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                <title>अंतरराष्ट्रीय - Samridh Jharkhand</title>
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                <title>अमेरिका ने ईरान से मांगी परमाणु हथियार न रखने की गारंटी, बदले में शांति बहाल करने का किया वादा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान से परमाणु हथियार न रखने की गारंटी मांगते हुए बदले में शांति बहाल करने का प्रस्ताव दिया है। दोनों देशों के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/us-asks-iran-guarantee-no-nuclear-weapons-in-exchange-for-peace-deal-middle-east-tension/article-20897"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/gjm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन: </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन और तेहरान के मध्य बढ़े हुए तनाव के बीच गुरुवार को कहा कि अगर ईरान को शांति चाहिए तो उसे कभी भी परमाणु हथियार न रखने की गारंटी देनी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान छोड़ दे, तब भी उसे फिर से खड़ा होने में 20 साल लग का समय लग जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर से दावा किया कि ईरान में युद्ध अमेरिका पहले ही जीत चुका है। मगर यह जीत बहुत छोटी है। अमेरिका को और बड़ी जीत चाहिए। ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना के साथ उसका नेतृत्व भी तबाह हो चुका है।</p>
<p>सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, "हमने सब कुछ तबाह कर दिया है। अगर हम अभी वहां से हट जाएं तो उन्हें फिर से सब कुछ खड़ा करने में 20 साल लग जाएंगे। इसमें शक है कि वह ऐसा कर पाएंगे। अमेरिका अभी और बहुत कुछ करना चाहता है।" ट्रंप ने कहा, " ईरान को यह गारंटी देनी होगी कि उसके पास कभी भी कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।" ट्रंप ने फिर दृढ़ता से कहा कि ईरान समझौता करने के लिए तत्काल तैयार है। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि ईरान के साथ बातचीत रुक गई है। ट्रंप ने कहा, "मेरे और कुछ अन्य लोगों के अलावा कोई नहीं जानता कि बातचीत किस मोड़ पर है। " ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका को हर हाल में ईरान का संवर्धित यूरेनियम भंडार चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होने के साथ गैस की कीमतें तेजी से नीचे गिर जाएंगी। उधर, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की करेंसी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि इस समय ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बेहद नाजुक मोड़ पर है। युद्ध की आशंका के बीच शांति के प्रयास भी जारी हैं। ईरान ने हाल ही में अमेरिका के सामने सशर्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु वार्ता को फिलहाल टालने की बात कही गई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ शुरू किए समन्वित सैन्य अभियान का असर समूचे मध्य पूर्व पर पड़ा है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताया है । वह परमाणु संवर्धन के मुद्दे को दरकिनार किए जाने से नाखुश हैं। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान ने इसे व्यापार के लिए बंद करने की धमकी दी है। वह कथित तौर पर सुरंग बिछा रहा है।</p>
<p>भारत के लिए राहत की बात यह है कि ईरान ने भारतीय जहाजों के वहां से गुजरने पर रोक नहीं लगाने का आश्वासन दिया है। इस सबके बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस संघर्ष में शांति दूत की भूमिका में नजर आ रहे हैं। ईरान रूस के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ रणनीतिक चक्रव्यूह रचने का प्रयास भी कर चुका है।</p>
<p>ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी राय बंटी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के कुछ सदस्य सैन्य कार्रवाई के पक्ष में तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई डेमोक्रेट्स संसाधनों की बर्बादी और संभावित परिणामों को लेकर चिंतित हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस संघर्ष में अब तक लगभग 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। उधर, ईरान सैन्य तैयारी में जुटा है। तेहरान में हाल ही में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपने अर्श ड्रोन के उन्नत संस्करण का प्रदर्शन किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:41:53 +0530</pubDate>
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                <title>बुद्ध जयंती पर नेपाल के प्रधानमंत्री का संदेश- सभी समस्याओं का समाधान बुद्ध के ज्ञान और शांति के मार्ग से संभव</title>
                                    <description><![CDATA[बुद्ध जयंती के अवसर पर नेपाल के प्रधानमंत्री ने विश्व शांति की कामना करते हुए कहा कि सभी समस्याओं का समाधान बुद्ध के ज्ञान और अहिंसा के मार्ग से संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/nepal-prime-minister-message-on-buddha-jayanti-solution-to-problems-through-buddha-teachingsnepal-prime-minister-message-on-buddha-jayanti-solution-to-problems-through-buddha-teachings/article-20896"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/e3d19750267e5f1623c71722fb08e8b2_749509703_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>काठमांडू: </strong>बुद्ध जयंती के अवसर पर शुभकामना संदेश देते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा है कि हर यात्रा समस्याओं के समाधान के मार्ग की ओर होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर अपने संदेश में उन्होंने लिखा-“बुद्ध ने कहा था- ‘दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निवारण है और दुःख निवारण का मार्ग भी है।’ बुद्ध द्वारा दिखाया गया मार्ग दुःखों के निवारण का मार्ग है। अंधकार वास्तव में प्रकाश के अभाव का नाम है। जब प्रकाश की किरण कदम रखती है, तब अंधेरा स्वयं समाप्त हो जाता है।”</p>
<p>उन्होंने आगे लिखा-“हमारी यात्रा भी उसी ज्ञानरूपी प्रकाश की खोज में होनी चाहिए, समस्याओं के समाधान के मार्ग पर होनी चाहिए। शांति के महान और सर्वकालिक प्रवर्तक बुद्ध की जयंती के अवसर पर मैं विश्व शांति की कामना करता हूँ। बुद्ध के जन्म से धन्य हमारी नेपाल भूमि सदैव अहिंसा और शांति के पक्ष में रही है।”</p>
