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झारखंड में कालाजार उन्मूलन अभियान जारी, पाकुड़ ने कोरोना संकट के बीच लोगों को किया जागरूक, सभी चिह्नत गांवों में छिड़काव

झारखंड में कालाजार उन्मूलन अभियान जारी, पाकुड़ ने कोरोना संकट के बीच लोगों को किया जागरूक, सभी चिह्नत गांवों में छिड़काव

पाकुड़: झारखंड कालाजार से निबटने के लिए अपने चार अलग- अलग इकाइयों के सहयोग व समन्वय से बेहतर काम कर रहा है। झारखंड में कालाजार उन्मूलन के लिए हेल्थ वर्कर के अलावा जेएसएलपीएस-झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, आइसीडीएस – इंटिग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम, एसबीएम – स्वच्छ भारत मिशन की भूमिका सुनिश्चित की गयी है।

जेएसएलपीएस के गांव- गांव में गठित एसएचजी की सदस्य, आइसीडीएस के तहत आने वाले आंगनबाडी की सेविका- सहायिका व एसबीएम के वर्कर इसको लेकर गांव में जागरूकता अभियान चलाने, लोग को समझाने, सर्वे करने में योगदान देते हैं।

कालाजार बीमारी देश के चार राज्यों बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल के 54 जिलों को प्रभावित करती है। झारखंड में संताल परगना के छह जिलों में चार जिले दुमका, गोड्डा, साहेबगंज एवं पाकुड़ में इसे संक्रमित मरीज पाए जाते हैं। झारखंड में कालाजार और पोस्ट कालाजार जिसे डर्मल लेशमनीयसिस कहते हैं, के लक्षण पाए जाते हैं। डर्मल लेशमनीयसिस कालाजार की वजह से होने वाला चर्मरोग है। यह बीमारी बालू मक्खी के काटने से होता है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

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पाकुड़ जिला के हिरणपुर प्रखंड के शिवनार गांव की सहिया बेबी बताती हैं कि समन्यव के साथ काम करने के परिणामस्वरूप इस साल अबतक उनके गांव में एक भी कालाजार का केस सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि पहले कालाजार के दो केस मिले थे, जिसमें एक 35 वर्षीय पुरुष व एक 13 वर्षीय लड़का इससे पीड़ित थे, लेकिन दोनों अब स्वस्थ हो चुके हैं। बेबी के अनुसार, 2020 से उनके गांव में कालाजार को कोई नया मामला सामने नहीं आया है। सहिया बेबी कहतीं है कि स्वास्थ्य विभाग व अन्य संस्था का सहयोग मिल रहा है, जिससे हम लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं.

बेबी कहती हैं कि कालाजार से निबटने के लिए गांव में बैठक की गयी और उसमें इस पर चर्चा की गयी कि कैसे कालाजार को खत्म करना है। वे कहती हैं लोगों को घरों के आसपास साफ- सफाई रखने व सूखापन रखने के लिए प्रेरित किया गया। उनके अनुसार, हर छह महीने पर गांव में एएसपी पाउडर का छिड़काव होता है, जो कालाजार मख्खी को पनपने से रोकने में कारगर है। वे कहती हैं कि उकने गांव में करीब 1034 लोगों की आबादी है, जिसमें संताल और मुसलिम समाज के लोग हैं। हर 15-15 दिन पर एमपीडब्ल्यू के साथ घर-घर जाकर सर्वे किया जाता है।

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हिरणपुर के बीडीओ उमेश कुमार श्वांसी ने बताया कि इस साल उनके प्रखंड क्षेत्र के 26 गांवों में छिड़काव कराया गया। यह कार्यक्रम 15 से 29 अगस्त तक चला। इस कार्य में शिक्षा विभाग ने भी सहयोग किया। जागरूकता अभियान चलाया गया। हर सप्ताह स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सर्वे कराया जाता है और कोई व्यक्ति बीमार मिलता है तो उसकी कुछ सप्ताह या महीने भर निगरानी की जाती है, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उसकी जांच भी करायी जाती है और कालाजार का वैक्सिनेशन किया जाता है। वे कहते हैं कि हमने इस बार काफी सघन ट्रेसिंग अभियान चलाया है और अगस्त तक 14 केस हमारे प्रखंड क्षेत्र में मिले हैं। उनके अनुसार, चिह्नित गांव के प्रत्येक घर में छिड़काव कराया गया, इस दौरान 27 घर बंद मिले, जिसके स्वामी बाहर चले गए थे।

पाकुड़ जिले में कालाजार को लेकर सोशल मोबलाइजर के रूप में काम कर रहे मोहम्मद अनीश कहते हैं, इस साल जब हम कालाजार से निबटने की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान कोरोना की दूसरी लहर भी फैली, जिसको लेकर फैली भ्रांति की वजह से कुछ गांव में लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन एवं स्थानीय जागरूक लोगों की मदद से हमने ग्रामीणो को समझाया और उनका विश्वास हासिल किया, जिसके बाद सभी चिह्नित गांव में छिड़काव किया गया। वे कहते हैं कि इसके लिए सभी छह प्रखंडों का अलग- अलग वाट्सएप ग्रुप बनाकर उसमें कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम का माइक्रो प्लान शेयर करना शुरू किया, जिससे हमें लक्ष्य को हासिल करने में बहुत कामयाबी मिली।

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