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फाइलेरिया और हाथीपांव रोग गंभीर जरूर लेकिन नियमित दवाओं के सेवन से रोग होगा दूर: डॉ अरुण

रांची न्यूज़ फाइलेरिया स्वास्थ्य विभाग, सचिव डॉ अरुण कुमार सिंह, हाथीपांव रोग,

रांची: फाइलेरिया रोग सार्वजनिक स्वास्थ्य की घातक बीमारी बनती जा रही है। पूरी दुनिया के साथ- साथ इस रोग से झारखंड भी अछूता नहीं है। महज रूप से लेता है। इस गम्भीर विषय पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ अरुण कुमार सिंह से किये गए बातचीत के अंश इस प्रकार प्रस्तुत हैं।

 

सवाल: फ़ाइलेरिया रोग क्या है और झारखण्ड में इसकी क्या स्थिति है ?

जवाब: फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। पूरी दुनिया के फ़ाइलेरिया के मरीजों में लगभग 45 प्रतिशत फ़ाइलेरिया रोगी भारत में हैं। राज्य में वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार लिम्फेडिमा (अंगों में सूजन)  के लगभग 43768 मरीज़ हैं और  हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के 46220 मरीज़ हैं । जिनमे से अबतक 3885 मरीजों का सफल आपरेशन किया जा चुका है।

सवाल: यह रोग हो जाने पर पीड़ित व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

जवाब: वैसे तो यह रोग किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है मगर बच्चों को इससे अधिक ख़तरा है। यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे; हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों की सूजन) व काइलुरिया (दूधिया सफेद पेशाब) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।

सवाल: राज्य सरकार इसके उन्मूलन के लिए क्या प्रयास कर रही है ?

जवाब: झारखण्ड सरकार, लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) के उन्मूलन हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस रोग से बचाव के लिए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाये जाते हैं। इसी क्रम में, आगामी 16 सितम्बर से 30 सितम्बर 2022  तक  झारखण्ड के 8 फाइलेरिया प्रभावित जिलों (लोहरदगा, हज़रीबाग, गिरिडीह, गढवा, पू० सिंहभूम, प० सिंहभूम, खूंटी और रांची ) में कोरोना के दिशा- निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी, मास्क और हाथों की साफ- सफाई का अनुपालन करते हुए फाइलेरिया रोग उन्मूलन के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। राज्य स्तर से जिला स्तर तक विभिन्न विभागों एवं स्वयं सेवी संस्थाओ के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है, ताकि कार्यक्रम में किसी भी संसाधन की कमी न होने पाए। एमडीए गतिविधियों का संचालन कोविड-19  के मानकों  का पालन करते हुए किया जायेगा, जिसमें हाथ की स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी) शामिल हैं । इस अभियान में सभी वर्गों के लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए 2 दवाएं डी.ई.सी. और अल्बंडाज़ोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर- घर जाकर, अपने सामने मुफ्त खिलाई जायेगी।  किसी भी स्थिति में, दवा का वितरण नहीं किया जायेगा। इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है।  2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति यों को ये दवाएं नहीं खिलाई जाती है।

सवाल: फ़ाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सफल किर्यन्वयन में किस तरह की चुनौतियाँ हैं ?

जवाब: देखिये इस कार्यक्रम में सबसे बड़ी चुनौती है, लाभार्थियों का इस रोग की गंभीरता को समझते हुए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान फ़ाइलेरिया रोधी दवाओं का प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के सामने सेवन करना। हम सब प्रशासनिक स्तर और सामजिक स्तर पर सकारात्मक प्रयास कर रहें हैं कि कार्यक्रम के दौरान 100% लाभार्थियों द्वारा फ़ाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन  किया जाना सुनिश्चित हों।

सवाल: सर, फ़ाइलेरिया के बारे में तो काफी बातचीत हो गयी, लेकिन कालाजार रोग क्या है और राज्य के कौन- कौन से  जिले कालाजार रोग से प्रभावित हैं, साथ ही सरकार द्वारा लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय किये जा रहें हैं ?

जवाब: देखिये, कालाजार का संक्रमण बालू मक्खी यानि सैंडफ्लाई द्वारा होता है। यह बालू मक्खी कालाजार रोग के परजीवी लीशमेनिया डोनोवानी को एक रोगी व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति तक फैलाती है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा से बुखार हो, उसकी तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो और उपचार से ठीक न हो, तो उसे कालाजार हो सकता है। कालाजार को फैलाने वाली बालू मक्खी के खत्म करने के लिए सरकार द्वारा कीटनाशी दवा का छिड़काव (आ ई.आर.एस.) करवाया जाता है। झारखण्ड सरकार कालाजार रोग के उन्मूलन के लिए भी प्रतिबद्ध है और इसी क्रम में कालाजार से प्रभावित 4 जिलों (गोड्डा, दुमका, साहेबगंज और पाकुड़) में समय- समय पर कीटनाशी दवा का छिड़काव कराया जाता है। दिनांक 1 अगस्त, 2022 से 45 दिनों तक उपरोक्त जिलों में कीटनाशी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। इस बारे में एक विशेष बात आपको बताना चाहूँगा कि अभी कुछ दिन पहले कोलंबिया देश में कालाजार से प्रभावित अन्य देशों के राजनीतिज्ञों, उच्चस्तरीय अधिकारियों एवं कार्यक्रम अधिकारियों की कालाजार रोग के उन्मूलन पर विस्तृत चर्चा हुई। जिसमें हमने स्वास्थ्य विभाग द्वारा विगत कई वर्षों के निरंतर प्रयासों से प्राप्त उपलब्धियों पर जानकारी साझा की और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सभी देशों के प्रभागियों को यह बताया कि राज्य में विषम परिस्थितियों के बावजूद रोग नियंत्रण मे सफल हुए जिसमे समय- समय पर छिड़काव, निगरानी एवं प्रत्येक स्तर पर कार्यक्रम का अनुश्रवण शामिल है। वहाँ से आने के पश्चात हमने उच्च प्रथिमकता वाले सभी गाँवों के लिए एक स्पेशल कार्ययोजना बनाई गई है और हम सुनिश्चित करेंगे की जिला एवं ब्लॉक अधिकारियों के माध्यम से इसका सफल क्रियान्वयन किया जाए ।

सवाल: हमारे श्रोताओं को आपकी और से कोई सन्देश ?

जवाब: फ़ाइलेरिया उन्मूलन के तहत सभी जिलों में वर्ष में एक बार चरणबद्ध तरीके से मास ड्रुग एडमिनिस्ट्रेशनका कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मैं आपके समाचार पत्र के माध्यम से यह संदेश देना चाहता हूँ कि ये फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी  ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। और अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में  फाइलेरिया के कीटाणु मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद कीटाणुओं के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं। इसके साथ ही कालाजार रोग के उन्मूलन के लिए जिस समय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम कीटनाशी दवा का छिड़काव करने आये, लोग उन्हें पूरा सहयोग करें।

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