<p>शुभकामना संदेश में शाह ने यह भी उल्लेख किया—“सच्ची क्रांति ‘क’ से नहीं, बल्कि ‘ज्ञ’ से शुरू होती है, और वह ‘ज्ञ’ ज्ञान है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:37:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर ट्रंप के फैसले का बचाव, रक्षा मंत्री बोले- अभी संसद की अनुमति जरूरी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 1973 के वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन पर कहा- ट्रंप प्रशासन को फिलहाल संसद से अनुमति लेने की जरूरत नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/trump-defends-iran-military-campaign-war-powers-resolution-congress-approval-debate/article-20895"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/cffbe8a63b76632b8a759fc07336a9fd_272672019_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन: </strong>अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का बचाव किया है। इस सैन्य अभियान पर राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ गुरुवार को सीनेट सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई में पहुंचे। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को फिलहाल संसद (कांग्रेस) की अनुमति की जरूरत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा सैन्य विराम (युद्ध विराम/सीज फायर) की स्थिति 60 दिन की कानूनी समय सीमा की बाध्यता को प्रभावी रूप से रोक देती है।</p>
<p>सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस सुनवाई की आश्वयकता 1973 के वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन की वजह से पड़ी। इस रिजोल्यूशन के अनुसार राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर 60 दिन के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है या अभियान को समाप्त करना पड़ता है। ईरान संघर्ष के मामले में यह समय सीमा पास है। हेगसेथ का तर्क है कि युद्ध विराम के चलते यह नियम अभी लागू नहीं होता। वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून इस व्याख्या का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह गंभीर कानूनी सवाल है।</p>
<p>सीनेट के बहुमत दल के नेता जॉन थ्यून ने गुरुवार को यह संकेत दिया कि उनका सदन निकट भविष्य में युद्ध को मंजूरी देने वाले किसी भी प्रस्ताव पर वोट नहीं करेगा। अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने घोषणा की कि अगर उन्हें अगले सप्ताह तक व्हाइट हाउस से कोई विश्वसनीय योजना नहीं मिलती है, तो वह इस बात पर एक प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही हैं कि क्या युद्ध को औपचारिक रूप से मंजूरी दी जाए।</p>
<p>इस सीनेटर ने सदन के पटल से कहा, "मैं यह स्वीकार नहीं करती कि हमें बिना किसी स्पष्ट दिशा या जवाबदेही के एक अनिश्चितकालीन सैन्य कार्रवाई में शामिल होना चाहिए। कांग्रेस की एक भूमिका है। कांग्रेस को आगे बढ़कर उस भूमिका को निभाना होगा। उस दायित्व को पूरा करना होगा जो संविधान ने हमें सौंपा है। मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली के अनुसार, इस युद्ध में हम एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। कानून के तहत, प्रशासन के पास अतिरिक्त 30 दिनों का अनुरोध करने की क्षमता है। यह बेहतर विकल्प है।</p>
<p>इस सुनवाई में ईरान के लड़कियों के एक स्कूल में कथित हमले का मुद्दा भी उठा। इस हमले 170 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इस हमले पर अनेक सांसदों ने सैन्य जवाबदेही पर सवाल उठाए। पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन अब एआई सहायता प्राप्त सिस्टम के साथ मानवीय निगरानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरे डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि देश के नागरिक इस संघर्ष का समर्थन नहीं करते। कैलिफोर्निया के सीनेटर एडम शिफ का कहना है कि यह युद्ध शुरू से ही गैरकानूनी था, क्योंकि अमेरिका पर कोई हमला नहीं हुआ था, और न ही हमले का कोई आसन्न खतरा था।</p>
<p>हेगसेथ ने कहा कि ऐसा नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन को जनता का समर्थन हासिल है। हेगसेथ के दावे पर गिलिब्रैंड ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध से अमेरिका पहले से ज्यादा सुरक्षित हुआ है, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है और न ही ईरान की ओर से तत्काल खतरे के प्रमाण है। इस सुनवाई से इतर ट्रंप ने ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई से ईरान में बड़े पैमाने पर हत्याएं रोकी गई हैं। ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया गया है। यह युद्ध नहीं, महज सैन्य अभियान है। ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है। तेल से होने वाली उसकी कमाई लगभग बंद है।</p>
<p>क्या है वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन</p>
<p>यह रिजोल्यूशन वियतनाम युद्ध के समय अस्तित्व में आया था। इसके अनुसार अगर युद्ध 60 दिन से ज्यादा चलता है तो कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि कांग्रेस ने किसी युद्ध को मंजूरी देने के लिए मतदान नहीं किया है, तब भी राष्ट्रपति के पास किसी आसन्न खतरे या देश पर हुए किसी हमले का जवाब देने के लिए सैन्य कार्रवाई करने के लिए 60 दिन का समय होता है।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस की साफ मंजूरी के बिना, जैसे ही यह समय सीमा पूरी हो जाती है राष्ट्रपति को अमेरिका की सेना का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञ 1 मई (शुक्रवार) को 60 दिन की समय सीमा का दिन मान रहे हैं। वह कहते हैं कि ऐसा इसलिए कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को बताया था कि युद्ध शुरू हो गया है।</p>
<p>वॉर पॉवर्स रिजोल्यूशन को '60 दिन की घड़ी' भी कहा जाता है। यह कानून राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण करता है, ताकि बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के लंबे समय तक युद्ध को न चलाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:35:21 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान झुकने को तैयार नहीं, अमेरिका होर्मुज में हाइपरसोनिक मिसाइल ‘डार्क ईगल’ तैनात करने पर विचार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में हाइपरसोनिक मिसाइल ‘डार्क ईगल’ तैनात करने पर विचार कर रहा है। इस घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर बड़ा असर पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-not-ready-to-bow-us-dark-eagle-hypersonic-missile-deployment-hormuz-strait-tension-middle-east-war/article-20856"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/cdc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>तेहरान/वाशिंगटन। </strong>अमेरिका-इजराइल के साथ लड़ाई में अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य कमांडरों को खो चुका ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के आधिपत्य पर झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि ईरान को हार माननी ही पड़ेगी। ईरान ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी कमांडरों का कहना है कि सवाल ही नहीं उठता। ईरान तेल पर टिकी अपनी अर्थव्यवस्था के लड़खड़ाने के बीच अमेरिका से सीधा मुकाबला करने को तैयार है। स्थिति गंभीर होती देख अमेरिका होर्मुज में हाइपरसोनिक मिसाइल 'डार्क ईगल' की तैनाती पर विचार कर रहा है। इसकी मारक क्षमता 2700 किलोमीटर से अधिक है।</p>
