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                <title>धर्म - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>धर्म RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अयोध्या राम मंदिर से बड़ी खबर: दान चोरी पर नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने दान चोरी की घटना को मंदिर के लिए "कलंक" बताते हुए कहा कि इस घटना से सभी स्वयं को छोटा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/nripendra-mishra-aims-to-complete-all-major-constructions-of-ram/article-23989"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/10ea54c37447acd5a45c385d11f4d7ba_1578457927_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या: </strong>राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा शनिवार को दान चाेरी प्रकरण पर कहा कि यह घटना अपने आप में "कलंक" है। हम सभी स्वयं को छोटा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि व्यवस्थाओं में सुधार होगा। भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होगी।<br /><br />शनिवार काे सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू नृपेन्द्र मिश्र ने कहा किा पुराने मंदिर स्मारक का निर्माण लगभग पूरा हाे गया है। अब वहां 24 घंटे अखंड ज्योति जलाने की तैयारी है। हुतात्मा स्मारक का निर्माण जुलाई के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। 30 जुलाई तक राम मंदिर के सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरे होने का लक्ष्य है। उम्मीद है कि समय रहते कार्य पूरा हाे जाएगा। केवल चार किलोमीटर लंबी चहारदीवारी का कार्य शेष है, जिसे 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।<br /><br />उन्होंने बताया कि राम मंदिर का ऑडिटोरियम दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार होगा। राम कथा संग्रहालय की 20 गैलरियों की स्टोरीलाइन तैयार है। वीडियो प्रस्तुति पर बैठक में अंतिम निर्णय होगा। इसके अलावा उन्हाेंने बताया कि सीईओ की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति अंतिम फैसला करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:24:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा के लिए 9,182 श्रद्धालुओं का 10वां जत्था रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[श्री अमरनाथ यात्रा के तहत शनिवार को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप से 10वां जत्था पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में 9,182 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनमें 2,435 महिलाएं, 256 साधु, 46 साध्वियां और 31 बच्चे भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहलगाम और बालटाल मार्गों के लिए भेजा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/amidst-tight-security-the-10th-batch-of-9182-devotees-left/article-23988"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-07/high_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>जम्मू :</strong> श्री अमरनाथ यात्रा के तहत शनिवार को 2,435 महिलाओं सहित कुल 9,182 श्रद्धालुओं का 10वां जत्था जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप से पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हुआ। श्रद्धालुओं को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अलग-अलग काफिलों में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले स्थित पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल बेस कैंप के लिए भेजा गया।<br /><br />अधिकारियों के अनुसार, रवाना हुए श्रद्धालुओं में 256 साधु, 46 साध्वियां और 31 बच्चे भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जम्मू से लेकर दोनों यात्रा मार्गों तक बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में वाहनों के काफिले को निर्धारित समय पर रवाना किया गया।<br /><br />अधिकारियों के अनुसार, 206 वाहनों के काफिले में 5,877 श्रद्धालुओं को पारंपरिक पहलगाम मार्ग के लिए भेजा गया। यह मार्ग अनंतनाग जिले के नुनवान बेस कैंप से होकर पवित्र गुफा तक पहुंचता है और अपेक्षाकृत लंबा लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर माना जाता है। वहीं, 127 वाहनों में सवार 3,305 श्रद्धालुओं ने गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग को चुना, जो दूरी में छोटा होने के कारण कम समय में गुफा तक पहुंचने का विकल्प प्रदान करता है।<br /><br />प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा सेवाएं, पेयजल, बिजली, संचार, भोजन, आवास तथा आपदा प्रबंधन की व्यापक व्यवस्था की है। मौसम और सुरक्षा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि यात्रा सुचारु रूप से जारी रहे।<br /><br />उल्लेखनीय है कि समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की 57 दिवसीय वार्षिक यात्रा 3 जुलाई से पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों से शुरू हुई थी। यह यात्रा रक्षा बंधन के पावन पर्व के अवसर पर 28 अगस्त को संपन्न होगी।<br /><br />धार्मिक आस्था और उत्साह के बीच इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अब तक देश-विदेश से आए दो लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर चुके हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी, जिसके मद्देनजर सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>24 एकादशियों के पुण्य के समान फलदायी है निर्जला एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन एकादशी व्रतों में से एक मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल दोनों का त्याग कर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/nirjala-ekadashi-2026-shubh-muhurat-mahatva-bhimseni-ekadashi-pranav-mishra/article-23596"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/0e8875f2-2bc8-4823-b5e1-064938efd7cd_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस एकादशी को <strong>भीमसेनी एकादशी</strong> के नाम से भी जाना जाता है। सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ सबसे कठिन भी मानी जाती है, क्योंकि इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना होता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है, जो इस वर्ष 25 जून को पड़ रही है।</p>
