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                <title>स्वास्थ्य - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>स्वास्थ्य RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सदर अस्पताल की व्यवस्था सुधारने को डॉ. मुकेश को मिली नई जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[साहिबगंज सदर अस्पताल की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने डॉ. मुकेश कुमार को उपाधीक्षक के प्रशासनिक कार्यों में सहयोग की जिम्मेदारी सौंपी है। डॉ. मुकेश अपने नियमित चिकित्सा कार्यों के साथ अस्पताल के विभिन्न विभागों के प्रशासनिक समन्वय में भी योगदान देंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/sahibganj/dr-mukesh-gets-new-responsibility-to-improve-the-system-of/article-24498"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/947615ca-4656-4058-8125-a4025b9ceb15_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>साहिबगंज:</strong> सदर अस्पताल की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सिविल सर्जन ने एक और डॉक्टर को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी है। सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने अस्पताल में प्रतिनियुक्त डॉ. मुकेश कुमार को उपाधीक्षक के कार्यों में सहयोग के लिए प्राधिकृत किया है।</p>
<p>जारी आदेश के अनुसार, डॉ. मुकेश कुमार अब अपने नियमित मरीज देखने के काम के साथ-साथ अस्पताल के विभिन्न विभागों के प्रशासनिक कामकाज में भी मदद करेंगे। उद्देश्य साफ है - मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा को और सुगम और व्यवस्थित करना। सिविल सर्जन ने डॉ. मुकेश को निर्देश दिया है कि वे अपने द्वारा किए जा रहे कार्यों की दैनिक रिपोर्ट उन्हें सौंपें, ताकि अस्पताल की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी जा सके।</p>
<p>डॉ. रामदेव पासवान ने बताया कि डॉ. मुकेश कुमार के लिए यह कोई नई जिम्मेदारी नहीं है। इससे पहले भी वे इसी तरह के प्रशासनिक कार्यों को सफलतापूर्वक संभाल चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से यह अहम दायित्व दिया गया है। सिविल सर्जन के इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि सदर अस्पताल में मरीजों की भीड़ और विभागीय समन्वय से जुड़ी समस्याओं में सुधार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में फिर बढ़ी कोविड-19 की चिंता, 12 नए मामले और 4 मौतें; विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[देश में कोविड-19 के कुछ नए मामलों और चार मौतों के बाद एक बार फिर सतर्कता बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई के बीच 12 लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें चार मरीजों की मौत हुई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल देश में कोरोना की नई लहर या किसी खतरनाक वेरिएंट के संकेत नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/covid-19-india--12-new-cases-4-deaths-andhra-pradesh-health-alert/article-24284"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/91ecc33e-d6ad-4d93-aa55-ba232374d34e_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>देश में कोविड-19 के कुछ नए मामलों और मौतों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बीमारी की वापसी की आशंका जताई जा रही है। आंध्र प्रदेश में 26 जून से 16 जुलाई के बीच 12 लोग कोविड-19 से संक्रमित पाए गए, जिनमें से चार मरीजों की पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों और कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के कारण मौत हो गई। इन मौतों का अनुपात लगभग 30 प्रतिशत रहा, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मरने वाले मरीजों को हाइपरटेंशन, डायबिटीज और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं थीं। शेष संक्रमितों में से तीन होम आइसोलेशन में हैं, दो अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जबकि तीन ठीक होकर घर जा चुके हैं। जुलाई के पहले पखवाड़े में देशभर में कुल 339 नए कोविड मामले दर्ज किए गए हैं, जो सतर्कता की आवश्यकता को दर्शाते हैं।</p>
<p>हालांकि, संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल देश में कोरोना की कोई नई लहर नहीं है और न ही कोई खतरनाक वेरिएंट सामने आया है। आंध्र प्रदेश के मामले स्थानीय क्लस्टर प्रतीत होते हैं, न कि देशव्यापी फैलाव। जानकारों का कहना है कि बड़ी आबादी में अब हाइब्रिड इम्यूनिटी मौजूद है, जो गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करती है। इन्फ्लूएंजा और कोविड के लक्षण मिलते-जुलते हैं, इसलिए जांच कराना महत्वपूर्ण है।</p>
<p>विशेषज्ञों ने खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से ग्रसित लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि बुखार 3 से 5 दिन से अधिक रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द हो या भ्रम की स्थिति बढ़े, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p>मास्क के उपयोग पर विशेषज्ञों का कहना है कि हर किसी को मास्क लगाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यदि किसी को बुखार, खांसी, गले में खराश या नाक बहने जैसी समस्या हो, तो दूसरों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए मास्क जरूर पहनना चाहिए। अस्पताल जाते समय या भीड़भाड़ वाली बसों, ट्रेनों और फ्लाइट्स में भी मास्क का उपयोग करना उचित है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
<p>विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं, खांसी या जुकाम होने पर मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें। यदि बच्चे बीमार हों, तो उन्हें स्कूल या खेलने के लिए न भेजें और घर में उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था बनाए रखें। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय सतर्कता और सावधानी ही इस स्थिति से निपटने का सबसे बेहतर उपाय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साहिबगंज सदर अस्पताल में बेड फुल, मरीज स्ट्रेचर और बरामदे में करा रहे इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[साहिबगंज सदर अस्पताल में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के कारण मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अस्पताल के सभी बेड भर जाने के बाद कई मरीजों का इलाज बरामदे में स्ट्रेचर पर किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में वायरल बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या में तेजी आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/sahibganj/in-sahibganj-sadar-hospital-bed-full-patients-are-undergoing-treatment/article-24282"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/aec889e9-54a5-4bce-9b23-88f886a691d7_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>साहिबगंज:</strong> बदलते मौसम की मार अब सीधे सदर अस्पताल पर पड़ रही है। बारिश-धूप के बीच मौसम बदलते ही मौसमी बीमारियों ने दस्तक दे दी और अस्पताल में मरीजों का सैलाब आ गया। नतीजा - अस्पताल के सारे बेड भरे हुए और मरीज बरामदे में स्ट्रेचर पर लेटे हुए नज़र आते हैं।    </p>
