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                <title>सक्सेस स्टोरी - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>सक्सेस स्टोरी RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हर दिल में बसने वाले नायक: जेआरडी टाटा की मानवीय विरासत आज भी प्रेरणास्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[जेआरडी टाटा केवल एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक थे। उन्होंने कर्मचारियों के सम्मान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और उत्कृष्ट कार्यसंस्कृति को हमेशा प्राथमिकता दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/success-story/jrd-tata-human-values-leadership-tata-steel-legacy/article-24745"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/dbdd5b11-8db0-4111-9832-b37662cd1dc8_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>इतिहास जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जे.आर.डी. टाटा) को एक दूरदर्शी उद्योगपति, अग्रणी विमान चालक, राष्ट्र निर्माता और आधुनिक भारतीय उद्योग के शिल्पकार के रूप में याद करता है। लेकिन जिन लोगों ने उन्हें निकट से जाना, वे उन्हें उनकी उपलब्धियों से भी बढ़कर उनकी मानवीयता और विनम्रता के लिए याद करते हैं। </p>
<p>वे ऐसे विलक्षण नेता थे, जो बोलने से पहले सुनने में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि हर व्यक्ति, चाहे उसका पद कोई भी हो, सम्मान और गरिमा का समान अधिकारी है। उन्होंने कभी अधिकार का सहारा लेकर नेतृत्व नहीं किया; बल्कि अपने आदर्श आचरण से उत्कृष्टता की प्रेरणा दी।</p>
<p>जे.आर.डी. टाटा से जुड़ी अनगिनत कहानियाँ हैं। उनमें से कई कभी किताबों में दर्ज नहीं हो सकीं, लेकिन जिन लोगों के जीवन को उन्होंने स्पर्श किया, उनकी यादों में वे आज भी जीवंत हैं।</p>
<p>मुंबई के स्टील हाउस में रहने वाले लोग आज भी बताते हैं कि जे.आर.डी. टाटा कई बार स्वयं कार चलाकर किसी को उसके घर छोड़ने चले जाते थे। कई बार वे परिवार के साथ एक प्याली चाय पर आत्मीयता से बातचीत करते  कुछ पल भी बिताते थे और अक्सर शाम का समापन बच्चों के साथ नीचे खेलते हुए होता था। उस समय वे भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक के अध्यक्ष नहीं, बल्कि सबके प्रिय मित्र बन जाते थे।</p>
<p>बॉम्बे हाउस की एक और घटना जे.आर.डी. टाटा के व्यक्तित्व की गहराई को बखूबी दर्शाती है। एक दिन वे लिफ्ट के लिए धैर्यपूर्वक कतार में अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे, तब भी लिफ्ट ऑपरेटर ने उन्हें कतार तोड़कर आगे जाने की अनुमति नहीं दी। उसके लिए नियम सबके लिए समान थे, यहाँ तक कि चेयरमैन के लिए भी। बाद में जब उस कर्मचारी का तबादला कर दिया गया, तो जे.आर.डी. ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति सिद्धांतों और अनुशासन का पक्का है। इसे दंडित कैसे किया जा सकता है?” जे.आर.डी. टाटा के लिए सम्मान कभी पद से नहीं मिलता था, बल्कि वह व्यक्ति के चरित्र, सिद्धांतों और आचरण से अर्जित होता था।</p>
<p> उनकी विनम्रता उनके व्यक्तित्व की सबसे  विशेषताओं में से एक थी। अपने असाधारण जीवन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, “मुझे नहीं लगता कि मैं उस सम्मान का पूरी तरह हकदार हूँ, जो मुझे मिला है... मेरे साथ हमेशा एक उत्कृष्ट टीम रही।” यही उनके नेतृत्व का सार था। वे स्वयं श्रेय लेने के बजाय अपनी टीम को आगे बढ़ाते थे और हर व्यक्ति को बड़े सपने देखने, निर्भीक होकर नवाचार करने तथा सामूहिक रूप से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते थे।</p>
<p>1938 से 1984 तक टाटा स्टील के चेयरमैन के रूप में जे.आर.डी. टाटा ने तकनीकी आधुनिकीकरण को नई दिशा दी, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रगति का वास्तविक केंद्र उसके लोग होते हैं। उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, प्रगतिशील मानव संसाधन नीतियों को बढ़ावा दिया, प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच संयुक्त परामर्श की संस्कृति को प्रोत्साहित किया तथा ऐसी अनेक पहलों की नींव रखी, जो आज भी टाटा स्टील की ‘पीपल-फर्स्ट’ संस्कृति को सशक्त बनाती हैं।</p>
<p>उनका विश्वास सरल, किन्तु अत्यंत गहरा था: कोई भी संस्थान तभी सफल होता है, जब उससे जुड़े लोग समृद्ध और प्रगतिशील हों।</p>
<p>जिम्मेदार व्यवसाय के वैश्विक प्राथमिकता बनने से बहुत पहले, जे.आर.डी. ने नैतिकता, कर्मचारियों के कल्याण और राष्ट्र-निर्माण को व्यवसाय की सफलता से अलग नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा माना। परिवार कल्याण, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने जमशेदपुर को एक आदर्श औद्योगिक नगर में बदल दिया, जबकि नैतिक नेतृत्व के प्रति उनकी हिमायत आज भी उनकी जयंती के आसपास मनाए जाने वाले टाटा स्टील के वार्षिक एथिक्स मंथ के लिए प्रेरणा बनी हुई है।</p>
<p>इनोवेशन भी जेआरडी की दूरदर्शी सोच का एक प्रमुख आधार था। चाहे टाटा स्टील का आधुनिकीकरण हो, भारत के विमानन उद्योग की नींव रखने की पहल हो या युवा नेतृत्व को परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नए रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करना—जेआरडी ने हमेशा लोगों को वर्तमान से आगे सोचने और भविष्य के निर्माण के लिए कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।</p>
