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आकांक्षा कुमारी : आकाश के बाद पाताल में भी बेटी दिखाएगी जौहर, झारखंड की बिटिया बनी देश की पहली भूमिगत माइनिंग इंजीनियर

सीसीएल ही नहीं कोल इण्डिया लिमिटेड के इतिहास में यह एक गौरव का पल है। सीसीएल में भी हमारी महिला सहकर्मी न सिर्फ कार्यालय व अस्पताल बल्कि बड़ी बड़ी मशीने भी चला रहीं है। वह अधिकारी, डॉक्‍टर, पारामेडिकल, सिक्‍युरिटी गार्ड, डम्‍पर ऑपरेटर, शॉवेल ऑपरेटर जैसे विभिन्‍न भूमिका में कम्‍पनी के उत्‍तरोत्‍तर विकास में अपना योगदान दे रही है।

डेस्क: नारी एक शक्ति है- वह सशक्‍त है, सक्षम है और सुदृढ़ है। आज वह सेना से लेकर ओलिंपिक तक देश की हर महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारियों को अपने मजबूत कंधो पर लिए हुए है। वो राफेल भी उड़ा रही है और देश की अर्थव्‍यवस्था भी संभाल रही है। कोयला जगत के चुनौतिपूर्ण क्षेत्र में भी वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण बनी हमारी बड़कागॉंव, हजारीबाग (Hazaribag) की रहने वाली आकांक्षा कुमारी।

सीसीएल ही नहीं कोल इण्डिया लिमिटेड (Coal mining company) के इतिहास में यह एक गौरव का पल है। सीसीएल में भी हमारी महिला सहकर्मी न सिर्फ कार्यालय व अस्पताल बल्कि बड़ी बड़ी मशीने भी चला रहीं है। वह अधिकारी, डॉक्‍टर, पारामेडिकल, सिक्‍युरिटी गार्ड, डम्‍पर ऑपरेटर, शॉवेल ऑपरेटर जैसे विभिन्‍न भूमिका में कम्‍पनी के उत्‍तरोत्‍तर विकास में अपना योगदान दे रही है।

इस नारी शक्ति को आज कम्पनी में और बल मिला जब सीसीएल को पहली महिला ‘माइनिंग इंजीनियर’ (Mining Engineer) मिली। सीसीएल के 4  दशक के लम्बे इतिहास में हजारीबाग की आकांक्षा कुमारी (Akanksha Kumari) ने आज नॉर्थ कर्णपूरा क्षेत्र के चूरी भूमिगत खदान में अपना योगदान दिया। आकांक्षा पूरे कोल इंडिया की दूसरी और भूमिगत खदान में योगदान देने वाली पहली महिला माइनिंग इंजीनियर हैं।

बड़कागांव, हजारीबाग की रहने वाली आकांक्षा ने अपनी स्‍कूली पढ़ाई नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidyalaya) से की। बचपन से ही अपने आसपास कोयला खनन की गतिविधियों को उन्‍होंने करीब से देखा है जिसके चलते खनन के प्रति उनकी रूचि और झुकाव शुरू से ही रही है। इस रूची को आगे बढ़ाते हुये आकांक्षा ने इंजीनियरिंग में माइनिंग ब्रांच को चुना।

उन्होंने वर्ष 2018 में बीआईटी (सिंदरी), धनबाद (Dhanbad) से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कोल इंडिया में अपना योगदान देने से पहले उन्‍होंने तीन वर्षों तक हिन्‍दुस्‍तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Limited) की राजस्‍थान स्थित बल्‍लारिया खदान में कार्य किया। आकांक्षा के पिता एक स्‍कूल टीचर है एवं माता गृहणी हैं।

आकांक्षा ने अपने इंजीनियरिंग कोर्स में माइनिंग को चूनकर न सिर्फ इस भ्रांति को तोड़ा है कि खनन क्षेत्र सिर्फ पुरूषों के लिए है बल्कि अपने जैसे और भी महत्‍वाकांक्षी छात्राओं को भी प्रेरित किया है। झारखंड की बेटी, आकांक्षा की इस उपलब्धि ने खनन क्षेत्र में महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत और असीम संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। कोयला मंत्री प्रल्‍हाद जोशी (Coal Minister Pralhad Joshi) के साथ- साथ सीएमडी, सीसीएल पीएम प्रसाद (CCL PM Prasad) , सभी निदेशकगण एवं सीसीएल वृहद परिवार आकांक्षा को उनके उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई देता है।