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                <title>अंतरराष्ट्रीय - Samridh Jharkhand</title>
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                            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर प्रारंभिक सहमति, 14 बिंदुओं वाले मसौदे से मध्य पूर्व में तनाव घटने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति बनने की खबर सामने आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/us-iran-peace-agreement-draft-middle-east-tension-relief/article-23356"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/6ad5d29de368db3dcf6f9d8e133a223a_1802058976_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>पेरिस (फ्रांस):</strong> मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के मसौदे पर प्रारंभिक सहमति बनने की खबर है। मसौदे में सैन्य गतिविधियों को रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग तथा परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने फ्रांस में आयोजित एक बैठक के दौरान इस मसौदे पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद व्हाइट हाउस, अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों में इस समझौते को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि अमेरिका ने इस दस्तावेज को <strong>‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’</strong> के रूप में जारी किया है। समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना, समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना, परमाणु विवाद का समाधान खोजना और दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने और उस पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर ओमान समेत कई देशों के साथ लंबे समय से परामर्श चल रहा था और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।</p>
<h4>समझौते के 14 प्रमुख बिंदु</h4>
<p class="isSelectedEnd"><strong>1. सभी प्रकार के सैन्य संघर्ष पर रोक</strong><br />अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों ने तत्काल प्रभाव से सैन्य अभियानों को समाप्त करने तथा भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई नहीं करने का संकल्प लिया है। इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष भी शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>2. संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान</strong><br />दोनों देश एक-दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>3. 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य</strong><br />दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर व्यापक और अंतिम समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>4. अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की प्रक्रिया</strong><br />समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसे 30 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>5. होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन</strong><br />ईरान अगले 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध मार्ग उपलब्ध कराएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>6. ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना</strong><br />ईरान की अर्थव्यवस्था और पुनर्निर्माण को समर्थन देने के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना का प्रस्ताव रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>7. प्रतिबंध हटाने का रोडमैप</strong><br />ईरान पर लगे विभिन्न आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>8. परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता</strong><br />ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। दोनों देश परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर आगे विस्तृत वार्ता करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>9. वार्ता के दौरान यथास्थिति कायम रहेगी</strong><br />अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति को बनाए रखेंगे और किसी नए तनावपूर्ण कदम से बचेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>10. तेल निर्यात को तत्काल राहत</strong><br />अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़ी बैंकिंग, बीमा तथा परिवहन सेवाओं के लिए विशेष छूट जारी करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>11. फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच</strong><br />अमेरिका ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित संपत्तियों और धनराशि को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>12. निगरानी तंत्र की स्थापना</strong><br />समझौते के क्रियान्वयन और अनुपालन की निगरानी के लिए एक विशेष कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>13. अंतिम समझौते पर औपचारिक वार्ता</strong><br />दोनों पक्ष व्यापक और स्थायी समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>14. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मान्यता</strong><br />अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<h4>क्षेत्रीय और वैश्विक असर</h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो इससे मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने, वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही अमेरिका और ईरान के संबंधों में भी एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:27:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में बड़ा बदलाव: खत्म होगी RAB, सरकार बनाएगी नया सुरक्षा बल</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश सरकार देश की विशेष अर्धसैनिक इकाई रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) को समाप्त कर नया सुरक्षा बल गठित करने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/bangladesh-rab-replacement-new-security-force-srb-ppf-news/article-23306"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/b510c3fca0a1f79d6494f455f9f34d5f_887227055_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p><strong>ढाका:</strong> बांग्लादेश सरकार देश की चर्चित अर्धसैनिक इकाई <strong>रैपिड एक्शन बटालियन (RAB)</strong> को समाप्त करने की तैयारी कर रही है। गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे के अनुसार, आरएबी की जगह एक नए विशेष सुरक्षा बल का गठन किया जाएगा, जो आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और संगठित अपराध पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालेगा।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए बल का नाम <strong>स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन (SRB)</strong> या <strong>पीपुल्स प्रोटेक्शन फोर्सेज (PPF)</strong> रखा जा सकता है। इसके लिए सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत आरएबी का पूरा ढांचा, संसाधन, कर्मचारी और चल रहे अभियान नए बल में समाहित कर दिए जाएंगे।</p>
