अफगानिस्तान में तालिबान पर भारत की वेट एंड वॉच की नीति, कश्मीर में बढाई जाएगी सुरक्षा चौकसी

भारत की अफगानिस्तान में आए बदलाव पर अन्य लोकतांत्रिक देशों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। भारत तालिबान के हाथों में आए अमेरिकी अथियार व सैन्य हथियारों को लेकर भी गंभीर है…

PM Modi 7 HM Amit Shah. Photo Credit - https://www.outlookindia.com/

नयी दिल्ली : अफगानिस्तान में तालिबान राज स्थापित होने पर भारत ने अबतक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कूटनीति व सामरिक नीति का मामला होने के कारण सरकार की चुप्पी पर विपक्ष ने सीधा हमला तो नहीं किया लेकिन संकेतों में सवाल जरूर उठाया। अब इस पर सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों की ओर से रुख स्पष्ट किया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआइ ने सरकार के शीर्ष सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि भारत की इस मामले पर नीति वेट एंड वाच की है, यानी वह स्थितियों में हो रहे बदलाव को देख रहा है और फिर उस पर प्रतिक्रिया देगा।

सूत्रों ने कहा है कि भारत इंतजार करेगा और यह देखेगा कि अफगानिस्तान में तालिबान का सरकार गठन कितना समावेशी होता है और तालिबान कैसा आचरण करते हैं। भारत की नजर इस पर भी होगी कि दुनिया के दूसरे लोकतांत्रिक देश तालिबान की हुकूमत पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

सरकार के सूत्रों ने कहा है कि हमारी सुरक्षा चिंताएं हैं। अफगानिस्तान इस्लामिक आतंकवाद का पहला केंद्र बन सकता है, जिसके पास एक राष्ट्र है। उनकी पहुंच उन सभी हथियारों तक है जो अमेरिका ने आपूर्ति की है और तीन लाख से अधिक अफगान राष्ट्रीय सेना के जवानों के हथियार भी हैं।

लश्कर-ए-तैयबा और लश्कर-ए-झांगवी जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों की अफगानिस्तान में कुछ उपस्थिति है। उन्होंने तालिबान के साथ काबुल के कुछ गांवों और हिस्सों में चेक पोस्ट भी बनाया है।

सूत्र के अनुसार, तालिबान ने कश्मीर पर अपना रुख स्पष्ट किया है और वह इसे एक द्विपक्षीय आंतरिक मुद्दा मानता है, उनका ध्यान कश्मीर पर नहीं है।

सूत्र ने कहा है कि कश्मीर में सुरक्षा चौकसी बढ़ाई जाएगी लेकिन चीजें नियंत्रण में हैं और अफगानिस्तान में पाकिस्तान स्थित समूहों के पास स्थिति का उपयोग करने की क्षमता बहुत कम है।
अतीत में, अफगानिस्तान में पाकिस्तानी संगठनों के शिविर थे। इसलिए हमें जम्मू.कश्मीर में सावधान रहना होगा।
पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई तालिबान को प्रभावित करने की कोशिश करेगी। हालाँकिए इसका बहुत सीमित प्रभाव होगा क्योंकि तालिबान ने ताकत की स्थिति में सत्ता हासिल कर ली है। केवल कमजोर तालिबान को प्रभावित कर सकता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में इसकी संभावना कम ही दिखती है।

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