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                <title>विधानसभा चुनाव 2024 - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>Ranchi news: सिरमटोली चौक में बन रहे निर्माणाधीन फ्लाईओवर का हेमन्त सोरेन ने किया औचक निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मेकॉन चौक से सिरमटोली चौक तक बन रहे निर्माणाधीन फ्लाईओवर का औचक निरीक्षण किया, मौके पर विधायक कल्पना सोरेन एवं राज्य सरकार के वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/ranchi/ranchi-news-hemant-soren-did-a-surprise-inspection-of-the/article-13043"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-12/press_release_75327_03-12-2024-222.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राँची:</strong> मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज राजधानी रांची में मेकॉन चौक (वन भवन के नजदीक) से सिरमटोली चौक तक बन रहे निर्माणाधीन फ्लाईओवर का औचक निरीक्षण किया. मौके पर विधायक कल्पना सोरेन एवं राज्य सरकार के वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे. निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने फ्लाईओवर के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से फ्लाईओवर की विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस फ्लाईओवर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा पर विशेष ध्यान दें. </p>
<p style="text-align:justify;">फ्लाईओवर निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में भी राज्य सरकार द्वारा कांटाटोली से सिरमटोली चौक तक बने फ्लाईओवर परियोजना को निर्धारित समय सीमा से पहले ही राजधानी वासियों को समर्पित किया जा चुका है. मेकॉन चौक (वन भवन के नजदीक) से सिरमटोली चौक तक बन रहे यह फ्लाईओवर भी निर्धारित समय सीमा से पहले ही रांची वासियों को समर्पित की जा सके इस कार्य में राज्य सरकार के पदाधिकारी, इंजीनियर एवं फ्लाईओवर  निर्माण में लगे श्रमिक पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने-अपने कार्य में जुटे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि इस फ्लाईओवर परियोजना का भी जल्द से जल्द शुभारम्भ हो, ताकि लोगों को ट्रैफिक की समस्या से निजात मिल सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ्लाईओवर चूंकि रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर से गुजर रहा है इसीलिए रेल गाड़ियों के आवागमन से संबंधित बिंदुओं का भी ध्यान रखा जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फ्लाईओवर का देश और राज्य में एक अलग पहचान होगा. यह फ्लाईओवर अपने आप में एक अनोखा फ्लाईओवर होगा. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 20:31:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Arpana Kumari]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाबूलाल मरांडी को लेकर यह क्या बोल गए निरंजन राय, समृद्ध झारखंड का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक राज धनवार को खास कर तिसरी को पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का कर्म भूमि माना जाता था. उनकी (बाबूलाल) यह राज धनवार की सीट बहुत सुरक्षित मानी जाती थी, लेकिन यहां निरंजन राय की एंट्री के बाद पुरे प्रदेश में इस बात की चर्चा है कि अब बाबूलाल मरांडी के सियासत का क्या होगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/what-did-niranjan-rai-say-about-babulal-marandi-exclusive-interview/article-12622"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/darkside-sanjay-mehtagdg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चुनाव स्पेशल: </strong>गिरिडीह का तिसरी प्रखंड यानी राज धनवार का एक प्रखंड और उसका एक गांव पपिलो से निरंजन राय ने झारखंड सूबे की सियासत में एक हलचल पैदा कर दी है. हलचल इसलिए कि अब तक राज धनवार को खास कर तिसरी को पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का कर्म भूमि माना जाता था. उनकी (बाबूलाल) यह राज धनवार की सीट बहुत सुरक्षित मानी जाती थी, लेकिन यहां निरंजन राय की एंट्री के बाद पुरे प्रदेश में इस बात की चर्चा है कि अब बाबूलाल मरांडी के सियासत का क्या होगा. इस संबध में समृद्ध झारखंड की टीम ने निरंजन राय से बात की. कभी बाबूलाल के खासम खास रहे निरंजन राय ने बाबूलाल का साथ छोड़ धनवार में पॉलिटिकल एंट्री क्यों ली, आखिर इसके पीछे क्या वजह रही, पढ़िए इस रिपोर्ट में.   </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> आपकी गिनती बाबूलाल मरांडी के खासमखास चेहरों में की जाती है. इस बार आपने उनकी चुनावी किश्ती को फंसाने का फैसला कैसे कर लिया?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय: </strong>कैसे हम फंसाने का फैसला किये हैं जी. वो (बाबूलाल मरांडी) अपने पार्टी कके उम्मीदवार हैं, हम निर्दलीय प्रत्याशी हैं और निर्दलीय हमको लगता हैं यहां 20 प्रत्याशी होंगे तो बाकि सब जितना निर्दलीय खड़ा है वो सब नहीं फंसाया है क्या.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> यह तो इस बात से ही पता चल सकता है क्यूंकि भाजपा के बड़े बड़े नेता आपके घर के ड्योढ़ी पर आपको मनाने आ रहे हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> अगर मनाने का यह सिलसिला पहले हुआ रहता तो आज सीन कुछ और रहता. आखिर यह सब नौबत आया क्यूं. </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> यह तो बेहतर आप ही बता सकते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> बेहतर तो बताने की एक ही बात बोल रहे हैं आप. अभी तो कल ही हम पर आचार संहिता का एक केस हुआ है. अगर कोई समर्थक कहां कसम खायेगा, क्या करेगा उसमें हमार क्या दोष है. चुनाव आयोग में ये हो गया कि इसको (निरंजन राय) झारखंड से ही बाहर कर दिया जाय. यहां तो नारा है की 1932 का खतियान लागू करें. हमलोग तो यहां 200 साल से भी पुराने बाशिंदे हैं. हमलोग 1932 नहीं 1632 खतियान वाले हैं. </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> एक चीज बताइये अभी आप कह रहे थे विर्वाचन आयोग के द्वारा आप पर मामला दर्ज किया गया. यह तो आप भली भाँती जानते होंगे कि जो कदम आप उठाने जा रही हैं उसकी अंतिम परिणति क्या होगी?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> हमको पता है हम पहेल भी बोल दिए हैं कि आज तक मेरा लाइफ में मीडिया के माध्यम सभी हम चैलेंज कर रहे हैं की अगर 107 मेरा नाम पर कहीं निकाल दे मैं चुनाव से बैक हो जाऊंगा. </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>दिल के किसी कोने में डर तो नहीं न लग रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> इसलिए तो बोल रहे हैं कि मेरे पूरा लाइफ में अगर 107 मेरे नाम पर कोई निकाल दे की इस अपराधी का एक भी आपराधिक मामला है या कुछ भी जैसे किसी पब्लिक को सताया हो या कुछ भी या बेईमानी कर लिया हो या फिर चेक बाउंस का भी कुछ किया हो, इतना भी दिखा दे तो मैं चुनाव से बैक हो जाऊंगा. इन सब मामलों से जब तक मेरा जिंदगी पाक साफ़ है, और जब तक हम सेवा करने के लिए आये हैं. मेरा उम्र 45-46 का हो गया है. इस उम्र तक हम नीट एंड क्लीन हैं. जनता की सेवा करने हम आये हैं. उसमें अगर अब हम पर 1000 केस भी होगा तो हमें मंजूर है.