<p>गुरुवार को सदर अस्पताल की तस्वीर किसी अस्थायी कैंप जैसी दिख रही थी। वार्ड के अंदर एक भी बेड खाली नहीं था। नए आने वाले मरीजों को मजबूरी में बरामदे में ही भर्ती करना पड़ा। बांझी गांव के भागमत मुर्मू गुरुवार सुबह पेट दर्द और दस्त के साथ अस्पताल पहुंचे। बुखार और कमजोरी थी, तुरंत सलाइन लगनी थी। लेकिन वार्ड में जगह नहीं मिली। आखिरकार बरामदे में लगे स्ट्रेचर पर ही उनका इलाज शुरू हुआ।<br />       अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पिछले 7 दिनों में ओपीडी और भर्ती मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। वायरल, मौसमी बुखार, उल्टी-दस्त के केस सबसे ज्यादा आ रहे हैं। आलम ये है कि वार्ड के साथ-साथ बरामदा भी मरीजों से पट गया है। कुछ परिजन तो खुद ही बरामदे में मरीज का इलाज कराने पर अड़े दिखे।</p>
<p> चिकित्सकों का कहना है कि कभी तेज धूप, कभी बारिश और उमस की वजह से इम्यूनिटी कमजोर हो रही है। इसी कारण वायरल और पेट संबंधी बीमारियां बढ़ी हैं। चिकित्सकों ने अपील की है कि लोग उबला पानी पिएं, बासी खाना न खाएं और घर-आसपास साफ-सफाई रखें। लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचें, लापरवाही न करें।</p>
<p>वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मौसमी बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त दवाएं, सलाइन और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध हैं। सभी मरीजों को सरकारी योजना के तहत मुफ्त इलाज दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बेड और स्टाफ की व्यवस्था भी की जाएगी।<br />फिलहाल सदर अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो प्रशासन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करना जरूरी हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:01:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना खाना खाए इंसान कितने दिन तक जिंदा रह सकता है? डॉक्टर ने बताया शरीर का पूरा विज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपने कभी सोचा है कि बिना खाना खाए इंसान कितने दिन तक जीवित रह सकता है? जानिए डॉक्टर के अनुसार शरीर में होने वाले बदलाव और इससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/how-long-can-a-human-survive-without-food-doctor-explains/article-23706"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/fhf.jpg" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>हेल्थ डेस्क: </strong>यह सवाल शायद कभी न कभी आपके मन में भी आया होगा कि अगर कोई इंसान खाना खाना बंद कर दे तो वह कितने दिनों तक जीवित रह सकता है? ग्रेटर नोएडा स्थित NIIMS मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमोल रत्न के अनुसार इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह से व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की आयु, शारीरिक वजन, पहले से चली आ रही बीमारियां, शरीर में वसा की मात्रा और सबसे अहम बात यह कि उसे पानी मिल रहा है या नहीं इन सब बातों पर यह तय होता है कि वह व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है। यदि पानी की आपूर्ति बनी रहे, तो सामान्य परिस्थितियों में एक इंसान लगभग एक से दो महीने तक जीवित रह सकता है। हालांकि इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि वह पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य अवस्था में रहेगा।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>शरीर में कब और कैसे शुरू होते हैं बदलाव?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">हमारा शरीर एक बेहद चतुर और जटिल तंत्र की तरह काम करता है। जैसे ही भोजन मिलना बंद होता है, शरीर तुरंत हार नहीं मानता बल्कि अपने भीतर संग्रहित ऊर्जा को उपयोग में लाने लगता है। शुरुआती अवस्था में शरीर पहले से उपलब्ध ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। उसके बाद यकृत (लिवर) और मांसपेशियों में भंडारित ग्लाइकोजन को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाने लगता है। यह भंडार लगभग 24 घंटों के भीतर तेजी से समाप्त होने लगता है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">जब ग्लाइकोजन का स्तर गिरने लगता है, तब शरीर शरीर में जमा चर्बी (वसा) को जलाकर ऊर्जा प्राप्त करना शुरू करता है। यही कारण है कि लंबे समय तक भूखे रहने पर व्यक्ति का वजन तेज गति से घटने लगता है। जब शरीर की वसा भी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है, तो मजबूरी में शरीर मांसपेशियों को तोड़कर उनसे ऊर्जा बनाने लगता है। यही वह क्षण होता है जब शरीर अत्यंत तेजी से कमजोर होने की राह पर चल पड़ता है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>पानी न मिले तो और भी खतरनाक होती है स्थिति</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">यदि भोजन के साथ-साथ पानी भी न मिले, तो स्थिति कहीं अधिक तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में अधिकांश लोग मात्र 3 से 7 दिनों के भीतर गंभीर रूप से अस्वस्थ हो सकते हैं। गर्म मौसम, अत्यधिक पसीना, बुखार या पहले से मौजूद कोई बीमारी इस समयसीमा को और भी कम कर सकती है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>पहले 24 घंटों में क्या महसूस होता है?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">डॉ. बताते हैं कि भोजन न मिलने के पहले 24 घंटों में व्यक्ति को तीव्र भूख का अनुभव होता है। इसके साथ ही चिड़चिड़ापन, शारीरिक थकान, सिरदर्द और सामान्य कमजोरी के लक्षण उभरने लगते हैं। रक्त में शर्करा का स्तर गिरने के कारण कुछ लोगों को चक्कर भी आ सकते हैं। यदि पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में हो, तो शरीर धीरे-धीरे इस नई परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने की कोशिश करता है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>दूसरे से तीसरे दिन क्या होता है?