Samridh Jharkhand
Fastly Emerging News Portal from Jharkhand

शशिकला को तमिलनाडु की राजनीति में हल्के में नहीं लिया जा सकता, भीड़ व सुरक्षा यह बता रही हैं…

0

- Sponsored -

- sponsored -

चेन्नई/बेंगलुरु : इस साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहे तमिलनाडु में दिवंगत नेता जे जयललिता की सहेली व सहयोगी वीके शशिकला को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। भ्रष्टाचार के आरोपों में बेंगलुरु के जेल में बंद शशिकला आज बेंगलुरु से चेन्नई पहुंचेंगी। इससे पहले सड़कों पर उनके हजारों समर्थक उनकी आगवानी में उतर आए हैं।

पुलिस व खुफिया एजेंसियों को भी उनके जेल से बाहर आने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया का अहसास है। इस वजह से भारी सुरक्षा कर्नाटक-तमिनलाडु सीमा सहित अन्य जगहों पर तैनात कर दी गयी है। शशिकला के समर्थक उन्हें जयललिता का वास्तविक राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते हैं। जबकि के पलानीसामी और ओ पन्नीरसेल्वम ने शशिकला के खतरे को समझते हुए संगठन और सरकार पर अपना कब्जा कायम रखने के लिए एक साझा सहमति विकसित की है और अनुपातिक तौर पर सत्ता व संगठन पर दोनों खेमों ने प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया है। हालांकि इन दोनों नेताओं में वैसा तीव्र जन आकर्षण नहीं है, जो राजनीति और विशेषकर दक्षिण भारतीय राजनीति के लिए आवश्यक है।


शशिकला की आगवानी के लिए भारी संख्या में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। एएनआइ फोटो।

शशिकला अन्नाद्रमुक या तमिलनाडु के लिए दिवंगत जयललिता का विकल्प तो नहीं हो सकती हैं, लेकिन एक हद तक वे जन भावना के उभार की क्षमता को लेकर उस कमी को पूरी करती दिखती हैं। शशिकला व उनके भतीजे को पार्टी से निकाल दिया गया है, लेकिन उनकी राजनीतिक चुनौतियां पलानीसामी व पन्नीरसेल्वम के लिए खत्म नहीं हुई हैं।

शशिकला से अन्नाद्रमुक के मौजूदा नेतृत्व को कितना खतरा?

शशिकला की रिहाई 27 जनवरी को जेल से हुई थी। उनके रिहाई की कार्रवाई के बीच उनके करीबी रिश्तेदार पर कार्रवाइयां भी तेज हुईं। उनके रिश्तेदार व संपत्ति मामले में सह दोषी वीएन सुधाकरण और जे इलावरसी की संपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट के 2017 के एक आदेश के तहत जब्त कर लिया गया। शशिकला के साथ सुधाकरण और इलावरसी को भी सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में चार साल के जेल की सजा सुनायी थी।

- Sponsored -

अन्नाद्रमुक शशिकला के वर्चस्व को लेकर सचेत है और पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की ओर से यह कहा जाता रहा है कि उन्हें वापस पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा और उनकी रिहाई का कोई असर नहीं पड़ेगा। पार्टी का भाजपा से गठबंधन है जिसकी राज्य में प्रभावी मौजूदगी नहीं है, हालांकि केंद्र में उसकी सरकार होने की वजह से उसे सहयोग मिलता है। अन्नाद्रमुक ने के पलानीस्वामी को अगला सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

शशिकला राजनीति में हस्तक्षेप करेंगी, यह लगभग तय है। ऐसे में उनके पास दो विकल्प बचता है – या तो वह अन्नाद्रमुक पर या उसके एक बड़े धड़े पर कब्जा कर लें या फिर एक नयी पार्टी बनाएं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ सकते हैं।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored

- Sponsored -