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> कुछ लोगों का दावा है कि आप जनता की सेवा करने नहीं, बाबूलाल मरांडी की कश्ती को फंसाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> जिनको जो कहना है कहे. क्या हमको चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है, है ना. तो अब राज धनवार हम घूम रहे हैं.आप जाइये तो कहीं भी हमरा घर से बहार कहीं भी अगर कुछ बना हुआ है. आखिर जनता हमको चुनाव में क्यूं उतारा है. </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>गांव में आ रहे थे तो पुल देखे जो आप के गांव को कनेक्ट करता है. वह पुल तो बाबूलाल जी के द्वारा बनवाया गया है न?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> वो 2002 में बनाया गया था.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> तो उस समय तो बाबूलाल जी सीएम थे.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> तो 2002 में सरकार बनाइयेगा तो काम करियेगा नहीं क्या. जनता जब वोट देगी, हमको अगर वोट देगी तो तो क्या हम अपना काम अपना बाबूजी के घर से करेंगे. जनता अगर हमको वोट डे रही है तो यह मेरा दायित्व बनता है कि जनता का काम हम करें.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> राज धनवार में बाबूलाल जी एक बड़ा चेहरा और चर्हित चेहरा रहे हैं बावजूद इसके सूबे का विकास क्यों नही हुआ है अब तक?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> यह तो आप उन्हीं से पूछिये.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>आप भी तो जनता की आवाज हैं.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> जनता जान रही है तभी तो हमको खड़ा की है. जनता कह रही है कि भैया सब आइए, बीए वाला को देख लिए हैं तो चलिए इस बार मैट्रिक फेल वाला को भी देख लेते हैं.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>झारखंड की सियासत में एक पहचान आपकी बन रही है. वह पहचान है आपकी बेबाक राय की.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय: </strong>बेबाक राय नहीं. यह सच्चाई राय है. जो सच है वही बोल रहे हैं हम और सच को ही बयान कर रहे हैं. झूठ को बयान हम नहीं करते हैं.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> आपका यही अंदाज तो जनता पसंद करती है. </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> झूठ को बयान हम नहीं दे रहे हैं. आखिर जनता ने क्या देखा कि जनता ने हमको खड़ा किया. जब उम्मीदवार से मोह भंग हो गया, तब ना. आप पूछते हैं बाबूलाल जी बहुत करीबी हैं. ऐसा क्या हुआ कि बाबूलाल जी से हम हट गए. </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> इसका जवाब तो मेरे पास नहीं हो सकता. इसका जवाब तो आप ही दे सकते हैं.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय: </strong>वही बात है ना. वकत आने पर वो भी जवाब आपको मिलेगा.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> एक बात बताइये, राज धनवार के विकास के लिए आप सियासी अखाड़े में कूद चुके हैं तो एक मास्टर प्लान या रोड मैप तो आपके दिमाग में होगा?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> हम राज धनवार का नेता नहीं बेटा है. धनवार में जितना गांव में सब का दौरा कर किये हैं. सब जगह देखे हैं कि क्या रोड है. रोड है ही नहीं. जब रोड ही नहीं है तो क्या रोड मैप दिखेगा कहीं. फिर क्या रोड मैप तैयार करेंगे हम.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>अच्छा एक चीज बताइये इमानदारी से. अभी विधानसभा चुनाव है फिर चुनाव का परिणाम आता है तो हैंग असेंबली में आप कहां खड़ा करेंगे अपने आपको?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> वक़्त बतायेगा. हम जनता की सेवा करने के लिए आये हैं. जैसा सिचुएशन क्या होगा, नहीं होगा वो तो वक़्त बतायेगा. हमारा एक ही नारा है कि हिंदु-मुस्लिम की खाई को दूर करना, ऊंच-नीच के भेदभाव को खत्म करना और जातिवाद जो है उसको खत्म करना.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> इस बात से याद कि एक जगह आप अल्लाहु-अकबर का नारा भी लगाते देखे देखे गए थे.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> आज भी ले लेंगे वो नारा. हम कहते हैं कि हमको मंदिर में पूजा करने से कौन रोकता है. कोई मुसलमान रोकने गया है क्या. कोई मुसलमान को कोई मस्जिद में जाने से कोई रोका है क्या. तो अल्लाह किसका नाम है, भगवान का ही. राम और रहीम क्यूं हुआ. ‘र’ से राम है और ‘र’ से रहीम भी है. अगर भगवान दो है तो सूर्य दो क्यूं नहीं है. आपका का ब्लड दो कलर का क्यों नहीं है. तो अल्लाह हो या सिख हो या इसाई हो हम को बोलने से कोई दिक्कत नहीं है. हमको किसी धर्म से कोई प्रॉब्लम नहीं है. हम मुसलमान भाइयों से भी एक ही बात बोलना चाहते हैं कि अगर जातिवाद और अगर धनवार को सुधारना चाहते हैं तो जातिवाद से हट कर आइये. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हिंदु-मुस्लिम के बीच की जो खाई है मैं उसको मिटा कर रहूंगा. सिर्फ आपका साथ चाहिये.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> एक तरफ देश में ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा चल रहा है. एक तरफ निरंजन राय इस बात का पैगाम दे रहे हैं कि हिंदु, मुस्लिम, सिख, इसाई सब आपस में भाई-भाई.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय: </strong>सदा है, सदा रहेगा. एक बात बोलते हैं कि बंटोगे तो कटोगे का नारा चुनाव के समय ही क्यूं आता है. चुनाव के पहले क्यूं नहीं आता है. जब चुनाव आता है तब ही धर्म खतरा में क्यूं आता है. जब चुनाव आता है तो इस्लाम खतरे में आ जाता है, हमारा हिंदु धर्म खतरे में आ जाता है. चुनाव खत्म होने के बाद तो देखते हैं कि सब साथे रहता है. हमारे गांव में हमार गोतिया मुसलमान है. 200 घर यहां मुसलमान का है. यह सब चुनाव के बिहान ही क्यूं होता है. फिर तो हिंदु-मुसलमान एके साथ रहता है.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>पूरे झारखंड में आपने एक हलचल पैदा कर दिया है अपने इस अंदाज़ से.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> यह अंदाज़ की बात नहीं है जो सच है उसकी बात बोल रहे हैं. आप भी हिंदु हैं आपके भी दर्जनों मुस्लिम दोस्त होंगे आपको कितने मुसलमान से आज तक दिक्कत हुआ है. फिर यह खतरा वाली बात क्यूं.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> सियासत का खेल है सब.                            </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> यहां तो जनता को खेलना है अब. राज धनवार से एक मैसेज देना है की यह सब अब नहीं चलेगा. आज हम निर्दलीय खड़ा हुए हैं. किसी पार्टी से यह सब बोलते तो शोभा नहीं देता. अगर जनता मुझ निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव में जीताती है तो वह हर व्यक्ति को जो यह धर्म का खेल खेलता है, उन सबके मुंह पर एक तमाचा पड़ेगा. हम लोग बंटेंगे कटेंगे वाले नहीं, हम सब लोग एक जोर ही रहेंगे. </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>अभी तो आप पे सिर्फ चुनाव आयोग की कार्रवाई हुई है, आने वाले दिनों में इससे भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है आप पर.