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कोयला उद्योग जस्ट ट्रांजिशन की प्रक्रिया का समर्थन करता है : सीसीएल एमडी

झारखंड में जस्ट ट्रांज़िशन प्रक्रिया पर ठोस नीतिगत पहल आवश्यक
स्टेकहोल्डर्स ने भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए विशेष टास्क फोर्स गठन करने पर दिया जोर

रांची : सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट, सीड द्वारा एक राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर्स कांफ्रेंस मेकिंग जस्ट ट्रांज़िशन ए रियलिटी इन झारखंड का आयोजन बुधवार, 14 सितंबर 2022 को होटल बीआर चाणक्या में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य नेट.जीरो एमिशन के लक्ष्यों के अनुरूप राज्य में जस्ट ट्रांज़िशन की प्रक्रिया से जुड़ी भावी नीतियों और एक्शन प्लान पर विचार करना था। इसी अनुरूप राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों, कॉर्पोरेट कंपनियों एवं शैक्षणिक संस्थानों के उच्च पदाधिकारियों ने जस्ट ट्रांज़िशन से जुड़ी चुनौतियों एवं नए अवसरों पर आज चर्चा की। कान्फ्रेंस में यह सहमति बनी कि सस्टेनेबल ट्रांजिशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष टास्क फोर्स या कमिटी का जल्द गठन किया जाए, ताकि नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्यों की दिशा में चलते हुए झारखंड में भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था का रोडमैप तैयार किया जा सके।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एल ख्यांग्ते, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड ने कहा कि राज्य सरकार सस्टेनेबल ट्रांजिशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। हम सततशील एवं समावेशी विकास के प्रति समर्पित है। हमें ग्रीन विजन और ग्रीन इकॉनोमी को कार्यरूप देना होगा, ताकि राज्य अर्थव्यवस्था, उद्योग.व्यापार जगत और लोगों को इसका लाभ मिले।

वर्ष 2070 में नेट जीरो कार्बन एमिशन का लक्ष्य हासिल करने को लेकर भारत सरकार प्रतिबद्ध है और इसी अनुरूप देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर ठोस पहल लिया जाना अपेक्षित है। जीवाश्म ईंधन पर आधारित झारखंड की अर्थव्यवस्था के समक्ष कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें क्लाइमेट चेंज से जुड़े समाधानों के साथ समावेशी विकास और आर्थिक वृद्धि को गति देना प्रमुख है। ऐसे में नेट.जीरो एमिशन के लक्ष्यों की दिशा में नयी नीतियों एवं विजन पर अमल करना समय की मांग है और जस्ट ट्रांजिशन इसी पूरी प्रक्रिया पर जोर देता है।

झारखंड के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एके रस्तोगी ने कहा कि सस्टेनेबल ट्रांज़िशन समावेशी विकास और सततशील दृष्टिकोण पर आधारित है, इसलिए इस पहल के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स को पूरी प्रक्रिया में जोड़ने और साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। इंडस्ट्री एवं बिज़नेस सेक्टर से जुड़ी कंपनियां, थिंक.टैंक, अकादमिक जगत और सिविल सोसायटी आदि के परिप्रेक्ष्य एवं सुझावों से झारखंड की भविष्य राह तैयार की जा सकती है, जो कार्बन न्यूट्रल और ग्रीन इकॉनोमी के व्यापक लक्ष्य को पूरा करेंगे।

इस अवसर पर सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि राज्य में भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था के निर्माण में नीतिगत सहायता एवं सुझाव देने के लिए टास्क फोर्स या कमिटी जरूरी है, जो कन्वर्जेन्स मॉडल पर काम करे और निर्धारित समय में सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ व्यापक संवाद के जरिए एक विजनरी रोडमैप तैयार करे। टास्क फ़ोर्स द्वारा प्राथमिकता में सबसे पहले अगले कुछ वर्षों के लिए लक्ष्य.केंद्रित और परिणामोन्मुख तात्कालिक, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कदमों को चिह्नित किया जाना चाहिए, ताकि सुनियोजित ढंग से चलते हुए फ्यूचर.रेडी इकोनॉमी तैयार की जा सके।

इस मौके पर सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के चेयरमैन सह मैनेजिंग डायरेक्टर पीएम प्रसाद ने कहा कि कोयला उद्योग जगत जस्ट ट्रांज़िशन की प्रक्रिया का सर्मथन करता है और नेट जीरो एमिशन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार के दिशानिर्देशों का अनुपालन करेगा। सस्टेनेबल ट्रांजिशन की प्रक्रिया राज्य की अर्थव्यवस्थाए समाज और जनहित की बेहतरी के लिए हैए जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स को रचनात्मक ढंग से योगदान देना चाहिए।

कांफ्रेंस के तकनीकी सत्र में कोयला, ऊर्जा, स्टील, सीमेंट, खनन आदि विविध क्षेत्रों और उद्योग.व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने स्वच्छ ऊर्जाए हरित तकनीक और नवाचार के महत्व को रेखांकित किया और वित्त पोषण एवं निवेश, स्थानीय रोजगार की संभावनाओं एवं इससे जुड़े कौशल विकास की जरूरत आदि पर विचार किया। कांफ्रेंस में निष्कर्ष के रूप में कुछ विचारणीय बिंदु उभर कर सामने आये जैसे, भावी अर्थव्यवस्था की राह में आनेवाले प्रमुख अवरोधों और सहायक कारकों की पहचान करना, सभी पक्षों को साथ लेकर अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाएं बनाना, कन्वर्जेन्स मॉडल के साथ सभी विभागों एवं एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना आदि ताकि झारखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।

कान्फ्रेंस में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों ऊर्जा, खनन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों सेन्ट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, सेन्ट्रल माइन प्लानिंग और डिजाइन इंस्टीट्यूट तथा नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के उच्च पदाधिकारी शामिल हुए। साथ ही औद्योगिक जगत की प्रमुख कॉरपोरेट कंपनियों . टाटा स्टील, टाटा पॉवर, हिन्डाल्को, अडानी इंडस्ट्री तथा प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची यूनिवर्सिटी, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी तथा जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस आदि के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।

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