लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ को मिला पद्मश्री, जानिए इनकी कहानी
जिंदगी के एक वाकये ने एक साइकिल मिस्त्री के जीवन का उद्देश्य बदल दिया. हुआ ऐसा कि अयोध्या के रहने वाले मोहम्मद शरीफ के बेटे की सुल्तानपुर में हत्या हो गयी. हत्या के एक महीने के बाद भी उन्हें यह न पता चला कि उनके बेटे के साथ क्या हुआ. बाद में जानकारी हुई कि हत्या हो गयी है. इस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्होंने ठान लिया कि वे अब हर लावारिस शव का अंतिम संस्कार करेंगे. उन्होंने अबतक साढे पांच हजार शवों का अंतिम संस्कार किया है. जिसमें तीन हजार हिंदू व ढाई हजार मुसलिम शामिल हैं.
Ayodhya:Mohd Sharif, who has been named for Padma Shri for cremating unclaimed bodies, says,”27 yrs ago, my son was murdered in Sultanpur&I got to know about it a month later.After that,I took this task in my hand.I’ve cremated 3000 bodies of Hindus&2500 bodies of Muslims so far” pic.twitter.com/2iw5Cp3gWd— ANI UP (@ANINewsUP) January 26, 2020
मोहम्मद शरीफ अब पद्मश्री हैं. कल जब भारत सरकार की ओर से पद्म पुरस्कारों का एलान किया गया तो पद्मश्री पाने वालों में मोहम्मद शरीफ का भी नाम था. उन्हें समाज सेवा क्षेत्र से पद्मश्री दिया गया है. उनका कहना है कि इस दुनिया में न कोई हिंदू है और न ही मुसलमान सभी इंसान हैं.
उन्हें सुलतानपुर कोतवाली के इंसपेक्टर ने बेटे के माारे जाने की सूचना दी. वह रेलवे ट्रैक पर मृत मिला था. कपड़े से पहचान हो पायी. 80 साल के हो चुके मोहम्मद शरीफ का मानना है कि इस दुनिया में किसी को लावारिस नहीं होना चाहिए. वे स्वयं ंिहंदू शवों को परंपरा के अनुसार मुखाग्नि देते हैं और मसुलिम शवों को इस्लामी परंपरा के अनुसार दफनाते हैं. लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए उन्हें नगर निगम से बेहद मामूली आर्थिक मदद मिलती है. उनके चार पुत्र थे जिनमें दो की मौत हो चुकी है. वे आज भी कच्चे के मकान में साधारण जिंदगी जीते हैं.
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