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय: </strong>हम तैयार हैं. अभी तक तो पाक साफ़ हैं ना हम. कल किसने देखा है. हम जेल जाने के लिए तैयार हैं.हम आज तक दाढ़ी नहीं बढाये हैं. हम गच्छ लिए हैं कि दाढ़ी या तो जेल में बढ़ेगा या तो बेल में बढ़ेगा. </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> हेमंत सोरेन व्यक्तिगत रूप से आपको कैसे लगते हैं?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> मैं किसी के बारे में या किसी पार्टी के बारे में अभी कोई टिपण्णी नहीं करूंगा. इन बातों से मुझे कोई ताल्लूक नहीं है. मैं राज धनवार चुनाव लड़ रहा हूं. हम राज धनवार की जनता की बात करते हैं. इसके अलावा हमको और दूसरी कोई बात नहीं करनी है. हम कोई पार्टी नहीं कि किसी दुसरे को बारे में बोलेंगे.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>समृद्ध झारखंड:</strong> समृद्ध झारखंड के मंच से राज धनवार की जनता को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>निरंजन राय:</strong> अगर बदलाव चाहिये तो आपको यह संकल्प लेना ही पड़ेगा बदलाव चाहिये तो एकजुट होना ही पड़ेगा. बांटने के लिए तो अभी 8 दिन है. अभी बहुत खेला होगा. हम एक ही चीज कहते हैं कि धनवार में अगर सौहार्द की स्थापना करना चाहते हैं तो सारा हिंदु-मुस्लिम एक साथ आइये और एक मंच पर आइये और एक साथ चल के दिखाइये कि हम लोग किसी पार्टी से नहीं. पार्टी हमसे है, हम किसी पार्टी से नहीं. हमलोग जब चाहेंगे सत्ता परिवर्त्तन कर सकते हैं. यही राज धनवार की जनता से हमारी प्रार्थना है कि अगर आज नहीं बदल पाए तो अब कभी नहीं बदल पायेंगे. </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>ट्रेंडिंग</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Nov 2024 15:42:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पोटका विधानसभा चुनाव 2024: मीरा के सामने संजीव सरदार का कीर्तिमान धवस्त करने की चुुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पोटका विधानसभा की तीन उस सीट में शामिल है, जहां वर्ष 2019 में झामुमो ने जीत का परचम 50 फीसदी से अधिक मतों से हासिल किया था. बहरागोड़ा में समीर मोहंती को 61.99 फीसदी मतों के साथ जीत मिली थी, सिसई में सुसारण होरो ने भाजपा  के दिनेश उरांव को 57.85  के साथ शिकस्त  देने में कामयाबी हासिल की थी, जबकि पोटका में संजीव सरदार को मेनका सरदार को करीबन 55.6 फीसदी मत के साथ पराजित करने में कामयाबी मिली थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/potka-assembly-elections-2024-challenge-for-meera-to-destroy-sanjeev/article-12438"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(32).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड के सियासी संग्राम में झामुमो का किला कोल्हान को भेदना भाजपा की एक बड़ी चुनौती है. यही कारण है कि दोनों ही तरह से जबरदस्त मोर्चेबंदी जारी है. आज कल्पना सोरेन सराईकेला के दौरे पर हैं तो कल अमित शाह  धालभूमगढ़ में चुनावी रैली करेंगे, इसके साथ ही चार नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी चाईबासा में होंगे. यदि हम कोल्हान की बात करें तो भाजपा के लिए इस बार सराईकेला और पोटका सीट प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है, सराईकेला से पूर्व सीएम चंपाई सोरेन अपनी सियासी जिंदगी में पहली बार भाजपा के चुनाव चिह्न पर अखाड़े में हैं, तो भूमिज बहुल पोटका से पहले बार भाजपा ने एक गैर भूमिज चेहरा पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को अखाड़े में उतारा है. </p>
<h3> बदल गया है दल का झंडे का रंग</h3>
<p>सराईकेला की बात करें तो पिछली बार इस सीट से भाजपा उम्मीदवार गणेश महली को झामुमो उम्मीदवार चंपाई सोरेन के हाथों करीबन 16 हजार मतों से मात खानी पड़ी थी, हालांकि वर्ष 2014 चंपाई सोरेन को गणेश महली के हाथों 1,115 मतों से मात खानी पड़ी थी. इस सियासी संग्राम की सबसे मजेदार स्थिति यह है कि इस बार दोनों ने अपना-अपना दल और झंडे का रंग बदल लिया है इस हालत में देखना होगा कि इस बार यह कोशिश कितनी रंग लाती है. लेकिन भाजपा को सबसे कठिन चुनौती पोटका से मिलने की उम्मीद है</p>
<h3><strong>भूमिज के किले को भेदना मीरा मुंडा की चुनौती</strong></h3>
<p> <br />दरअसल पोटका विधानसभा की तीन उस सीट में शामिल है, जहां वर्ष 2019 में झामुमो ने जीत का परचम 50 फीसदी से अधिक मतों से हासिल किया था. बहरागोड़ा में समीर मोहंती को 61.99 फीसदी मतों के साथ जीत मिली थी, सिसई में सुसारण होरो ने भाजपा  के दिनेश उरांव को 57.85  के साथ शिकस्त  देने में कामयाबी हासिल की थी, जबकि पोटका में संजीव सरदार को मेनका सरदार को करीबन 55.6 फीसदी मत के साथ पराजित करने में कामयाबी मिली थी. गौरतलब यह भी है कि सिसई और पोटका दोनों ही विधानसभा में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा है, तो क्या पोटका मीरा मुंडा को महिला मतदाताओं का साथ मिल सकता है. मीरा मुंडा की मुश्किल यह है कि वह खुद मुंडा जनजाति से आती है, जबकि पोटका को भूमिज जनजाति का किला माना जाता है. इस हालत में इस बार पोटका का सियासी रंग क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 19:03:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा को एक और झटका! अब हेमंत के खिलाफ बरहेट से ताल ठोक चुके साइमन मालटो ने छोड़ा साथ</title>
                                    <description><![CDATA[ वर्ष 2019 में साइमन मलटो ने बरहेट विधान सभा से भाजपा के चुनाव चिह्न पर हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव चुनाव लड़ते हुए 47,985 वोट पाया था, जबकि हेमंत सोरेन को 73,725 के साथ जीत मिली थी. साइमन मलटो का आरोप है कि टिकट वितरण में भाजपा उस पहाडिया जनजाति की उपेक्षा कर रही है, जो अब तक उसका परंपरागत वोटर रहा है. साइमन मलटो भी उसी पहाड़िया समुदाय से आते हैं. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/another-blow-to-bjp-now-simon-malto-who-had-fought/article-12432"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/simon-malto1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> कल केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का झारखंड दौरा के ठीक पहले भाजपा को दो करारा झटका लगा है, पहले झारखंड भाजपा उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा ने पार्टी छोड़ने का एलान किया और अब  वर्ष 2019 में बरहेट से हेमंत सोरेन के खिलाफ ताल ठोकने वाले साइमन मालटो ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है. </p>
<h3><strong>पहाड़िया जनजाति का उपेक्षा करने का आरोप</strong></h3>
