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पर्यावरण

ठीक उस वक़्त, जब दुनिया भर के जलवायु नीति निर्माता, वैश्विक जलवायु और पर्यावरण की दशा और दिशा बदलने वाली IPCC वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट का उसके रिलीज़ होने से पहले अवलोकन कर रहे हैं, तब नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक नए पेपर में ऐसी नीतियों की पहचान की गई है जो वैश्विक जलवायु

दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के अवसरों पर बातचीत के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक वेबिनार का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने दक्षिण एशिया में विकराल रूप लेती वायु प्रदूषण की समस्‍या और उसके स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी पहलू की भयावहता को सामने रखा बल्कि उन कारणों को भी जाहिर किया जिनके चलते ये हालात पैदा हुए।

ताज़ा सर्वे के मुताबिक पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और आधुनिक टेक्नोलॉजी को लेकर उत्साह इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में सोचने के दो प्रमुख कारण हैं   भारत समेत पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है मगर विशेषज्ञों का मानना है कि इस सकारात्‍मक पहलू के बीच कई बुनियादी और व्‍यावहारिक

अब समय है स्वीकारने का कि जलवायु परिवर्तन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी पर दिखा रहा है असर, ग्लोबल वार्मिंग भारत में मानसून की बारिश को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ा रहा है भारत के पश्चिमी तटीय राज्यों महाराष्ट्र और गोवा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में चरम मौसम की घटनाओं का

  देश के कई प्रमुख शहर वर्ष के अधिकांश भाग के लिए न केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) बल्कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की भी निर्धारित सीमा से ऊपर रहते हैं। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और झारखंड में पार्टिकुलेट मैटर के स्तरों की गहन जाँच से पता चलता है कि यहाँ समस्या सिर्फ मौसमी नहीं

वैश्विक पवन उद्योग के प्रमुख CEOs (सीईओ) ने एकजुट होकर G20 (जी20) सदस्यों से, राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाकर और जीवाश्म ईंधन की जगह लेना के लिए पवन ऊर्जा उत्पादन में इज़ाफ़ा करने के लिए तत्काल ठोस योजना बनाकर, जलवायु संकट में नेतृत्व दिखाने की माँग की है। COP26 के लिए ग्लोबल विंड एनर्जी कोअलिशन (वैश्विक

न्यायसंगत एनर्जी ट्रांजिशन के लिए कोयला क्षेत्र से जुड़े हर व्‍यक्ति के हितों की रक्षा ज़रूरी एनर्जी ट्रांजिशन भारत जैसे जटिल सामाजिक और आर्थिक परिदृश्‍यों वाले देश की एक बड़ी ज़रूरत है लेकिन इस ट्रांजिशन का न्‍यायसंगत तरीके से करना भी उतना ही मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एनर्जी ट्रांजिशन का

बीते समय के मुकाबले अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता में खतरनाक वृद्धि हुई है। इतनी ख़तरनाक, कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि ‘वेरी सीवियर’ या बेहद गंभीर चक्रवातों की आवृति में 150% की बढ़त दर्ज की गयी है। यह दावा है पुणे के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल

Increase in incidents due to climate change, concur experts Centre for Science and Environment (CSE) and Down To Earth magazine organise webinar to understand this phenomenon, its devastating impact, and what is triggering the surge New Delhi : The number and frequency of lightning strikes is increasing globally. The proverbial bolts from the blue are

Lहाल ही में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) से कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 42 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, जिसमें प्रयागराज 16 मौतों के साथ चार्ट में सबसे ऊपर था। जयपुर के पास आमेर किले में बिजली गिरने से 11 पर्यटकों की जान चली गई। वहीँ मध्य प्रदेश ने कम से