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">दूसरे और तीसरे दिन तक शरीर वसा को ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में उपयोग में लाने लगता है। कुछ लोगों में भूख की तीव्रता थोड़ी कम हो सकती है, परंतु शारीरिक कमजोरी बढ़ती जाती है। इस अवस्था में सांस से एक अलग प्रकार की गंध आने लगती है, जिसका कारण शरीर में कीटोन्स (Ketones) का निर्माण होना है। यही प्रक्रिया लंबे उपवास या कीटो डाइट के दौरान भी देखी जाती है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>एक सप्ताह के बाद शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">एक सप्ताह से अधिक समय तक भोजन न मिलने पर शरीर में विटामिन, खनिज और प्रोटीन की गंभीर कमी उत्पन्न होने लगती है। वजन में तेज गिरावट, मांसपेशियों का कमजोर होना और दैनिक कार्य करने में असमर्थता जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">इस अवस्था में शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं। हृदय की मांसपेशियां क्षीण होने लगती हैं, जिसके फलस्वरूप धड़कन अनियमित या धीमी हो सकती है। रक्तचाप में गिरावट आती है और बार-बार चक्कर आने की समस्या होने लगती है। इसके अलावा गुर्दे और यकृत की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। शरीर का तापमान गिरने लगता है और व्यक्ति को लगातार ठंड का अनुभव होता रहता है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>हार्मोनल बदलाव भी होते हैं गंभीर</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">लंबे समय तक भूखे रहने पर हार्मोन्स पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। महिलाओं में मासिक धर्म बाधित हो सकता है, जबकि पुरुष और महिला दोनों में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल असंतुलन देखने को मिल सकते हैं।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>जब जान का खतरा बन जाती है भुखमरी</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">स्थिति तब अत्यंत खतरनाक हो जाती है जब शरीर के पास ऊर्जा के लिए उपयोग योग्य न तो वसा बचती है और न ही मांसपेशियां। इस अवस्था में हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े और गुर्दे जैसे अत्यावश्यक अंग सुचारु रूप से कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं। व्यक्ति अत्यधिक दुर्बल हो जाता है, चलना-फिरना कठिन हो जाता है और बेहोशी तक की नौबत आ सकती है। यदि समय पर उचित उपचार और पोषण नहीं दिया गया तो अंग विफलता, गंभीर संक्रमण या हृदय गति रुकने जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>लंबे समय बाद खाना खिलाने में भी बरतनी होती है सावधानी</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">यह जानना भी बेहद जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति कई दिनों तक भूखा रहा हो, तो उसे एकदम से अधिक मात्रा में भोजन नहीं देना चाहिए। ऐसा करने पर शरीर में "रिफीडिंग सिंड्रोम" (Refeeding Syndrome) नामक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स में अचानक और तेज बदलाव होते हैं, जिससे हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण चिकित्सकों की निगरानी में धीरे-धीरे और संतुलित आहार देकर ऐसे व्यक्ति को सामान्य स्थिति में लाया जाता है।</p>
<hr />
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या लंबे उपवास से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/health/how-long-can-a-human-survive-without-food-doctor-explains/article-23706</link>
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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 15:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंक फूड और खराब लाइफस्टाइल बढ़ा रहे कैंसर का खतरा, समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव: डॉ. जितेंद्र रोहिला</title>
                                    <description><![CDATA[शिमला में फोर्टिस कैंसर संस्थान, मोहाली के सीनियर कंसल्टेंट जीआई सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. जितेंद्र रोहिला ने कहा कि जंक फूड, खराब जीवनशैली, मोटापा और स्वास्थ्य जांच में लापरवाही कैंसर के बढ़ते मामलों की प्रमुख वजह हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/cancer-risk-junk-food-lifestyle-dr-jitendra-rohila-fortis-mohali/article-23308"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/3dd4f60b-90c9-4518-9a9e-00acc9f8a5cf_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>शिमला:</strong> बदलती जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज करना कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। फोर्टिस कैंसर संस्थान, मोहाली के सीनियर कंसल्टेंट जीआई सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. जितेंद्र रोहिला ने लोगों से समय रहते जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है।</p><p class="isSelectedEnd">डॉ. रोहिला ने कहा कि कैंसर का सबसे प्रभावी उपचार उसकी शुरुआती पहचान में छिपा है। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण, विशेष रूप से स्टेज-1 में चल जाए, तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुका होता है।</p><p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि हाल ही में फोर्टिस अस्पताल मोहाली में 63 वर्षीय महिला का सफल उपचार किया गया, जो स्यूडोमायक्सोमा पेरिटोनी (पीएमपी) नामक दुर्लभ कैंसर से पीड़ित थीं। यह बीमारी बेहद दुर्लभ मानी जाती है और इसके मामले प्रति दस लाख आबादी में केवल एक से दो ही सामने आते हैं।</p><p class="isSelectedEnd">महिला लंबे समय से पेट में सूजन, भूख कम लगने और मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसी समस्याओं से परेशान थीं। जांच में पता चला कि कैंसर अपेंडिक्स से शुरू होकर पेट की अंदरूनी परत पेरिटोनियम तक फैल चुका था। पीईटी-सीटी स्कैन में पेट के विभिन्न हिस्सों में ट्यूमर जमाव मिलने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने साइटोरिडक्टिव सर्जरी (सीआरएस) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (हाइपेक) प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया।</p><p class="isSelectedEnd">करीब नौ घंटे तक चली जटिल सर्जरी के दौरान कैंसरग्रस्त ऊतकों और ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया गया। इसके बाद लगभग 90 मिनट तक पेट के भीतर गर्म कीमोथेरेपी दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार सीआरएस-हाइपेक तकनीक को इस प्रकार के कैंसर के लिए दुनिया भर में सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है।</p><p class="isSelectedEnd">सफल उपचार के बाद मरीज को दस दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।