<p><br />आपको बता दें कि वर्ष 2019 में साइमन मलटो ने बरहेट विधान सभा से भाजपा के चुनाव चिह्न पर हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव चुनाव लड़ते हुए 47,985 वोट पाया था, जबकि हेमंत सोरेन को 73,725 के साथ जीत मिली थी. साइमन मलटो का आरोप है कि टिकट वितरण में भाजपा उस पहाडिया जनजाति की उपेक्षा कर रही है, जो अब तक उसका परंपरागत वोटर रहा है. साइमन मलटो भी उसी पहाड़िया समुदाय से आते हैं. संताल में संतालियों के बाद पहाडिया जनजाति की एक बड़ी आबादी है. माना जाता है कि पहाड़िया जनजाति के बीच साइमन मलटो का मजबूत सियासी पकड़ है. साइमन मलटो के पहले लुईस मरांडी भी भाजपा छोड़कर झामुमो का दामन साथ चुकी है. लुईस मरांडी को भी संताल में भाजपा का एक बड़ा चेहरा समझा जाता था, वर्ष 2014 में दुमका सीट से हेमंत सोरेन जैसे कद्दवार चेहरे को भी शिकस्त देने का कारनामा भी कर चुकी है. बावजूद इसके इस बार बेटिकट कर दी गयी. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 17:43:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> रघुवर दास के खिलाफ झामुमो का बड़ा आरोप, छत्तीसगढ़ से परिजनों को लाकर टाटा में नौकरी दिलवाने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[हेमंत सरकार ने झारखंड में स्थित कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए 75 फीसदी नौकरी स्थानीय युवाओं को देने का कानून बनाया था. जिसके विरोध में पीआईएल दायर किया गया था. अब इस चुनावी संग्राम के बीच झामुमो इस मामले को उछाल कर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.     ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/jmms-big-allegation-against-raghuvar-das-is-that-he-brought/article-12428"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/jmm-(2).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>चुनावी सरगर्मी के बीच झामुमो ने रघुवर दास के खिलाफ एक बार फिर से मोर्चा  खोल दिया है, झामुमो का दावा है कि रघुवर दास ने छतीसगढ़ से अपने परिजनों को थोक भाव में लाकर टाटा कंपनी में नौकरी दिलवाया, जिसके कारण झारखंडी युवाओं की हकमारी हुई.  अपने एक्स एकाउंट पर पूर्व सीएम रघुवर दास के खिलाफ आरोपों की बौछार करते हुए झामुमो ने लिखा है कि “ये हमारा नहीं भाजपा के आम कार्यकर्ताओं की लिस्ट है। रघुबर दास जी ने हाथी उड़ाने के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ बाहरियों को बहुत तरीक़े से Tata कंपनी में बसाने का कार्य किया है। - आख़िर भाजपा झारखंडियों को अपना क्यों नहीं मानती? आख़िर वे हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ लूटने का कार्य क्यों करते हैं ? जब हमने निजी कंपनियों में झारखंडियों के लिए 75% आरक्षण लगाया तो विरोध किसने किया? PIL किसने लगाया? </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">ये हमारा नहीं भाजपा के आम कार्यकर्ताओं की लिस्ट है। <br /><br />रघुबर दास जी ने हाथी उड़ाने के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ बाहरियों को बहुत तरीक़े से Tata कंपनी में बसाने का कार्य किया है। <br /><br />- आख़िर भाजपा झारखंडियों को अपना क्यों नहीं मानती ? <br /><br />- आख़िर वे हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ लूटने का कार्य… <a href="https://t.co/1o5zMWB4zD">pic.twitter.com/1o5zMWB4zD</a></p>
— Jharkhand Mukti Morcha (@JmmJharkhand) <a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1852309182130590122?ref_src=twsrc%5Etfw">November 1, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<h3><strong>स्थानीय कंपनियोंं ने झारखंडियों के लिए 75 फीसदी आरक्षण</strong></h3>
<p><br />आपको बता दें कि हेमंत सरकार ने झारखंड में स्थित कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए 75 फीसदी नौकरी स्थानीय युवाओं को देने का कानून बनाया था. जिसके विरोध में पीआईएल दायर किया गया था. अब इस चुनावी संग्राम के बीच झामुमो इस मामले को उछाल कर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.     </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 16:51:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा को एक और झटका! प्रदेश उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा  ने थामा झामुमो का दामन</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी ने अटल-आडवाणी के उस युग से कदम पीछे खींच लिए हैं, और इस बदलाव ने मेरे हृदय में गहरा दर्द पैदा कर दिया है। यह दर्द और गहरा तब हुआ जब मुझे और मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार दरकिनार किया गया। मेरे पिताजी के राजनीतिक और सामाजिक योगदान, मेरे परिवार की विरासत, और मेरे अपने बीस वर्षों के मेहनत और निष्ठा को नजरअंदाज किया गया।मेरी राजनीतिक और सामाजिक पूंजी को समाप्त करने के लिए लगातार षड्यंत्र रचे जाने लगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/another-blow-to-bjp-state-vice-president-pranab-kumar-burma/article-12423"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(31).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong>  विधानसभा चुनाव के दौरान पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के द्वारा भाजपा छोड़ने के सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज प्रदेश उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा ने भाजपा छोड़ने का एलान करते हुए झामुमो का दामन थाम लिया.<br />आपको बता दें कि प्रणव वर्मा कोडरमा संसदीय सीट से पांच बार (1977,1980,1989,1996 और 1998) के सांसद रहे रीतलाल वर्मा के पुत्र हैं.  सियासी गलियारों में प्रणव वर्मा को लेकर कोडरमा विधानसभा से चुनाव लड़ने की खबर थी. लेकिन भाजपा ने इस बार भी डॉ नीरा यादव पर दांव लगाया, और अब प्रणव वर्मा ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए झामुमो की सवारी करने का एलान कर दिया है. <br />इसकी जानकारी साक्षा करते हुए अपने फेसबूक पोस्ट पर प्रणव वर्मा ने लिखा है कि “प्रिय साथियों,<br />मैं भारी मन और गहरे भावुकता के साथ आप सभी के समक्ष कुछ शब्द साझा कर रहा हूँ। जैसा कि आप सब जानते हैं, मेरे पिताजी भूतपूर्व भाजपा सांसद स्व. रीतलाल प्रसाद वर्मा जी ने अपना संपूर्ण जीवन, अपना खून-पसीना इस भाजपा को खड़ा करने में लगा दिया था। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी और आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर झारखंड (तत्कालीन दक्षिण बिहार) में पार्टी को अपने अस्तित्व में लाने में उन्होंने जो योगदान दिया।उनके बलिदान, त्याग और मेहनत का हर कण आज भी हमारे दिलों में बसता है।<br />यह मेरी सौभाग्य की बात थी कि मुझे उस पार्टी की सेवा करने का अवसर मिला जिसके हर कण में मेरे पिताजी की मेहनत की महक है। मैंने भी अपनी हर साँस, अपने तन-मन-धन से पार्टी को सींचने का संकल्प लिया। जो भी दायित्व मुझे सौंपा गया, उसे मैंने निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।</p>
<h3><strong> जीवन खपाने वाले कार्यकर्ताओं का अब भाजपा में सम्मान नहीं</strong></h3>
<p><br />लेकिन, पार्टी के लिए अपना जीवन खपा देने वाले कार्यकर्ताओं को जब सम्मान नहीं मिलने लगा तो मुझे ऐसा महसूस हुआ कि अब वह पार्टी, वह आदर्श, वह सिद्धांत नहीं बचे हैं जिनके लिए मेरे पिताजी ने अपना सर्वस्व अर्पित किया था। पार्टी ने अटल-आडवाणी के उस युग से कदम पीछे खींच लिए हैं, और इस बदलाव ने मेरे हृदय में गहरा दर्द पैदा कर दिया है। यह दर्द और गहरा तब हुआ जब मुझे और मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार दरकिनार किया गया। मेरे पिताजी के राजनीतिक और सामाजिक योगदान, मेरे परिवार की विरासत, और मेरे अपने बीस वर्षों के मेहनत और निष्ठा को नजरअंदाज किया गया।मेरी राजनीतिक और सामाजिक पूंजी को समाप्त करने के लिए लगातार षड्यंत्र रचे जाने लगे।</p>