<p>उनके निधन के तीन दशक से अधिक समय बाद भी उनकी विरासत टाटा स्टील की कार्यसंस्कृति और मूल्यों को सार्थक रूप से दिशा दे रही है। यह हमारी नैतिकता और सत्यनिष्ठा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता में रची बसी है। यह कर्मचारियों के समग्र कल्याण—शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य—पर हमारे विशेष ध्यान में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। साथ ही, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, वर्ष 2045 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने तथा नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और उत्तरदायी व्यावसायिक कार्यप्रणालियों में निरंतर निवेश की हमारी प्रतिबद्धता में भी उनकी दूरदृष्टि साफ़ दिखाई देती है।</p>
<p>सबसे बढ़कर, उनकी विरासत हमारे इस विश्वास में जीवित है कि वास्तविक प्रगति वही है, जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाए।</p>
<p>वन टाटा स्टील के रूप में हम जमशेदजी टाटा और जेआरडी टाटा के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए केवल एक संगठन ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और उद्देश्यपूर्ण सोच के साथ समाज, उद्योग और राष्ट्र को भी सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।</p>
<p>कुछ लीडर्स अपने बनाए हुए व्यवसायों के कारण इतिहास में अमर हो जाते हैं। जेआरडी टाटा उन अनगिनत जीवनों के कारण हमेशा याद किए जाएंगे, जिन्हें उन्होंने अपने नेतृत्व, मानवीय दृष्टिकोण और मूल्यों से समृद्ध किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>स्टोरी </category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:31:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET UG 2026: 651 अंक लाने वाली आर्या पलक का महापौर प्रमिला मेहरा ने किया सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह की छात्रा आर्या पलक ने NEET UG 2026 परीक्षा में 651 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1973 हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि पर गिरिडीह नगर निगम की महापौर प्रमिला मेहरा ने सम्मानित करते हुए उन्हें जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/neet-ug-2026-mayor-pramila-mehra-honored-arya-palak-who/article-24513"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/untitled-design-(8)_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><strong>गिरिडीह:</strong> आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह की मेधावी छात्रा <strong>आर्या पलक</strong> ने <strong>NEET UG 2026</strong> परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए <strong>651 अंक</strong> प्राप्त किए हैं। उन्होंने <strong>ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1973</strong> हासिल कर गिरिडीह जिले तथा आकाश इंस्टीट्यूट का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।</p>
<p>आर्या पलक की इस शानदार उपलब्धि पर गिरिडीह नगर निगम की महापौर <strong>प्रमिला मेहरा</strong> ने उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने आर्या के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। महापौर ने आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह के शिक्षकों एवं प्रबंधन की भी सराहना की, जिन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन प्रदान किया।</p>
<p>इस अवसर पर आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह के प्रबंधन ने आर्या पलक को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण, अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसी का परिणाम है कि संस्थान के विद्यार्थी लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहे हैं।</p>
<p>आर्या पलक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह के सतत मार्गदर्शन और अनुशासित अध्ययन वातावरण को दिया।</p>
<p>आकाश इंस्टीट्यूट, गिरिडीह परिवार ने आर्या पलक को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संघर्ष से सफलता तक: फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा ने GEM बालिकाओं को किया प्रेरित</title>
                                    <description><![CDATA[PVUNL के GEM कार्यक्रम में युवा भारतीय फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा ने बालिकाओं के साथ संवाद कर उन्हें प्रेरित किया। भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की डिफेंडर दिव्यानी ने AFC U-17 Women’s Asian Cup 2026 और SAFF U-17 Women’s Championship में शानदार प्रदर्शन कर राष्ट्रीय पहचान बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ramgarh/divyani-linda-inspired-gem-girls-pvunl-football-session-2026/article-22367"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/21ac6b69-9d0c-4110-9adf-34ef5796d567_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रामगढ़:</strong> 27 मई 2026 को प्रतिभाशाली युवा भारतीय फुटबॉलर Divyani Linda ने PVUNL की GEM बालिकाओं के साथ संवाद कर उन्हें प्रेरित किया। भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की डिफेंडर दिव्यानी ने AFC U-17 Women’s Asian Cup 2026 तथा SAFF U-17 Women’s Championship में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देशभर में पहचान बनाई है। अत्यंत साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के बावजूद उन्होंने कठिन संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत के बल पर सफलता हासिल की।</p>