<p>सीएनएन, सीबीएस न्यूज, मेहर न्यूज एजेंसी, अल जजीरा, ब्लूमबर्ग और गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार मेजर जनरल मोहसिन रजेई ने कहा है कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अमेरिका के किसी भी संभावित हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के पूर्व कमांडर मेजर जनरल रजेई ने बुधवार देर रात एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कोई भी नया हमला विनाशकारी होगा। उन्होंने कहा, "इतिहास यह दर्ज करेगा कि ईरान ने फारसी खाड़ी और ओमान सागर में अमेरिकी महाशक्ति को डुबो दिया।"</p>
<p>इस बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। कच्चे तेल की कीमत आसमान को छू रही है। अमेरिकी नाकाबंदी के बाद ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया है। ईंधन की बढ़ती कीमत से खुद अमेरिका परेशान है। आईआरजीसी की नौसेना कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी ने कहा कि ईरान कभी हार नहीं मानेगा। ट्रंप की धमकियों की आगे देश नहीं झुकेगा। ईरान जवाबी कार्रवाई के लिए हर मोर्चे पर तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर दुश्मन में हिम्मत है तो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजकर देख ले। ईरानी ने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी बेअसर है। अनेक जहाज हमारे बंदरगाहों से रवाना हुए और कुछ अपने गंतव्य तक पहुंच गए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दुश्मन को बहुत जल्द ऐसे हथियार का सामना करना पड़ेगा, जिससे वह बहुत डरता है। ईरानी ने कहा कि हमारी नौसेना अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर सात मिसाइलें दाग चुकी है। ऐसा करके अमेरिका को विमानवाहक पोत से विमान उड़ाने या हवाई हमले करने से रोक दिया गया। आईआरजीसी की नौसेना के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख मोहम्मद अकबरजादेह ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के बारे में कोई नई गलतफहमी पाल ली है। उन्होंने कहा, "अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर सैन्य कार्रवाई करता है तो आईआरजीसी की नौसेना उसके विशाल जहाजों को राख कर देगी।</p>
<p>इस तनातनी के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस आक्रामकता के बावजूद ईरान अभी भी सैन्य क्षमता के मामले में बहुत मजबूत है। माना जा रहा है कि अमेरिका हाइपरसोनिक मिसाइल 'डार्क ईगल' की तैनाती पर विचार कर रहा है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास मिसाइल और ड्रोन का इतना जखीरा है कि वे लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सकते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड को इसका अंदाजा है। तभी उसने सेना के लंबे समय से अटके हुए डार्क ईगन सिस्टम को इस क्षेत्र में भेजने का अनुरोध किया है।</p>
<p>इसका मकसद अमेरिकी सेना को ईरान के भीतरी हिस्सों में मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों पर हमला करने की क्षमता देना है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका किसी हाइपरसोनिक हथियार सिस्टम को तैनात करेगा। बहरहाल अभी ट्रंप का सैन्य विराम (युद्ध विराम/ सीजफायर जारी है। रिपोर्ट यह भी है कि ईरान ने अपना राष्ट्रीय फारसी खाड़ी दिवस मनाया है। यह दिवस हर साल अप्रैल के आखिर में मनाता है। यह दिवस 1622 में होर्मुज जलडमरूमध्य से पुर्तगाली सेना को खदेड़े जाने के की खुशई में मनाया जाता है। समारोह में मौजूद ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि यह जलमार्ग "महान ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध का प्रतीक" है और इस जल क्षेत्र में किसी भी तरह की असुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका और इजराइल की है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को कहा, "नाकाबंदी शानदार है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था सच में संकट में है। यह मृत अर्थव्यवस्था है।" कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति नाकाबंदी से इतने खुश हैं कि उन्होंने अपने सहयोगियों को इसे और भी लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का दावा है कि युद्ध की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। दस लाख लोगों का रोजगार छिन गया है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान के तेलमंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने बुधवार को जनता को चेतावनी दी कि वे ऊर्जा का इस्तेमाल कम करें। उन्होंने सरकारी दफ्तरों को आदेश दिया गया है कि वे दोपहर एक बजे के बाद बिजली का इस्तेमाल 70 फीसद तक कम कर दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 18:38:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल को ‘डेस्टिनेशन वेडिंग हब’ बनाने की पहल, नई दिल्ली में पर्यटन और वेडिंग इंडस्ट्री का बड़ा कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भारत को केंद्रित कर नेपाल को ‘डेस्टिनेशन वेडिंग हब’ के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल के जरिए वेडिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने और भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/nepal-destination-wedding-hub-promotion-event-new-delhi-tourism-board-india-wedding-industry/article-20835"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/nepal-tourism_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>काठमांडू। </strong>नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भारत को केंद्रित कर नेपाल को ‘डेस्टिनेशन वेडिंग हब’ बनाने के उद्देश्य से प्रचार अभियान तेज कर दिया है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड और होटल एसोशिएशन ऑफ नेपाल ने भारत स्थित नेपाली दूतावास के सहयोग से ‘नेपाल डेस्टिनेशन वेडिंग एंड ओटीएज कनेक्ट’ कार्यक्रम आयोजित किया। दो दिवसीय कार्यक्रम में नेपाल और भारत के पर्यटन तथा वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि सहभागी हो रहे हैं।</p>