<p>एकादशी तिथि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। <strong>विष्णु पुराण</strong> में उल्लेख है कि एकादशी तिथि पर व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर भगवान विष्णु सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इसे सभी एकादशी व्रतों में विशेष स्थान प्राप्त है।</p>
<p>इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है तथा घर में सुख-समृद्धि और धन-संपदा का वास होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<h3>इस वर्ष निर्जला एकादशी पर बन रहे शुभ योग</h3>
<p>पंचांग के अनुसार, इस वर्ष निर्जला एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन <strong>हस्त नक्षत्र</strong> और <strong>अमृत योग</strong> का विशेष संयोग रहेगा।</p>
<p>निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार दान कर सकते हैं। इसके अलावा गोदान, जलदान, छाता दान एवं अन्नदान का विशेष महत्व बताया गया है, जो शुभ फलों की प्राप्ति कराता है।</p>
<h3>मुहूर्त</h3>
<p>प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा ने बताया कि 24 जून को रात्रि <strong>08:09 बजे</strong> एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जबकि 25 जून को रात्रि <strong>09:15 बजे</strong> इसका समापन होगा। 25 जून को पूरे दिन एकादशी तिथि रहने के कारण इसी दिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत का पारण 26 जून को किया जाएगा।</p>
<h3>भीमसेनी एकादशी क्यों कहलाती है?</h3>
<p>वेदव्यास जी ने महाभारत में उल्लेख किया है कि पांडवों में भीम ने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बिना जल ग्रहण किए व्रत किया था।</p>
<p>पांडव भाइयों में भीम विशेष रूप से भोजन प्रिय थे। एक बार उन्होंने महर्षि वेदव्यास से कहा कि उनके सभी भाई और माता नियमित रूप से एकादशी व्रत रखते हैं, लेकिन उनके लिए महीने में दो बार उपवास करना अत्यंत कठिन है। उन्होंने पूछा कि क्या कोई ऐसा व्रत है, जिसे वर्ष में केवल एक बार करने से सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो सके।</p>
<p class="tag_h1 node_title"><a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/nirjala-ekadashi-vrat-niyam-what-to-do-and-what-not-to-do/article-23589"><span style="color:rgb(0,0,0);background-color:rgb(191,237,210);">यह भी पढ़े: Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Niyam: व्रत रखने वाले जरूर जान लें ये 9 नियम, तभी मिलेगा पूरा पुण्य फल</span></a></p>
<p>तब वेदव्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निर्जल रहकर व्रत करने तथा अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने का विधान बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके बाद भीम ने निर्जला एकादशी का व्रत करना प्रारंभ किया। इसी कारण निर्जला एकादशी को <strong>भीमसेनी एकादशी</strong> या <strong>पांडव एकादशी</strong> भी कहा जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/religion/nirjala-ekadashi-2026-shubh-muhurat-mahatva-bhimseni-ekadashi-pranav-mishra/article-23596</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 19:10:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Acharya Pranav Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Niyam: व्रत रखने वाले जरूर जान लें ये 9 नियम, तभी मिलेगा पूरा पुण्य फल</title>
                                    <description><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026 Vrat ke Niyam: निर्जला एकादशी का व्रत रखने वालों को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए। व्रत का पूरा फल पाने के लिए इन नियमों को मानना अनिवार्य है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/nirjala-ekadashi-vrat-niyam-what-to-do-and-what-not-to-do/article-23589"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/sf.jpg" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>Nirjala Ekadashi 2026: </strong>सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कहा जाता है कि यही एकमात्र व्रत है जो भीम ने अपने पूरे जीवन में किया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इसीलिए इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं। पद्म पुराण में इस व्रत की विशेष महिमा वर्णित है। पुराण के अनुसार इस दिन कुछ खास नियमों का पालन अनिवार्य है। पंडित राकेश झा से जानते हैं निर्जला एकादशी के नियम।</p>