<p>कार्यक्रम में उन्होंने GEM प्रतिभागियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश दिया। स्वर्णरेखा महिला समिति की अध्यक्षा  रेणु सहगल एवं उपाध्यक्षा सोमा मुखर्जी ने उनका एवं उनके कोच का स्वागत किया। GEM बालिकाओं ने उनसे उनके अभ्यास, दिनचर्या एवं तकनीकों से जुड़े प्रश्न भी पूछे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रामगढ़</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साधारण शुरुआत, बड़ा मुकाम... ऐसे बने सुदर्शन गुर्जर लाखों UPSC छात्रों की प्रेरणा</title>
                                    <description><![CDATA[सुदर्शन गुर्जर आज UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच एक लोकप्रिय भूगोल शिक्षक के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने कठिन विषय को आसान और रोचक तरीके से पढ़ाकर लाखों छात्रों का भरोसा जीता है। सरल भाषा, मानचित्र और उदाहरणों के जरिए पढ़ाने की उनकी शैली ने उन्हें खास पहचान दिलाई। हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए वे उम्मीद और प्रेरणा का बड़ा नाम बन चुके हैं। उनकी सफलता की कहानी मेहनत, धैर्य और निरंतरता की मिसाल मानी जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/success-story/sudarshan-gurjar-success-story-upsc-geography-teacher-biography/article-21330"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/dsdsds.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध भारत डेस्क:</strong> कुछ लोग केवल पढ़ाते नहीं, बल्कि अपने अंदाज़ से हजारों छात्रों की सोच बदल देते हैं। सुदर्शन गुर्जर भी ऐसे ही नामों में शामिल हैं। आज वे UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं। खासतौर पर भूगोल को जिस आसान, रोचक और याद रहने वाले तरीके से वे समझाते हैं, उसने उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाई है।</p>
<p>उनकी कहानी किसी चमकदार शुरुआत की कहानी नहीं है, बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और अपने काम पर भरोसा रखने की कहानी है। यही वजह है कि वे आज केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।</p>
<blockquote class="instagram-media"><strong><a href="https://www.instagram.com/p/DSFhqcxEvvR/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=MzRlODBiNWFlZA==">https://www.instagram.com/p/DSFhqcxEvvR/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=MzRlODBiNWFlZA==</a></strong></blockquote>
<p>

</p>
<h4><strong>जब कठिन विषय भी आसान लगने लगे</strong></h4>
<p>UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भूगोल अक्सर ऐसा विषय माना जाता है, जिसे समझना तो जरूरी है, लेकिन याद रखना उससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। सुदर्शन गुर्जर ने इसी चुनौती को अपनी ताकत बना लिया।</p>
<p>उन्होंने पढ़ाने का ऐसा तरीका चुना, जिसमें मानचित्र, उदाहरण और सरल भाषा का इस्तेमाल होता है। नतीजा यह हुआ कि जो विषय पहले भारी लगता था, वही छात्रों को दिलचस्प लगने लगा। यही एक शिक्षक की सबसे बड़ी जीत होती है, जब छात्र डर की जगह समझ के साथ पढ़ने लगें।</p>
<h4><strong>मेहनत ने बनाई अलग पहचान</strong></h4>
<p>हर सफल व्यक्ति के पीछे एक लंबा सफर होता है, और सुदर्शन गुर्जर का सफर भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने अपने काम को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की तरह निभाया। लगातार पढ़ाना, छात्रों की कठिनाइयों को समझना और विषय को आसान बनाते जाना, यही उनकी पहचान बन गई।</p>
<blockquote class="instagram-media"><strong><a href="https://www.instagram.com/reel/DXrVdwlDLA2/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=MzRlODBiNWFlZA==">https://www.instagram.com/reel/DXrVdwlDLA2/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=MzRlODBiNWFlZA==</a></strong></blockquote>
<p>

</p>
<p>आज उनकी लोकप्रियता सिर्फ इसलिए नहीं है कि वे पढ़ाते अच्छे हैं, बल्कि इसलिए भी है कि वे छात्रों की मानसिकता को समझते हैं। वे जानते हैं कि तैयारी कर रहे एक छात्र को सिर्फ किताब नहीं, भरोसा भी चाहिए।</p>
<h4><strong>हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए उम्मीद की तरह</strong></h4>
<p>सुदर्शन गुर्जर की खास बात यह है कि वे हिंदी माध्यम के छात्रों के बीच बेहद भरोसेमंद नाम बन गए हैं। उनकी भाषा सरल है, तरीका साफ है और अंदाज़ ऐसा है कि छात्र उन्हें सुनते-सुनते विषय से जुड़ जाते हैं।</p>
<p>ऐसे दौर में जब बहुत सारे विद्यार्थी संसाधनों की कमी या भाषा की बाधा से जूझते हैं, सुदर्शन गुर्जर जैसे शिक्षक उन्हें यह एहसास कराते हैं कि सफलता के लिए शानदार शुरुआत जरूरी नहीं, मजबूत इरादा जरूरी है।</p>
<h4><strong>सफलता का असली संदेश</strong></h4>
<p>सुदर्शन गुर्जर की कहानी सिर्फ एक शिक्षक की सफलता नहीं है। यह उस सोच की जीत है, जिसमें साधारण शुरुआत भी असाधारण परिणाम दे सकती है। उनकी यात्रा यह सिखाती है कि अगर इंसान अपने काम को पूरी ईमानदारी, निरंतरता और जुनून के साथ करे, तो पहचान अपने आप बनती है।</p>
<p>आज वे उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन रास्ता नहीं जानते। उनकी कहानी कहती है कि रास्ते हमेशा तैयार नहीं मिलते, कई बार उन्हें मेहनत से बनाना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:04:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मधुपुर की बेटी मंतशा इरफान ने रचा इतिहास, ICSE 10वीं में 90.1% अंक लाकर बढ़ाया क्षेत्र का मान</title>