<h4>2004 में हुआ था आरएबी का गठन</h4>
<p>रैपिड एक्शन बटालियन की स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी। यह बांग्लादेश का एक विशेष अर्धसैनिक बल है, जिसे देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आतंकवाद और उग्रवाद पर नियंत्रण करने तथा संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के लिए गठित किया गया था।</p>
<p>पिछले दो दशकों में आरएबी ने कई बड़े ऑपरेशन चलाए, लेकिन इस दौरान उस पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगते रहे।</p>
<h4>नए बल को मिलेंगे व्यापक अधिकार</h4>
<p>गृह मंत्रालय के मसौदे के मुताबिक नए बल को किसी भी स्थान पर प्रवेश करने, तलाशी लेने, संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। हालांकि ऐसी कार्रवाई की लिखित जानकारी संबंधित पुलिस थाने को देना अनिवार्य होगा।</p>
<p>सरकार का कहना है कि नए ढांचे का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि अधिक जवाबदेह और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील सुरक्षा बल का निर्माण करना है।</p>
<h4>मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के बाद उठाया कदम</h4>
<p>आरएबी पर वर्षों से मानवाधिकार हनन, जबरन गायब किए जाने और कथित फर्जी मुठभेड़ों जैसे आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2021 में अमेरिका ने मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के चलते आरएबी के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे।</p>
<p>हाल ही में गठित एक जांच आयोग ने भी जबरन लापता किए गए लोगों के मामलों की जांच के बाद आरएबी को भंग करने की सिफारिश की थी।</p>
<h4>जवाबदेही पर जोर</h4>
<p>मानवाधिकार संगठन <strong>ह्यूमन राइट्स एंड पीस फॉर बांग्लादेश</strong> के अध्यक्ष एडवोकेट मंजिल मुर्शिद ने कहा कि केवल नाम बदलना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आरएबी के पास अनुभवी और प्रशिक्षित अधिकारी हैं, इसलिए सुधार प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य गलत कार्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना और संस्थागत पारदर्शिता बढ़ाना होना चाहिए।</p>
<h4>सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी</h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह बांग्लादेश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था व्यवस्था में पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव साबित हो सकता है। सरकार का दावा है कि नया बल सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ मानवाधिकार मानकों का भी पालन करेगा।</p>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जी-7 के मंच पर भारत की बढ़ी ताकत, मोदी ने जापान, ब्रिटेन और यूएई संग मजबूत किए रिश्ते</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, जापान, मिस्र और केन्या के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/pm-modi-g7-summit-meetings-uk-uae-japan-egypt-kenya/article-23302"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/c4ce31db-3070-412b-8105-72f45714bad8_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p><strong>एवियन (फ्रांस):</strong> फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेताओं से मुलाकात कर भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति का मजबूत संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जापान, मिस्र और केन्या के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की।</p>
<h2>भारत-ब्रिटेन संबंधों को मिलेगी नई गति</h2>
<p>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ हुई बैठक में दोनों नेताओं ने पिछले एक वर्ष में द्विपक्षीय संबंधों में आई मजबूती पर संतोष जताया। हालिया व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। बातचीत में नवाचार, एआई, कौशल विकास, खेल और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।</p>
<h2>यूएई के साथ रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा</h2>
<p>संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय को मिल रहे सहयोग और सम्मान के लिए राष्ट्रपति का आभार भी व्यक्त किया।</p>
<h2>जापान के साथ व्यापार और निवेश पर फोकस</h2>
<p>जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ वार्ता में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी विस्तार पर सहमति जताई।</p>
<h2>मिस्र के साथ ऐतिहासिक मित्रता पर जोर</h2>
<p>मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-मिस्र संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को विशेष महत्व का बताया।</p>
<h2>केन्या के साथ ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर चर्चा</h2>
<p>केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बैठक में वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की प्राथमिकताओं, विकास चुनौतियों और सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और केन्या की साझेदारी आपसी विश्वास और साझा विकास पर आधारित है।</p>
<h2>वैश्विक मंच पर मजबूत हो रही भारत की भूमिका</h2>
<p>जी-7 सम्मेलन के दौरान हुई इन महत्वपूर्ण बैठकों को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रभावशाली कूटनीति का प्रतीक माना जा रहा है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत की सक्रिय भागीदारी दुनिया के प्रमुख देशों के साथ उसके संबंधों को नई मजबूती प्रदान कर रही है।</p>
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                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:41:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उड़ान भरते ही आसमान से गिरा अमेरिकी एयरफोर्स का B-52 बॉम्बर, 8 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एयरफोर्स का B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/america-b52-bomber-crash-california-8-dead/article-23253"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/d561ddef-e24e-439e-9808-8de82b22ea89_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>कैलिफोर्निया:</strong> अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का शक्तिशाली <strong>B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर</strong> सोमवार को उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी <strong>8 लोगों की मौत</strong> हो गई।</p>
