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विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर पर्यावरण कार्यकर्ता दीपक साह ने की अनूठी पहल, गोरैया के लिए बनाया घोंसला

विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर गुरुवार को वन्य व नदी जल जीव संरक्षण के लिए प्रयासरत दीपक साह ने गौरैया प्रजनन व पुनर्वास कार्यक्रम का प्रारंभ किया। इसके अंतर्गत 20 मार्च 2022 को विश्व गौरैया दिवस तक यह अभियान चलाया जाएगा।

भागलपुर : विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर गुरुवार को वन्य व नदी जल जीव संरक्षण के लिए प्रयासरत दीपक साह ने गौरैया प्रजनन व पुनर्वास कार्यक्रम का प्रारंभ किया। इसके अंतर्गत 20 मार्च 2022 को विश्व गौरैया दिवस तक यह अभियान चलाया जाएगा।

इस अभियान के तहत कई घोसले तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अमिता मोइत्रा के यहां लगाया गया। साथ में पक्षियों को पानी व दाना खिलाने का बर्तन भी भेट किया गया।

इस अभियान के तहत भागलपुर के विभिन्न घरों में इनके द्वारा राजकीय पक्षी गौरैयों के लिए कृत्रिम घोसले लगाये जायेंगे। दीपक लंबे समय से गौरेया संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं इनके घर पर भी आप सैकड़ो गौरैयों के आवास को देख सकते हैं।

ये घोसले पुराने सामानों के प्रबंधन से बनाया गया है। इन घोसलों को 6 सालों से कई जगह बनाकर प्रयोग करने के बाद ही लोगों के घरों में लगाने के लिए तैयार किया गया है। जो सामग्री कचरे के रूप में व्यर्थ हैं, उनमें ये नन्हीं गौरैया प्रजनन करेंगी। इनका दावा है कि किसी भी अन्य घोसलों को बनाने से ये सस्ता है व गौरैया भी इन्हें आसानी से पसंद करती हैं व सफल प्रजनन करती हैं।

सभी पक्षियों में गौरैया हमारे सबसे निकटतम संबंधी हैं। इन्हें बचपन से ही हम अपने आंगन में फुदकते देखते हैं, इनके गिरती संख्या चिंता का विषय है पर धीरे-धीरे लोग अपने दिलो में इस पक्षी को स्थान दे रहे हैं। अब इनकी संख्या चिंता के बाहर है। बिहार सरकार भी इस पक्षी के संरक्षण के लिए काफी प्रयास कर रही है। साथ ही कई सामाजिक संस्थान भी आगे आकर जागरूकता फैला रहे हैं। इसी कड़ी में मुंदीचक निवासी दीपक कुमार, गंगा प्रहरी, भारतीय वन जीव संस्थान ने भी गौरैया के प्रति लोगों को जागरूकता सह घोसला वितरण करने की योजना बनाई है।

इस वर्ष 2022 विश्व वन्यजीव दिवस का थीम पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए प्रमुख प्रजातियों को पुनर्प्राप्त करना है। हर साल पूरी दुनिया में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्‍य दुनिया भर में तेजी से विलुप्त हो रही वनस्पतियों और जीव जन्तुओं की प्रजातियों की सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना है। जैव विविधता की समृद्धि ही धरती को रहने व जीवनयापन के योग्य बनाती है लेकिन समस्या यह है कि लगातार बढ़ता प्रदूषण, वातावरण पर इतना खतरनाक प्रभाव डाल रहा है कि जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। भारत में इस समय 900 से भी ज्यादा दुर्लभ प्रजातियां खतरे में बताई जा रही हैं। यही नहीं, विश्व धरोहर को गंवाने वाले देशों की लिस्ट में दुनियाभर में भारत का चीन के बाद 7वां स्थान है। आज हम अपने आसपास कई पक्षियों को खो चुके हैं इनकी घटती संख्या व मानव जीवन पर इसका गंभीर दुष्परिणाम देख सकते हैं।