                                    <description><![CDATA[मधुपुर की मंतशा इरफान ने ICSE 10वीं परीक्षा में 90.1% अंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पुत्री मंतशा की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/deoghar/mantasha-irfan-icse-10th-90-percent-madhupur-success-story/article-21002"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/capture_samridh_1200x720-(2).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>देवघर</strong>: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की सुपुत्री मंतशा इरफान ने ICSE 10वीं की परीक्षा में 90.1% अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे मधुपुर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। इस शानदार सफलता से पूरे मधुपुर में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।</p>
<p>यह उपलब्धि केवल एक छात्रा की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि उस संस्कार, मार्गदर्शन और समर्पण का प्रतीक है, जो परिवार से मिलता है। मंतशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को देते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।</p>
<p>मंतशा इरफान ने अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि उनकी इच्छा एक सफल डॉक्टर बनने की है, ताकि वे समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सकें और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान दे सकें।</p>
<p>उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए एक मजबूत संदेश भी दिया—<br />"बेटियां किसी से कम नहीं होतीं, उन्हें भी समान अवसर और प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि वे समाज में आगे बढ़कर अपनी पहचान बना सकें।"</p>
<p>इस उपलब्धि पर क्षेत्र के गणमान्य लोगों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने मंतशा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।</p>
<p>मंतशा की यह सफलता न केवल एक परिवार की खुशी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देवघर</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:40:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>“गणित के जादूगर” पीके बिस्वास ने पूरे किए शिक्षण के 50 वर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[साहिबगंज के प्रसिद्ध शिक्षक और गणितज्ञ पवित्र कुमार बिस्वास ने अपने शिक्षण जीवन के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। “गणित के जादूगर” के नाम से पहचाने जाने वाले पीके बिस्वास ने सेंट जेवियर स्कूल से अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/sahibganj/mathematics-magician-pk-biswas-completes-50-years-of-teaching/article-18654"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/a40e63f4-41e4-4a41-b4bb-d3c71e8f7902_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>साहिबगंज: </strong>"गणित के जादूगर" के रूप में प्रसिद्ध पवित्र कुमार बिस्वास ने इस वर्ष अपने 50 वर्षों के शिक्षण करियर को सफलतापूर्वक पूरा किया। वे सेंट जेवियर स्कूल, साहिबगंज में गणित और विज्ञान के शिक्षक के रूप में शुरू करते हुए, अभी भी अपने स्वयं के संस्थान "ट्रिनिटीज़ एंगल्स स्कूल" में सेवा जारी रखे हुए हैं। पवित्र कुमार बिस्वास ने 1976 में सेंट जेवियर स्कूल में शामिल होने से पहले भौराह, धनबाद में एक खनन इंजीनियर के रूप में 10 वर्षों तक काम किया था। लेकिन उनकी आत्मा ने हमेशा उन्हें बताया कि वे शिक्षित करने और जरूरतमंद, पिछड़े और दबे-कुचले छात्रों की सेवा करने के लिए पैदा हुए हैं।</p>
<p>उन्होंने अपने शिक्षण करियर में दो पीढ़ियों को शिक्षित किया है, जिसमें अनगिनत डॉक्टर, इंजीनियर, जज, सफल व्यवसायी, आईटी पेशेवर, आईपीएस और आईएएस अधिकारी भारत और विदेश में शामिल हैं। पवित्र कुमार बिस्वास को कई ट्रॉफी, सम्मान, पुरस्कार और स्मृति चिन्ह प्राप्त हुए हैं। वे 1985 में प्रसिद्ध नई दिल्ली स्थित आईसीएसई बोर्ड से यह सम्मान प्राप्त करने वाले जिले के पहले मान्यता प्राप्त शिक्षक थे। वे अभी भी अपने संस्थान, ट्रिनिटीज़ एंगल्स स्कूल के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षित करने का सपना देखते हैं, ताकि सामान्य लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों के सपने जीवित रहें।</p>
<p>ट्रिनिटीज़ एंगल्स स्कूल हनुमान नगर, पोखरिया, टाउन हॉल के पीछे स्थित है। यह स्कूल समाज के कमजोर वर्गों के छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित है। पवित्र कुमार बिस्वास की कहानी एक प्रेरणा है कि कैसे एक व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उनकी कहानी हमें शिक्षा के महत्व और समाज सेवा के प्रति समर्पण की याद दिलाती है। राजमहल कांग्रेस प्रखंड उपाध्यक्ष मोहम्मद सिफ़रान अख्तर ने अपने पढ़ाई के दिनों को याद करते हुए बताया की पीके बिस्वास के मार्गदर्शन में ही मैट्रिक की परीक्षा दी थी और अच्छे नंबर से उत्तीर्ण भी हुए। उन्होंने कहा कि पीके बिस्वास एक प्रसिद्ध गणितज्ञ और शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने 50 वर्षों के शिक्षण करियर में हजारों छात्रों को शिक्षित किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक पीके बिस्वास को "गणित के जादूगर" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने गणित विषय पर दर्जनों पुस्तकें लिखी हैं और आईआईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए छात्रों को तैयार किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 16:00:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झारखंड के होनहारों का यूपीएससी में दमदार प्रदर्शन, कई अभ्यर्थियों ने किया राज्य का नाम रोशन</title>