</p><p>डॉ. रोहिला ने कहा कि शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और समय पर जांच ही कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/health/cancer-risk-junk-food-lifestyle-dr-jitendra-rohila-fortis-mohali/article-23308</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:13:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएचसी जमुआ में दवाओं का भरपूर स्टॉक, मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में निरंतर प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[गिरिडीह जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जमुआ में आवश्यक जीवनरक्षक एवं नियमित उपयोग की दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/chc-jamua-medicine-stock-available-better-health-services-giridih/article-22791"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/593c8983-d52a-404f-944c-16a8ab9aab96_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>गिरिडीह:</strong> उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देशानुसार जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), जमुआ में आवश्यक जीवनरक्षक एवं नियमित उपयोग की दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<h5><strong>सीएचसी जमुआ में उपलब्ध दवाओं एवं उनके वर्तमान स्टॉक की स्थिति निम्नवत है—</strong></h5>
<ul>
<li>Albendazole Tablet 400 mg – 4,667</li>
<li>Iron + Folic Acid Syrup (200 ml) – 5,595</li>
<li>Ampicillin Capsule 250 mg – 800</li>
<li>Rabeprazole Sodium 20 mg + Domperidone 30 mg Capsule – 800</li>
<li>Anti Rabies Vaccine 2.5 – 11</li>
<li>Dicyclomine Oral Solution 10 mg/5 ml – 300</li>
<li>Glucose Solution Chloride 5% + 0.9% Sodium Chloride – 240</li>
<li>Paracetamol Drop 100 mg/ml – 75</li>
<li>Paracetamol Injection 150 mg/ml – 83</li>
<li>Permethrin Cream 5% – 100</li>
<li>Tinidazole Injection 2 mg/ml – 288</li>
<li>Paracetamol 500 mg Tablet – 1,500</li>
<li>ECG Jelly 250 ml – 150</li>
<li>Syringe 3 ml – 300</li>
<li>Calcium with Vitamin D3 Tablet – 6,600</li>
<li>Iron एवं Folic Acid (Red Colour) Tablet – 7,50,000</li>
<li>Anti Rabies Vaccine (ARV) – 35</li>
<li>ORS Sachet (20.1 gm) – 5,000</li>
<li>ORS Sachet (21.0 gm) – 1,000</li>
</ul>
<p>स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से दवाओं की उपलब्धता की निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त दवाओं की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।</p>
<p>उपायुक्त रामनिवास यादव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय सुविधाओं एवं मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/chc-jamua-medicine-stock-available-better-health-services-giridih/article-22791</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 15:49:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी में गैस और अपच से परेशान हैं? पुदीना दे सकता है राहत, जानिए फायदे</title>
                                    <description><![CDATA[आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. एस.एस. गौरी ने बताया कि पुदीना गर्मियों में गैस, अपच, अम्लता और पेट संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/pudina-benefits-for-digestion-summer-health-ayurveda/article-22779"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/a8408b0d2b76d62524a12282df20b0f0_1922929733_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">गर्मियों के मौसम में गैस, अपच, अम्लता और पेट संबंधी अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में पुदीना एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है। पाचन तंत्र को बेहतर बनाने वाले इसके औषधीय गुण लंबे समय से आयुर्वेद में महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं। यह बात आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. एस.एस. गौरी ने कही।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की विज्ञान-आधारित आयुर्वेदिक कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड की ओर से शहर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पुदीना के औषधीय गुणों और स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेदिक और प्राकृतिक स्वास्थ्य समाधानों के प्रति जागरूक करना था।</p>
<p class="isSelectedEnd">डॉ. गौरी ने बताया कि पुदीना में एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो विशेष रूप से गर्मियों में शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में पुदीना को पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी औषधीय जड़ी-बूटी माना गया है और इसका उपयोग हजारों वर्षों से किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि पुदीना में मौजूद मेंथॉल पाचन के लिए जरूरी एंजाइमों को सक्रिय करता है। इसके साथ ही यह पेट की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे गैस, अपच, पेट दर्द, ऐंठन और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर-मार्केटिंग श्रीराम पद्मनाभन ने कहा कि बदलती जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के बीच लोग प्राकृतिक एवं सुरक्षित स्वास्थ्य विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि बाजार में उपलब्ध कई एंटासिड रासायनिक तत्वों पर आधारित होते हैं, जबकि पुदीना आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद प्राकृतिक विकल्प प्रदान करते हैं। डाबर का 'पुदीन हरा' ब्रांड करीब 100 वर्षों से लोगों के बीच लोकप्रिय है और गैस, अपच, अम्लता तथा पेट दर्द जैसी समस्याओं में उपयोग किया जाता रहा है।</p>
<p>कंपनी के अनुसार, पुदीन हरा टैबलेट, लिक्विड, पाउडर और फिज जैसे विभिन्न स्वरूपों में उपलब्ध है, जिसमें पुदीना सत्व प्रमुख घटक के रूप में शामिल है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने लोगों को गर्मियों के दौरान पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाने की भी सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Thyroid Day 2026: महिला या पुरुष, किसे ज्यादा होता है थायरॉइड? जानें लक्षण, कारण और बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जानें महिलाओं और पुरुषों में किसे ज्यादा खतरा रहता है, इसके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/thyroid-disorder-men-or-women-who-is-more-at-risk/article-22137"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/ai-generated-(6).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Thyroid Risk Men vs Women:</strong> आज के समय में थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खराब लाइफस्टाइल, तनाव, हार्मोनल बदलाव और खानपान की गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर महिला या पुरुष, किसे थायरॉइड रोग का खतरा ज्यादा रहता है? आइए जानते हैं इस बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव के तरीके।</p>