<p>इस कार्यक्रम के माध्यम से नेपाल को सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक वैवाहिक रीति-रिवाजों के अनोखे मेल वाले ‘ड्रीम वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। कार्यक्रम में शामिल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी रॉबिन रेगमी के अनुसार, इसमें नेपाल की 21 प्रतिष्ठित कंपनियों और भारत के 45 वेडिंग प्लानर्स कंपनी की सक्रिय भागीदारी रही।</p>
<p>उन्होंने बताया कि नेपाली प्रतिनिधियों ने नेपाल में विवाह समारोह के लिए उपलब्ध उच्चस्तरीय होटल, रिसॉर्ट और सेवाओं के बारे में प्रस्तुति दी और उनका प्रचार किया। बी-टू-बी बैठकों, प्रस्तुतियों, नेटवर्किंग और चर्चाओं के माध्यम से नेपाल-भारत के बीच वेडिंग टूरिज्म सहयोग बढ़ाने की आधारशिला रखी गई।</p>
<p>नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक राज जोशी ने कहा कि वेडिंग टूरिज्म नेपाल के लिए अत्यधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा, “नेपाल में वेडिंग टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, जहां लग्जरी रिसॉर्ट्स से लेकर प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों तक कई विकल्प उपलब्ध हैं।”</p>
<p>उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रयासों से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था और अन्य सहायक क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p>कार्यक्रम में होटल एसोशिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष विनायक शाह ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच सहयोग वेडिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं, इंडियन वेडिंग प्लानर एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज धवन ने कहा कि भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग की बढ़ती लोकप्रियता नेपाल के लिए बड़ा अवसर है।</p>
<p>नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेंद्र थापा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम नेपाल-भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करेंगे तथा द्विपक्षीय पर्यटन सहयोग को नई ऊंचाई देंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वी सभ्यता में विवाह का गहरा सांस्कृतिक महत्व है और नेपाल भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बाजार के लिए एक आदर्श वेडिंग डेस्टिनेशन बन सकता है।</p>
<p>नेपाल टूरिज्म बोर्ड के हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत, नेपाल के लिए सबसे बड़ा पर्यटन स्रोत बाजार बना हुआ है। वर्ष 2025 में नेपाल आने वाले कुल हवाई पर्यटकों में 25.2 प्रतिशत यानी 2 लाख 92 हजार 438 भारतीय पर्यटक थे। उसी वर्ष कुल 11 लाख 58 हजार 451 हवाई पर्यटक नेपाल पहुंचे थे।</p>
<p>बोर्ड के अनुसार, यदि भारतीय बाजार को लक्षित कर वेडिंग टूरिज्म को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जाए तो इससे उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने और पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलेगी। नेपाल को सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अनुभव, लग्जरी सेवाएं और यादगार विवाह आयोजनों के केंद्र के रूप में स्थापित करने की उम्मीद की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहलगाम हमले की बरसी पर ‘आतंकिस्तान’ ने फिर उगला जहर, शहबाज शरीफ के मंत्री ने भारत से मांगे सबूत</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसे भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/pahalgam-terror-attack-anniversary-pakistan-minister-attaullah-tarar-raises-false-flag-allegation-against-india/article-20724"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/untitled-design.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नैशनल डेस्क: </strong>पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि पहलगाम हमले को लेकर भारत अब तक पाकिस्तान के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका है। तरार ने कहा कि एक साल बीत जाने के बाद भी भारत न तो कोई प्रमाण दे पाया है और न ही कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या की गई थी।</p>
<p>तरार ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत ने पहलगाम घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या यह घटना किसी “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी जांच और बिना किसी उचित पूछताछ के पाकिस्तान पर दोष मढ़ दिया गया। पाकिस्तान की तरफ से यह वही पुराना तरीका दोहराया गया है, जिसमें हर गंभीर आरोप पर जवाब देने के बजाय उल्टा सवाल खड़े करने की कोशिश की जाती है।</p>
<p>पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया था। हमले के दो दिन बाद भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा तौर पर निलंबित कर दिया और साफ संदेश दिया कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते। इसके बाद भारत ने 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू करते हुए पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर का पूरा परिवार मारा गया था।</p>
<p>तरार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार रहा है और उसने पहलगाम हमले में मारे गए नागरिकों के प्रति सहानुभूति जताई थी। हालांकि, भारत की ओर से इस हमले को लेकर लगातार पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया गया और अब तक किसी भी तरह का ऐसा स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिसे पाकिस्तान संतोषजनक मान सके। इसी विवाद के बीच पाकिस्तान ने फिर से “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” का मुद्दा उठाकर पुरानी रणनीति दोहराने की कोशिश की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:42:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में भीषण गैस पाइपलाइन धमाका, एक ही परिवार के 8 लोगों की दर्दनाक मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हरिपुर में गैस पाइपलाइन में हुए भीषण धमाके में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं और सभी एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। हादसा हत्तार इंडस्ट्रियल एस्टेट के पास हुआ, जहां अचानक आग भड़क उठी और आसपास के रिहायशी इलाके को भी अपनी चपेट में ले लिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/horrific-gas-pipeline-explosion-in-pakistan-painful-death-of-8/article-20591"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/8d569333abbc9e26646dc6a398891324_578205688_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>इस्लामाबाद:</strong> पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हरिपुर में गैस पाइपलाइन में हुए भीषण धमाके में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं और सभी एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। यह हादसा हत्तार इंडस्ट्रियल एस्टेट इलाके में हुआ।</p>
