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बिहार: सरकारी नौकरी के बजाय स्वरोजगार की तरफ आगे बढ़ रहे युवा

आरा: भारत में रोजगार और बेरोजगारी को लेकर चल रही राजनीति को दूर तक पीछा छोड़ते हुए युवाओं ने स्वरोजगार का रास्ता अपनाकर अब देश की प्रगति और विकास का स्वयं को पथ प्रदर्शक साबित करना शुरू कर दिया है। बिहार और देश में निजी और सरकारी नौकरियों की तरफ जाने और निजी कंपनियों,प्रतिष्ठानों एवं राज्य व केंद्र सरकार पर नौकरी के लिए आश्रित होने की उम्मीद के बजाय युवाओं ने स्वरोजगार को आर्थिक उन्नति का आधार बना कर देश और प्रदेश की सरकारों को भी रोजगार को लेकर बढ़ते दबाव को कम करना शुरू कर दिया है।

वैश्वीक महामारी कोरोना ने तो निजी क्षेत्रों में नौकरी करने वालों को उनके भविष्य का आईना तक दिखा दिया है। कोरोना काल में महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, बेंगलोर जैसे देश के कई औद्योगिक नगरों महानगरों से अपने श्रमिको और कर्मियों के लिए दरवाजे बंद कर देने और जान बचाने को ले मची भगदड़ के बीच लोगों को अपने गांव अपनी मिट्टी पर ही सबसे अधिक भरोसा मिला।

परदेश से लौटने वालो में बड़ी संख्या में श्रमिक विभिन्न क्षेत्रों में हासिल की गई दक्षता का उपयोग अपने गांव और शहर में अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और स्वावलंबन के लिए करने लगे हैं। भोजपुर जिले के आरा शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में युवा वर्ग स्वरोजगार के सहारे अपने जीवन स्तर को सुधारने और सशक्त बनाने में जुटा हुआ है। छोटे व्यवसाय से लेकर चलती फिरती दुकानों से आम आदमी और ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनाने में अब युवाओं को सफलता मिल रही है।

आरा सदर प्रखंड के धोबहां निवासी सकारात्मक सोच से उत्साहित जितेंद्र कुमार इनदिनों आरा शहर के किसी भी मुहल्ले में अचानक मिल जाएंगे। वे तिनपहिया ठेले पर ही बेसन और सत्तू पीसने और ग्राहकों तक उपलब्ध कराने में जुटे हैं। उनकी चलती फिरती दुकान से ग्राहक काफी प्रभावित हैं। ग्राहक अपनी आंखों के सामने चने की गुणवत्ता देख बेसन और सत्तू की मशीन में पिसाई करा कर खरीद कर घर ले जा रहे हैं। युवाओ को स्वरोजगार से संपन्नता का संदेश देने वाले जितेंद्र बताते हैं कि ठेले पर लगी बेसन और सत्तू पीसने वाला मशीन प्रति घण्टे करीब 30 किलोग्राम बेसन या सत्तू पीस कर तैयार कर देता है। ग्राहक चने की गुणवत्ता सामने से देख लेते हैं और अपने सामने जरूरत के अनुसार बेसन या सत्तू की पिसाई कराकर खरीददारी कर रहे हैं।

बेरोजगारी का आरोप लगाने और रोजगार के लिए देश और प्रदेश की सरकारों पर दबाव बनाने एवं सरकार पर आरोप लगा कर युवाओं को गुमराह करने वालों को देश की प्रगति, उन्नति और विकास में बाधक तत्व करार देते हुए जितेंद्र बताते हैं कि युवाओं को स्वरोजगार के क्षेत्र में खुला आसमान मौजूद है जहां आगे आकर वे लंबी और उंच्ची उड़ान उड़ सकते हैं।

सरकारी नौकरी की चाहत रखने वालों को भी वे संदेश देते हुए कहते हैं कि देश का युवा वर्ग सरकारी नौकरियों के लिए प्रयास जरूर करे और एक समय सीमा के भीतर सरकारी नौकरी प्राप्त करने में सफलता नहीं मिलती तो युवा वर्ग को समय गंवाए बिना स्वरोजगार की तरफ आगे बढ़ जाना चाहिए। स्वरोजगार एक ऐसा रोजगार है जहां न सिर्फ वे खुद को आत्मनिर्भर बनाते हैं बल्कि कई और लोगो को भी रोजगार प्रदान करते हैं।

जितेंद्र कुमार की तरह ही अब कई युवा सरकारी नौकरी के बजाय स्वयं के व्यवसाय को लेकर आगे बढ़ रहे हैं जहां काम करके और पैसे कमाकर वे स्वयं को तो संतुष्ट पा ही रहे हैं साथ ही समाज के युवाओ को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने का संदेश दे रहे हैं।

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