बाबूलाल मरांडी : मजबूत विपक्ष सत्ता को निरंकुश होने से रोकने के लिए जरूरी

बाबूलाल मरांडी : मजबूत विपक्ष सत्ता को निरंकुश होने से रोकने के लिए जरूरी

मनोज मौर्या

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का मजबूत होना ही लोकतंत्र की खूबसूरती है और लोकतंत्र के लिए आवश्यक है

झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा संकट यदि कुछ है तो निःसंदेह विपक्ष का कमजोर होना ही है. झारखण्ड के गठन के उपरांत या यूं कहें कि प्रथम मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल के उपरांत विगत 15 वर्षों तक झारखंड की राजनीति में कोई मजबूत प्रतिपक्ष का नेता नहीं बन पाया. यदि विपक्ष कमजोर हो या प्रतिपक्ष का नेता कमजोर हो तो सत्तारूढ़ दल निरंकुश हो जाता है. हिटलरशाही चरम पर होती है जिसका सीधा प्रभाव राज्य के विकास पर पड़ता है.

झारखंड राज्य के राजनीतिक इतिहास पर एक नज़र डाली जाये और साथ में गठित दो अन्य राज्यों छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से तुलना की जाय तो पूरब पश्चिम जैसा अंतर दिखता है जबकि गठन के समय दो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा समृद्ध और खनिज संपदा से संपन्न राज्य झारखंड ही प्रतीत होता था. वैसे तो राज्य की मौजूदा स्थिति के कई कारण हैं लेकिन उनमें से मुख्य तीन कारण हैं :

राज्य में सरकार की अस्थिरता
विपक्ष का कमजोर होना तथा
मजबूत प्रतिपक्ष के नेता का ना होना.

समय का चक्र चलता रहा. राज्य की जनता ने गठन के 14 वर्षों तक अस्थिर सरकार देखी, राष्ट्रपति शासन देखा, निर्दलीय मुख्यमंत्री देखे और अंततः 14 वर्षों के बाद पहली बार स्थिर सरकार के पांच वर्षों का कार्यकाल भी देखा. अधिकांशतः यहाँ गठबंधन की सरकारें रहीं. जब सत्तापक्ष मजबूत रहा तो विपक्ष कमजोर रहा. जब सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष भी मजबूत स्थिति में रहा तो प्रतिपक्ष का नेता कमजोर रहा, जो राज्य के विकास में सबसे बड़ा बाधक साबित हुआ. फलतः राज्य में विकास के दावे जरूर किए गए लेकिन विकास का पैमाना परिभाषित नहीं हो पाया.

बहरहाल, आज 24 फरवरी 2020 को राज्य की जनता आशा भरी निगाहों से राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी की ओर देख रही है. उन्हें उम्मीद है कि अपने 28 महीने के कार्यकाल में राज्य के विकास की जो लकीर उन्होंने खींची थी, अब वो सपना साकार होने का वक़्त आ गया है, क्योंकि विगत 17 फरवरी को पुनः भाजपा की सदस्यता लेने के उपरांत आज 24 फरवरी को भाजपा के शीर्ष नेताओं और जीते हुए 25 विधायकों ने श्री मरांडी को प्रतिपक्ष का नेता चुना है. जाहिर है, आगामी विधानसभा चुनाव तक विधानसभा में मौजूदा सरकार के हर गलत निर्णय पर जनता की आवाज़ बनने लिए एक अनुभवी, कर्तव्यनिष्ठ, दूरदर्शी और प्रखर नेता उपस्थित रहेंगे. जिसका सीधा सीधा फायदा राज्य की जनता को मिलेगा और राज्य विकास की ओर अग्रसर होगा. अब देखना यह है कि मौजूदा सरकार इस भीष्म पितामह की दूरदर्शिता और अनुभव से कितना सीख पाती है और भविष्य में विपक्ष को इसका कितना लाभ मिल पाता है. यह भविष्य के गर्भ में है. परंतु जहाँ से मैं देख पा रहा हूँ, राज्य की राजनीतिक परिदृश्य बदलता हुआ दिख रहा है.

लेखक के ये निजी विचार हैं.

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Edited By: Samridh Jharkhand

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