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लोक कथाकार फणीश्वर नाथ की जन्म शताब्दी पर परिचर्चा, अंगिका की सोंधी सुंगध के विराट रूप का केंद्र रेणु

रेणु जी के जन्म शताब्दी समारोह में उपस्थित अतिथि।

इस अवसर पर साहित्यक चर्चा एवं कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया

भागलपुर (Bhagalpur, Bihar) : भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड के विक्रमपुर गांव में महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म शताब्दी कार्यक्रम मनाया गया। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक सोशलिस्ट नेता गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु की कलम में गांव की अभिव्यक्ति की स्याही है, जिसे सिर्फ पन्नों पर ही नहीं वरण लोगों के दिलोदिमाग पर उकेरने का काम उन्होंने किया। अंगिका भाषा की इस सोंधी सुगंध के विराट रूप का केंद्र फणीश्वर नाथ रेणु हैं। रेणु जी ने गाँव के नौजवानों को हिरामन कहा जिसके अंदर असीम संवेदन है और अपनी संवेदना को प्रकट करने के लिए सिर्फ शब्दों का ही नहीं बल्कि अपने अभिनय से बात को कह देने की कला है। पात्र कहीं नाराज़गी व्यक्त करते हैं तो वो अपने साथी बैल को ही मन की बात कहकर संतुष्ट हो जाता है।

रेणु ने अंगिका भाषा अर्थात मातृ भाषा का सम्मान बहुत ही नम्र और मज़बूती के साथ साहित्य भंडार तक लाने का कार्य किया है। हिंदी साहित्य जगत के ये एक मुस्तकिल है।

फणीश्वर नाथ रेणु को अपना इष्ट मानने वाले या यूं कहें रेणु को जीने वाले अंगिका के मूर्धन्य कवि भगवान प्रलय ने कहा रेणु जी ने जो कार्य किए वह अनमोल है लेकिन उसके आगे रेणु जी जहां जाना चाहते थे जो कार्य उनका अधूरा रह गया है उसे हम आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

डाॅ अंजनी विशू ने कहा रेणु एक क्रांतिकारी लेखक थे। उन्होंने अन्याय-उत्पीड़न के खिलाफ पद्मश्री सम्मान लौटा कर एक युगांतकारी फ़ैसला लिया था। वे भले सोशलिस्ट पार्टी से विधायक चुनाव में चुनाव हारे लेकिन आजीवन संघर्षरत रहे। चाहे भारत का मामला हो या नेपाल का। रेणु जी आज हम सब के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रलय जी द्वारा रचित महुआ घटवारिन काव्य ग्रंथ की कुछ पंक्तियों को सुनाया गया – कंङना रसैं-रसैंए झूनूर-झूनूर बोलै सहित दर्जनों कविता पाठ किया गया।

विजेता मुद्गलपुरी ने कई एक गंभीर हास्य कविता को सुनाकर दर्शकों से वाह-वाही ली… ई हो उमर छरपना काका बेलगट तीन महला सेऽ फायन गेलैऽ

साथी सुरेश सूर्य ने रेणु जी को याद करते हुए कहा आज सामने उभर रहा यह सबसे जटील सवाल है।

गाँधी-गौतम की धरती क्यों आज लहू से लाल है।

ऊर्दू के शायर इकराम हुसैन साद ने भाईचारे का पैगाम देते हुए तथा सत्ता की साजिश पर निशाना साधते हुए अपनी रचना से दर्शकों से तालियाँ बटोरी।

कार्यक्रम की शुरुआत फीता कटकर किया गया। मंच की अध्यक्षता समाजसेवी मनोज लाल ने किया जबकि संचालन कवि अरुण अंजाना ने किया।

इस मौके पर मनोज माही, कुमार गौरव, विनय दर्शन, मनोज कुमार, हर्षत कुमार, सोनू कुमार व धनंजय सुमन ने अपनी अंगिका और हिंदी कविता से दर्शकों को बांधे रखा।

अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी मनोज लाल व संयोजक गौतम कुमार प्रीतम ने सभी कविगण व कार्यकर्ता साथी को अंगवसत्र व कलम देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में बिपिन कुमार, राहुल कुमार 1, राहुल कुमार 2, अशोक मंडल, बीरेन्द्र महतो, राजा कुमार, शंकर महतो, गोलू, अभिषेक, दीपक, ब्रजेश, पुलिस महतो, सहित ग्रामीण का सहयोग रहा।

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