                                    <description><![CDATA[संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम में झारखंड के कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया है। दुमका की सुदीपा दत्ता ने 41वीं रैंक प्राप्त कर राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/strong-performance-of-promising-candidates-of-jharkhand-in-upsc-many/article-18578"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/image-(7)_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची :</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में झारखंड के कई अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर राज्य और अपने-अपने शहरों का नाम रोशन किया है।</p>
<h4><strong>रांची के इस्तियाक रहमान ने हासिल की 354वीं रैंक</strong></h4>
<p>राजधानी रांची के डोरंडा स्थित मानिटोटोला, फिरदौस नगर के निवासी इस्तियाक रहमान ने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हुए ऑल इंडिया रैंक 354 हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से रांची शहर में खुशी और गर्व का माहौल है।</p>
<p>इस्तियाक रहमान की सफलता पर सामाजिक संगठन फ्रेंड्स ऑफ वीकर सोसाइटी के अध्यक्ष तनवीर अहमद ने प्रेस बयान जारी कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस्तियाक रहमान की सफलता रांची के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस्तियाक रहमान पिछले लगभग छह महीनों से मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के अंतर्गत हैदराबाद एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। अब यूपीएससी में सफलता प्राप्त कर उन्होंने अपने परिवार, समाज और पूरे रांची शहर को गौरवान्वित किया है।</p>
<p>तनवीर अहमद ने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अगर युवा मेहनत, लगन और सही दिशा में तैयारी करें तो वे किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस्तियाक रहमान की सफलता उन छात्रों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<h4><strong>दुमका की सुदीपा दत्ता ने हासिल की 41वीं रैंक</strong></h4>
<p>इस बार झारखंड के दुमका की सुदीपा दत्ता ने 41वीं रैंक हासिल कर राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यह उनका तीसरा प्रयास था। सुदीपा ने बताया कि उन्होंने अपनी तैयारी दुमका में रहकर ही की और शहर की स्टेट लाइब्रेरी में पढ़ाई कर इस मुकाम तक पहुंचीं।</p>
<p>उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता सहायक पोस्टमास्टर हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। इससे पहले सुदीपा का चयन झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से सीडीपीओ पद पर भी हो चुका है।</p>
<h4><strong>लातेहार के बिपुल गुप्ता बने आईएएस</strong></h4>
<p>वहीं लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव के बिपुल गुप्ता ने 103वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है। बिपुल पवन कुमार गुप्ता और दीपा गुप्ता के पुत्र हैं।</p>
<p>इससे पहले वर्ष 2024 में उन्होंने 368वीं रैंक हासिल की थी, जिसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (IFS) में हुआ था। हालांकि उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, जिसे उन्होंने इस बार अपनी कड़ी मेहनत से पूरा कर लिया। उनकी सफलता की खबर मिलते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया और परिवार सहित ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की।</p>
<h4><strong>साहिबगंज की निहारिका सिन्हा ने भी पाई सफलता</strong></h4>
<p>इसी तरह साहिबगंज की निहारिका सिन्हा ने भी यूपीएससी परीक्षा में 365वीं रैंक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया है। कुलीपाड़ा निवासी निहारिका के पिता निरंजन सिन्हा पेशे से दर्जी हैं, जबकि माता शबनम कुमारी स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर नर्स हैं।</p>
<p>निहारिका ने 2018 में संत जेवियर स्कूल, साहिबगंज से दसवीं और 2020 में रांची के जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की।</p>
<p>वर्ष 2024 में पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में 365वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपने माता-पिता के सपनों को साकार किया।</p>
<h4><strong>धनबाद की श्रुति मोदी ने भी पाई सफलता</strong></h4>
<p>इधर, धनबाद जिले से जुड़ी श्रुति मोदी ने भी यूपीएससी में 569वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। श्रुति के पिता सीताराम मोदी और माता सुषमा मोदी हैं।</p>
<p>उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से बीकॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई की है। वर्तमान में वह बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं और नौकरी के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।</p>
