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कर्नाटक : मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा के बीच येदियुरप्पा ने सबको जारी की चेतावनी, मठ-महंत का सहारा

बुधवार को धर्मगुरुओं के साथ बैठक करते बीएस येदियुरप्पा।

बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री व भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने खुद को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा के बाद एक ओर अपनी शक्ति के प्रदर्शन की शुरुआत की है तो दूसरी ओर वे चेतावनी भी जारी कर रहे हैं। बुधवार को येदियुरप्पा ने विभिन्न मठों के महंतों के साथ बैठक की थी। कर्नाटक के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में इन मठों एवं महंतों का काफी प्रभाव व सम्मान है।

वहीं, इसके बाद उन्होंने एक ट्वीट कर भाजपा जनों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी कर दी है। येदियुरप्पा ने अपने ट्वीट में कहा है, मुझे भाजपा का वफादार कार्यकर्ता होने का सौभाग्य मिला है। नैतिकता और व्यवहार के उच्चतम मानकों के साथ पार्टी की सेवा करना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है। मैं सभी से पार्टी की नैतिकता के अनुसार कार्य करने और विरोध-अनुशासनहीनता में शामिल नहीं होने का आग्रह करता हूं जो पार्टी के लिए अपमानजनक और शर्मनाक है।


समझा जाता है कि यह ट्वीट कर येदियुरप्पा ने राज्य में खुद को पद से हटाने के लिए गोलबंदी शुरू करने वालों को पहले ही चेतावनी दे दी है। साथ ही इसे केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी उनका संदेश माना जा रहा है। सामान्यतः नेतृत्व परिवर्तन के लिए स्थानीय स्तर पर असहमति व असंतोष के स्वर की केंद्रीय नेतृत्व को जरूरत होती है।

कर्नाटक के बेककिना काल मठ सीर मल्लिकार्जुन मुरुगराजेंद्र ने कहा है कि बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए। यह हमारा मत है। न केवल लिंगायत और वीरशैव ने बल्कि सभी समुदायों ने उन्हें समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि हम अगले चुनाव में राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

मालूम हो कि भाजपा की जीत में बहुसंख्यक लिंगायतों और धर्मगुरुओं का समर्थन अहम माना जाता रहा है। खुद येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं और इनके बीच उनकी अच्छी पकड़ है।

कल मुख्यमंत्री ने इस समुदाय के प्रमुख संतों के साथ एक बैठक की थी, जिसे उनका शक्ति प्रदर्शन माना गया था।

येदियुरप्पा के बदले तेवरों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाता है या नहीं।

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