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तीन सालों में दरभंगा की खेती हो गयी चौपट, किसान नेता ने बतायी वजह

प्रतीकात्मक फोटो।

दरभंगा : अखिल भारतीय किसान सभा की बैठक शुक्रवार को सीपीआई जिला कार्यालय में हुई। जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजीव कुमार चौधरी ने की। बैठक में दरभंगा जिला के किसानों की दुर्दशा पर मंथन और आगामी आन्दोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही 27 सितम्बर को अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के आवाह्न पर भारत बंद में स्थानीय मुद्दों को जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर दरभंगा को बंद करवाने की रणनीति बनाई गई।

बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार झा ने कहा कि जबसे मोदी सरकार सत्ता में आयी है तब से किसानों का जीवन दूभर हो गया है। जिला की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है मगर 2019 से न तो रवि फसल और न ही खरीफ फसल हो पाया है। बाढ़-सुखाड़ तो जिला के लिए अपरिहार्य बनता जा रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा कोई ठोस राहत नहीं मिलना बेहद ही चिन्ताजनक है। किसान कर्ज लेकर कब तक खेती करते रहेगा। आलम यह है कि कई बीघा जमीन का मालिक रहने वाला किसान भी अब पंजाब हरियाणा जाकर मजदूरी करने को विवश नजर आता है।

अध्यक्षता करते हुए राजीव कुमार चौधरी ने कहा कि सोनमार हाट से हायाघाट वाले बाँध और शहर सुरक्षा बाँध के कारण हनुमाननगर, बहादुरपुर व हायाघाट को सरकार द्वारा प्रायोजित वाटर लॉगइन एरिया बना दिया गया है। जिससे 3 से 4 महीना इस क्षेत्र में जलजमाव रहता है। कारणवश खेती तो होता नहीं है, इस क्षेत्र में 80 प्रतिशत से ऊपर आम, लीची सहित कीमती पेड़-पौधे सूख गए हैं। ऐसी भयानक विपदा जो आम लोगों के साथ-साथ प्रकृति के लिए भी खतरनाक है। ऐसी स्थिति में भी सरकार के किसी स्तर के पदाधिकारी इस दुर्दशा को देखने तक नहीं आए हैं, मुआवजा तो दूर की बात है। इस बार सरकार ने फसल क्षति का जो आकलन किया है, वह भी ऑफिस के बंद कमरों में बैठकर महज खानापूरी की गई है। जिसका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

अंचलाधिकारी व बीडीओ ने विगत दिनों हुए प्रदर्शन में यह आश्वासन दिया था कि शत-प्रतिशत परिवार को फसल क्षति सहित बाढ़ सहायता राशि भेजी जाएगी। मगर कुछ एक परिवार को छोड़कर अधिकांश को यह राशि नहीं मिल पाया है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय मुद्दा सहित किसान अपने क्षेत्र के ज्वलंत मुद्दा को लेकर भी 27 सितंबर को शहीद ए आजम भगत सिंह के शहादत दिवस और दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के 9 महीने पूरे होने के उपरांत व्यापक गोलबंदी कर भारत बंद को सफल बनाने के लिए दरभंगा को पूर्ण रूप से बंद करेगी और हजारों हजार की संख्या में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च करेगी।