<h3><strong>रीतलाल वर्मा और जेपी कुशवाहा के योगदान को धूमिल किया जा रहा</strong></h3>
<p>यह बात मेरे लिए अत्यंत दुखदायी रही है कि जहाँ मेरे पिताजी और बड़े पिताजी स्व. जेपी कुशवाहा जी जैसे महान नेताओं ने हमारे समाज को एक दिशा देने का कार्य किया, वहाँ उनके योगदान को धूमिल करने की कोशिश की गई। इन सब से दुखी होकर भारी मन से मैं पार्टी को छोड़ रहा हूँ और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित तमाम दायित्वों से इस्तीफा दे रहा हूं।<br />मैं पुनः एक नई ऊर्जा, नए विश्वास और नई सोच के साथ आप सबके बीच आ रहा हूँ। मेरा विश्वास है कि जैसे आप मेरे पिताजी के कंधे से कंधा मिलाकर चले थे, जैसे आपने मुझे सदा अपने बेटे या भाई की तरह सहयोग किया वैसे ही मेरे साथ आगे भी इस नए सफर में साथ रहेंगे,आपका यह स्नेह और समर्थन मेरे लिए बहुत मूल्यवान है, और उम्मीद करता हूँ कि आपके आशीर्वाद का यह मोल मैं हमेशा संजो कर रखूँगा। <br /><br /></p>
<h3><strong> झामुमो की सदस्यता ग्रहण करने का एलान</strong></h3>
<p>आज झारखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री और मेरे बड़े भाई माननीय Hemant Soren जी एवं गांडेय विधायक सब भाभी जी श्रीमती कल्पना सोरेन जी की गरिमामय उपस्थिति में बड़े भाई गिरिडीह विधायक श्री Sudivya Kumar Sonu जी व राज्यसभा सांसद श्रीमती महुवा माजी जी के आशीर्वाद से मैने सपरिवार झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ग्रहण कर जल जंगल जमीन और झारखंडी अस्मिता की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस शुभ अवसर पर मेरी आदरणीय माता जी श्रीमती चंपा वर्मा जी, धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा वर्मा जी, जमुआ विधायक श्री केदार हाजरा जी भी उपस्थित रहे। मेरा परिवार सदा से गुरु जी आदरणीय शिबू सोरेन जी के परिवार का हिस्सा रहा है और मृत्यु के पूर्व मेरे पिताजी स्व. रीतलाल प्रसाद वर्मा जी झारखंड की भलाई हेतु झामुमो में शामिल हुए थे और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भी भूमिका अपने अंतिम दिनों में निभाए ये। आज पुनः हमारे दोनों परिवारों का मिलन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 15:38:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;बंटोगे तो कटोगे&quot; के बाद अब सरना धर्म कोड का आसरा</title>
                                    <description><![CDATA[क्या वाकई भाजपा आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म कोड देने को तैयार है, या फिर यह महज एक  चुनावी नारा है. यदि भाजपा वास्तव में आदिवासी समाज को सरना धर्म कोड देने का इरादा रखती है तो फिर इसमें देरी क्यों की जा रही है? झारखंड में हेमंत सरकार और बंगाल में ममता बनर्जी तो पहले ही विधानसभा से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेज चुकी है, फिर भाजपा आदिवासी समाज की इस पुरानी मांग पर अपनी मुहर क्यों नहीं लगाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/after-%22if-you-divide-you-will-be-divided%22-now-the/article-12398"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(30).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"><strong>रांची: </strong>झारखंड के चुनावी संग्राम में “बंटोगे तो कटोगे” नारे का अभी ठीक से एंट्री भी नहीं हुई कि अचानक भाजपा बैकफूट पर नजर आने लगी है, अब तक हिन्दूओं को एकजूट करने का स्लोगन देती रही भाजपा का अब इस चुनावी संग्राम में सरना धर्म कोड को लेकर आयी है, उसका दावा है कि वह तो सरना धर्म कोड का पैरोकार है, यह तो कांग्रेस है, जिसने इसको हटाने का काम किया है. इसकी राह में अड़चने डालने की कोशिश की है.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>सियासी शिकस्त के बाद योगी आदित्यनाथ ने उछाला था नारा</strong></h3>
<p style="text-align:left;">दरअसल लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली करारी शिकस्त के बाद योगी आदित्यनाथ ने बंटोगे तो कटोगे के नारे के साथ एक बार फिर से हिन्दू मतों का धुर्वीकरण करने की कोशिश की है, ताकि उपचुनाव में लोकसभा चुनाव के समान हिन्दू मतों का विभाजन नहीं हो, और कम से कम उपचुनाव में पार्टी सम्मान जनक सीट हासिल करने में  कामयाब रहे.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>हिन्दू स्वाभिमान यात्रा पर निकल पड़े गिरिराज सिंह</strong> </h3>
<p style="text-align:left;">इधर यूपी में योगी आदित्यनाथ ने यह नारा उछाला और उधर गिरिराज सिंह बिहार के मुस्लिम बहुल इलाके में बंटोगे तो कटोगे के साथ हिन्दू स्वाभिमान यात्रा पर निकल पड़े, लेकिन गिरिराज सिंह के इस पैंतरे का नीतीश कुमार की पार्टी जदयू खुलकर विरोध करने लगी, अब तक साफ सुधरी राजनीति करती आयी जदयू और नीतीश कुमार को इस नारे में अपनी सियासी जमीन का बंटाधार होता नजर आने लगा. दरअसल भाजपा के साथ तमाम गलबहियां के बावजूद नीतीश कुमार की रणनीति अपने चेहरे को गैर सम्प्रादायिक बनाये रखने की रही है, और वह एक हद तक इसमें कामयाब भी होते रहे हैं. मुस्लिम समाज का ठीक ठाक वोट जदयू के हिस्से आता रहा है. लेकिन गिरिराज सिंह के हिन्दू स्वाभिमान यात्रा से उसे अपनी जड़े हिलती नजर आयी और हालत यह हो गयी कि संघ और भाजपा परिवार दोनों ने गिरिराज सिंह के इस हिन्दू स्वाभिमान यात्रा से किनारा कर लिया.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>काम नहीं आया बंटोगे तो कटोगे का नारा!</strong></h3>
<p style="text-align:left;">लेकिन सबसे उलझन भरी स्थिति सूबे झारखंड में नजर आ रही है, अभी ठीक से बंटोगे तो कटोगे के नारे की एंट्री भी नहीं हुई थी कि भाजपा के रणनीतिकारों ने इसका बंटाधार कर दिया. झारखंड चुनाव सह प्रभारी हिमंता विश्व सरमा ने बांग्लादेशी घुसपैठ और “बंटोगे तो कटोगे” से किनारा करते हुए अब इस चुनावी संग्राम में सरना धर्म कोड की एंट्री करवा दी है. और इसके साथ ही यह सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या बांग्लादेशी घुसपैठिया के तीर से साथ ही क्या ‘बंटोगे तो कटोगे’ का ब्रह्माशास्त्र भी फेल हो गया. आखिर क्या कारण है कि अब तक हिन्दूओं को एकजूट रहने का नारा लगाने वाली भाजपा अब सरना धर्म कोड की बात करने लगी है, क्या आदिवासी-मूलवासी बहुल झारखंड की जमीन पर बांग्लादेशी घुसैपैठिया के साथ ही ‘बंटोगे तो कटोगे’ की नारा भी अप्रभावी हो गया. और इस चुनावी बेचैनी में सरना धर्म कोड का कार्ड खेलने की मजबूरी आ पड़ी है, </p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>क्या सरना धर्म से खंडित नहीं होगी हिन्दू एकता?</strong></h3>
<p style="text-align:left;">इसके साथ ही अब यह सवाल भी खड़ा होने लगा है कि आखिर जिस सरना धर्म कोड की बात भाजपा कर रही है, क्या उससे हिन्दूओं की एकता खंडित नहीं होगी, तो क्या हिन्दूओं टूकड़े टुकड़े करने की शर्त पर भी भाजपा सत्ता को अपने पास रखना चाहती है, तो क्या हिन्दू एकजूटता का नारा महज एक छलावा था.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>क्या वाकई सरना धर्म कोड देने जा रही है भाजपा? </strong></h3>