<hr />
<h3><strong>थायरॉइड क्या है और शरीर में इसका क्या काम है?</strong></h3>
<p>थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि (Gland) होती है। यह शरीर में हार्मोन बनाती है, जो कई जरूरी कामों को नियंत्रित करते हैं।</p>
<p>थायरॉइड हार्मोन मुख्य रूप से इन चीजों को प्रभावित करता है:</p>
<ul>
<li>शरीर का मेटाबॉलिज्म</li>
<li>वजन नियंत्रण</li>
<li>हार्ट रेट</li>
<li>शरीर का तापमान</li>
<li>ऊर्जा स्तर</li>
<li>दिमाग और मांसपेशियों की कार्यक्षमता</li>
</ul>
<p>जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तब थायरॉइड डिसऑर्डर की समस्या शुरू होती है।</p>
<hr />
<h3><strong>थायरॉइड के मुख्य प्रकार</strong></h3>
<h4><strong>1. हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism)</strong></h4>
<p>इस स्थिति में शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगता है।</p>
<p>इसके कारण शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं।</p>
<p><strong>लक्षण:</strong></p>
<ul>
<li>हर समय थकान महसूस होना</li>
<li>अचानक वजन बढ़ना</li>
<li>ज्यादा ठंड लगना</li>
<li>कब्ज की समस्या</li>
<li>बाल झड़ना</li>
<li>त्वचा का रूखा होना</li>
<li>सुस्ती और कमजोरी</li>
<li>ध्यान लगाने में परेशानी</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>2. हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism)</strong></h3>
<p>इसमें शरीर में <strong>जरूरत से ज्यादा थायरॉइड हार्मोन बनने लगता है।</strong></p>
<p>इस वजह से शरीर की गतिविधियां असामान्य रूप से तेज हो सकती हैं।</p>
<p><strong>लक्षण:</strong></p>
<ul>
<li>तेजी से वजन कम होना</li>
<li>घबराहट और बेचैनी</li>
<li>दिल की धड़कन तेज होना</li>
<li>ज्यादा पसीना आना</li>
<li>हाथ कांपना</li>
<li>नींद की समस्या</li>
<li>चिड़चिड़ापन</li>
</ul>
<p>मानव शरीर भी कमाल है, कभी इंजन स्लो कर देता है, कभी बिना वजह टर्बो मोड में चला जाता है।</p>
<hr />
<h3><strong>महिला या पुरुष, किसे ज्यादा होता है थायरॉइड?</strong></h3>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक <strong>महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉइड का खतरा ज्यादा पाया जाता है।</strong></p>
<p>कई रिपोर्ट्स के अनुसार महिलाओं में यह समस्या <strong>पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक</strong> देखी जाती है।</p>
<p>इसके पीछे कई वजहें मानी जाती हैं।</p>
<h3><strong>हार्मोनल बदलाव</strong></h3>
<p>महिलाओं के शरीर में समय-समय पर बड़े हार्मोनल बदलाव होते हैं।</p>
<p>जैसे:</p>
<ul>
<li>पीरियड्स</li>
<li>प्रेग्नेंसी</li>
<li>डिलीवरी के बाद का समय</li>
<li>मेनोपॉज</li>
</ul>
<p>इन बदलावों का असर थायरॉइड हार्मोन पर भी पड़ सकता है।</p>
<h3><strong>ऑटोइम्यून बीमारियां</strong></h3>
<p>थायरॉइड की कई समस्याएं <strong>ऑटोइम्यून डिजीज</strong> से जुड़ी होती हैं।</p>
<p>इसमें शरीर की इम्यूनिटी गलती से अपने ही थायरॉइड पर हमला करने लगती है।</p>
<p>महिलाओं में ऐसी बीमारियों का खतरा अधिक माना जाता है।</p>
<hr />
<h3><strong>किन लोगों में थायरॉइड का खतरा ज्यादा रहता है?</strong></h3>
<p>कुछ लोगों में इस बीमारी का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है।</p>
<p><strong>जोखिम बढ़ाने वाले कारण:</strong></p>
<ul>
<li>परिवार में थायरॉइड की हिस्ट्री होना</li>
<li>महिलाओं में बढ़ती उम्र</li>
<li>गर्भावस्था</li>
<li>लगातार तनाव</li>
<li>मोटापा</li>
<li>आयोडीन की कमी</li>
<li>ऑटोइम्यून बीमारी</li>
<li>अनियमित लाइफस्टाइल</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>थायरॉइड के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए</strong></h3>
<p>कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।</p>
<p>अगर ये संकेत लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।</p>
<p><strong>ध्यान देने वाले संकेत:</strong></p>
<ul>
<li>बिना कारण वजन बढ़ना या घटना</li>
<li>लगातार थकान रहना</li>
<li>मूड स्विंग</li>
<li>बाल तेजी से झड़ना</li>
<li>ज्यादा ठंड या गर्मी लगना</li>
<li>दिल की धड़कन में बदलाव</li>
<li>नींद प्रभावित होना</li>
</ul>
<p>शरीर कई बार पहले धीरे चेतावनी देता है। लोग उसे “थोड़ी कमजोरी होगी” कहकर टाल देते हैं। फिर टेस्ट रिपोर्ट आती है और सबको अचानक विज्ञान याद आ जाता है।</p>
<hr />
<h3><strong>थायरॉइड की जांच कैसे होती है?</strong></h3>
<p>अगर लक्षण दिखाई दे रहे हों तो डॉक्टर कुछ जरूरी टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।</p>
<p>इनमें शामिल हैं:</p>
<ul>
<li><strong>TSH Test</strong></li>
<li><strong>T3 Test</strong></li>
<li><strong>T4 Test</strong></li>
<li>जरूरत पड़ने पर थायरॉइड स्कैन या अल्ट्रासाउंड</li>
</ul>
<p>इन जांचों से हार्मोन स्तर का पता लगाया जाता है।</p>
<hr />
<h3><strong>थायरॉइड से बचने के लिए क्या करें?</strong></h3>
<p>हालांकि हर मामले में थायरॉइड को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ अच्छी आदतें जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं।</p>
<h4><strong>संतुलित खानपान रखें</strong></h4>
<ul>
<li>आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें</li>
<li>हरी सब्जियां और फल खाएं</li>
<li>पर्याप्त प्रोटीन लें</li>
<li>ज्यादा जंक फूड से बचें</li>
</ul>
<h3><strong>नियमित एक्सरसाइज करें</strong></h3>
<p>रोजाना शारीरिक गतिविधि हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है।</p>
<h5><strong>तनाव कम करें</strong></h5>
<p>लगातार तनाव हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।</p>
<h5><strong>पर्याप्त नींद लें</strong></h5>
<p>रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर के लिए जरूरी मानी जाती है।</p>
<h5><strong>समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं</strong></h5>
<p>अगर परिवार में इतिहास है या लक्षण दिख रहे हैं, तो नियमित जांच कराना बेहतर विकल्प हो सकता है।</p>
<hr />
<p>थायरॉइड एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। यह बीमारी <strong>पुरुष और महिला दोनों को प्रभावित कर सकती है</strong>, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।</p>
