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कोयला के भरपूर दोहन व विद्युत उत्पादन में वृद्धि के बावजूद बिजली संकट कायम, उपाय क्या है?

मई 2022 के पहले सप्ताह में रांची रेलवे स्टेशन पर कोयला लदा एक रेल रेक। फोटो : राहुल सिंह।

रांची : कोयला मंत्रालय ने बुधवार (आठ जून 2022) को नए आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि मई 2022 में पिछले साल की इस अवधि की तुलना में देश में कोयला उत्पादन और बिजली उत्पादन दोनों बढा है। कोयला मंत्रालय ने यह दावा ऐसे हालात के बीच किया है, जब प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य झारखंड सहित देश के कई हिस्से बिजली संकट से जूझ रहे हैं।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, मई 2022 में कोयला उत्पादन 71.30 मिलियन टन हो गया है। कैप्टिव व अन्य खदानों से उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई है। वहीं, मई में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 26.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कोयला मंत्रालय ने अपने आधिकारिक प्रेस वक्तव्य में कहा है कि भारत में कोयला उत्पादन मई 2021 की तुलना में मई 2022 में 38.88 प्रतिशत बढकर 71.30 मिलियन टन हो गया। कोयला मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, तुलनात्मक अवधि में कोल इंडिया लिमिटेड का उत्पादन 30.04 प्रतिशत, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड का उत्पादन 11.01 प्रतिशत और कैप्टिव एवं अन्य खानों का उत्पादन 83.33 प्रतिशत बढा है।

बीते महीने देश में बिजली संकट के बाद कोयला डिस्पैच को लेकर आलोचनाओं को झेलने के बाद कोयला मंत्रालय ने कहा है कि कोयला डिस्पैच में 16.05 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। मई 2022 के दौरान सीआइएल, एससीसीएल और कैप्टिव व अन्य ने क्रमशः 61.24 मिलियन टन, 6.13 मिलियन टन, 10.46 मिलियन टन डिस्पैच करके क्रमशः 11.34 प्रतिशत, 5.65 प्रतिशत, 67.06 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है।

देश के शीर्ष 37 कोयला उत्पादक खदानों में 23 का 100 प्रतिशत से अधिक और 10 खदानों का का उत्पादन 80 से 100 प्रतिशत के बीच रहा है।

इस साल अप्रैल की तुलना में मई में कम कोयला बिजली उत्पादन

इसी तरह कोयला आधारित बिजली उत्पादन में मई 2021 की तुलना में मई 2022 में 26.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। मई 2022 में कुल विद्युत उत्पादन अप्रैल 2021 की तुनला में 23.32 प्रतिशत और अप्रैल 2022 में 2.63 प्रतिशत अधिक रहा है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन अप्रैल 2022 के 102529 मिलियन यूनिट की तुलना में मई 2022 में 98609 मिलियन यूनिट रहा है और इसमें 3.82 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। हालांकि जल एवं पवन ऊर्जा के कारण अप्रैल 2022 के 1, 36, 465 मिलियन यूनिट से बढ कर मई 2022 में 1, 40, 059 मिलियन यूनिट हो गया।

बिजली का संकट

झारखंड जैसा प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य पिछले कुछ महीनों से घोर बिजली संकट झेल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 2300 मेगावाट बिजली की मांग है, जबकि आपूर्ति 1700 मेगावाट की जा रही है। राज्य के कई जिलों में 12 घंटे से कम बिजली आपूर्ति हो रही है। इससे लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गर्मियों के महीने से त्योहारी मौसम तक बिजली की खपत व मांग बढ जाती है। झारखंड की यह स्थिति तब है जब यहां साल 2021 में 123.428 मिलिनय टन कोयला का उत्पादन हुआ। साल 2001 से 2021 के बीच झारखंड का औसत कोयला उत्पादन 108.949 मिलियन टन रहा है।

पतरातू में एनटीपीसी का निर्माणाधीन संयंत्र।

 

भारत में ऊर्जा उत्पादन की मौजूदा स्थिति और झारखंड का संदर्भ

31 मार्च 2022 तक के आंकड़े के अनुसार, भारत में सेंट्रल सेक्टर की ऊर्जा उत्पादन में 24.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, स्टेट सेक्टर की 26.2 प्रतिशत और प्राइवेट सेक्टर की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जीवाष्म ऊर्जा की की कुल ऊर्जा उत्पादन में 59.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कुल आंकड़े में कोयला ऊर्जा का हिस्सा 51.1 प्रतिशत, लिग्नाइट का 1.7 प्रतिशत व गैस का 6.3 प्रतिशत है।

हाइड्रो सहित नवीनीकृत क्षेत्र का योगदान 39.2 प्रतिशत है। कुल उत्पादन में हाइड्रो का 11.7, पवन, सौर एवं अन्य का 27.5 प्रतिशत, पवन का 10.1, सोलर का 13.5 प्रतिशत योगदान है।

नवनीकृत ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति संतुष्टिजनक मानी जा सकती है, लेकिन देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य इस क्षेत्र में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं जिसे उनकी उर्जा संकट के कई वजहों में एक प्रमुख वजह माना जा सकता है। झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा की कुल क्षमता मात्र 97.4 मेगावाट है।

दुमका जिले के आमगाछी गांव में सोलर लाइट में पढते आदिवासी बच्चे। फोटो क्रेडिट : सच्चिदानंद सोरेन।

 

झारखंड जैसे प्रांत की तो इसमें नगण्य उपलब्धि है। वहीं, अगले कुछ सालों में झारखंड में कई नए कोयला संयंत्र ऑपरेशनल होने वाले हैं। इसमें एनटीपीसी पतरातू और एनटीपीसी टंडवा प्रमुख है, जिस पर केंद्र सरकार का पूरा जोर है और हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी प्रगति की समीक्षा की है। वहीं, गोड्डा स्थित अडानी पॉवर प्लांट से बांग्लादेश बिजली आपूर्ति की जाएगी।

दरअसल, प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य होने की वजह से मानसिक व व्यावहारिक रूप से राज्य को जीवाष्म ईंधन पर अधिक निर्भर बनाए रखा, जिससे वह लगातार कोयला उत्पादन और ऊर्जा उत्पादन में आगे बढने के बावजूद अपनी निजी जरूरत को पूरा करने में विफल होता दिख रहा है।

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