<h4><strong>इंडस्ट्रियल एस्टेट के पास भड़की भीषण आग</strong></h4>
<p>द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, हरिपुर के डिप्टी कमिश्नर वसीम अहमद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि धमाके के बाद गैस पाइपलाइन में आग भड़क उठी, जिसने पास के रिहायशी इलाके को भी अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कॉलोनी मोड़ के पास कोट नजीबुल्लाह क्षेत्र में अचानक आग लगने से फैक्टरी और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। फैक्टरी के कर्मचारी तो किसी तरह बच निकले, लेकिन कई लोग फंस गए।</p>
<h4><strong>कई घंटों बाद आग पर काबू, जांच जारी</strong></h4>
<p>रेस्क्यू 1122 और दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। आग की तीव्रता को देखते हुए मनसेहरा, एबटाबाद, मरदान और स्वाबी से अतिरिक्त दमकल वाहन बुलाए गए। करीब सात से आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और बचाव अभियान पूरा हुआ। घायलों का इलाज जारी है। प्रशासन ने एहतियातन हजारा डिवीजन में गैस सप्लाई रोक दी है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:27:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयशंकर के 'दलाल' बयान से तिलमिलाया पाकिस्तान, हिना रब्बानी ने कहा— हद हो गई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong>भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बना भारत के विदेश मंत्री<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784"> <strong>एस. जयशंकर</strong></a> का वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत कोई “दलाल देश” नहीं है। इस टिप्पणी के बाद पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री <strong>हिना रब्बानी खार</strong> <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/india-did-not-bow-down-to-head-trump-threats-to/article-15250">ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे गलत तथा क्षेत्रीय शांति के लिए</a> नुकसानदायक बताया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/HinaRKhar/status/2037498157211570618?s=20">https://twitter.com/HinaRKhar/status/2037498157211570618?s=20</a></blockquote>
<p>
//&gt;&lt;!--

//--&gt;&lt;!</p>
<p><a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/india-did-not-bow-down-to-head-trump-threats-to/article-15250">दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ </a>जब<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784"> पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध को लेकर </a>पाकिस्तान की ओर से अमेरिका और ईरान के <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/jayashankar-a-war-stopped-from-the-native-channel-not-a/article-15028">बीच मध्यस्थता</a></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/jaishankar-dalal-nation-remark-hina-rabbani-khar-reaction-pakistan-india-diplomatic-row/article-19566"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/chatgpt-image-mar-28,-2026,-07_09_17-pm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बना भारत के विदेश मंत्री<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784"> <strong>एस. जयशंकर</strong></a> का वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत कोई “दलाल देश” नहीं है। इस टिप्पणी के बाद पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री <strong>हिना रब्बानी खार</strong> <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/india-did-not-bow-down-to-head-trump-threats-to/article-15250">ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे गलत तथा क्षेत्रीय शांति के लिए</a> नुकसानदायक बताया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/HinaRKhar/status/2037498157211570618?s=20">https://twitter.com/HinaRKhar/status/2037498157211570618?s=20</a></blockquote>
<p>

</p>
<p><a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/india-did-not-bow-down-to-head-trump-threats-to/article-15250">दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ </a>जब<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784"> पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध को लेकर </a>पाकिस्तान की ओर से अमेरिका और ईरान के <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/jayashankar-a-war-stopped-from-the-native-channel-not-a/article-15028">बीच मध्यस्थता की कोशिशों की चर्चा सामने आई।</a> इसी संदर्भ में भारत में आयोजित एक सर्वदलीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसी भूमिका में शामिल नहीं है, <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/jayashankar-a-war-stopped-from-the-native-channel-not-a/article-15028">क्योंकि वह किसी तरह का “दलाल देश” नहीं है।</a></p>

<div style="max-width:100%;margin:22px auto;font-family:Arial, Helvetica, sans-serif;">
<div style="padding:2px;">
<div style="background:#ffffff;padding:20px 22px;font-size:16px;line-height:1.75;color:#111111;">
<div style="background:rgb(216,0,0);color:rgb(255,255,255);padding-top:4px;padding-right:12px;padding-bottom:4px;font-size:12px;font-weight:bold;letter-spacing:0.5px;"> STATEMENT</div>

<div style="font-size:34px;color:#d80000;font-weight:bold;">❝</div>

<div style="padding-left:26px;font-weight:600;">वाह! यह तो हद ही हो गई। यह देखकर दुख होता है कि पूरा का पूरा इलाका ऐसे लोगों और उनके सियासी ड्रामे का बंधक बना हुआ है।</div>

<div style="height:1px;margin:14px 0 10px 0;"> </div>

<div style="font-size:14px;font-weight:bold;color:#d80000;">— हिना रब्बानी खार</div>
</div>
</div>
</div>
<p>जयशंकर के इस बयान पर पाकिस्तान सरकार ने पहले ही नाराजगी जताई थी। इसके बाद शनिवार को हिना रब्बानी खार ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की भाषा और सोच पूरे क्षेत्र को प्रभावित करती है और यह दुखद है कि पूरा इलाका राजनीतिक बयानबाज़ी और सियासी ड्रामे का बंधक बनता जा रहा है।</p>