<p>उनकी सफलता पर वर्णवाल सेवा समिति बाघमारा सहित परिवार और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 00:12:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुस्कान कनोडिया ने UGC NET (कॉमर्स) उत्तीर्ण कर बढ़ाया क्षेत्र का मान, शिक्षाविदों ने दी बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[राजमहल अनुमंडल की मुस्कान कनोडिया ने UGC NET (कॉमर्स) परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने परिवार, क्षेत्र और शिक्षण जगत का मान बढ़ाया है। राजमहल मॉडल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह और क्षेत्र के शिक्षाविदों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/success-story/muskaan-kanodia-brought-glory-to-the-region-by-passing-ugc/article-18085"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/capture_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>साहिबगंज : </strong>शिक्षा के क्षेत्र में राजमहल अनुमंडल ने एक बार फिर नया कीर्तिमान गढ़ा है। प्रखंड की मुस्कान कनोडिया (पिता: राकेश कनोडिया एवं माता: बीना कनोडिया) ने यूजीसी नेट परीक्षा में कॉमर्स विषय से सहायक प्राध्यापक हेतु सफलता प्राप्त कर अपने परिवार, क्षेत्र एवं शिक्षण जगत का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर जिला में हर्ष का वातावरण है।</p>
<p>मुस्कान की इस उपलब्धि पर राजमहल मॉडल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जो मेहनत से नहीं डरता, किस्मत भी उसका साथ देती है। उन्होंने कहा कि मुस्कान की सफलता इस कथन को चरितार्थ करती है। निरंतर परिश्रम, लक्ष्य के प्रति समर्पण और सकारात्मक सोच से ही इस प्रकार की उपलब्धि संभव होती है।</p>
<p>प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। मुस्कान कनोडिया की इस सफलता पर महाविद्यालय परिवार एवं क्षेत्र के शिक्षाविदों ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>साहिबगंज</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 17:13:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>9 घंटे प्राइवेट जॉब करते हुए UPSC क्रैक कर IAS बनीं श्वेता भारती, बिहार गर्ल की इंस्पायरिंग सक्सेस स्टोरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>पटना: </strong>बिहार की बेटी श्वेता भारती ने साबित कर दिया कि प्राइवेट जॉब की थकान के बावजूद भी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा क्रैक की जा सकती है। उन्होंने नौकरी के साथ मेहनत कर पहली ही कोशिश में आईएएस बनने का सपना पूरा किया, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।<span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">श्वेता भारती बिहार के नालंदा जिले के राजगीर बाजार इलाके से ताल्लुक रखती हैं, जहां साधारण परिवार में उनका जन्म हुआ। शुरुआती पढ़ाई पटना के ईशान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल से पूरी की, फिर भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इंजीनियरिंग के बाद विप्रो कंपनी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/article/success-story/shweta-bharti-became-ias-by-cracking-upsc-while-doing-private/article-18073"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-02/success-story-of-ias-shweta-bharti_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>पटना: </strong>बिहार की बेटी श्वेता भारती ने साबित कर दिया कि प्राइवेट जॉब की थकान के बावजूद भी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा क्रैक की जा सकती है। उन्होंने नौकरी के साथ मेहनत कर पहली ही कोशिश में आईएएस बनने का सपना पूरा किया, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।<span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">श्वेता भारती बिहार के नालंदा जिले के राजगीर बाजार इलाके से ताल्लुक रखती हैं, जहां साधारण परिवार में उनका जन्म हुआ। शुरुआती पढ़ाई पटना के ईशान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल से पूरी की, फिर भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इंजीनियरिंग के बाद विप्रो कंपनी में नौकरी पकड़ ली, क्योंकि परिवार की जिम्मेदारियां निभानी थीं, लेकिन सिविल सेवा का जुनून दिल में कायम रहा।<span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">हर दिन सुबह से शाम तक नौ घंटे की ड्यूटी के बाद घर लौटकर रात भर यूपीएससी की तैयारी करती रहीं श्वेता। समय निकालना आसान न था, फिर भी हार न मानने की जिद ने उन्हें आगे बढ़ाया। कोचिंग का सहारा नहीं लिया, सिर्फ सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। इससे पहले 64वीं और 65वीं बीपीएससी भी पास कीं, जहां 65वीं में 65वीं रैंक लाकर वेस्ट चंपारण में डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर बनीं।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">2021 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पहली अटेम्प्ट में ही ऑल इंडिया रैंक 356 हासिल कर इतिहास रच दिया। लिखित में 774 और इंटरव्यू में 168 अंक लाए, कुल 942 मार्क्स के साथ सफलता मिली। आज भागलपुर में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में सेवा दे रही हैं, जो उनके संघर्ष की जीत है।<span class="inline-flex">​</span><span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज था सोशल मीडिया से पूरी दूरी। इंटरव्यू में बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप्स और फोन बंद कर दिए, बचे समय को पढ़ाई में झोंक दिया। यह गोल्डन रूल नौकरीपेशा उम्मीदवारों के लिए खास सीख है कि फोकस बनाए रखो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। श्वेता की कहानी बताती है कि जिंदगी के बोझ तले भी सपने पूरे हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 14:51:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2025 नोबेल सीजन: जानिए अब तक कितने भारतीय जीत चुके हैं यह प्रतिष्ठित पुरस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर अभिजीत बनर्जी तक। इन विजेताओं ने साहित्य, भौतिकी, चिकित्सा, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/delhi/2025-nobel-season-know-how-many-indians-have-won-this/article-16601"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-10/resized-image---2025-10-11t141542.445.