पहाड़िया महासभा की बैठक में पेसा कानून को आदिवासी हित में लागू करने पर चर्चा

साहिबगंज : तेतुलकुड़िया में आज हिल एसेम्बली, पहाड़िया महासभा की बैठक सरदार इसाक मालतो की अध्यक्षता में हुई। इसमें ग्राम प्रशासक समिति समूहों, प्रधान, गोड़ायत, नादो, भोगदोराजा एवं समिति के महिला-पुरुष सदस्य हिस्सा लिया।

तेतुलकुड़िया में बीर बाबा जबरा पहाड़िया तिलका मांझी की आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन रखा गया है। बैठक में उपस्थित ग्राम प्रधानों धरमा मालतो, प्रधान बड़ा खम्भी, बबलू पहाड़िया, प्रधान धोबसी, बाबूराम पहाड़िया प्रधान तेतुलकुडिया, बमना पहाड़िया, छोटा खम्भी प्रधान, रूपा पहाड़िया प्रधान लोहरबनी, सोनिया पहाड़िया प्रधान परवाभीठा, महेश्वर मालतो, नायब सिबा पहाड़िया, नायब मदन मालतो, धरमराज पहाड़िया सुरमा, नायब धरमा पहाड़िया, नायब पौलुस पहाड़िया, सुरजी पहाड़िन, बिमोला मालतो, मरियम पहाड़िन एवं धर्मी पहाड़ीन ने अपना विचार व्यक्त किया।

शिवचरण मालतो, महासचिव ने कहा कि आदिवासी की सुरक्षा के लिए संसद के द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून अस्तित्व में आया। इसके बावजूद आदिवासियों का जल, जंगल, जमीन, खनिज सम्पदा, संस्कृति पर सुनियोजित तरीके से लगातार हमला हो रहा है। संसदीय कानून को लागू किये बीना आदिवासी असुरक्षित ही रहेंगे। अगर सरकार इस पर अमल नहीं करती है तो वह बड़े आंदोलन को आमंत्रित कर रही है यह संकेत अच्छा नहीं है।

अनुसूचित क्षेत्रों में 23 प्रावधानों के अनुपालन से ही अनुसूचित क्षेत्र में वास करने वाली जनजातियों का सुरक्षा हो सकेगी।

धरमा पहाड़िया ने कहा कि पेसा कानून 1996 के 23 प्रावधानों के अनुपालन हेतु नियमावली बनाने की प्रक्रिया पूरी होने तक अनुसूचित क्षेत्रों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर रोक लगना ही आदिवासी हित का स्थायी समाधान है।

उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र पहाड़िया ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में परम्परागत शासन व्यवस्था स्वशासी जिला परिषद तथा विशेष ग्राम सभा का गठन करना हमारा संवैधानिक आधार है।

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