<p style="text-align:left;">और सबसे बड़ा सवाल क्या वाकई भाजपा आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म कोड देने को तैयार है, या फिर यह महज एक  चुनावी नारा है. यदि भाजपा वास्तव में आदिवासी समाज को सरना धर्म कोड देने का इरादा रखती है तो फिर इसमें देरी क्यों की जा रही है? झारखंड में हेमंत सरकार और बंगाल में ममता बनर्जी तो पहले ही विधानसभा से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेज चुकी है, फिर भाजपा आदिवासी समाज की इस पुरानी मांग पर अपनी मुहर क्यों नहीं लगाती? हिमंता किस आधार पर यह दावा करते हैं कि यह तो कांग्रेस है जो सरना धर्म कोड की राह में रोड़ा अटका रही है. क्यों नहीं भाजपा लोकसभा में इस आशय का बिल लाती है, साफ हो जायेगा कि कौन सा राजनीतिक दल इसके समर्थन और कौन विरोध में है? हकीकत है कि कांग्रेस पहले ही यह साफ कर चुकी है कि यदि वह सत्ता में आती है तो जातीय जनगणना का फैसला कैबिनेट की पहली बैठक में लिया जायेगा और इसके साथ ही आदिवासी समुदाय की चिर प्रतिक्षित मांग को सरना धर्म कोड पर भी मुहर लगायी जायेगी. जबकि भाजपा सत्ता में है, उसके पास वादे करने का कोई विकल्प नहीं है, भाजपा ने सरना धर्म का वादा 2014 में भी किया था, लेकिन डबल इंजन की सरकार बनने के बावजूद उस वादे को पूरा नहीं किया, फिर आदिवासी समाज  भाजपा के इस नये वादे पर विश्वास क्यों करेगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 13:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> भाजपा के साथ लुईस मरांडी का सीधा मुकाबला, जयश्री सोरेन ने जामा से दाखिल नहीं किया नामांकन</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा के चुनाव चिह्न पर जयश्री सोरेन का चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने सीता सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे अपने पुराने कार्यकर्ता सुरेश मुर्मू को ही एक बार फिर से अखाड़े में उतारने का फैसला किया. जिसके बाद जयश्री सोरेन की नाराजगी की खबर सामने आ रही थी, जामा वही सीट है, जहां से सीता सोरेन वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार जीत दर्ज करती रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/badi-khabar/lewis-marandis-direct-contest-with-bjp-jayashree-soren-did-not/article-12380"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>रांची: सीएम हेमंत की भतीजी और सीता सोरेन की बेटी जयश्री सोरेन ने अपना नामांकन दाखिल नहीं करने का फैसला किया है, जिसके बाद अब जामा विधानसभा में लुईस मरांडी का भाजपा उम्मीदवार सुरेश मुर्मू के साथ सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है<br />आपको बता दें कि जयश्री सोरेन जामा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थी, नामांकन दाखिल करने के लिए मंगलवार को पर्चा भी खरीदा गया था, लेकिन अब जो खबर आ रही है कि भाजपा की ओर से जयश्री सोरेन को मना लिया गया है, दावा किया जा रहा है कि अब जयश्री सोरेन सुरेश मुर्मू के लिए प्रचार प्रसार करेगी. </p>
<h3><strong>जामा पर अपनी दावेदारी ठोक रही थी जयश्री सोरेन</strong></h3>
<p>आपको यह भी बता दें कि पहले भाजपा के चुनाव चिह्न पर जयश्री सोरेन का चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने सीता सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे अपने पुराने कार्यकर्ता सुरेश मुर्मू को ही एक बार फिर से अखाड़े में उतारने का फैसला किया. जिसके बाद जयश्री सोरेन की नाराजगी की खबर सामने आ रही थी, जामा वही सीट है, जहां से सीता सोरेन वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार जीत दर्ज करती रही है. जयश्री सोरेन के पिता दुर्गा सोरेन को 1995 और 2000 में जीत मिली थी तो दादा शिबू सोरेन 1985 में जीत दर्ज  करने में कामयाब रहे थें, और यही कारण है कि जामा को झामुमो का अभेद किला माना जाता है. दावा किया जाता है कि जयश्री सोरेन इस सीट पर किसी बाहरी चेहरे को एंट्री देने को तैयार नहीं थी, जयश्री सोरेन का मानना था कि जब भाजपा के दूसरे नेताओं के बेटे बेटियों और बहूओं को  टिकट मिल सकता है तो फिर सोरेन परिवार की इस परंपरागत सीट से उन्हे उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया जा सकता है. जयश्री सोरेन की मां सीता सोरेन को भाजपा जामा के बदले जामताड़ा से उम्मीदवार बनाया है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 15:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मांडर विधानसभा 2024: बंधू तिर्की का कारवां बढ़ायेगी शिल्पी नेहा तिर्की या सन्नी टोप्पो खिलायेंगे कमल</title>
                                    <description><![CDATA[सन्नी टोप्पो कितनी मजबूत चुनौती पेश कर सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी. हालांकि शिल्पी नेहा तिर्की और बंधू तिर्की अपनी जीत को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आ रहे हैं, बंधू तिर्की का दावा है कि कहीं कोई मुकाबला नहीं है, कांग्रेस की जीत महज औपचारिकता है, लेकिन अंतिम फैसला तो मतपटियों से ही निकल कर सामने आयेगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/mandar-assembly-2024-shilpi-neha-tirkey-or-sunny-toppo-will/article-12356"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(27).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> लोहरदगा लोकसभा का हिस्सा मांडर विधानसभा में वर्ष 2005,2009 और 2019 में बंधू तिर्की अलग अलग पार्टियों के बनैर तले जीत दर्ज कर चुके हैं.  वर्ष 2005 में बंधू तिर्की ने गोवा डमोक्रैटिक पार्टी, वर्ष 2009 में झारखंड जनाधिकार मंच और वर्ष 2019 में झाविमो के टिकट पर जीत दर्ज की थी. हालांकि आय से अधिक मामले में उनकी विधायकी जाने के बाद बेटी शिल्पी नेहा तिर्की ने मोर्चा संभाला और 2022 के उपचुनाव में जीत दर्ज करने में सफल भी रही, इस बार कांग्रेस ने शिल्पी नेहा तिर्की पर एक बार फिर से दांव लगाया है, जबकि भाजपा ने सन्नी टोप्पो को मोर्चे पर तैनात किया है. वर्ष 2014 में कमल खिलाने वाले गंगोत्री कुजूर पर इस बार पार्टी ने दांव लगाना बेहतर नहीं समझा, दरअसल वर्ष 2022 के उपचुनाव में पार्टी ने एक बार फिर से गंगोत्री कुजूर पर दांव लगाया था, लेकिन गंगोत्री कुजूर शिल्पी नेहा तिर्की का मुकाबला सफलता का परचम फहराने में सफल नहीं हो सकी, इस हालत में देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी ने सन्नी टोप्पो जैसे युवा चेहरा पर जो दांव खेला है, कितना कामयाब रहता है. </p>
<h3><strong>वर्ष 2014 में गंगोत्री को हाथों खिला था कमल</strong></h3>