<p>अच्छी बात यह है कि <strong>समय पर जांच, सही खानपान, स्वस्थ जीवनशैली और उचित इलाज</strong> से थायरॉइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>अगर आपको लंबे समय से थकान, वजन में बदलाव, बाल झड़ना या हार्मोनल समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। शरीर का “सिस्टम अपडेट उपलब्ध है” वाला नोटिफिकेशन अक्सर इसी तरह आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/health/thyroid-disorder-men-or-women-who-is-more-at-risk/article-22137</link>
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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 19:18:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरुषों में स्टेमिना कम होने के 7 कारण</title>
                                    <description><![CDATA[दिनभर थकान, कमजोरी और सांस फूलना? जानिए पुरुषों में लो स्टेमिना के कारण, लक्षण और इसे बढ़ाने के आसान तरीके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/7-reasons-for-low-stamina-in-men-understand-the-signs/article-21696"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/hgjgh.webp" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>7 Reasons for Low Stamina in Men: </strong>आजकल बहुत से पुरुष दिनभर थकान और कमजोरी की शिकायत करते हैं। थोड़ा चलने पर सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ते ही हांफ जाना या बिना कुछ खास किए थकावट महसूस होना -ये सब सिर्फ busy schedule का नतीजा नहीं है। कई बार ये शरीर के अंदर की किसी कमी का इशारा होता है जिसे हम नजरअंदाज करते रहते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">खराब खानपान, नींद पूरी न होना, तनाव, विटामिन की कमी या कोई पुरानी बीमारी- इनमें से कोई भी चीज स्टेमिना को कमजोर कर सकती है। और यह सोचना गलत है कि यह सिर्फ उम्रदराज लोगों की समस्या है। आजकल 25-30 साल के युवा भी इससे परेशान हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि पुरुषों में कमजोरी और लो स्टेमिना के पीछे असली वजहें क्या हैं और इसे ठीक करने के लिए क्या किया जा सकता है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>स्टेमिना क्या होता है?</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">सीधे शब्दों में कहें तो स्टेमिना वह ताकत है जो आपको लंबे समय तक बिना थके काम करने देती है — चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक। जब यह क्षमता घटने लगती है तो इसे लो स्टेमिना कहते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इसे बनाए रखना आसान नहीं रहा। लेकिन जरूरी भी बहुत है - क्योंकि अच्छा स्टेमिना ही आपको जिंदगी के हर पल को पूरी तरह जीने देता है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>पुरुषों में कमजोरी और लो स्टेमिना की वजह क्या है? (7 Reasons for Low Stamina in Men)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">अक्सर लोग सोचते हैं कि इसके पीछे सिर्फ टेस्टोस्टेरोन की कमी है। लेकिन एक्सपर्ट्स इससे सहमत नहीं हैं। असल में इसके पीछे कई चीजें एक साथ काम करती हैं — खराब नींद, तनाव, पोषण की कमी, शारीरिक गतिविधि न के बराबर होना, विटामिन D और आयरन की कमी, थायराइड, डायबिटीज या स्लीप एपनिया भी इसकी वजह हो सकते हैं।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>1. पोषण की कमी</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">शरीर को सही तरह से चलाने के लिए प्रोटीन, आयरन, विटामिन B12 और विटामिन D बहुत जरूरी हैं। इनमें से किसी की भी कमी हो जाए तो थकान और कमजोरी दरवाजा खटखटाने लगती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>2. नींद पूरी न होना</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">रात को देर से सोना, सुबह जल्दी उठना या बीच-बीच में नींद टूटना — यह सब शरीर की रिकवरी को रोकता है। नतीजा यह होता है कि सुबह उठकर भी ताजगी नहीं लगती और दिनभर एनर्जी की कमी बनी रहती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>3. तनाव और मानसिक दबाव</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">दिमाग पर जितना ज्यादा बोझ होगा, शरीर उतना ही जल्दी थकेगा। लगातार चिंता और तनाव में रहने से शरीर और मन दोनों टूटने लगते हैं।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>4. शारीरिक गतिविधि न करना</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">घंटों कुर्सी पर बैठे रहना और कोई हलचल न करना धीरे-धीरे शरीर की ताकत और सहनशक्ति को खत्म कर देता है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>5. गलत खानपान</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">जंक फूड, तला-भुना और मीठा ज्यादा खाने से शरीर को असली पोषण नहीं मिलता। ऊपर से एनर्जी भी जल्दी गिर जाती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>6. पानी कम पीना</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">डिहाइड्रेशन एक ऐसी चीज है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज करते हैं। लेकिन कम पानी पीने से मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और थकान जल्दी आती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>7. कोई बीमारी</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">कभी-कभी लगातार कमजोरी किसी बीमारी की वजह से भी हो सकती है जैसे एनीमिया, डायबिटीज, थायराइड या हार्मोनल बदलाव। अगर बाकी सब ठीक हो फिर भी थकान बनी रहे तो डॉक्टर से जरूर मिलें।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">धूम्रपान और शराब भी लो स्टेमिना की बड़ी वजह हैं। इनसे फेफड़ों की क्षमता घटती है और खून का दौरान कमजोर होता है — जिसका सीधा असर स्टेमिना पर पड़ता है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>पुरुषों में लो स्टेमिना के लक्षण क्या होते हैं?</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">पहचानना बहुत आसान है। जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब उन्हीं में दम निकलने लगे — यही सबसे बड़ा संकेत है। इसके अलावा थोड़ी मेहनत में सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, पूरी नींद के बाद भी थकान लगना, शरीर में भारीपन, मांसपेशियों में कमजोरी और किसी काम में मन न लगना — ये सब लो स्टेमिना की निशानियां हैं।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>स्टेमिना बढ़ाने के आसान तरीके</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">इसे ठीक करने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा — रूटीन, खानपान, नींद और मानसिक सेहत सब पर ध्यान देना जरूरी है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>1. सही डाइट लें</strong> अंडे, दालें, ड्राई फ्रूट्स, हरी सब्जियां और मौसमी फल रोज खाएं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>2. एक्सरसाइज करें</strong> रोजाना वॉक, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग — कुछ भी करें लेकिन शरीर को हिलाते जरूर रहें।