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>निर्जला एकादशी व्रत के नियम</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>1)</strong> निर्जला एकादशी में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। इस दिन गेहूं, चावल जैसे अनाज और पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि विशेष परिस्थितियों में जल ग्रहण किया जा सकता है। जो लोग निर्जला व्रत नहीं कर सकते वे शाम को सात्विक फलाहार कर सकते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>2)</strong> निर्जला एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और दिन में सोने से बचना चाहिए।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>3)</strong> एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। आप तुलसी माता को दीपक जलाकर अर्पित कर सकते हैं। इस दिन तुलसी में जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><span style="background-color:rgb(194,224,244);"><a style="background-color:rgb(194,224,244);" href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/nirjala-ekadashi-2026-shubh-muhurat-mahatva-bhimseni-ekadashi-pranav-mishra/article-23596"><strong>यह भी पढ़े: 24 एकादशियों के पुण्य के समान फलदायी है निर्जला एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व</strong></a></span></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>4)</strong> निर्जला एकादशी का व्रत करने वालों को एकादशी से एक दिन पहले और व्रत वाले दिन चावल नहीं खाने चाहिए।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>5)</strong> व्रत करने वालों को इस दिन क्रोध से बचना चाहिए और किसी की निंदा या बुराई नहीं करनी चाहिए।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>6)</strong> निर्जला एकादशी का व्रत रखने वालों को शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और जागरण करना चाहिए।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>7)</strong> निर्जला एकादशी के दिन ही दान की सामग्री एकत्र करें और द्वादशी तिथि को उसका दान करें।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>8)</strong> व्रती को जल से भरा कलश, पंखा, चीनी, चने की दाल और चावल आदि का दान करना शुभ माना जाता है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>9)</strong> निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले अपना पारण द्वादशी तिथि में ही करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ताज़ा खबरें </category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Sawan 2026: कब से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना? जानें चारों सावन सोमवार की तारीखें</title>
                                    <description><![CDATA[धार्मिक आस्था के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय है। इस दौरान शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लग जाता है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाकर भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगते हैं। आइए जानते हैं 2026 में सावन कब से शुरू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/sawan-2026-date-start-end-and-all-sawan-somwar-list/article-23540"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/ghfgjg.jpg" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>Sawan 2026: </strong>हिंदू धर्म में सावन के महीने को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने शिवजी की उपासना करने से उनकी असीम कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि पूरे देश में करोड़ों श्रद्धालु सावन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। साल 2026 में भी सावन शिव भक्तों के लिए अनेक शुभ मौके लेकर आ रहा है।</p>
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>सावन 2026 कब से होगा शुरू?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन का शुभारंभ 30 जुलाई गुरुवार से होगा। प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात से ही लग जाएगी, लेकिन उदयातिथि के आधार पर सावन की गिनती 30 जुलाई से मानी जाएगी। इस पावन महीने का समापन 28 अगस्त शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा।</p>
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>कब-कब पड़ेंगे सावन के सोमवार?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">सावन में सोमवार का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस दिन शिवजी का व्रत और पूजन करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। 2026 में सावन के दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे।</p>
<ul class="[li_&amp;]:mb-0 [li_&amp;]:mt-1 [li_&amp;]:gap-1 [&amp;:not(:last-child)_ul]:pb-1 [&amp;:not(:last-child)_ol]:pb-1 list-disc flex flex-col gap-1 pl-8 mb-3">
<li class="font-claude-response-body whitespace-normal break-words pl-2">पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को होगा।</li>
<li class="font-claude-response-body whitespace-normal break-words pl-2">दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ेगा।</li>
<li class="font-claude-response-body whitespace-normal break-words pl-2">तीसरा सोमवार 17 अगस्त को आएगा।</li>
<li class="font-claude-response-body whitespace-normal break-words pl-2">चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को होगा।</li>
</ul>