<p>यदि मांडर के पुराने इतिहास को खंगाले तो इस सीट से वर्ष 2000 में देवकुमार धान ने पंजा को जीत दिलाई थी, जबकि वर्ष 2005 और 2009 में बंधू तिर्की ने जीत का सेहरा बांधा, लेकिन वर्ष 2014 में गंगोत्री कुजूर कमल खिलाने में कामयाब रही. वर्ष 2022 के उप चुनाव में शिल्पी नेहा तिर्की के हिस्से 95,486 तो गंगोत्री कुजूर के खाते में 71,796 वोट आया था, जबकि पूर्व विधायक देव कुमार धान ने निर्दलीय अखाड़े में कूदते हुए 22,424 वोट पाने में कामयाब हुए थें. जबकि वर्ष 2019 में बंधू तिर्की के हिस्से 92,491 तो देव कुमार धन भाजपा की ओर से बैटिंग करते हुए महज 69,364 पर सिमट गये थें, जबकि उस वक्त के कांग्रेस उम्मीदवार सन्नी टोप्पो 8,840 के साथ  चौथे स्थान पर थें.<br />हार जीत का अंतर करीबन 23 हजार का था. इस हालत में इस बार सन्नी टोप्पो कितनी मजबूत चुनौती पेश कर सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी. हालांकि शिल्पी नेहा तिर्की और बंधू तिर्की अपनी जीत को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आ रहे हैं, बंधू तिर्की का दावा है कि कहीं कोई मुकाबला नहीं है, कांग्रेस की जीत महज औपचारिकता है, लेकिन अंतिम फैसला तो मतपटियों से ही निकल कर सामने आयेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 15:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदिवासी समाज के अस्तित्व  के लिए एनआरसी जरुरी: बाबूलाल मरांडी</title>
                                    <description><![CDATA[1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर 88% से 81% पर पहुँच गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/nrc-is-necessary-for-the-survival-of-tribal-society-babulal/article-12354"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/babulal-marandi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p>रांची: झारखंड में आदिवासी समाज के अस्तिव को बचाने के लिए एनआरसी जरुरी है, बगैर इसके आदिवासी समाज की अस्मिता, उनकी पहचान और उनकी सांस्कृतिक परंपरा को बचाया नहीं जा सकता. यह दावा पूर्व सीएम बाबूलाल की ओर से किया गया है, अपने एक्स एकाउंट पर एनआरसी की जरुरत को रेखांकित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि “झारखंड में आदिवासी समाज के अस्तित्व को बचाने और घुसपैठ पर नकेल कसने के लिए एनआरसी लागू करना बेहद जरूरी है। जिस प्रकार से झामुमो कांग्रेस के संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देकर उनके अवैध दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, ये भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा व जामताड़ा समेत 6 जिलों से 16% जनजातीय समुदाय के लोग घटे हैं। जबकि मुस्लिमों की आबादी में 13% की वृद्धि हुई है। संथाल परगना के दो जिले साहिबगंज और पाकुड़ में तो मुस्लिमों की संख्या 35% बढ़ी है।</p>
<p>1951 36 फीसदी थी आदिवासियों की आबादी, 2011 में  26 फीसदी रह गयी</p>
<p>बाबूलाल  ने आगे लिखा है कि “1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर 88% से 81% पर पहुँच गई है। झारखंड में आदिवासियों की घटती आबादी का बुरा असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी और सरकारी नौकरियों में घटते अवसर के रूप में पड़ने वाला है। यदि अवैध घुसपैठ की स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आदिवासी समाज के सांसदों, विधायकों की संख्या भी कम हो जाएगी। संथाल परगना के क्षेत्र में मुस्लिम युवक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधियों से विवाह कर डेमोग्राफी बदलने का प्रयास कर रहे हैं।झारखंड में भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठ विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी और एनआरसी लाकर सारे बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें चुन-चुनकर राज्य की सीमा से बाहर किया जाएगा</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 14:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हटिया का किंग कौन! नवीन जायसवाल का चौका या अजयनाथ शाहदेव रोक लेंगे कारवां</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा एक बार फिर से पूरे शबाब में नजर आ रही है, उसकी तुलना में कांग्रेस प्रचार प्रसार के मोर्चे अत तक कुछ पीछे नजर आ रही है, हालांकि अभी वक्त है, इस हालत में देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कितनी मजबूत चुनौती दे पाती है. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/who-will-be-the-king-of-hatiya-naveen-jaiswals-chowka/article-12353"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(26).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची</strong>: हटिया विधानसभा में एक बार फिर से कांग्रेस ने अजयनाथ शाहदेव पर दांव लगाया है, हालांकि टिकट मिलने के पहले तक अजयनाथ शाहदेव के बारे में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की खबर थी. करीबन एक सप्ताह तक यह खबर सियासी गलियारों में तैरती रही, बावजूद इसके अजयनाथ शाहदेव की ओर इसका कोई खंडन सामने नहीं आया. लेकिन जैसे ही भाजपा की ओर से नवीन जायसवाल की उम्मीदवारी का एलान हुआ, अजयनाथ शाहदेव सामने आयें और भाजपा में शामिल होने की तमाम खबरों का खंडन किया. अ्जयनाथ शाहदेव की इस रणनीति के कारण अभी भी कांग्रेस समर्थकों के बीच भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है. दावा किया जा रहा है कि अजयनाथ शाहदेव की पहली चाहत तो भाजपा ही थी, लेकिन जब सीपी सिंह को सातवीं बार रांची के अखाड़े से उतारने का एलान हो गया, उसके बाद  नवीन जायसवाल का एक बार फिर से हटिया से चुनाव लड़ना तय हो गया, अब अजयनाथ शाहदेव के पास कोई दूसरा  विकल्प नहीं था और आखिरकार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. यदि इसके बावजूद भी कांग्रेस को अजयनाथ शाहदेव पर दांव लगाना पड़ा तो समझा जा सकता है कि हटिया कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती है.</p>
<h3><strong>तीन बार जीत कांग्रेस का परचम फहरा चुके हैं सुबोधकांत सहाय</strong></h3>
<p>आपको बता दें कि हटिया विधानसभा का गठन वर्ष 1977 में हुआ था, सुबोधकांत सहाय तीन बार हटिया से जीत दर्ज कर चुके हैं. 1990 में इस सीट पर संघ का पुराना चेहरा रहे रामजी लाल सारडा ने भाजपा का कमल खिलाया था, वर्ष 2005 और 2009 में कांग्रेस के गोपलनाथ शाहदेव ने कांग्रेस की झोली में जीत का तोहफा डाला, लेकिन वर्ष 2012 के उपचुनाव में मौजूदा विधायक नवीन जायसवाल ने आजसू के टिकट पर जीत दर्ज की, जिसके बाद वर्ष 2014 में नवीन जायसवाल ने झाविमो और 2019 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की, इस बार भाजपा आलाकमान ने एक बार फिर से नवीन जायसवाल पर भरोसा जताया है. <br /> </p>
<h3><strong>अभी तक नहीं चढ़ा है कांग्रेस पर चुनावी रंग</strong></h3>
<p>यदि सामाजिक समीकरणों की बात करें तो हटिया में 4फीसदी दलित, 28 फीसदी आदिवासी, 15 फीसदी मुस्लिम, तीन फीसदी महतो और तीन फीसदी के आसपास तेली जाति के मतदाता हैं. जहां तक मौजूदा सियासी जंग का सवाल है, भाजपा एक बार फिर से पूरे शबाब में नजर आ रही है, उसकी तुलना में कांग्रेस प्रचार प्रसार के मोर्चे अत तक कुछ पीछे नजर आ रही है, हालांकि अभी वक्त है, इस हालत में देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कितनी मजबूत चुनौती दे पाती है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 13:23:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्ता नहीं, हेमंत सरकार के भ्रष्टाचार से मुक्ति ही एकमात्र लक्ष्य: बाबूलाल मरांडी</title>