<p>पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने भी भारत के बयान को खारिज करते हुए इसे गैर-कूटनीतिक बताया और कहा कि जब तर्क कमजोर पड़ जाते हैं, तब अपशब्दों का सहारा लिया जाता है। उन्होंने यह भी सं<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784">केत दिया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भारत कमतर दिखाने की कोशिश कर रहा है।</a></p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्य <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784">मुद्दा पश्चिम एशिया में संभावित संघर्ष और उसे रोकने की कोशिशें हैं। </a>पाकिस्तान यह दावा कर रहा है कि वह <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/strait-of-hormuz-opened-for-indian-tankers-pushpak-parmal-secured-indias/article-18784">अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की भूमिका निभा सकता है,</a> जबकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसी <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/jayashankar-a-war-stopped-from-the-native-channel-not-a/article-15028">मध्यस्थता की राजनीति का हिस्सा नहीं है</a> और <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/jayashankar-a-war-stopped-from-the-native-channel-not-a/article-15028">अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 19:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Epstein Island Secrets: आर्किटेक्ट का सनसनीखेज दावा, ‘कमरों में लड़कियों के लिए बंक बेड और कैद जैसा माहौल’</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>क्राइम डेस्क:</strong> <a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">अमेरिकी कुख्यात कारोबारी और यौन शोषण</a> के आरोपी<a href="https://www.justice.gov/epstein"> जेफरी एपस्टीन</a> के निजी द्वीप <em>लिटिल सेंट जेम्स</em>  पर एक बार फिर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। फ्रांस के मशहूर आर्किटेक्ट रॉबर्ट कूटूरियर ने कहा है कि उन्होंने कुछ समय के लिए इसी द्वीप पर काम किया था और वहां कई ऐसे संकेत दिखे, जिनसे साफ लगता था कि कुछ बहुत गलत चल रहा है। कूटूरियर के हवाले से यह भी कहा गया कि जो लोग भी इस द्वीप पर गए, उन्हें यह इंकार नहीं करना चाहिए कि वहां कुछ असामान्य चल रहा था।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">आर्किटेक्ट ने बताया कि द्वीप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/epstein-island-architect-shocking-claim-girls-bunk-bed/article-19445"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/chatgpt-image-mar-26,-2026,-02_53_22-pm.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>क्राइम डेस्क:</strong> <a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">अमेरिकी कुख्यात कारोबारी और यौन शोषण</a> के आरोपी<a href="https://www.justice.gov/epstein"> जेफरी एपस्टीन</a> के निजी द्वीप <em>लिटिल सेंट जेम्स</em> पर एक बार फिर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। फ्रांस के मशहूर आर्किटेक्ट रॉबर्ट कूटूरियर ने कहा है कि उन्होंने कुछ समय के लिए इसी द्वीप पर काम किया था और वहां कई ऐसे संकेत दिखे, जिनसे साफ लगता था कि कुछ बहुत गलत चल रहा है। कूटूरियर के हवाले से यह भी कहा गया कि जो लोग भी इस द्वीप पर गए, उन्हें यह इंकार नहीं करना चाहिए कि वहां कुछ असामान्य चल रहा था।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">आर्किटेक्ट ने बताया कि द्वीप पर बने कमरों में दो‑मंजिला बंक बेड लगे थे। जब उन्होंने एपस्टीन से पूछा कि ये किसके लिए हैं, तो जवाब आया कि ये “लड़कियों के लिए” हैं। इस जवाब के बाद कूटूरियर को लगा कि यहां कुछ गड़बड़ की बात है, क्योंकि महिलाओं के लिए ऐसे बेड रखना आम तौर पर असामान्य माना जाता है और इससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था और भाषा से यह संकेत मिलता था कि यह जगह सिर्फ शालीन आतिथ्य या सामान्य घर जैसी नहीं थी।</p>
<h5 class="font-editorial font-bold mb-2 mt-4 [.has-inline-images_&amp;]:clear-end text-base first:mt-0"><strong>कमरों का अजीब और डरावना माहौल</strong></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">कूटूरियर ने बताया कि लिटिल सेंट <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/name-of-indian-victim-in-jeffrey-epstein-case-revealed-american/article-18213">जेम्स द्वीप पर बने कई कमरे बेहद अजीब और रहस्यमय माहौल वाले थे।</a> कमरों में भारी और गहरे रंग के परदे लगे रहते थे, खिड़कियां शायद ही कभी खोली जाती थीं और अंदर का माहौल बंद और दबा‑दबा सा लगता था। एक कमरे में कंप्यूटरों से भरी तकनीकी व्यवस्था थी। उन्होंने <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/name-of-indian-victim-in-jeffrey-epstein-case-revealed-american/article-18213">एपस्टीन से इस बारे में पूछा तो जवाब में कहा गया</a> कि यह लड़कियों के मजे करने के लिए है। इतने अजीब–से जवाबों और वातावरण ने उन्हें यह महसूस कराया कि यह द्वीप एक आम प्राइवेट रिज़ॉर्ट या रिहायशी स्थान नहीं, बल्कि कुछ और ही था।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">उनके हवाले से यह भी कहा गया है कि पूरे प्रॉपर्टी का माहौल डरावना और चिंता जगाने वाला था।</a> अंधेरे रंग, खुली न होने वाली खिड़कियां और ऐसी बातें जो युवा लड़कियों को लेकर कही जा रही थीं, ये सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे थे, जिसमें अजीब और असहज महसूस करना लाज़मी था। इन्हीं बातों ने उन्हें यह महसूस कराया कि वहां कुछ गलत चल रहा है, हालांकि उस वक्त उनके पास इस बारे में कोई सबूत या आधिकारिक कार्रवाई का दायरा नहीं था।</p>
<h5 class="font-editorial font-bold mb-2 mt-4 [.has-inline-images_&amp;]:clear-end text-base first:mt-0"><strong>द्वीप पर युवा लड़कियों का “कैद” जैसा वातावरण</strong></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">कूटूरियर का दावा है कि द्वीप पर मौजूद कई युवा लड़कियां</a> और महिलाएं लगभग कैद जैसी स्थिति में रखी गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि साल 2010 में उन्हें इस मामले को लेकर पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और पूरा मामला अधूरा रह गया। इस बात को लेकर आज भी यह तर्क दिया जाता है कि शुरुआती संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे बाद में बड़े पैमाने पर यौन शोषण और रैकेट संभव हो पाए।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">टीम में शामिल अन्य लोगों के हवाले से भी कई चौंकाने वाले दावे आए हैं। <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/name-of-indian-victim-in-jeffrey-epstein-case-revealed-american/article-18213">रिपोर्टों के मुताबिक</a>, कुछ कर्मचारियों ने कहा कि द्वीप पर कुछ कमरों में छोटी उम्र की लड़कियों की तस्वीरें लगी हुई थीं। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि एपस्टीन अक्सर युवा लड़कियों को अपने कमरे में ले जाता था और उनकी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाती थी। <a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">एक कर्मचारी ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य प्रिंस एंड्रयू को भी एक युवा लड़की के साथ पूल में देखा था, जिससे इस मामले की गहराई और भी बढ़ गई।</a></p>
