क्या सीता सोरेन की बेटियों के द्वारा दुर्गा सोरेन सेना का गठन सामान्य राजनीतिक घटना है?

क्या दुर्गा सोरेन व सीता सोरेन की बेटियां अपने सामाजिक संगठन के जरिए भविष्य में राजनीति की राह पर चलेंगी और अगर ऐसा करेंगी तो उनका रुख क्या होगा, यह अहम सवाल है, जिसका जवाब झारखंड वासी जानना चाहते हैं…

दुर्मा सोरेन सेना गठन कार्यक्रम में उनकी बेटियां व अन्य।

रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक व झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन की बेटियों ने शुक्रवार को विजयादशमी के मौके पर दुर्गा सोरेन सेना का गठन किया। सीता सोरेन की बेटियों ने इसे गैर राजनीतिक संगठन बताया है, जिसका उद्देश्य समाज सेवा करना व लोगों के हितों के लिए काम करना बताया है।

बिजनेस मैनजमेंट व लॉ की पढाई पूरी कर चुकी राजश्री सोरेन एवं जयश्री सोरेन ने शुक्रवार को इस संगठन की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि लोगों से इससे जुड़ने की अपील की। सीता सोरेन की छोटी बेटी विजयश्री सोरेन ने इसको लेकर ट्वीट किया – “विजयदशमी के शुभ अवसर पर मेरे स्वर्गीय पिताजी दुर्गा सोरेन के अधूरे सपनों को पूर्ण करने की तरफ एक नेक कदम बढ़ते हुए मेरी बड़ी बहनों के द्वारा दुर्गा सोरेन सेना का विस्तार किया गया है। यह संगठन समस्त झारखंडवासियों के उज्ज्वल भविष्य एवं समाज सेवा में अपना पूर्ण योगदान निभाएगा”।

वहीं, राजश्री ने ट्वीट किया, “झारखंड आंदोलन के नेता, गरीबों व असहायों के हक की लड़ाई लड़ने वाले मेरे पिता स्वर्गीय दुर्गा सोरेन के सपनों का झारखंड बनाने व अधूरी समाजसेवा के सपनों को साकार करने के लिए दुर्गा सोरेन सेना का गठन किया गया है। आप सभी से निवेदन है कि हमारे संगठन से जड़े और हमें मजबूती प्रदान करें”।


इस आयोजन में सीता सोरेन शामिल नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने ट्वीट कर कहा, “विजयादशमी के दिन हमारी बेटियाँ जयश्री और राजश्री द्वारा पिता स्व दुर्गा सोरेन के सपनों को पूरा करने के लिए दुर्गा सोरेन सेना का गठन किया गया है। आप दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं हमें पूर्ण विश्वास है कि आप दोनों पिता द्वारा मिली समाजसेवा की प्रेरणा के साथ जनता का सेवा करेंगी”।


बड़ी हो चुकी बेटियों की सार्वजनिक जीवन की राह चुनने की कोशिश

दिवंगत दुर्गा सोरेन व सीता सोरेन की बेटियों ने इसे भले ही पहले ही गैर राजनीतिक संगठन बताया हो लेकिन इस संगठन की स्थाापना से यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक जीवन में काम करने की उनकी इच्छा प्रबल है। अपनी शिक्षा के अनुरूप वे एक प्रोफेशनल कैरियर को चुन कर लोगों की नजरों से ओझल व गुमनाम नहीं रहना चाहती हैं। बल्कि वे सामाजिक व सार्वजनिक जीवन में काम कर आमलोगों से जुड़ना चाहती हैं और उनके बीच सक्रिय रहना चाहती है। सामाजिक जीवन में काम करने की यह चाह भविष्य में राजनीतिक सक्रियता के तरफ नहीं जाएगी, इसकी संभावना नहीं के बराबर है। इस तरह के सामाजिक संगठनों के जरिए राजनीति की राह तय करने के पूर्व के कई उदाहरण हैं। सीता सोरेन की बेटियों ने यह कदम झामुमो की युवा इकाइयों के सक्रिय व प्रभावी होने के बाद भी उठाया है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि दुर्गा सोरेन-सीता सोरेन की बेटियां राजनीतिक राह चुनती हैं तो वह किस तरह की होगी।

सीता सोरेन ने उठाया था विनोद पांडेय का मुद्दा

सीता सोरेन पहले भी पार्टी में असंतोष का स्वर उठा चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि जब चतरा के दौरे पर गयीं थीं तो पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने कार्यकर्ताओं को उनके कार्यक्रम में जाने से रोका था और शामिल होने वालों को कार्रवाई की चेतावनी दी थी। सीता सोरेन ने पार्टी अध्यक्ष व अपने ससुर शिबू सोरेन को एक पत्र लिख कर कहा था कि विनोद पांडेय उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। उन्होंने इस पत्र को ट्विटर पर पोस्ट कर दिया था और इसमें शिबू सोरेन व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग किया था। पत्र की कॉपी सार्वजनिक होने पर काफी हंगामा मचा था। सीता सोरेन ने इस पत्र में कहा था कि यह पार्टी उनके ससुर शिबू सोरेन व पति दुर्गा सोरेन की मेहनत व खून-पशीने से खड़ी हुई है।

कुछ दिनों तक इस मुद्दे पर काफी गहमागहमी रही। हालांकि बाद में सीता सोरेन ने यह स्पष्ट किया कि वे पार्टी और परिवार के साथ हैं और ऐसा कयास लगाने को उन्होंने गलत बताया। लेकिन, हकीकत यह भी है कि राजनीति में हाशिये पर हर कोई बहुत दिनों तक खड़े भी तो नहीं रहना चाहता।

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