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बहुजन आंदोलनों की वजह से ही बिहार में नीतीश-लालू फिर साथ आए : गौतम प्रीतम

मुंगेर : पेरियार ललई सिंह यादव व पेरियार ईवी रामासामी नायकर की जयंती व जगदेव प्रसाद के सहादत दिवस के अवसर पर बहुजनों के सामने चुनौती व कार्यभार विषय पर टटिया बम्बर प्रखंड क्षेत्र में चर्चा हुई।

इस दौरान पेरियार ललई सिंह यादव जयंती समारोह के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार कोर कमेटी सदस्य गौतम कुमार प्रीतम ने कहा, चौतरफा बढ़ते मनुवादी सांप्रदायिक हमले और कॉरपोरेट कब्जा के खिलाफ हम बहुजन की दावेदारी का सवाल चरणबद्ध तरीके से उठा रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार के विभिन्न जगहों पर अब तक आठ बहुजन दावेदारी सम्मेलन कर चुके हैं। आज जब हम पेरियार की जयंती मना रहे हैं तो हमें ये देखना है कि आज की परिस्थित में हमारे सामने क्या चुनौती व कार्यभार है। बहुजन आंदोलनों के मेहनत से जो ऊर्जा बनी है उसी का नतीजा है कि बिहार में नीतीश कुमार व लालू प्रसाद एक साथ आए हैं। यहीं पर बहुजन छोड़ से हमें बहुजनो का जो एजेंडा है उसे पेश करना है जिसमें निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण समान स्कूल शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार, भूमिहीन को जमीन, संख्यानुपात धन-धरती-राजपाट में हिस्सेदारी, कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर न्यायपालिका, मीडिया सहित सभी लोकतांत्रिक पदों पर भागेदारी जैसे मुद्दे को सड़क पर खड़ा होकर पेश करना है।

जयंती समारोह की अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद यादव व संचालक राजेश कुमार ने कहा, बहुजन समाज दो जगह मजबूती से काम करे, एक तो जातिवाद की जगह बहुजन एकता पर जोर दे और दूसरा धार्मिक उन्माद के प्रपंच से बचे। जातिवार जनगणना कराने के लिए केंद्र सरकार को बाध्य करने के लिए लड़ाई तेज करें, जातियों का विभाजन और जो भेदभाव है उसे हम सब मिलकर काम करें और विकल्प पेश करें।

शशिकांत दास व जिला परिषद प्रतिनिधि टुनटुन ठाकुर ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद ने कहा था, सौ में नब्बे शोषित है, नब्बे भाग हमारा है और सौ पर नब्बे का राज नहीं चलेगा, आज भी हम इसी लड़ाई को लड़ रहे हैं। बहुजन दावेदारी सम्मेलन जो जगह-जगह हो रहा उसका एजेंडा भी यही है। इसलिए इस संघर्ष में हम साथ हैं।

मूल निवासी विचार मंच के कोषाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह व पवन कुमार बंसल ने कहा कि देश में सबसे अधिक नुकसान पिछड़ा वर्ग के लोगों ने उठाया है। उनकी हिस्सेदारी 54 प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन कमंडल की ताकतों ने मनुवादी सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं देने की पाबंदी लगा दी। नतीजा आपके सामने है कि शासन, प्रशासन, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायापालिका और मीडिया में पिछड़ों की हिस्सेदारी आबादी के अनुपात में नगण्य है।

वहीं, राजेश दास व निर्दोष काश्यप ने कहा सामाजिक न्याय के एजेंडा को राजनीति के केन्द्र में मजबूती से स्थापित करने का मुहिम चला रहे हैं, जबकि बहुजन समाज की ही सरकार पिछले तीस साल से अधिक से बिहार की सत्ता पर काबिज है। लेकिन वो ब्राह्मणवादी, कॉरपोरेट शक्तियों के ही गिरफ्त में है। नई सरकार तमिलनाडु मॉडल को अपनाए और पिछड़ों का आरक्षण बढ़ाये।

बहुजन स्टूडेन्ट्स यूनियन, बिहार के सचिव अनुपम आशीष व उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि भारत में हम सौ में नब्बे हैं। नब्बे की जागरूकता अभियान ही हमारी ताकत है। हम ललई सिंह यादव, ईवी रामासामी नायकर, जगदेव प्रसाद, महामना रामस्वरूप वर्मा के विचारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हम सफल होंगे और समाज के साथ-साथ सत्ता परिवर्तन भी करेंगे।

कार्यक्रम में संजीव कुमार, शशिशेखर, सुधीर पासवान, विक्रम पासवान, मनोज चौरसिया, संजय दास, रणजीत मांझी, संतोष दास, दिलीप पासवान सहित सैंकड़ों लोगों की उपस्थिति रही।

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