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>3. नींद पूरी करें</strong> 7-8 घंटे की गहरी नींद शरीर को रिकवर करती है और एनर्जी बनाए रखती है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>4. पानी खूब पिएं</strong> दिनभर हाइड्रेटेड रहें — इससे शरीर एक्टिव रहता है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>5. तनाव कम करें</strong> योग, मेडिटेशन या बस थोड़ी देर शांत बैठना — मन को राहत दें।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>किन लोगों को ज्यादा ध्यान देना चाहिए?</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">जिन्हें दिल की बीमारी, अस्थमा, डायबिटीज या सीओपीडी है, उनके लिए लो स्टेमिना और भी गंभीर हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले, ज्यादा तनाव में रहने वाले और 30 साल से ऊपर के पुरुष - इन सभी को अपनी सेहत पर नजर रखनी चाहिए।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>कब सतर्क हो जाएं?</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">अगर लंबे समय से कमजोरी बनी हो, अचानक वजन घट रहा हो या रोजमर्रा के काम मुश्किल लगने लगें — तो इसे हल्के में न लें। वक्त रहते ध्यान न दिया तो यह धीरे-धीरे पूरी जिंदगी पर असर डालने लगेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 23:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ayurvedic Fertility Tips: मां बनने की तैयारी कर रही हैं? इन आयुर्वेदिक उपायों से मिल सकता है नेचुरल सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खानपान और हार्मोनल असंतुलन के कारण फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आयुर्वेद में पुत्रजीवक, शतावरी, अश्वगंधा, सफेद मूसली और कौंच बीज जैसे उपायों का उल्लेख मिलता है। जानें गर्भधारण की तैयारी और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े आयुर्वेदिक उपायों की पूरी जानकारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/health/ayurvedic-fertility-tips-pregnancy-planning-natural-support/article-21677"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/ayurvedic-fertility-tips-in-hindi.webp" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>Ayurvedic Fertility Tips:</strong> आज की जिंदगी इतनी तेज हो गई है कि शरीर का ख्याल रखना पीछे छूट जाता है। काम का बोझ, रात को देर तक जागना, बाहर का खाना- ये सब मिलकर शरीर को अंदर से कमजोर कर देते हैं। और जब बात आती है मां बनने की, तो यही छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी रुकावट बन जाती हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">कई घरों में ऐसा होता है- शादी के बाद महीने गुजरते हैं, फिर साल, और खुशखबरी नहीं आती। डॉक्टर के पास जाओ तो कभी हार्मोन की गड़बड़ी, कभी पीरियड्स अनियमित, कभी पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी दिक्कत। ऐसे में बहुत से दंपती अब आयुर्वेद की तरफ देख रहे हैं - और सही भी है। आयुर्वेद कोई जादू नहीं है, लेकिन यह शरीर को जड़ से ठीक करने का काम करता है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">आयुर्वेद कहता है कि गर्भधारण तभी होता है जब शरीर, मन और खानपान- तीनों संतुलन में हों। सिर्फ दवाई खाने से काम नहीं चलता। इसीलिए पहले पंचकर्म जैसी प्रक्रियाओं से शरीर की सफाई की जाती है, ताकि अंदर जमे विषैले तत्व बाहर निकलें और प्रजनन तंत्र सही से काम करे।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>कौन सी जड़ी-बूटियां असर करती हैं?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">आयुर्वेदिक जानकारों के मुताबिक पांच जड़ी-बूटियां खासतौर पर फर्टिलिटी के लिए बेहद काम की हैं - पुत्रजीवक, सफेद मूसली, अश्वगंधा, कौंच बीज और शतावरी। इनमें से हर एक का अपना काम है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>1. पुत्रजीवक</strong> (<strong>Putrajeevak)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">नाम से ही जाहिर है -यह संतान से जुड़ी औषधि है। जो दंपती लंबे समय से कोशिश कर रहे हों और नतीजा न मिल रहा हो, उनके लिए पुत्रजीवक को खास माना गया है। यह ओवुलेशन को पटरी पर लाती है, गर्भाशय को स्वस्थ रखती है और हार्मोन्स की गड़बड़ी को धीरे-धीरे ठीक करती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>2. सफेद मूसली</strong> <strong>(White Muesli)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">यह सिर्फ पुरुषों की दवाई नहीं है जैसा आमतौर पर लोग समझते हैं। महिलाओं के लिए भी उतनी ही जरूरी है। थकान दूर करती है, अंडाशय की कार्यक्षमता बढ़ाती है और शरीर में फर्टिलिटी हार्मोन्स का संतुलन बनाती है। पुरुषों में स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों पर इसका अच्छा असर देखा गया है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>3. अश्वगंधा</strong> <strong>(Ashwagandha)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">तनाव आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या है और गर्भधारण में यह सबसे बड़ा रोड़ा भी। अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन को काबू में रखती है। नींद बेहतर होती है, मन शांत रहता है और हार्मोनल सिस्टम ठीक से काम करता है। पुरुष हों या महिला — दोनों के लिए फायदेमंद है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>4. कौंच बीज</strong> (<strong>Kaunch seeds)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">इसे म्यूकुना प्रुरियन्स भी कहते हैं। आयुर्वेद में इसे वीर्यवर्धक और बलवर्धक माना गया है। प्रजनन शक्ति बढ़ाने में यह स्त्री और पुरुष दोनों के काम आती है।</p>
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>5. शतावरी</strong> (<strong>Shatavari)</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">महिलाओं की सेहत की बात हो और शतावरी का नाम न आए — ऐसा हो नहीं सकता। यह गर्भाशय को पोषण देती है, उसमें सूजन कम करती है और शरीर का पीएच संतुलन बनाए रखती है। मासिक धर्म नियमित होता है और गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<hr class="border-border-200 border-t-0.5 my-3 mx-1.5" />
