झारखंड की छुटनी महतो को डायन कुप्रथा के खिलाफ संघर्ष के लिए मिला पद्मश्री

झारखंड की छुटनी महतो को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। छुटनी महतो को यह सम्मान उनके द्वारा डायन कुप्रथा के लिए किए गए संघर्ष और जागरूकता के लिए दिया गया। छुटनी महतो खुद इस कुप्रथा की शिकार रही ंहैं और उन्हें घर से बाहर कर दिया गया था व उनकी देह पर मैला फेका गया था जिसका अंश उनके मुंह के अंदर भी चला गया था।

राष्ट्रपति से पदमश्री सम्मान प्राप्त करतीं छुटनी महतो।

नयी दिल्ली : झारखंड की छुटनी महतो को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। छुटनी महतो को यह सम्मान उनके द्वारा डायन कुप्रथा के लिए किए गए संघर्ष और जागरूकता के लिए दिया गया। छुटनी महतो खुद इस कुप्रथा की शिकार रही ंहैं और उन्हें घर से बाहर कर दिया गया था व उनकी देह पर मैला फेका गया था जिसका अंश उनके मुंह के अंदर भी चला गया था।

राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया है कि श्रीमती छुटनी महतो को यह सम्मान सामाजिक कार्य के लिए दिया गया है। वह झारखंड के सरायकेला जिले की एक कार्यकर्ता हैं और उन्होंने अपने दम पर 125 महिलाओं को डायन कुप्रथा का शिकार होने से बचाया है। उनके बहादुरी पूर्ण कार्याें के लिए उन्हें शेरनी कहा जाता है।

छुटनी महतो की शादी सरायकेला खरसांवा जिले गम्हरिया थाने के महतांड गांव में 12 साल की उम्र में हुई थी। उन्हें घर से निकाल दिया गया था। बाद में मायके चली गयीं और वहां से ही इस कुप्रथा के खिलाफ संघर्ष किया।

झारखंड देश का सबसे अधिक डायन कुप्रथा से प्रभावित जिला है, जहां आए दिन इस तरह की घटनाएं घटित होती रहती हैं।

झारखण्ड के राज्यपाल रमेश बैस ने कहा है, “श्रीमती छुटनी देवी को पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत होने हेतु हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। महिला उत्पीड़न एवं डायन प्रताड़ना जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनका संघर्ष सभी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है”।

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