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong>2025 के नोबेल पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा जारी है, चिकित्सा, भौतिकी और रसायन विज्ञान के पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। अब 13 अक्टूबर को साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र पुरस्कारों का इंतजार कर रहा है, इसलिए अब तक नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीयों पर एक नजर डालते हैं। <br /></p><h4><strong>भारत के नोबले विजेता </strong><br /></h4><p style="text-align:justify;"><strong>रवींद्रनाथ टैगोर (साहित्य, 1913): </strong>गीतांजलि के लिए सम्मानित, जो भारतीय आध्यात्मिकता और गीतात्मकता को विश्व साहित्य में लाने वाली कविताओं का एक संग्रह है। इसके साथ ही, टैगोर पहले एशियाई नोबेल पुरस्कार विजेता बने थे। <br /><strong></strong></p><p style="text-align:justify;"><strong>सी.वी. रमन (भौतिकी, 1930): </strong>रमन प्रभाव की खोज के लिए उन्हें सम्मानित किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से गुजरता है, तब उसकी तरंगदैर्ध्य कैसे बदलती है। <br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>हर गोबिंद खुराना (शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा, 1968):</strong> डीएनए में आनुवंशिक जानकारी प्रोटीन संश्लेषण को कैसे नियंत्रित करती है, इसकी व्याख्या करने के लिए संयुक्त पुरस्कार दिया गया। उन्होंने दुनिया का पहला सिंथेटिक जीन भी बनाया। <br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>मदर टेरेसा (शांति, 1979):</strong> मिशनरीज ऑफ चैरिटी के माध्यम से कोलकाता में गरीबों और बीमारों की देखभाल करने के उनके मानवीय कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (भौतिकी,1983):</strong> चंद्रशेखर सीमा सहित तारों की संरचना और विकास पर उनके सिद्धांत के लिए सम्मानित किया गया। <br />अमर्त्य सेन (आर्थिक विज्ञान, 1998) : कल्याणकारी अर्थशास्त्र में उनके योगदान और गरीबी और विकास को मापने के लिए उनके क्षमता दृष्टिकोण के लिए सम्मानित किया। <br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>वेंकटरमन रामकृष्णन (रसायन विज्ञान, 2009):</strong> राइबोसोम की परमाणु संरचना का मानचित्रण करने के लिए पुरस्कार साझा किया गया, जो चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण खोज है। <br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>कैलाश सत्यार्थी (शांति, 2014): </strong>बाल श्रम के खिलाफ दशकों से चल रही लड़ाई और बच्चों की शिक्षा की वकालत के लिए सम्मानित।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>अभिजीत बनर्जी (आर्थिक विज्ञान, 2019):</strong> वैश्विक गरीबी का अध्ययन करने और उसे कम करने के लिए क्षेत्रीय प्रयोगों के अग्रणी उपयोग के लिए पुरस्कार साझा किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 14:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेहनत की मिसाल: डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर, जानें सूरज यादव की प्रेरक जर्नी</title>
                                    <description><![CDATA[गिरिडीह के छोटे से गाँव से निकले सूरज यादव ने संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की। कभी स्विगी डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करने वाले सूरज ने जेपीएससी 2023 में 110वीं रैंक लाकर डिप्टी कलेक्टर का पद पाया। उनका सफर कड़ी मेहनत, त्याग और परिवार व दोस्तों के सहयोग की मिसाल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/the-example-of-hard-work-is-the-inspiring-journey-of/article-15766"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-08/resized-image-(48)3.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची/गिरिडीह: </strong>एक कहानी जो लाखों लोगों को प्रभावित कर सकती है। कहानी जो दिखाती है कि धैर्य और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी पार की जा सकती हैं। यह कहानी है सूरज यादव और उनके एक मेहनती स्विगी डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर बनने की।</p>
<p style="text-align:justify;">सूरज का शुरूआती जीवन गिरिडीह जिले के एक छोटे से गाँव कपिलो में बीता। उनके पिता राजमिस्त्री थे और परिवार को गुज़ारा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सूरज ने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और एक कॉल सेंटर में काम करना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी चाहत डीएसपी बनने की थी और वे इसकी तैयारी में भी जुट गए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने जेपीएससी परीक्षा की तैयारी करने और इम्तिहान के दौरान दो साल तक हजारीबाग में शिक्षक के रूप में भी काम किया। अपने परिवार की किस्मत बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित, सूरज सिविल सर्वेंट बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए रांची चले गए। