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नीतीश-प्रशांत किशोर की मुलाकात के बाद आगे की राजनीति पर टिकी निगाहें, यूपी के नतीजे सबसे अहम फैक्टर

नयी दिल्ली : दो दिन पहले मीडिया में बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के शीर्ष नेता नीतीश कुमार और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलाकात की खबर आयी। इस मुलाकात के बाद एक दूसरी खबर मीडिया में आयी है कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति चुनाव में तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार हो सकते हैं और उनके राजनैतिक कद के मद्देनजर कांग्रेस भी समर्थन को मजबूर हो सकती है और वे विपक्ष के साझा उम्मीदवार बन सकते हैं। मीडिया रिपोर्टाें में कहा जा रहा है कि नीतीश को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने की कवायद की अगुवाई प्रशांत किशोर कर रहे हैं।

उधर, नीतीश कुमार ने पीके से मुलाकात के बाद कहा है कि उनके प्रशांत से पुराने रिश्ते हैं। प्रशांत किशोर न सिर्फ चुनाव प्रबंधक बल्कि पिछले कुछ सालों में भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे से अहम समीकरण व रणनीतियां तय करने वाले शख्स के रूप में सामने आए हैं। जगनमोहन, स्टालिन, ममता बनर्जी जैसे कई नेताओं को सत्ता दिलाने में उनका अहम योगदान माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से प्रशांत किशोर ने पूर्व में मुलाकात की थी और केसीआर भी शीर्ष पद के लिए नीतीश के नाम पर सहमत हैं। जातिगत जनगणना सहित कई मुद्दों पर नीतीश की पार्टी के भाजपा से मतभेद हैं। उनकी पार्टी सत्ता संचालन में भाजपा के अधिक विधायकों के दबाव भी महसूस कर रही है। हालांकि नीतीश अपने बड़े राजनैतिक कद की वजह से कई बिंदुओं पर वीटो करने की क्षमता रखते हैं।

नीतीश कुमार एक गंभीर राजनेता है और किसी बात पर सहमत होने या कोई कदम उठाने से पहले वे उसके विभिन्न पक्षों पर सोचेंगे, लेकिन यह तय है कि तीसरे मोर्चे या नीतीश की अगली रणनीति पर सबसे अधिक असर यूपी चुनाव परिणाम का पड़ेगा। अगर यूपी में भाजपा हारती है तो विपक्षी दलों या भाजपा के वैसे सहयोगी दल जो उसकी बढी ताकत का दबाव महसूस कर रहे हैं, उन्हें राहत होगी।

अगर यूपी में गैर भाजपा सरकार बनती है तो भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत गैर भाजपा गठजोड़ तैयार हो सकता है और इसका एक अहम पड़ाव नीतीश को शीर्ष पद के लिए उम्मीदवार के रूप में पेश करना हो सकता है।