<p>स्थानीय समयानुसार सुबह करीब <strong>11:20 बजे</strong> यह दुर्घटना हुई। बताया जा रहा है कि B-52 बॉम्बर नियमित परीक्षण मिशन (रूटीन टेस्ट फ्लाइट) पर रवाना हुआ था। उड़ान के तुरंत बाद विमान नियंत्रण खो बैठा और क्रैश होकर उसमें भीषण आग लग गई।</p>
<p>एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के <strong>412वें टेस्ट विंग</strong> के डिप्टी कमांडर <strong>कर्नल जेम्स हेस</strong> ने बताया कि दुर्घटना इतनी भयावह थी कि किसी के जीवित बचने की संभावना नहीं थी। उन्होंने कहा कि हादसे में देश ने अपने आठ अनुभवी कर्मियों को खो दिया है।</p>
<h3>बोइंग के दो कर्मचारी भी थे सवार</h3>
<p>विमान में मौजूद लोगों में वायुसेना के जवानों के अलावा सरकारी कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल थे। एयरोस्पेस कंपनी <strong>बोइंग</strong> ने पुष्टि की है कि मृतकों में उसके दो कर्मचारी भी शामिल हैं। कंपनी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।</p>
<h3>जांच शुरू, एयरबेस अस्थायी रूप से बंद</h3>
<p>हादसे के बाद एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में कई महीने लग सकते हैं। एहतियात के तौर पर एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस का एयरफील्ड अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और सभी उड़ानों का मार्ग बदल दिया गया है।</p>
<h3>अमेरिकी वायुसेना की ताकत है B-52</h3>
<p>B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस दुनिया के सबसे प्रसिद्ध लंबी दूरी के बॉम्बर्स में गिना जाता है। 1950 के दशक से यह अमेरिकी वायुसेना की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह विमान पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और कई बड़े सैन्य अभियानों में उपयोग किया जा चुका है।</p>
<p>दुर्घटना ने अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान को झकझोर दिया है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो हादसे की वास्तविक वजह सामने लाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 08:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या खत्म होगा दशकों पुराना तनाव? अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/america-iran-300-billion-dollar-peace-deal-discussion/article-23252"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/06b83fe2-7e85-41d3-9493-37eb2f7470ee_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़े शांति समझौते की चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते की कुल आर्थिक कीमत करीब <strong>300 अरब डॉलर</strong> आंकी जा रही है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक डील माना जा रहा है।</p><p>सूत्रों के अनुसार, समझौते के ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान ने वर्षों से लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और अपने जमे हुए विदेशी फंड्स तक पहुंच बहाल करने की मांग रखी है। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कड़े अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र को स्वीकार करे और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाए।</p><h3>क्या हो सकती हैं प्रमुख शर्तें?</h3><ul><li>ईरान पर लगे प्रमुख आर्थिक प्रतिबंधों में राहत।</li><li>ईरानी तेल और गैस निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील।</li><li>विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को चरणबद्ध तरीके से जारी करना।</li><li>परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को मजबूत करना।</li><li>क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों पर नए समझौते।</li></ul><h3>वैश्विक बाजारों पर असर</h3><p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।</p><h3>अभी नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि</h3><p>हालांकि दोनों देशों की ओर से प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पैकेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बातचीत अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी बताई जा रही है और अंतिम सहमति बनने में समय लग सकता है।</p><p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह समझौता सफल होता है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 08:10:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका में बड़ा विमान हादसा, 12 यात्रियों की मौत से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के मिसौरी राज्य में एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी 12 लोगों की मौत हो गई। हादसा बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के निकट हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/missouri-plane-crash-12-killed-america/article-23203"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/86de1f72-0894-4d30-899b-7556e7f9cfb3_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन/मिसौरी:</strong> अमेरिका के मिसौरी राज्य में रविवार को एक दर्दनाक विमान हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के निकट एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 12 लोगों के मारे जाने की आशंका है।</p>
<p>मिसौरी स्टेट हाईवे पेट्रोल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन बचाव दल मौके पर पहुंच गया। दुर्घटनास्थल को सुरक्षा घेरे में लेकर राहत और जांच कार्य शुरू कर दिया गया है।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के आसपास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हालांकि, हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। अमेरिकी विमानन सुरक्षा एजेंसियों और जांच अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।</p>
<p>स्थानीय प्रशासन ने बताया कि मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी। बटलर शहर कैनसस सिटी से लगभग 60 मील दक्षिण में स्थित है।</p>
