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दुमका का रेशमा गांव : सात-आठ महीने पहले लगी सोलर टंकी, पर अबतक नहीं मिला एक बूंद पानी

कुआं में लगा खराब पड़ा चापानल।

सड़क मार्ग से कटे होने के कारण लोगों को होती है काफी दिक्कत
बुनियादी सुविधाओं से वंचित है रानेश्वर प्रखंड का यह गांव

दुमका : दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड के तालडंगाल पंचायत के अंतर्गत पहाड़ों के बीच बसा आदिवासी बाहुल्य गांव रेशमा मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। देश की आजादी के 74 साल बाद और झारखण्ड राज्य बनने के 21 साल बाद भी यहां मूलभूत सुविधाएं मयस्सर नहीं हैं। यह गांव सड़क मार्ग से कटा हुआ है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ जाती है।

इस गांव में कुल तीन टोला हैं, जो दूर-दूर स्थित हैं :

बुचह टोला : इस टोला में करीब 35 घर हैं। इस टोला में कोई भी चापानल नहीं है। इस टोला के ग्रामीण गर्मी में डोभा और झरना से अपना प्यास बुझाते हैं और वर्षा में खेत में बने कृषि कुआं से अपनी प्यास बुझाते हैं, जो करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस टोला के ग्रामीणों का कहना है कि पानी की बहुत समस्या है। शादी-विवाह और मेहमानों के घर आने पर पानी की बहुत दिक्कत हो जाता है, बहुत मुश्किल से जिन्दगी गुजरती है। इस टोला में पीसीसी ढलाई भी नहीं है।

गांव में सड़क का ऐसा है हाल।

मांझी टोला : मांझी टोला में लगभग 40 घर हैं। इस टोला में दो चापानल है और एक सोलर टंकी है, जिसमें से एक चापानल, जो पोरमे किस्कू के घर के सामने स्थित है करीब एक महीने से ख़राब है। दूसरा जाहेर थान के पास का चापानल ठीक है, लेकिन इस में लगी सोलर टंकी ख़राब है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 6-7 महीने पहले सोलर टंकी तो जरूर लगा दिया गया है लेकिन एक बार भी सोलर टंकी से पानी नहीं निकला। ठेकेदार और विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर चले गये हैं। ग्रामीणों से जब चापानल मरम्मत के बारे में पूछा गया कि चापानल का मरम्मत कैसे कराते हैं तो उस पर ग्रामीणों का कहना है कि हम सभी ग्रामीण चंदा कर चापानल का मरम्मत कराते हैं। मुखिया से सोलर टंकी और चापानल मरम्मत के लिए शिकायत की है, लेकिन कोई मरम्मत नही करवाता है। इस टोला में पीसीसी ढलाई भी आधा-अधूरा है।

टंकी से जलापूर्ति की मांग करते लोग।

 
स्कूल टोला : स्कूल टोला में करीब 35 घर हैं। इस टोला में तीन चापानल है और एक सोलर टंकी। सभी चालू स्थिति में है। इस टोला में भी कुल्ही में पीसीसी ढलाई आधा-अधूरा है।

ग्रामीणों का कहना है कि झारखण्ड राज्य बने इतने वर्ष हो जाने के बाद भी हमारे गांव में मूलभूत सुविधा उपलब्ध नही है। गांव में आधा-अधूरा पीसीसी ढलाई होने के कारण आने-जाने व चलने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। गांव सड़क मार्ग से कटा हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की कि गांव को दिगलपहाड़ी और घुड़टोला गांव के सड़क मार्ग से जोड़ा जाय, जो दोनों तरफ करीब तीन-तीन किलोमीटर के दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से जुड़ा नहीं होने के कारण गांव में विकास कार्य भी काफी धीमा है। सड़क मार्ग से नहीं जुड़ा होने के कारण सरकारी एम्बुलेंस गांव तक नहीं आता है। वर्षा में मरीजों व गर्भवती को हॉस्पिटल ले जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। करीब तीन किलोमीटर दूर तक मरीज को ढोकर ले जाना पड़ता है तब जाकर एम्बुलेंस के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र भेजना संभव हो पाता है। सड़क मार्ग नही। होने के कारण आम लोगो को भी आने जाने व बाजार करने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। छात्र-छात्राओं को स्कूल, कॉलेज जाने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है पानी, सड़क और पीसीसी ढलाई को लेकर मुखिया और विधायक से कई वर्षो से गुहार लगाते आये हैं लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। इसको लेकर ग्रामीण काफी नाराज और आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द ही समस्या का सामाधान नहीं किया जाता है तो आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार के लिय मजबूर होंगे। इस मौके में सिरिल मुर्मू, सुनिराम मुर्मू, बर्नवास मुर्मू, धरमेन मुर्मू, चुंडा मुर्मू, दरोगा सोरेन, दीबू किस्कू, जयराम किस्कूर्, इश्वर मुर्मू, तबित मरांडी, मोतीलाल मरांडी, तोप्लो हांसदा आदि उपस्थित थे।

इस बीच दुमका के विधायक बसंत सोरेन ने मामले को संज्ञान में लिया है और उपायुक्त को कार्रवाई के लिए कहा है।

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