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>सिर्फ जड़ी-बूटी नहीं, तेल और पंचकर्म भी जरूरी (Ayurvedic Fertility Tips)</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ कैप्सूल और चूर्ण तक सीमित नहीं है। औषधीय तेल और पंचकर्म थेरेपी भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन ये हर किसी के लिए एक जैसे नहीं होते। महिला की शारीरिक प्रकृति देखकर, उसकी सेहत समझकर तब जाकर उपचार तय किया जाता है। मकसद एक ही होता है- शरीर को भीतर से तैयार करना, गर्भाशय की बारीक नाड़ियों को पोषण देना और गर्भधारण के लिए सही माहौल बनाना।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">कोई भी औषधि शुरू करने से पहले किसी अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर मिलें।</p>
<hr />
<h3 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>FAQ</strong></h3>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>फर्टिलिटी कम होने के मुख्य कारण क्या हैं?</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">तनाव, गलत खान-पान, नींद की कमी, हार्मोनल असंतुलन, थायराइड, पीसीओडी, मोटापा, धूम्रपान और उम्र बढ़ना फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>क्या आयुर्वेदिक दवाओं से फर्टिलिटी बढ़ाई जा सकती है?</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">आयुर्वेद में पुत्रजीवक, अश्वगंधा, शतावरी, कौंच बीज और सफेद मूसली जैसी औषधियां बताई गई हैं जो प्राकृतिक रूप से हार्मोनल संतुलन बनाकर फर्टिलिटी बढ़ाने में मदद करती हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>प्रेग्नेंसी के लिए डाइट में क्या शामिल करना चाहिए?</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">ताजा भोजन, दूध, घी, बादाम, शतावरी और मौसमी फल फर्टिलिटी बढ़ाने में सहायक हैं। प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और अत्यधिक कैफीन से बचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 21:41:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की एंट्री, गूगल के साथ एमओयू की पहल, अस्पतालों में जांच और इलाज होंगे और तेज</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एआई तकनीक लागू करने की पहल की है और गूगल के साथ एमओयू की प्रक्रिया शुरू की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/latest-news/jharkhand-health-services-ai-entry-google-mou-health-department-initiative/article-20910"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/ai_dr.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल के तहत राज्य के स्वास्थ्य विभाग में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए गुगल एलएलसी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पहल की गई है।</p>
<p>राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि एआई तकनीक के लागू होने से सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में जांच, इलाज और डेटा प्रबंधन की प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी। इससे मरीजों की बीमारी की समय पर पहचान, जांच रिपोर्ट तैयार करने और उपचार व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी संसाधनों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है। एआई के उपयोग से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस नई तकनीक से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को कार्य में बेहतर सहयोग मिलेगा, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही अस्पतालों में संसाधनों की निगरानी, दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों के रिकॉर्ड के प्रबंधन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।</p>
<p>सरकार को उम्मीद है कि यह पहल राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक मजबूत और भविष्य के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>ताज़ा खबरें </category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 15:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Deoghar News: जन्मदिन पर रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[देवघर के सदर अस्पताल में प्रयोगशाला प्रभारी मनोज कुमार मिश्र ने अपनी पुत्री के जन्मदिन पर रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। वे हर साल परिवार के सदस्यों के जन्मदिन पर यह परंपरा निभाते हैं। उनकी इस पहल से समाज में सेवा और परोपकार का संदेश फैल रहा है और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरणा मिल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/deoghar/deoghar-news-set-an-example-of-humanity-by-donating-blood/article-20519"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/abe4d4cf-4a60-4391-a373-0f6c9b7ab625_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>देवघर:</strong> देवघर के सदर अस्पताल में मानवता और सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। प्रयोगशाला प्रभारी मनोज कुमार मिश्र ने अपनी पुत्री आकांक्षा शांडिल्य के जन्मदिन के अवसर पर रक्त केंद्र,<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071"> देवघर में रक्तदान</a> कर समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p>इस विशेष मौके पर उनके साथ पुनीत कुमार यादव, अनिल रजक तथा छोटू राम भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस नेक कार्य की सराहना की।</p>
<p>मिश्र की यह पहल केवल एक दिन की नहीं, बल्कि एक सतत परंपरा का हिस्सा है। वे प्रत्येक वर्ष अपने परिवार के सदस्यों के <a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071">जन्मदिन पर रक्तदान</a> करते हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिलती है और समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाने का अवसर भी मिलता है।</p>
<p><a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071">रक्तदान</a> को उन्होंने सबसे बड़ा परोपकार और पुण्य का कार्य बताया। उनका कहना है कि <a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071">रक्तदान न केवल जरूरतमंदों के जीवन </a>को बचाता है, बल्कि यह दान करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। <a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071">नियमित अंतराल पर रक्तदान</a> करने से शरीर में नई <a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/hazaribagh-youth-wing-blood-donation-camp-governor-santosh-gangwar-invitation-500-units/article-20071">रक्त कोशिकाओं का निर्माण</a> होता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।</p>
<p>मनोज कुमार मिश्र की यह सोच और कार्य समाज के अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस महान कार्य से जुड़ सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>देवघर</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 16:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
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