महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण बदलने के खेल ने 2017 के बिहार की याद ताजा करा दी
नयी दिल्ली : महाराष्ट्र में जिस तरह सत्ता का पूरा का पूरा समीकरण बदल गया और शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की कई चरणों की मैराथन बैठकें धरी की धरी रह गयीं, उसने 2017 के बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम की याद ताजा करा दी. अंतर सिर्फ इतना है कि बिहार में उस समय जदयू-राजद की सरकार बनी हुई थी, जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार गठन के करीब पहुंच चुके थे. बिहार में सत्ता परिवर्तन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण होते दिखा, जबकि महाराष्ट्र में भाजपा ने यह ठान रखा था कि सीएम तो उसी का होगा और किसी हाल में ठाकरे को या उनके किसी प्रतिनिधि को सीएम नहीं बनने देना है.
जैसे बिहार में शाम से सुबह की तसवीर जुदा थी, वैसे ही महाराष्ट्र में भी शाम से सुबह की तसवीर जुदा है. पूरब और पश्चिम के ये दोनों बड़े राज्य भारत की राजनीति में काफी अहमियत रखते हैं. इन दोनों सूबों की राजनीतिक घटनाएं राष्ट्रीय सुर्खियां तो बनती ही हैं, उनका असर भी देश की राजनीति पर पड़ता है. तो महाराष्ट्र के इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.
अब दोपहर साढे 12 बजे शरद पवार व उद्धव ठाकरे प्रेस कान्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखेंगे और उम्मीद है कि अजीत पवार भी देर-सबेर अपनी बात कहेंगे.
लेगों के मन में एक सवाल यह भी है कि क्या चाचा-भतीजा में सचमुच मतभेद है या ऐसा दिख रहा है.
बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम से पवार चाचा-भतीजे के साथ मोदी-शाह की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में आयी है और लोग यह मान रहे हैं कि ये मौजूदा राजनीति के सबसे माहिर खिलाड़ी हैं. ट्विटर पर इनके लिए मोटाभाई, चाणक्य, सर्जिकल स्ट्राइक आदि कई चीजें आज ट्रेंड कर रही हैं. अजीत पवार, बीजेपीएनसीपी, उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस तो ट्रेंड कर ही रहे हैं.
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