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सरना धर्म कोड पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल को कदम उठाने का दिया निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल को सरना धर्म कोड को लागू करने की दिशा में कदम उठाने का निर्देेश दिया है। गृह मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल को पत्र जारी कर इस दिशा में समुचित कदम उठाने को कहा है।

नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल को सरना धर्म कोड को लागू करने की दिशा में कदम उठाने का निर्देेश दिया है। गृह मंत्रालय ने रजिस्ट्रार जनरल को पत्र जारी कर इस दिशा में समुचित कदम उठाने को कहा है। ऐसी पहल आदिवासियों के लिए आवाज उठाने वाले पूर्व सांसद सालखन मुर्मू की मांग के आधार पर की गयी है।

गृह मंत्रालय ने छह सितंबर 2021 को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि सालखन मुर्मू द्वारा 29 अप्रैल को भेजे गए पत्र में संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड की मांग की गयी है। इसमें वर्ष 2021 की जनगणना में एक अलग धर्म कोड कॉलम प्रदान करने की मांग की गयी है।

संभावना है कि राज्य सरकार की ओर से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेगा जिसके द्वारा जातीय जनगणना के साथ सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की जा सकती है। विधानसभा के द्वारा इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया था। झारखंड सरकार ने भी केंद्र सरकार ने मांग की गयी है कि प्रकृति पूजक आदिवासी समुदाय के लिए जगणना में एक अलग धर्म कोड कॉलम हो।

झारखंड में पिछले साल आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड लागू करने और जनगणना में इसका कॉलम जोड़ने के लिए राज्य में व्यापक आंदोलन भी चलाया गया। विभिन्न आदिवासी संगठनों ने इस आशय की मांग रखी है। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था होने पर उनकी धार्मिक मान्यता सुरक्षित व संरिक्षत रहेगी।

सरना धर्म कितना खतरे में, समझें इस आंकड़े से

2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड में कुल 86,45ए042 आदिवासी हैं। इनमें सरना आदिवासी 40,12,622 हैं जबकि ईसाई आदिवासी 13,38,175 हैं। जबकि हिंदू आदिवासी 32,45,856 हैं। मुसलिम आदिवासी 18,107 सिख आदिवासी 984, बौद्ध आदिवासी 2946 है। यह दावा पिछले साल सरना धर्म कोड के लिए आंदोलन के दौरान आदिवासी नेता देव कुमार धान ने किया था।

देव कुमार धान के अनुसार, झारखंड में 26.20 प्रतिशत आदिवासी आबादी है। इसमें 46.4 प्रतिशत सरना आदिवासी, 37 प्रतिशत हिंदू आदिवासी और 15.5 प्रतिशत ईसाई आदिवासी हैं। यानी 50 प्रतिशत से कम आदिवासी हैं जो अपना मूल धर्म सरना मानते हैं। उनका कहना था कि अगर अलग सरना धर्म कोड लागू नहीं हुआ तो आने वाले सालों में आदिवासियों के सरना धर्म का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

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