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी पढ़ाई और खुद का खर्च चलाने के लिए स्विगी में डिलीवरी बॉय का काम भी किया क्योंकि इस नौकरी से उन्हें काम करने और पढ़ाई करने में आसानी होती थी। इस पूरी यात्रा में, उनके परिवार का प्रोत्साहन अमूल्य साबित हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके माता-पिता और ससुराल वालों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनकी पत्नी ने उन्हें भावनात्मक रूप से मज़बूती दी। उनके पास अपनी बाइक नहीं थी, इसलिए उनके दो दोस्तों ने उन्हें अपनी छात्रवृत्ति के पैसे दिए ताकि वह अपनी नौकरी के लिए एक सेकंड-हैंड बाइक खरीद सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्षों के अथक प्रयास और त्याग के बाद, सूरज ने जेपीएससी 2023 परीक्षा में 110वीं रैंक हासिल की। यह एक ऐसी कामयाबी है जिसने अब अनगिनत लोगों को अपने सपनों को कभी न छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिलीवरी बॉय से लेकर डिप्टी कलेक्टर बनने तक, उन्होंने साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत, लगन और अपनों के सहयोग से कोई भी सपना हासिल करना मुश्किल नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>आर्टिकल</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 17:32:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गांव से लेकर वर्दी तक: हजारीबाग के रोबिन कुमार ने पाई JPSC में 7वीं रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>Story - हजारीबाग:</strong> शुक्रवार सुबह 2 बजे जैसे ही झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का फाइनल परिणाम घोषित हुआ, पूरे राज्य में कई चेहरों पर सफलता की चमक बिखर गई. इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित गंगादोहर गांव के रोबिन कुमार ने प्रदेशभर में सातवीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है. रोबिन अब झारखंड में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर सेवा देंगे.</p>
<p style="text-align:justify;">साधारण किसान परिवार से आने वाले रोबिन की कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है. उनके पिता किसानी करते हैं,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/hazaribagh/from-village-to-uniform-robin-kumar-of-hazaribagh-got-7th/article-14942"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2025-07/resized-image-(18).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Story - हजारीबाग:</strong> शुक्रवार सुबह 2 बजे जैसे ही झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का फाइनल परिणाम घोषित हुआ, पूरे राज्य में कई चेहरों पर सफलता की चमक बिखर गई. इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित गंगादोहर गांव के रोबिन कुमार ने प्रदेशभर में सातवीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है. रोबिन अब झारखंड में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर सेवा देंगे.</p>
<p style="text-align:justify;">साधारण किसान परिवार से आने वाले रोबिन की कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है. उनके पिता किसानी करते हैं, वहीं माता गृहिणी हैं. प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने बड़कागांव के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने मारखम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक किया और हजारीबाग में लॉज में रहकर अपनी तैयारी जारी रखी.</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2020 में भी रोबिन जेपीएससी की मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया. उस समय की निराशा को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. अगले पांच वर्षों तक निरंतर प्रयास, कठोर मेहनत और अनुशासन के साथ उन्होंने खुद को फिर से तैयार किया. और आज, उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता देर से मिल सकती है, लेकिन अगर हौसले बुलंद हों तो मिलना तय है.</p>
<p style="text-align:justify;">कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों में रहकर रोबिन ने यह उपलब्धि हासिल की है. उनका यह सफर उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सुविधाओं की कमी के कारण खुद को पीछे मान बैठते हैं. रोबिन कहते हैं, "मेहनत और लगन के साथ किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता. जो आज असफल हुए हैं, वे निराश न हों. अगर ईमानदारी से प्रयास करते रहें, तो एक दिन सफलता ज़रूर मिलेगी."<br />जेपीएससी परिणाम घोषित होने के बाद रोबिन के लॉज में जश्न का माहौल है. उनके माता-पिता गांव में ही हैं और बेटे की सफलता की खबर सुनकर भावुक हो उठे. रोबिन के बड़े भाई, जो वर्तमान में झारखंड पुलिस में कार्यरत हैं और बीते सात वर्षों से जेपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, ने भी खुशी जताते हुए कहा कि, “आज रोबिन की सफलता ने हमारे परिवार को एक नई उम्मीद दी है, अब मेरा विश्वास और मजबूत हो गया है कि मेरी बारी भी जल्द आएगी.”</p>
<p style="text-align:justify;">रोबिन की यह सफलता न केवल एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती. </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हजारीबाग</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                            <category>सक्सेस स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Jul 2025 20:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sujit Sinha]]></dc:creator>
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