<h5 class="font-editorial font-bold mb-2 mt-4 [.has-inline-images_&amp;]:clear-end text-base first:mt-0"><strong>जारी हुई फाइलों में ताकतवर नाम</strong></h5>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इसी साल 2026 की शुरुआत में ही लगभग <a href="https://www.justice.gov/epstein">30 लाख से ज़्यादा एपस्टीन‑संबंधित फाइलें जारी की गईं</a>, जिनमें कई ताकतवर हस्तियों के नाम शामिल मिले। इन दस्तावेज़ों में माइक्रोसॉफ्ट के सह‑संस्थापक बिल गेट्स, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और प्रिंस एंड्रयू जैसी शीर्ष व्यक्तियों के नाम दिखाई दिए। इन फाइलों में कुछ तस्वीरें भी शामिल थीं, जिनमें ये लोग युवा लड़कियों के साथ नजर आ रहे थे। यही बात इस केस को सिर्फ एक <a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">व्यक्तिगत</a> अपराध से लेकर एक बड़े राजनीतिक‑सामाजिक घोटाले की श्रेणी में बढ़ा देती है।</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि <a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/name-of-indian-victim-in-jeffrey-epstein-case-revealed-american/article-18213">जेफरी एपस्टीन के द्वीप पर जो चल रहा था,</a> वह एक सामान्य प्राइवेट लाइफस्टाइल या शाही मनोरंजन से कहीं ज़्यादा गहरा और अवैध था। फ्रेंच आर्किटेक्ट रॉबर्ट कूटूरियर का खुलासा इस घटनाक्रम के रास्ते में आए और भी चौंकाने वाले हिस्से को उजागर करता है, <a href="https://samridhjharkhand.com/trending/epstein-files-shower-of-resignations-in-britain-norway-european-governments-shaken/article-18004">जहां तकनीकी या वास्तुकला के काम के बहाने भी असहज वास्तविकता दिखाई दी। अब जनता की नज़र इन नई फाइलों, पुराने दावों और जांच पर है कि आगे कौन‑कौन से घालमेल और जिम्मेदारी सामने आती है।</a></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/international/epstein-island-architect-shocking-claim-girls-bunk-bed/article-19445</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:54:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में 47 सांसद मातृभाषा में लेंगे शपथ, 17 भाषाओं में होगा समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में 47 सांसद 17 मातृभाषाओं में शपथ लेंगे, 26 मार्च को होगा शपथ ग्रहण समारोह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/47-mps-in-nepal-will-take-oath-in-mother-tongue/article-19367"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/465df59561ca2fdc9a84de2267104990_336479781_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू: </strong>नेपाल में प्रतिनिधि सभा के 47 नवनिर्वाचित सांसदों अपनी-अपनी मातृभाषा में शपथ लेने के लिए आवेदन किया है। सभी ने अपना नाम संसद सचिवालय में दर्ज करा दिया है। यह सभी 17 बोलियों (मातृभाषा) में 26 मार्च को शपथ ग्रहण करेंगे। शपथ संबंधी अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, कोई भी सार्वजनिक पद धारण करने वाला व्यक्ति नेपाल में बोली जाने वाली अपनी मातृभाषा में शपथ ले सकता है। इसके लिए मातृभाषा का विवरण शपथ दिलाने वाले अधिकारी को उपलब्ध कराना आवश्यक है।<br /><br />संसद सचिवालय के अनुसार, नेपाली भाषा में शपथ लेने के लिए अनुष्का श्रेष्ठ, कुलभक्त शाक्य, कुसुम महर्जन, कृपा महर्जन, गंगालक्ष्मी अवाल, मदन कृष्ण श्रेष्ठ, रुकेश रंजित, विराज भक्त श्रेष्ठ और सहजान खातुन ने आवेदन दिया है। डोटेली भाषा में आकृति अवस्थी, दीपकराज बोहरा और हरिनादेवी कामी शपथ लेंगी। मैथिली में अंकिता ठाकुर, आशा झा, उज्ज्वलकुमार झा, कामिनी कुमारी, तपेश्वर यादव, दीपककुमार साह, नरेंद्र साह कलवार, निशा मेहता, मनीष झा, मातृकाप्रसाद यादव, रामजी यादव, सीताराम साह, शम्भु कुमार यादव और जोग कुमार बरबरिया यादव शपथ लेंगे।<br /><br />बज्जिका भाषा में नीतिमा भण्डारी कार्की और राजेशकुमार चौधरी शपथ लेंगे। भोजपुरी में कन्हैया बनियाँ, बुद्धिप्रसाद पंत और रविन्द्र पटेल शपथ लेंगे। थारू भाषा में अमरकांत चौधरी, अशोककुमार चौधरी, गीता चौधरी, प्रमिलाकुमारी गच्छदार और सुरेन्द्र चौधरी, जबकि कठरिया थारू में करिश्मा कठरिया तथा राना थारू में कृपाराम राना शपथ लेंगे। मगही भाषा में प्रमोदकुमार महतो और राजकिशोर महतो शपथ लेंगे। संस्कृत में खुश्बु ओली, बान्तावा में ध्रुवराज राई, तामांग में परशुराम तामांग, चाम्लिंग में निष्कल राई, अवधी में मोहम्मद इश्तियाक राई, बझांगी में ऐनबहादुर महर, छन्त्याल में गंगा छन्त्याल और मगर खाम में रेनुका काउचा शपथ लेंगी।<br /><br />संसद सचिवालय 26 मार्च को प्रतिनिधि सभा के नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएगा। बुधवार को ज्येष्ठ सदस्य अर्जुननरसिंह केसी ने राष्ट्रपति से शपथ ली है और वे अगले दिन सिंहदरबार स्थित निर्माणाधीन संसद भवन के बहुउद्देश्यीय हॉल में अन्य सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। शुक्रवार को बालेन्द्र शाह राष्ट्रपति के समक्ष प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 13:45:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Anshika Ambasta]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>29 साल की पूरी तरह स्वस्थ महिला को दी इच्छामृत्यु, दुनिया हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[गाजियाबाद के हरीश राणा को 13 साल कोमा में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने और नीदरलैंड की 29 वर्षीय जोराया टेर बीक को मानसिक पीड़ा के आधार पर इच्छामृत्यु दिए जाने से इस संवेदनशील मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/national/didnt-want-to-live-people-were-shocked-by-the/article-19227"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/capture_samridh_1200x720-(1)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>इच्छामृत्यु को लेकर एक बार फिर देश और दुनिया में बहस तेज हो गई है। गाजियाबाद के हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे, उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट से पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति मिली। वहीं, इसके उलट नीदरलैंड की 29 वर्षीय जोराया टेर बीक को मानसिक पीड़ा के आधार पर इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी गई, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<h3><strong>भारत में सख्त कानून, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मिली अनुमति</strong></h3>
