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प्रसिद्ध बांग्ला पत्रिका शिल्पे अनन्या के 60वें अंक का धनबाद में विमोचन, बांग्ला की पढाई नहीं होने पर चिंता

धनबाद : लिंडसे क्लब में 18 सितंबर को झारखंड, बंगाल व त्रिपुरा में लोकप्रिय पत्रिका शिल्पे अनन्या के 60वें अंक का विमोचन बांग्ला के जाने-माने लेखक एवं बुद्धिजीवियों के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ कृष्णनाथ बंद्योपाध्याय, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ अमलेंदु सिन्हा, डॉ शैलेंद्र सिन्हा, डॉ पार्थसारथी चक्रवर्ती, डॉ काशीनाथ चटर्जी, गौतम चटर्जी, डॉ शर्मिला बनर्जी व सुबल दत्ता मौजूद थे।

इस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गयी तथा सभी मंचासीन अतिथियों को अंग वस्त्र देने के पश्चात सरवानी मजूमदा के द्वारा मंगला चरण प्रस्तुत की गयी।

विदित हो की शिल्पे अनन्या पत्रिका का सफर 1977 में प्रो डॉ दीपक कुमार सेन के नेतृत्व में शुरू हुआ था। उनका सपना 1977 में मूर्त रूप लिया तथा आज भी यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित होती आ रही है। इसके विमोचन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो डॉ कृष्णनाथ बंदोपाध्याय जो कोयलांचल विश्वविद्यालय के भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें अपार हर्ष व आश्चर्य हो रहा है कि वे पत्रिका के 60 वें अंक के विमोचन में शामिल हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ अमलेंदु सिन्हा; पूर्व निदेशक सिंफर, धनबाद ने कहा की इस पत्रिका में बहुत सारे वैज्ञानिक जानकारी एवं आलेख भी रहता है, जो समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ शैलेंद्र सिन्हा, डीन साइंस, कोयलांचल विश्विद्यालय धनबाद ने कहा कि हमें इस विमोचन में शामिल होने में अपार प्रसन्नता हो रही है।

बांग्ला भाषा एवं सांस्कृतिक रक्षा समिति, झारखंड के सचिव सह जाने-माने भाषाविद गौतम चटर्जी ने कहा कि हमें शिल्पे अनन्या के 60वें अंक के विमोचन में अत्यंत खुशी हो रही है। झारखंड में 42 प्रतिशत बांग्ला भाषा-भाषी रहते हैं। परंतु स्कूलों में बांग्ला भाषा में पढ़ाई नहीं होती, यह बहुत चिंताजनक स्थिति है। हमें बंगला भाषा की पत्रिकाओं को लगातर जारी रखना चाहिए और सभी भाषा-भाषी में एकता स्थापित करना चाहिए। इसके साथ गौतम चटर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जल्द ही झारखंड में लिटिल मैगजीन फोरम का पंजीयन कराएंगे जो इस तरह के पत्र . पत्रिकाओं को साथ-साथ चलने में सहायता करेगा।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ काशीनाथ चटर्जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की प्रथम पत्रिका राजाराम मोहन राय के द्वारा कुमुदनी का प्रकाशन किया गया था। उसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी के द्वारा 1872 में बंग दर्शन का प्रकाशन किया गया। रवींद्र नाथ टैगोर 11 वर्ष की उम्र में इस पत्रिका का इंतजार व्यग्रता से करते थे। शिल्पे अनन्या पत्रिका झारखंड का पहला बांग्ला रजिस्टर्ड पत्रिका है। इसके लिए मैं प्रो डीके सेन का शुक्रगुजार हूं।

इसके पश्चात कोलकाता से आए हुए प्रतिष्ठित विद्वान डॉ पार्थो शार्थी चक्रवर्ती ने भी कहा, मुझे आश्चर्य है कि झारखंड जैसे राज्य में शिल्पे अनन्या का 60वां अंक प्रकाशित होने से प्रसन्नता हुई है, इसके लिए शुभकामनाएं देता हूं।

डॉ शर्मिला बनर्जी, बांग्ला पीजी विभाग, बीबीएमके विश्वविद्यालय ने कहा कि शिल्पे अनन्या का सफर आगे बढ़े और समाज को मार्गदर्शन करता रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन श्रीमती बरनाली गुप्ता एवं मनोजित मजूमदार तथा धन्यवाद ज्ञापन शिल्पे अनन्या के संपादक डॉ दीपक कुमार सेन के द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में सुबल दत्ता के द्वारा भी विचार रखा गया। अंकिता बनर्जी देवी स्तुति पर नृत्य प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर बांग्ला कविता की पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम को सफल करने में लिंडसे क्लब के सभी सदस्यों तथा विकाश सेन, भोला नाथ राम, विनय राय, इंद्रदीप विश्वास आदि का सहयोग रहा।

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