डायन कुप्रथा सती प्रथा की तरह खतरनाक, आदिवासी सेंगल अभियान ने दिया धरना

दुमका : डायन कुप्रथा उत्तर भारत के बड़े हिस्से में व्याप्त है। यह कुप्रथा मध्ययुगीन सती प्रथा की तरह ही खतरनाक है। आदिवासी सेंगल अभियान ने शुक्रवार, 12 नवंबर को इसके खिलाफ दुमका में एक दिवसीय धरना दिया और लोगों से अपील की कि वे इससे बचें और इसके खिलाफ खड़े हों।

दुमका : डायन कुप्रथा उत्तर भारत के बड़े हिस्से में व्याप्त है। यह कुप्रथा मध्ययुगीन सती प्रथा की तरह ही खतरनाक है। आदिवासी सेंगल अभियान ने शुक्रवार, 12 नवंबर को इसके खिलाफ दुमका में एक दिवसीय धरना दिया और लोगों से अपील की कि वे इससे बचें और इसके खिलाफ खड़े हों।

आदिवासी सेंगल अभियान ने एक बयान जारी कर डायन कुप्रथा के उन्मूलन की अपील की है। इसमें कहा गया है कि सती प्रथा की ही तरह यह कुप्रथा झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम आदि प्रांतों के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में व्याप्त है। अभियान इसके उन्मूलन के लिए पिछले दो दशकों से इन क्षेत्रों में प्रयासरत है। बयान में इसे विकृत मानसिकता का परिणाम बताया गया है।

डायन हिंसा में हत्या व प्रताड़ना आदि की घटनाएं घटित होती हैं, जिसके तहत दुष्कर्म करना, निर्वस्त्र कर गांव में घुमाना, पैला पिलाना आदि जैसी घटनाएं शामिल हैं, इसके खिलाफ लोग चुप रहते हैं, जो उचित नहीं है। ऐसे कृत्यों पर समाज के अगुवा वर्ग भी चुप रहते हैं।

आदिवासी सेंगल अभियान ने कहा है कि मानवीय जीवन की गरिमा, न्याय एवं शांति के रास्ते पर आतंकवादी हमले की तरह एक चुनौती है। यह ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ, बदले की भावना, जमीन-संपत्ति विवाद में भी घटित होती है। डायन कुप्रथा के खिलाफ पुलिस से सहयोग की अपील करते हुए आदिवासी सेंगल सभा ने कहा कि इसके खिलाफ सिविल सोसाइटी, सभी राजनीतिक-सामाजिक संगठनों, बार एसोसिएशन, मीडिया, बुद्धिजीवियों एवं प्रबद्ध जनों को एकजुट होना व उनका सहयोग अपेक्षित है। आदिवासी सेंगल अभियान ने इस आशय का ज्ञापन दुमका के एसपी को सौंपा है।

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