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विश्व मच्छर दिवस के मौके पर राज्य मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों में तेजी लाने के लिए तैयार: बन्ना गुप्ता

विश्व मच्छर दिवस के मौके पर राज्य मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों में तेजी लाने के लिए तैयार: बन्ना गुप्ता

रांचीः दुनिया की सबसे गंभीर संक्रामक बीमारियों में से एक मलेरिया मच्छर के काटने से फैलता है। 2020 में, दुनिया भर में मलेरिया के 241 मिलियन मामले और इसकी वजह से 627,000 मौतें दर्ज की गईं।

मलेरिया और इसके कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए जरूरी है कि हम इससे बचने के लिए ऐहतियाती कदम उठाएं। इस विश्व मच्छर दिवस, यानि 20 अगस्त को झारखण्ड सभी के लिए मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों में नवीनीकरण हेतु तैयार है।

मलेरिया के बोझ को कम करने की बात करें, तो इस दृष्टि से झारखण्ड ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत में सबसे ज्यादा मामले दर्ज करने वाले राज्यों में झारखण्ड पाँचवें स्थान पर है। वर्ष 2021 में देश भर में मलेरिया के कुल मामलों में से 8.79 फीसदी मामले झारखण्ड राज्य में दर्ज किए गए। 2017- 2021 के बीच झारखण्ड में साल – दर -साल मलेरिया के मामलों में कमी आई है।

झारखण्ड सरकार की मलेरिया उन्मूलन रणनीतियों के तहत बड़े पैमाने पर बुखार के सर्वेक्षण, लम्बी चलने वाली मच्छरदानी और एन्डेमिक क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर कीटनाशकों के छिड़काव आदि पर ध्यान दिया जाता है। राज्य में मलेरिया के कारण मृत्यु कम बनी हुई है, ये आंकड़े 2017- 2021 के बीच 0-0.04 फीसदी रहे हैं।

राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन रणनीतियों के तहत् राज्य में वेक्टर नियन्त्रण, मलेरिया की रोकथाम और चिकित्सकीय सेवाओं के सार्व भौमिक कवरेज पर ध्यान दिया जाता है जिससे 2027 तक देश में शून्य स्वदेशी संचरण और 2030 तक उन्मूलन के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

भारत में मलेरिया के मामले 2004 में 1.92 मिलियन थे जो 2014 में कम होकर 1.1 मिलियन हो गए- इस तरह कुल मामलों की संख्या में 42 फीसदी गिरावट आई है। इसी तरह मलेरिया के कारण होने वाली मौतों की संख्या 949 से 40.8 फीसदी कम होकर 562 पर आ गई है।

ये आंकड़े मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भारत के प्रयासों की पुष्टि करते हैं। इस साल विश्व मच्छर दिवस के मौके पर हमें सामुदायिक गतिविधियों जैसे वेक्टर नियन्त्रण और नीति निर्माण द्वारा मलेरिया उन्मूलन की प्रतिबद्धता को नवीकृत करना है।

एण्डेमिक राज्यों में आज भी मलेरिया का बोझ सबसे अधिक है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को उम्मीद है कि मलेरिया और इसकी वजह से होने वाली मौतों की रोकथाम के बारे में जागरुकता बढ़ाकर भारत को 2030 तक मलेरिया मुक्त करने के प्रयासों में योगदान दिया जा रहा है।

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