<p>इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 07:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी, ‘भारत इनोवेट्स’ से वीवा टेक तक नवाचार पर रहेगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर नीस पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान वह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और जी-7 सम्मेलन में भाग लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/pm-modi-france-visit-bharat-innovates-vivatech-g7-summit/article-23169"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/bec7fc00ba44571eb42a85eb7d313947_146332009_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>नीस (फ्रांस):</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा के तहत फ्रांस पहुंच गए हैं। उनकी यह यात्रा भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और नवाचार सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p><p class="isSelectedEnd">नीस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उनकी यात्रा केवल नीस तक सीमित नहीं होगी, बल्कि एवियां और पेरिस में भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के माध्यम से भारत अपने प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग और मित्रता को और मजबूत करेगा।</p><p class="isSelectedEnd">फ्रांस पहुंचने पर प्रवासी भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर मोदी ने भारतीय समुदाय के स्नेह और मातृभूमि के प्रति उनके गहरे जुड़ाव की सराहना की।</p><p class="isSelectedEnd">14 जून को प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेंगे और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। इसी दौरान दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप तथा वेंचर कैपिटल संस्थान भाग लेंगे।</p><p class="isSelectedEnd">भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी और उद्यमशीलता के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को नई गति देने वाला माना जा रहा है।</p><p class="isSelectedEnd">फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को एवियां में आयोजित जी-7 सम्मेलन में भी भाग लेंगे। वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।</p><p class="isSelectedEnd">इसके बाद 18 जून को प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े टेक और स्टार्टअप आयोजन ‘वीवा टेक’ में शामिल होंगे। इस वर्ष सम्मेलन में भारत का मंडप सबसे बड़ा होगा, जो वैश्विक नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और स्टार्टअप क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करेगा।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ नवाचार, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग के नए अवसर भी खोलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:44:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान टकराव और गहरा, बहरीन-कुवैत तक पहुंची जंग की आंच</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है। ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने ईरान पर नए हमले किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-us-conflict-bahrain-kuwait-hormuz-strait-tension/article-23056"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/96284a5cd6d5333d29d133e1d1ce4721_599407987_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>तेहरान/वाशिंगटन/कुवैत सिटी/मनामा:</strong> अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के चलते खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हमले किए हैं, जबकि ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का कहना है कि उसके हमले आत्मरक्षा के तहत किए गए हैं और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है।</p>
<p>तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी विवाद गहरा गया है। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की है, जबकि अमेरिका का कहना है कि व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही अभी भी जारी है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, बहरीन और कुवैत में अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्रीय वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय हैं और कई स्थानों पर ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को रोकने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 10:03:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ब्रिटेन समेत 22 देशों ने ईरान को घेरा, संयुक्त बयान से बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका, ब्रिटेन सहित 22 देशों ने ईरान पर विदेशों में रह रहे विरोधियों, पत्रकारों और यहूदी समुदाय से जुड़े लोगों को धमकाने, अपहरण करने तथा उन पर हमलों की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-22-countries-allegations-against-opposition-journalists/article-23051"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/iran-news-landscape-collage_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong> अमेरिका, ब्रिटेन समेत 22 देशों ने ईरान पर विदेशों में रह रहे लोगों को धमकाने, उनका अपहरण करने और उन पर हमलों की कथित साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान से ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद करने की मांग की है और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता जताई है।</p><p>ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान की <strong>इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी)</strong>, उसकी <strong>कुद्स फोर्स</strong> और खुफिया एजेंसियां कथित तौर पर ईरानी सरकार के आलोचकों, पत्रकारों तथा यहूदी और इजराइली समुदाय से जुड़े लोगों को निशाना बना रही हैं। संयुक्त बयान में इन गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया गया है।</p><p>बयान में कहा गया है कि संबंधित देश मिलकर इन खतरों का सामना करेंगे और ईरान से अपेक्षा करते हैं कि वह ऐसी सभी कथित कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करे।</p><p>इस संयुक्त बयान का समर्थन ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल और स्वीडन सहित कई देशों ने किया है। सभी देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:39:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: होर्मुज के पास ईरान ने गिराया अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक अमेरिकी एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हादसे के बाद दोनों पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/trump-claims-iran-shot-down-us-apache-helicopter-near-hormuz/article-23000"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/ef1cc449-e2d5-4156-8d88-0c8a4470a6da_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन:</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक अमेरिकी सैन्य हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रहा है और इसका उचित जवाब दिया जाएगा।