<p>हरीश राणा का मामला भारत में इच्छामृत्यु की जटिल प्रक्रिया को दर्शाता है। उनके पिता को बेटे की इच्छामृत्यु के लिए करीब दो साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े। पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर पैसिव यूथिनेशिया की अनुमति दी। भारत में केवल निष्क्रिय इच्छामृत्यु ही वैध है, वह भी तब जब मरीज के ठीक होने की कोई उम्मीद न हो।</p>
<h3><strong>यूरोप में अलग दृष्टिकोण, मानसिक पीड़ा भी माना गया आधार</strong></h3>
<p>इसके विपरीत, नीदरलैंड में 29 वर्षीय जोराया टेर बीक को मानसिक तनाव, डिप्रेशन और ट्रॉमा के आधार पर इच्छामृत्यु की अनुमति मिली। वह शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थीं, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि उनकी मानसिक स्थिति ने जीवन को असहनीय बना दिया है। करीब साढ़े तीन साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें मंजूरी मिली। नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है।</p>
<h3><strong>क्या मरने का अधिकार भी मौलिक अधिकार है?</strong></h3>
<p>इन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जीने का अधिकार, मरने के अधिकार को भी शामिल करता है। आलोचकों का मानना है कि मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति हमेशा स्वतंत्र निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होता, जबकि समर्थकों का कहना है कि असहनीय पीड़ा की स्थिति में व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:34:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर कोरिया ने दागी 10 बैलिस्टिक मिसाइलें: अमेरिका के THAAD हटाने पर किम का तगड़ा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>सियोल से सनसनीखेज खबर आ रही है। शनिवार दोपहर उत्तर कोरिया ने अपनी राजधानी प्योंगयांग के पास सुनान इलाके से करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो जापान सागर यानी पूर्वी सागर की ओर बढ़ीं। दक्षिण कोरिया की जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसकी तुरंत पुष्टि की और बताया कि मिसाइलें समुद्र में गिरीं, लेकिन इससे पूरे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव चरम पर पहुंच गया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032680576864628843?s=20">https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032680576864628843?s=20</a></blockquote>
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<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह मिसाइल परीक्षण बिल्कुल सही समय पर हुआ है, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपने सालाना 'फ्रीडम शील्ड' संयुक्त सैन्य अभ्यास में जुटे हैं। उत्तर कोरिया इन्हीं अभ्यासों को अपने खिलाफ 'आक्रमण की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/north-korea-fired-10-ballistic-missiles-kims-strong-response-to/article-18857"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/chatgpt-image-mar-14,-2026,-05_27_59-pm.jpg" alt=""></a><br /><p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2"><strong>नेशनल डेस्क: </strong>सियोल से सनसनीखेज खबर आ रही है। शनिवार दोपहर उत्तर कोरिया ने अपनी राजधानी प्योंगयांग के पास सुनान इलाके से करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो जापान सागर यानी पूर्वी सागर की ओर बढ़ीं। दक्षिण कोरिया की जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसकी तुरंत पुष्टि की और बताया कि मिसाइलें समुद्र में गिरीं, लेकिन इससे पूरे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव चरम पर पहुंच गया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032680576864628843?s=20">https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032680576864628843?s=20</a></blockquote>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">

</p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">यह मिसाइल परीक्षण बिल्कुल सही समय पर हुआ है, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपने सालाना 'फ्रीडम शील्ड' संयुक्त सैन्य अभ्यास में जुटे हैं। उत्तर कोरिया इन्हीं अभ्यासों को अपने खिलाफ 'आक्रमण की रिहर्सल' बताता रहा है और अक्सर ऐसे मौकों पर अपनी सैन्य ताकत दिखाने का बहाना बना लेता है। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि मिसाइलें उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर समुद्र में गिरीं, जिससे जापान को तत्काल खतरा नहीं हुआ।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032685509567459470?s=20">https://twitter.com/JPN_PMO/status/2032685509567459470?s=20</a></blockquote>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">

<span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">इस घटना ने दक्षिण कोरिया में सुरक्षा चिंताओं को और हवा दे दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के सियोंगजू में तैनात अपनी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली की बैटरी को हटा लिया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने इसे मध्य पूर्व में ईरान के साथ चल रही जंग के लिए भेज दिया, जहां अमेरिकी रक्षा सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। एसोसिएटेड प्रेस ने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के कार्यालय से पूछा था, तो उन्होंने अमेरिकी सेना के ऑपरेशन की पुष्टि से इनकार कर दिया।<span class="inline-flex">​</span></p>
<p class="my-2 [&amp;+p]:mt-4 [&amp;_strong:has(+br)]:inline-block [&amp;_strong:has(+br)]:pb-2">दक्षिण कोरिया की सेना ने निगरानी तेज कर दी है और अमेरिका-जापान के साथ रीयल-टाइम जानकारी साझा कर रही है। विशेषज्ञ इसे किम जोंग उन का स्पष्ट संदेश मान रहे हैं - खासकर तब जब अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया पर केंद्रित है। यह इस साल उत्तर कोरिया का तीसरा मिसाइल लॉन्च है, जो जनवरी के बाद पहला बैलिस्टिक टेस्ट है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ शक्ति प्रदर्शन था या कोरियाई प्रायद्वीप में नई टकराव की शुरुआत?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:29:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Desk]]></dc:creator>
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