रांची बनेगा खगोलीय शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र: मुख्यमंत्री
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रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को चिरौंदी के साइंस सेंटर में 26 करोड़ की लागत से बने नवनिर्मित वारामिहिर तारामंडल का उद्घाटन कर राजधानी सहित पूरे झारखंडवासियों को एक सौगात दी। इस दौरान सीएम ने झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का ऑनलाइन उदघाटन सहित साइंस सेंटर परिसर में ही इनोवेशन हब का शिलान्यास करने के बाद कहा कि तारामंडल खगोलीय विद्या के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड के छात्र- छात्राओं और शोधकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। इन्हें खगोलीय विद्या के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
सीएम ने कहा कि नई- नई तकनीकों को अगर हम बदलते समय के साथ नहीं अपनाएंगे तो चीजें समय के साथ आगे नहीं बढ़ पायेंगी। विज्ञान के विकास के बिना राज्य या देश तरक्की नहीं कर सकता। शिक्षा, कारोबार, उद्योग या फिर सरकारी मशीनरी इन सभी क्षेत्रों के विकास में विज्ञान और नई तकनीकों का महत्वपूर्ण स्थान है। कहा कि विज्ञान और तकनीक से ही झारखंड का और विकास होगा। झारखंड से भी खगोलविद और वैज्ञानिक अपना परचम लहराएं, इसी सोच के साथ तारामंडल का निर्माण किया गया है। 15 अक्टूबर से इसे आम आदमी के लिए खोल दिया जाएगा।
इसकी शुरुआत एस्ट्रोनॉमी शो से होगी। इसमें 27 मिनट की फिल्म दिखायी जाएगी। इसके अलावा यहां खगोल शास्त्र की प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। यह हाइब्रिड श्रेणी का तारा मंडल है। इसके डोम (गोलंबर) का डायमीटर 15 मीटर है। इसमें डायरनल मोशन की भी व्यवस्था है, जिससे समूचे ब्रह्मांड को देखा जा सकता है। यहां पांच डिजिटल प्रोजेक्टर के साथ ऑप्टिकल सिस्टम की मदद से तारे दिखाये जाएंगे। इसका प्रोजेक्टर लेजर फॉसफेरम तकनीक का है, जो सबसे आधुनिक तकनीक है। देश में इससे बेहतर टेक्नोलॉजी केवल कोलकाता में है।
साइंस सेंटर में बने इस तारामंडल में दुनिया भर की खगोलीय घटनाएं दिखाई जाएंगी। यहां एक एस्ट्रोनॉमी गैलरी बनाई गई है। इसमें एस्ट्रोनॉमी से जुड़ी चीजें रखी गई हैं। विज्ञान पंसद लोग यहां होल, बिग बैंग थ्योरी आदि का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यहां 8500 तारे एक समय में स्क्रीन पर दिखाए जा सकते हैं। इसके लिए हायर एएनएसआइ लूमन कैपेसिटी प्रोजेक्टर लगाया गया है। यहां खगोल विज्ञान क्लब भी है। इनोवेशन हब के निर्माण की कुल लागत का आधा भाग केंद्र सरकार वहन कर रही है। इस पर कुल एक करोड़ 80 लाख रुपये का खर्च होगा। इसे बनाने का उद्देश्य बच्चों व युवाओं में विज्ञान को लोकप्रिय और रोचक बनाना है।
नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम को इनोवेशन हब बनाने का काम दिया गया है। सीएम ने कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड का पहला अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित तारामंडल है। इस तारामंडल का नाम बड़े चिंतन के साथ वराहमिहिर रखा गया है। वराहमिहिर महान दार्शनिक खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे। वराहमिहिर गुप्त काल के छठवीं सदी में उज्जैन में जन्म लिए थे। सीएम ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के शुभारंभ होने से राज्य के तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को काफी लाभ पहुंचेगा। इस क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अब बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, उन्हें यहीं से डिग्रियां प्राप्त होंगी। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव, सांसद संजय सेठ, कांके विधायक जीतू चरण राम, मेयर आशा लकड़ा, उच्च शिक्षा सचिव शैलेश कुमार सिंह, तकनीकी निदेशक डॉ अरूण कुमार, सेंटर के कार्यपालक निदेशक जीएसपी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक व स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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Edited By: Samridh Jharkhand
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