</p><p>राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर अमेरिकी सेना का एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर था। हालांकि हादसे में दोनों पायलट सुरक्षित बचा लिए गए और उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। ट्रंप ने घटना के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अमेरिका इस मामले पर चुप नहीं बैठेगा।</p><p>इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान पहली बार एक मानवरहित ड्रोन नौका का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर के समुद्र में गिरने के बाद ड्रोन नौका ने दोनों पायलटों का पता लगाया और लगभग दो घंटे तक पानी में रहने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p><p>कैप्टन हॉकिन्स के मुताबिक, यह अभियान आधुनिक सैन्य तकनीक और बचाव क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने बताया कि कठिन समुद्री परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन नौका ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पायलटों की जान बचाने में सफलता हासिल की।</p><p>घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, ईरान की ओर से ट्रंप के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी दावे की पुष्टि होती है तो यह घटना पहले से तनावपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 08:02:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओमान के तट पर अमेरिकी मिसाइल हमला, तेल टैंकर डूबा; 24 भारतीय नाविकों को बचाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[ओमान के मसिराह तट के पास एमटी मैरिवेक्स नामक तेल टैंकर से जुड़ी घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। जहाज पर सवार सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/oil-tanker-disabled-while-trying-to-break-us-blockade-off/article-22947"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/87bd9a055873329058e11414b9a50d85_925739981_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> ओमान के मसिराह तट के पास चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज करने और नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश में अमेरिका ने सोमवार को पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी मैरिवेक्स पर मिसाइल से हमला कर दिया। हालांकि, इस पर सवार सभी 24 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें ओमानी अधिकारियों की मदद से बचा लिया गया है।</p>
<p>भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह जहाज खाली था और उस पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह ब्लैकलिस्टेड जहाज अमेरिकी नौसेना की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज कर नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह जहाज विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) की प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल था।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार, एमटी मैरिवेक्स ने पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते पिछले कई दिनों में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की चार कोशिशें की थीं। तीन बार चेतावनी मिलने पर जहाज पीछे हट गया, लेकिन 8 जून को चौथे प्रयास में उसने ओमानी समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान जहाज ने अपने सिग्नल उपकरण बंद कर दिए, ताकि उसका पता न चल सके।</p>
<p>बार-बार चेतावनी नहीं मानने के बाद अमेरिकी नौसेना ने अपने युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) से एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान के जरिए इस जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग हिस्सों पर सटीक हमला कर इसे डुबो दिया। हमले के समय जहाज खाली था और उसमें कोई माल लदा नहीं था।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर कहा कि 8 जून को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने बिना तेल वाले एक टैंकर को रोक दिया। यह टैंकर ईरान के बंदरगाह तक जाने की कोशिश कर नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। जब चालक दल ने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया, तो एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट विमान ने जहाज पर हमला किया।</p>
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                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ताज़ा खबरें </category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:53:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
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                <title>दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडरा सकता है खतरा, ईरान ने दी बड़ी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंधों को राजनीतिक कदम बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/international/iran-hormuz-strait-eu-sanctions-global-oil-trade/article-22939"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/fc99ed0e-923f-463c-a75e-70ebbe6279aa_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>तेहरान:</strong> ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपने संप्रभु अधिकारों का प्रयोग जारी रखेगा और बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।</p>
<h3>EU प्रतिबंधों पर ईरान की प्रतिक्रिया</h3>
<p>ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने यूरोपीय संघ के फैसले को "भ्रामक और राजनीतिक कदम" करार दिया। उन्होंने कहा कि तेहरान इस तरह के प्रतिबंधों को कोई महत्व नहीं देता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ता रहेगा।</p>
<h3>क्यों महत्वपूर्ण है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?</h3>
<p>हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है।</p>
<h3>EU ने क्यों लगाए प्रतिबंध?</h3>
<p>यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख के अनुसार, सदस्य देशों ने कुछ ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। आरोप है कि इन लोगों और संस्थाओं ने जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को सीमित करने में भूमिका निभाई है।</p>
<h3>वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर</h3>
<p>ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में जारी गतिरोध के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>अंतरराष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 07:27:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
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