Breaking News

धनबाद: दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में स्कूल के बच्चे गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, जोरिया और तालाब में धोते हैं जूठे बर्तन

धनबाद के टुंडी प्रखंड स्थित दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बच्चों को पेयजल नसीब नहीं है. स्कूल के किताबों के जरिए बच्चों को स्वच्छ पेयजल पीने के बारे में तो बताया जाता है. लेकिन स्कूल में मध्याहन भोजन के बाद छात्र- छात्राओं को पानी नसीब नहीं होता.

धनबाद: दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में स्कूल के बच्चे गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, जोरिया और तालाब में धोते हैं जूठे बर्तन

स्कूली बच्चों के जीवन से हो रहा खिलवाड़, कभी भी ये बच्चे पड़ सकते हैं बीमार

टुंडी(धनबाद): “जल ही जीवन है”, “जल पर सबका अधिकार है” और “जल जीवन का आधार है.” ऐसी पंक्तियों को हम बचपन से ही देखते, सुनते और समझते आ रहे हैं. झारखंड सरकार ने राज्यवासियों को पेयजल की आपूर्ति के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भी बना रखा है. लेकिन धनबाद के टुंडी प्रखंड स्थित दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के बच्चों को पेयजल नसीब नहीं है. स्कूल के किताबों के जरिए बच्चों को स्वच्छ पेयजल पीने के बारे में तो बताया जाता है. लेकिन स्कूल में मध्याहन भोजन के बाद छात्र- छात्राओं को पानी नसीब नहीं होता.

धनबाद: दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में स्कूल के बच्चे गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, जोरिया और तालाब में धोते हैं जूठे बर्तन

 

स्कूली बच्चे धोते हैं थाली

जोरिया के गंदे पानी से थाली धोते ये बच्चे कोई और नहीं, बल्कि हमारे घरों से निकले स्कूल के बच्चे हैं. जिन्हें पढ़ाई के दौरान प्यास लगे, तो स्कूल में पानी नसीब नहीं होता. मध्याहन भोजन के बाद थाली धोना हो, तो स्कूल से दूर जोरिया या पोखरा में जाना पड़ता है. हालांकि स्कूल के प्रधानाध्यापक के निर्देश पर इन बच्चों की निगरानी के लिए कर्मचारियों को साथ भेजा जाता है. लेकिन गहरे गंदे पानी के बीच इन बच्चों से थाली मंजवाया जाता है.

क्या कहती है स्कूली छात्रा

स्कूल में शिक्षारत छात्रा बताती है कि स्कूल से दूर जाकर जोरिया के पानी का उपयोग करना पड़ता है. जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है. स्कूल में पेयजल की सुविधा के अभाव में उन्हें असुरक्षा का सामना करना पड़ता है. जोरिया, तालाब और कुआं से पानी का उपयोग करने में डर तो लगता है, लेकिन सुविधा के अभाव में स्कूल के सभी बच्चों को इन्हीं पेयजल संसाधनों का उपयोग करना पड़ता है.

क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक

टुंडी के दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक दुर्जन वर्मा बताते हैं कि स्कूल में एक चापाकल है. लेकिन उससे पीने योग्य पानी नहीं आता. उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति को शिक्षा विभाग से जो राशि मिलती है, वह स्कूल के संचालन के लिए कम पड़ जाती है. वे सारी व्यवस्थाएं तो करना चाहते हैं, लेकिन राशि के अभाव में नहीं कर पाते. हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है.

व्यवस्था के अभाव में दुर्घटना को आमंत्रण

दो मुंडा के इस सरकारी स्कूल में व्यवस्था का घोर अभाव नजर आता है. पेयजल के लिए चापाकल की व्यवस्था तो है, लेकिन पीने योग्य पानी नहीं निकलता. पानी पीने के लिए बच्चे नहर और तालाब का रूख कर लेते हैं. जो कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ का जीता-जागता उदाहरण है. इस नहर और तालाब में गहराई है और बच्चों का मन चंचल होता है. इसलिए अभाव में दुर्घटना के आमंत्रण से परहेज नहीं किया जा सकता.

 

धनबाद: दो मुंडा उत्क्रमित मध्य विद्यालय में स्कूल के बच्चे गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, जोरिया और तालाब में धोते हैं जूठे बर्तन

प्रबंधन की लापरवाही बच्चों पर पड़ सकती है भारी

इस मामले में विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही साफ नजर आती है, क्योंकि विद्यालय प्रबंधन स्थानीय बच्चों की सेहत को लेकर सजह होता. तो शायद बच्चों को तालाब और बावड़ी न जाना पड़ता. स्कूली किताबों में साफ पानी पीने के लिए बताया जाता है. लेकिन वहीं दूसरी ओर विद्यालय प्रबंधन के सदस्यों की ओर से बच्चों को गंदे पानी पीने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है.

ये बच्चे कभी तालाब का गंदा पानी पीते हैं, तो कभी गहरे कुएं के पास पानी भरते देखे जाते हैं. हालांकि शिक्षकों को इसकी पूरी जानकारी है कि गंदे पानी के सेवन से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है और उन्हें टाइफड, मलेरिया, हैजा, डायरिया और कॉलेरा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती है. इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की लापरवाही की वजह से छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

हालांकि विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुलदीप मिस्त्री बताते हैं कि स्कूल में पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इसके लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी नहीं है.

जनप्रतिनिधियों को आ रही नींद

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि इस पूरे मामले से स्थानीय जनप्रतिनिधि बेखबर हों. लेकिन ना तो वार्ड सदस्य ने इस मामले में कोई कार्रवाई की और ना ही पंचायत के मुखिया की कोई रूचि नजर आयी. स्थानीय विधायक को इन बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है. लेकिन न जाने क्यों विभागीय अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक नींद की गहराई में बच्चों के भविष्य को भूलते नजर आ रहे हैं. खुद तो सपने देख रहे हैं, लेकिन पानी के अभाव में बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के सपनों से खेल जा रहे हैं.

वेद-पुराणों में कहा गया है “क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच तत्व मिल बने शरीरा.” शरीर के निर्माण में जल का सबसे बड़ा योगदान है. इसलिए हमें खुद भी स्वच्छ पेयजल का सेवन करना चाहिए और देश के भविष्य की मानसिकता को स्वच्छ बनाने के लिए स्वच्छ जल का सेवन कराना चाहिए. मनुष्य को सामाजिक प्राणी की संज्ञा दी गयी है. इसलिए हम सभी को एक-दूसरे की चिंता करनी चाहिए और समस्या का उचित समाधान निकालना चाहिए.