                                    <description><![CDATA[हेमंत सरकार का पांच साल नाकामियों का खुला दस्तावेज है. किसी भी मोर्चे पर इस सरकार को सफलता हाथ नहीं लगी, और तो और अपने पिता शिबू सोरेन को साक्षी मान कर हेमंत ने जो कसम खाई थी, उस वादे को भी पूरा करने में वे नाकामयाब रहे. ना तो महिलाओं को चूल्हा भत्ता मिला और ना ही नव विवाहितों को सोने का सिक्का, बावजूद इसके सफलता का ढोल पीटा जाता रहा, अब इसका माकूल जवाब झारखंड की जनता देगी. हेमंत सरकार के कार्यकाल, मौजूदा सियासी हालात और भाजपा के अंदर मचे उथल- पुथल पर राज्य के पूर्व सीएम और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल से समृद्ध झारखंड की खास बातचीत. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/babulal-marandi-the-only-goal-is-to-get-rid-of/article-12164"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/babulal-marandi-(7).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>पूर्व मंत्री लुईस मरांडी, घाटशिला से पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू, जमुआ विधायक केदार हाजरा सहित दर्जनों नेताओं ने पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया. इसका भाजपा के चुनावी संभावना पर क्या असर होगा?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>हर पार्टी में टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं की अपनी उम्मीद होती है, लेकिन टिकट की संख्या सीमित होती है, हर किसी को खुश नहीं किया जा सकता और जो पार्टी छोड़ कर गयें, सिर्फ वही भाजपा के कार्यकर्ता नहीं थें. दूसरे कार्यकर्ताओं की भावनाओं का भी सम्मान करना होता है. टिकट कटने पर निराशा स्वाभाविक है, मनाने की कोशिश जारी है. बहुत जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जायेगा.</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड:</strong>  हेमंत को चुनावी अखाड़े में परास्त कर चुकी और संताल की सियासत में पार्टी का एक बड़ा चेहरा लुईस मरांडी का इस चुनावी संग्राम के बीच पार्टी छोड़ कर जाना कितनी बड़ी चुनौती है?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी:</strong>  पार्टी छोड़ने की पीड़ा उनके चेहरे से झलक रही थी. इन तीन दशकों में पार्टी ने लुईस मरांडी को सब कुछ दिया. आपको पता होना चाहिए कि लोकसभा चुनाव के वक्त पार्टी ने पहले दुमका से सुनील सोरेन को टिकट दिया था,  बाद में सुनील सोरेन के चेहरे को पीछे करते हुए सीता सोरेन को आगे किया गया. इस हालत में इस बार पार्टी ने सुनील सोरेन को दुमका से अवसर देने का फैसला किया. बावजूद इसके यदि लुईस मरांडी ने जो फैसला. हमारी शुभकामनाएं उनके साथ है. </p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong> लुईस मरांडी का दावा है कि झारखंड में एक नयी भाजपा का प्रवेश हो चुका है, जिसके कारण भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ रही है, उनका इशारा झारखंड भाजपा चुनाव सह प्रभारी हिमन्त बिश्व शर्मा की ओर था?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong> यह उनकी सोच है, भाजपा कार्यकर्ता पूरे जोश और उमंग के साथ इस चुनावी संग्राम में कूदने को तैयार हैं, पूरी पार्टी एकजूट और दृढ़ संकल्पित है. सारे फैसले सामूहित नेतृत्व का नतीजा है.</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong> आरोप है कि इस बार के टिकट वितरण में कुछ बड़े नेताओं ने टिकटों का बंदरबांट कर लिया. किसी ने पत्नी, किसी ने बेटा तो किसी ने पतोहु के लिए टिकट हासिल करने में कामयाबी हासिल की.</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>सबकी अपनी चाहत होती है. यह प्रवृति हर जगह देखने को मिलती है. यदि पार्टी ने युवाओं को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, तो इसमें बूरा क्या है?</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>लेकिन चार दशक के राजनीतिक जीवन में आपने तो कभी इस तरह की कोशिश नहीं की?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>सबका अपना मिजाज होता है, हम इस मिजाज के व्यक्ति नहीं हैं, कभी भी इस तरह की कोशिश नहीं की. पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी अपने बेटे-बेटी या सगे संबंधियों को आगे बढ़ाने का एक भी प्रयास नहीं किया. यह तो व्यक्ति के मिजाज से तय होता है, इसका पार्टी से क्या संबंध है?</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong> हेमंत सरकार के इन पांच वर्षों कामकाज को आप किस रुप में देखते हैं?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी:</strong> कौन से मोर्चे पर यह सरकार सफल रही? किस वादे को पूरा किया गया? सेना की जमीन से लेकर आदिवासियों की जमीन तक सब कुछ तो इसी सरकार में बेचा गया. कौन सा ऐसा पाप है, जो बाकी रहा. हर मोर्चे पर यह सरकार विफल रही, पिता शिबू सोरेन का कसम खा कर महिलाओं से चुल्हा भत्ता और नव विवाहितों को सोने का सिक्का देने का वादा हुआ था, कम से कम उस वादे को तो पूरा किया जाता.</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>इस बार राजधनवार की सीट माले के खाते में दिख रही है, राजकुमार यादव को माले एक बार फिर से अपना चेहरा बना सकती है, क्या इससे आपके सामने कोई चुनौती खड़ी होती दिखती है?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>पिछला बार भी राजकुमार यादव के ही खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी. फिर इस बार कौन सी चुनौती खड़ी हो गयी? राजधनवार हमारा घर है, क्या किसी को अपने घर में कोई चुनौती मिलती है, राजधनवार का हर नागरिक हमारे परिवार का हिस्सा है, इतनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी हम हर 15 दिन पर एक बार जरुर से राजधनवार जाते हैं, वहां के लोगों का दुख- दर्द को समझने की कोशिश करते हैं. राजधनवार में हमारे सामने कोई चुनौती ना तो पहले कभी थी और ना आज है.</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>कुछ लोगों की शिकायत है कि यदि बाबूलाल किसी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ते तो राजधनवार से किसी सामान्य जाति के चेहरे को जगह मिलती?</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>राजधनवार के आसपास कोई आरक्षित सीट नहीं है, फिर क्या हम अपना घर छोड़े दें, आज भी हमारा नाम वहां मतदाता के रुप में दर्ज है.</p>
<p><strong>समृद्ध झारखंड: </strong>आप झारखंड की सियासत में उन चंद चेहरों में से एक हैं, जो किसी आरक्षित सीट के बजाय सामान्य सीट से चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं, यह ताकत आपको कहां से मिलती है.</p>
<p><strong>बाबूलाल मरांडी: </strong>आरक्षित-अनारक्षित के खेल में कभी नहीं पड़ा, दुमका से चुनाव जीता तो कोडरमा जैसे अनारक्षित सीट से भी जीत दर्ज की और जब सीएम बना तब भी रामगढ़ जैसे अनारक्षित सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचा था. इस सफलता के पीछे लोगों का प्यार और स्नेह है. यह सफलता भी उन्ही को समर्पित है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
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                                            <category>पश्चिम-बंगाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 19:03:50 +0530</pubDate>
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