Breaking News

दुमका के दुवारिया गांव में सारे चापानल खराब, ग्रामीणों को बारिश में पीना पड़ रहा है दूषित पानी

दुमका : झारखंड के दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड की टांयजोड़ पंचायत के अंतर्गत दुवारिया गांव आदिवासी और पहाड़िया आदिम जनजाति बहुल है। यह गांव प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी में स्थित है। यहां करीब 110 घर हैं। इस गांव में दूर-दूर स्थित गाडा टोला, ताला टोला और प्रधान टोला मिलाकर कुल तीन टोला हैं। इनमें घरों की संख्या क्रमशः 46, 40 और 24 है। इस गांव में पीने के पानी का घोर समस्या है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रायः सभी चापानल तीन-चार वर्षो से बेकार हो चुके हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है गांव में करीब 20-25 वर्ष पहले चापानल लगाया गया था, लेकिन विभाग, पंचायत और ब्लॉक से इसकी कभी भी मरम्मत नही करायी गयी। ग्रामीण अब तक अपने पैसों से ही चापानल की मरम्मत कराते आए हैं।


चापानल बहुत पुराना हो गया है, जिस कारण उसके पाईप भी सड़ गए हैं। इस कारण ग्रामीण अब चापानल की मरम्मत करवाने में असमर्थ हैं, क्योंकि पाईप नई लगानी होगी। गाडा टोला में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली चालित टंकी भी लगी हुई है, लेकिन वह भी करीब एक वर्ष से ख़राब है। ग्रामीण पानी की समस्या को लेकर वार्ड सदस्य और मुखिया से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन न तो चापानल की मरम्मत हुई है और न ही बिजली चलित टंकी का मरम्मत ही करायी गयी है।

इस कारण ग्रामीण मजबूर हो कर रोजमर्रा के काम से लेकर पीने का पानी तक के लिए डडी, डोभा, सिंचाई, कुआं, नदी का प्रदूषित पानी पर आश्रित है। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी स्रोतों का पानी शुद्ध नहीं है, लेकिन मजबूरन इस सभी प्रदूषित स्त्रोतों का पानी नित्य व्यवहार में लाना होता है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। खेत में बने सिंचाई कुआं में खेत का पानी प्रवेश कर जाता है, जिससे वह पानी प्रदूषित हो जाता है।


लोगों को डडी, डोभा और नदी का पानी लाने के लिए करीब एक किलोमीटर उबड़-खाबड़ पथरीला रास्ता और जंगल होकर जाना पड़ता है। पानी भरकर जब बुजुर्ग, महिला, पुरुष और बच्चे पथरीले व पहाड़ी रास्ते से होकर वापस आते हैं तो वह बहुत जोखिम भरा होता है। छोटे-बड़े पत्थर रास्ते में होते हैं। अगर जरा भी असावधानी हुई तो बड़ी दुर्घटना होने कि संभवाना हमेशा बनी रहती है। चढाई अधिक होने के कारण पुरुषों को पानी लाते समय डंडा की सहायता लेनी पड़ती है। ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन, जन प्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द ही सभी चापानल में नया पाईप लगाकर मरम्मत करवाया जाये और सभी टोले में सोलर टंकी लगवायी जाए।

गांव में टोलावार चापानल की स्थिति
गाडा टोला में कुल पांच चापानल और एक बिजली चलित मोटर है। सभी खराब हैं।

1. खडू सोरेन के घर के सामने का चापानल करीब एक वर्ष से खराब है।
;2. होपना हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापानल करीब एक वर्ष से खराब है।
3. सपल हांसदा के घर के सामने का चापानल करीब तीन वर्ष से खराब है।
4. विलसन बास्की के घर के सामने का चापानल करीब दो वर्ष से खराब है।
5. प्राथमिक विद्यालय, दुवरिया का चापानल करीब एक वर्ष से खराब है।
6. आंगनबाड़ी में स्थित बिजली चलित मोटर करीब एक वर्ष से खराब है।

ताला टोला में कुल तीन चापानल है। एक खराब है और अन्य दो कि स्थिति ठीक नहीं है।
1. फूलचंद मड़ैया के घर के सामने का चापानल ठीक से पानी नहीं दे रहा है।
2. बदरू हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापानल करीब दो वर्ष से खराब है।
3. बजल टुडू के घर के सामने का चापानल मात्र पांच-छह बाल्टी पानी देता है, उसके बाद बंद हो जाता है। उसके बाद फिर एक घंटा के बाद पांच-छह बाल्टी पानी देता है। इस चापानल का पानी बाल्टी में कुछ देर रखने पर लाल हो जाता है।
प्रधान टोला में कुल दो चापानल हैं। दोनों ही खराब हैं।
1. संग्राम हेम्ब्रोम के घर के सामने का चापानल करीब तीन वर्ष से खराब है।
2. धानेश्वर मरांडी के घर के सामने का चापानल करीब चार वर्ष से खराब है।

पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग करने वालों में मुखी मरांडी, माश्वरी मुर्मू, मंत्री मरांडी, मार्था सोरेन, फुलमुनी हेम्ब्रोम, बाहामुनि हेम्ब्रोम, एलीना मरांडी, शांति मुर्मू, शिवलाल सोरेन, संतोषिनी हेम्ब्रोम, सालोनी बेसरा, लुखी हेम्ब्रोम, एमेल बास्की, होपना हेम्ब्रोम, सनातन बास्की, राजा मरांडी, उर्मिला हेम्ब्रोम आदि ग्रामीण शामिल हैं।

यह भी देखें