झारखंड में बाल अपराध के अधिक मामले के बावजूद किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति में पद रिक्त

राज्य के सभी जिलों में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कोडरमा की संस्था कल्याण फाउंडेशन के सचिव मेरियन सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।

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सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य को पत्र लिख हस्तक्षेप की मांग की

कोडरमा : राज्य के सभी जिलों में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कोडरमा की संस्था कल्याण फाउंडेशन के सचिव मेरियन सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।

मेरियन सोरेन ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्य में बालहित बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि किशोर न्याय बोर्ड के 48 पद एवं बाल कल्याण समिति के 120 पद रिक्त हैं। उन्होंने लिखा है कि पीआईएल नंबर 1052/2018 एवं उच्च न्यायालय के द्वारा सू मोटो के तहत दिनांक आठ सितंबर 2021 को किशोर न्याय बोर्ड के सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य को आठ सितंबर 2021 से 8 सप्ताह का अवधि विस्तार का निर्देश दिया गया। परंतु, इसका अनुपालन महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा नहीं किया गया बल्कि राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त द्वारा विभाग के आदेश संख्या 1610, दिनांक एक सितंबर 2021 के आलोक में किशोर न्याय बोर्ड के सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सरकारी अधिवक्ता एवं सहायक सरकारी अधिवक्ता तथा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, सदस्य के रूप में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी का प्रतिनियुक्ति किया गया, जो कि जेजे एक्ट 2015 के 4(3) एवं 15(3) तथा उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्डपीठ द्वारा मिसिलिनिय्स बैच नंबर 3340/2018 के मामले में दिये गये आदेश का भी उल्लंघन हैं।

उन्होंने अपने आवेदन में यह भी लिखा है कि इन सभी मामलों में उच्च न्यायालय झारखंड के द्वारा 08 सप्ताह का अवधि. विस्तार का जो समय दिया गया, वह समय भी बीत गया। लेकिन, अभी तक किशोर न्याय बोर्ड के सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, सदस्यों का न अवधि विस्तार हुआ और न ही नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गयी। ऐसे में, झारखंड राज्य में बालहित बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बालहित में अविलंब आवश्यक पहल किए जाने की मांग की है।

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