महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण बदलने के खेल ने 2017 के बिहार की याद ताजा करा दी

महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण बदलने के खेल ने 2017 के बिहार की याद ताजा करा दी

 

नयी दिल्ली : महाराष्ट्र में जिस तरह सत्ता का पूरा का पूरा समीकरण बदल गया और शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की कई चरणों की मैराथन बैठकें धरी की धरी रह गयीं, उसने 2017 के बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम की याद ताजा करा दी. अंतर सिर्फ इतना है कि बिहार में उस समय जदयू-राजद की सरकार बनी हुई थी, जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार गठन के करीब पहुंच चुके थे. बिहार में सत्ता परिवर्तन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण होते दिखा, जबकि महाराष्ट्र में भाजपा ने यह ठान रखा था कि सीएम तो उसी का होगा और किसी हाल में ठाकरे को या उनके किसी प्रतिनिधि को सीएम नहीं बनने देना है.

जैसा कि मीडिया रिपोर्टाें में कहा गया कि शुक्रवार की रात शिवसेना, एनसीपी एवं कांग्रेस उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार गठन पर लगभग आम सहमति तक पहुंच गए थे और कुछ सवालों का आज शनिवार को जवाब तलाशना था. यह भी संभावना बनी थी कि तीनों दल आज उद्धव ठाकरे को नेता चुन कर सरकार गठन की दावेदारी पेश कर सकते हैं. लेकिन, छोटे पवार के मन में कुछ और ही था. शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने रातोंरात भाजपा से गठबंधन कर लिया और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के डिप्टी सीएम के रूप में सुबह-सुबह राजभवन पहुंच कर शपथ ले ली. वहीं, फडणवीस ने दोबार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पवार को बधाइयां दी.

याद कीजिए 2017 के जुलाई-अगस्त महीने में तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण नीतीश कुमार ने लंबी चुप्पी के बाद एक शाम राजभवन पहुंच कर इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस्तीफा देने के बाद कहा था कि कफन में जेब नहीं होता और एक महान आदर्श प्रस्तुत करते दिख रहे थे. लेकिन, आधी रात में नीतीश कुमार ने फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उनके डिप्टी के रूप में उनके पुराने साथी और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने शपथ ग्रहण किया.

जैसे बिहार में शाम से सुबह की तसवीर जुदा थी, वैसे ही महाराष्ट्र में भी शाम से सुबह की तसवीर जुदा है. पूरब और पश्चिम के ये दोनों बड़े राज्य भारत की राजनीति में काफी अहमियत रखते हैं. इन दोनों सूबों की राजनीतिक घटनाएं राष्ट्रीय सुर्खियां तो बनती ही हैं, उनका असर भी देश की राजनीति पर पड़ता है. तो महाराष्ट्र के इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

अब दोपहर साढे 12 बजे शरद पवार व उद्धव ठाकरे प्रेस कान्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखेंगे और उम्मीद है कि अजीत पवार भी देर-सबेर अपनी बात कहेंगे.

लेगों के मन में एक सवाल यह भी है कि क्या चाचा-भतीजा में सचमुच मतभेद है या ऐसा दिख रहा है.

बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम से पवार चाचा-भतीजे के साथ मोदी-शाह की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में आयी है और लोग यह मान रहे हैं कि ये मौजूदा राजनीति के सबसे माहिर खिलाड़ी हैं. ट्विटर पर इनके लिए मोटाभाई, चाणक्य, सर्जिकल स्ट्राइक आदि कई चीजें आज ट्रेंड कर रही हैं. अजीत पवार, बीजेपीएनसीपी, उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस तो ट्रेंड कर ही रहे हैं.

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Edited By: Samridh Jharkhand

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