कोल बेड मिथेन निष्कर्षण की चार परियोजनाओं की Feasibility Report तैयार, इस साल जारी हो सकता है टेंडर

Jharia coalfield, Jharkhand. Photo Credit - Wikimedia Commons.

कोल इंडिया के क्लीन एनर्जी प्रोग्राम के तहत सीएमपीडीआइ कोल बेड मिथेन के उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं पर कर रहा है काम

राहुल सिंह

रांची : एनर्जी ट्रांजिशन की जरूरतों के मद्देनजर सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम कोल इंडिया कोल बेड मिथेन गैस के उपयोग की योजना को आगे बढाने की तैयारी में है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो कोल इंडिया की चार सहायक कंपनियों कोल बेड मिथेन गैस की उपयोगिता की दिशा में इस साल कदम बढा सकती हैं। कोल इंडिया की चार सहायक कंपनियां इसीएल (Eastern Coalfield Limited), सीसीएल (Central Coalfields Limited), डब्ल्यूसीएल (Western Coalfields Limited), एसइसीएल (South Eastern Coalfields Limited) के तहत कोल बेड मिथेन गैस के उपयोग के लिए इस साल एक-एक प्रोजेक्ट का टेंडर निकाला जा सकता है। कोल इंडिया की सहायक कंपनी और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI) ने इसके लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट (व्यावहार्यता रिपोर्ट) भी तैयार की है। इससे पहले कोल इंडिया की ही सहायक कंपनी बीसीसीएल (Bharat Coking Coal limited) ने पिछले साल इस दिशा में पहला कदम बढाया है।

सीएमपीडीआइ के जीएम – अंडरग्राउंड माइनिंग डिवीजन एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रभाग के प्रभारी चिरंजीव पात्रा के अनुसार, कोल इंडिया के तहत कोयला खदानों से जुड़े दो गैस प्रभाग हैं – 1. कोल बेड मिथेन, 2. कोल गैसिफिकेशन।

पात्रा के अनुसार, कोलबेड मिथेन गैस की वजह से भूमिगत खदानों में विस्फोट होता है। ऐसे में अगर ड्रील करके उसे पहले ही निकाल लेंगे तो दो फायदे होंगे – एक तो माइनिंग करने पर गैस नहीं निकलेगा और दूसरा उसकी बोटलिंग करके उसका उपयोग किया जा सकता है।

मालूम हो कि मिथेन एक ग्रीन हाउस गैस है और सामान्यतः यह वातावरण में मिल जाता है। यह कार्बन डाइ ऑक्साइड से 25 गुणा अधिक वैश्विक तापमान बढाने की क्षमता रखता है

इनर्जी ट्रांजिशन और सीओपी26 में भारत के संकल्प से जुड़े सवाल पर चिंरजीव पात्रा ने कहा, “कोयला माइनिंग से प्रदूषण नहीं होता है, बल्कि उसके उपयोग से प्रदूषण होता है, जैसे थर्मल पॉवर प्लांट आदि से”। पात्रा कहते हैं, “हमें आने वाली चुनौतियों का अहसास है, इसलिए हम उपयोगिता के स्वरूप में बदलाव करेंगे और इस रणनीति पर काम कर रहे हैं”। पात्रा के दावों की झलक इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की कोल 2021 रिपोर्ट में दिखती है।

भारत की कोल गैसिफिकेशन में 55 बिलियन डॉलर निवेश की नीति

17 दिसंबर 2021 को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी द्वारा जारी कोल 2021 रिपोर्ट में कोयला या कोयला आधारित उद्योग को लेकर विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का लेखा-जोखा है। इसमें कहा गया है कि भारत की 2030 तक कोल गैसीकरण या गैसिफिकेशन एवं द्रवीकरण में में 55 बिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश की नीति है। भारत की पहली कोल गैसिफिकेशन आधारित उर्वरक कारखाना तालचर में 2023 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिसकी कोयला क्षमता 3.3 मिलियन टन होगी और यहां 2200 टन अमोनिया एवं 3850 टन यूरिया का प्रतिदिन उत्पादन होगा। साथ ही सरकार मेथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था के विकास पर भी काम कर रही है और उच्च राख वाले कोयला पर आधारित पांच मेथेनॉल प्लांट स्थापित करने की योजना है।

2021 में झरिया कोयला खनन क्षेत्र के लिए प्रभा एनर्जी से बीसीसीएल का हुआ करार

सितंबर 2021 में कोल बेड मिथेन के उपयोग और बोटलिंग को लेकर कोल इंडिया की सहायक कंपनी बीसीसीएल का प्रभा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से करार हुआ। दोनों के बीच करीब 1800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू शेयरिंग कांट्रेक्ट पर करार हुआ है।इसके तहत कंपनी को 25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र काम करने के लिए दिया गया है।

झरिया के कोल बेड मिथेन ब्लॉक – 1 में लगभग 25 बिलियन क्यूबिक मीटर के भंडार का अनुमान है और उससे 1.3 एमएमएससीएमडी (मिलियन मिट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन) गैस निकालने का लक्ष्य है। यह परियोजना तीन चरणों की है। पहला चरण करार पर हस्ताक्षर करने से दो सालों तक का है, दूसरा चरण पायलट प्रोजेक्ट तीन साल का है और तीसरे फेज में उत्पादन का लक्ष्य 30 सालों का है।

केल इंडिया के सीएमडी प्रमोद अग्रवाल ने भी पिछले साल मार्च में बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए इंटरव्यू में कहा था, “कोल इंडिया के मुख्य क्षेत्र के विस्तार से इतर विविधीकरण जिसमें मुख्य रूप से सौर बिजली उत्पादन, क्लीन कोल इनिटिएटिव के तहत कोल बेड मिथेन का विस्तार, सरफेस कोल गैसीफिकेशन, कोयले से मेथनॉल और वाशरीज शामिल हैं”।

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