साहित्य

बेगूसराय : बिहार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और औद्योगिक रूप से धनी भूमि बेगूसराय ने अपनी उर्वर भूमि पर एक से एक विभूति को पैदा किया है, जो बीते और वर्तमान काल खंड में ही नहीं, भविष्य में भी सदैव याद किए जाते रहेंगे। वैसे ही विभूतियों में एक हैं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर। 23 सितंबर

वर्ष 2017 में मंच की शुरूआत झारखंड के कलाकारों ने व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से की। वर्ष 2020 में ऑफिसियल फेसबुक पेज पर लाइव गीत- संगीत की प्रस्तुति का अयोजन किया गया।

टेंस सिम्पलीफाइड आयुषी खरे की चौथी पुस्तक है। आयुषी इसके पहले हमसफर और ख्वाहिश शीर्षक से दो किताबें लिख चुकी हैं। इन किताबों को पाठकों द्वारा काफी सराहा गया है।

जब कभी मैं गली, नुक्कड़, चौराहे, बाजार, ऑटो, बस, ट्रेन या किसी सरकारी व प्राइवेट ऑफिस में जाती हूँ तो हर जगह एक चीज कॉमन है जो है हर जगह कुछ लोगों के मुँह से माँ की गाली देना। ज़रा सी गुस्सा आयी नहीं कि सामने वाले को माँ की गाली सुना देना। आपने ध्यान

रांची : इस साल के साहित्य आकादमी पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को की गयी। संताली भाषा के लिए संताली कवि व साहित्यकार रूपचंद हांसदा को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है, जबकि मैथिली के लिए साहित्यकार कमलकांत झा को। वहीं, हिंदी भाषा के लिए यह सम्मान कवियित्री अनामिका को देने का ऐलान

इस अवसर पर साहित्यक चर्चा एवं कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया भागलपुर (Bhagalpur, Bihar) : भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड के विक्रमपुर गांव में महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म शताब्दी कार्यक्रम मनाया गया। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक सोशलिस्ट नेता गौतम कुमार प्रीतम ने कहा कि फणीश्वरनाथ रेणु की कलम में गांव

कहानियां प्रेरणादायक होनी चाहिए, ये मेरा मानना है। अभी-अभी मैं लौटी हूँ। एक ऐसी कहानी संग्रह है, जिसमें लेखक अजय कुमार ने अपने गाँव यूँ कहूँ कि गाँव की जीवनशैली को बख़ूबी दिखाने की कोशिश की है। कहानियों में स्त्री के कई रूप को महसूस कराने की कोशिश की गई है। ग्रामीण परिवेश को बड़े

 इंदौर : देश में हिंदी भाषा में ऐसे कई साहित्यकार हुए जिनकी वंशावली नहीं है अथवा उनके तर्पण श्राद्ध संबंधित सामाजिक उत्तरदायित्व का कोई निर्वहन नहीं करता। हिन्दी के दिवंगत साहित्यकारों के सभी उत्तरकर्मों के निर्वहन के लिए भारत में हिन्दी भाषा प्रचार के लिए कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने बीड़ा उठाया है। गुरुवार को

धूप की चादर ओढ़ें छाँव तलाश करते हो जुगनू मन के पंखो पर करार तलाशा करते हो।   जो कही नहीं वो बात की चाल तलाशा करते हो आँखों के गलियारों में हाल तलाशा करते हो।   कई मुद्द्ते बीत गईं सवालों की तलाश में राहगीर थक हार अब जवाब तलाशा करते हो।   है

लोक कलाकार भिखारी ठाकुर जन मानस से जुड़े एक ऐसे कलाकार थे, जो अपने नाटकों एवं गीतों के माध्यम से सामाज में फैले तमाम बुराईयों को सामने लाने का काम किया। समाज में जितनी भी प्रकार की विकृति थी चाहे वो धार्मिक विकृति हो, सामाजिक विकृति हो या फिर आर्थिक विषमता हो, उन सभी विषयों