कम से कम इस तरह की कोई खबर तो नहीं सुनी। उम्मीद है कि बिहारी स्वादिष्ट भोजन, मिठाई और फलों  का स्वाद बिना किसी विवाद के लेते रहेंगे।</p>
<p style="font-weight:400;">मेहमान नवाज पसंद बिहारी खाते भी रहेंगें और खिलाते भी रहेंगें। पर झगड़ने से जरूर बचेंगें।</p>
<p style="font-weight:400;">(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तभकार और पूर्व सांसद हैं)</p>
]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/opinion-mahabharat-in-bihar-at-wedding-feasts/article-8463</link>
                <guid>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/opinion-mahabharat-in-bihar-at-wedding-feasts/article-8463</guid>
                <pubDate>Wed, 16 Jun 2021 19:23:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://samridhjharkhand.com/media/2021-06/maxresdefault-1.jpg"                         length="161427"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Samridh Jharkhand]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        