<h4 class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><strong>इस बार का सावन क्यों है खास?</strong></h4>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal">2026 में सावन की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। गुरुवार को गुरु का दिन माना जाता है और भगवान शिव को आदिगुरु कहा जाता है। इसलिए धार्मिक नजरिए से इस बार का सावन और भी अधिक फलदायी माना जा रहा है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई शिव आराधना से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर सुख, खुशी और समृद्धि की वर्षा करते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal"><em>(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।)</em></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ताज़ा खबरें </category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:13:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मां विंध्यवासिनी मंदिर के दान पात्रों से निकले 18.27 लाख रुपये, प्रशासन ने कराई गणना</title>
                                    <description><![CDATA[मीरजापुर स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में स्थापित 11 दान पेटिकाओं से कुल 18 लाख 27 हजार 523 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/vindhyavasini--temple-donation-box-counting-mirzapur-18-lakh-rupees/article-23049"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/622c6c254dea3660d5ad16e766e81c38_1447026073_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मीरजापुर:</strong> मां विंध्यवासिनी मंदिर में स्थापित दान पेटिकाओं से बुधवार को श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धनराशि की गणना की गई। कुल 11 दान पेटिकाओं से 18 लाख 27 हजार 523 रुपये प्राप्त हुए, जिन्हें नियमानुसार विंध्य विकास परिषद के पदेन अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी के खाते में भारतीय स्टेट बैंक की विंध्याचल शाखा में जमा करा दिया गया।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह मंदिर परिक्रमा मार्ग स्थित 18 नंबर दान पात्र से धुआं और आग लगने की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। नगर मजिस्ट्रेट के निर्देश पर संबंधित दान पात्र के साथ अन्य दान पेटिकाओं को भी खोलकर उनकी जांच और धनराशि की गणना कराई गई।</p>
<p>नायब तहसीलदार गरिमा यादव की निगरानी में 11 दान पेटिकाओं को खोला गया। दान राशि की गिनती मंदिर परिसर की छत पर स्थित श्री विंध्य पंडा समाज कार्यालय में पुलिस सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनी रही।</p>
<p>गणना पूरी होने के बाद प्राप्त धनराशि को भारतीय स्टेट बैंक, विंध्याचल शाखा में जमा कराया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई।</p>
<p>इस दौरान राजस्व कर्मी सूरज सोनकर, विजय शंकर दुबे, हरेंद्र दुबे, अनिल सोनकर, राकेश सोनकर, महेश सोनकर, चंद्रमणि तिवारी, शिव चौरसिया और घनश्याम पांडे सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे तथा गणना कार्य में सहयोग किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 07:57:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Susmita Rani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Surya Gochar 2026: 15 जून से इन 4 राशि वालों का चमक उठेगा भाग्य, नौकरी और परीक्षा में मिलेंगे अच्छे परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[Surya Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 जून 2026 को सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य और बुध की मित्रता के कारण यह गोचर विशेष महत्व रखता है। मेष, मिथुन, सिंह और तुला राशि के जातकों को करियर, व्यापार, धन लाभ, पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/surya-gochar-2026-from-15th-june-the-luck-of-these/article-22800"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-06/gn-fhb-.jpg" alt=""></a><br /><p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>Surya Gochar 2026: </strong>इस साल 15 जून को सूर्य मिथुन राशि में दाखिल होंगे। मिथुन को सूर्य के मित्र ग्रह बुध की राशि माना जाता है, इसलिए यह गोचर कई राशियों के लिए खास फलदायी साबित हो सकता है। साथ ही यह समय भाग्य के लिहाज से भी अनुकूल रहने वाला है।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">15 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर सूर्य मिथुन राशि में कदम रखेंगे। ज्योतिषियों की मानें तो सूर्य का यह गोचर इसलिए अहम है क्योंकि मिथुन, बुध की राशि है और बुध सूर्य के मित्र ग्रह माने जाते हैं। इस शुभ संयोग के चलते कई राशियों को बेहतरीन नतीजे मिल सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्कशक्ति का प्रतीक माना गया है। ऐसे में सूर्य के मिथुन में आने से करियर, कारोबार और कार्यक्षेत्र में पद-प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बनेंगे। सूर्य 16 जुलाई 2026 तक इसी राशि में टिके रहेंगे, जिससे जुलाई मध्य तक आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि देखने को मिल सकती है। आइए जानते हैं वो कौन सी राशियां हैं जिन्हें इस गोचर का सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>मेष राशि</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी हैं और इस गोचर के दौरान तीसरे भाव में विराजमान होंगे। यह समय साहस और हिम्मत में इज़ाफा करने वाला रहेगा। हर काम को लेकर आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा। लंबे समय से की जा रही मेहनत और लगन का पूरा फल इस दौरान मिल सकता है। यात्राएं भी आपके लिए फायदेमंद साबित होंगी। आपकी बात और फैसलों को लोग अहमियत देंगे। कार्यक्षेत्र में तारीफ और सराहना मिलेगी। इसके अलावा धन कमाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>मिथुन राशि</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी हैं और इस बार वे आपकी अपनी राशि यानी लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे करियर को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलेगी। जो काम लंबे समय से रुके पड़े थे वे अब पूरे होते नजर आएंगे। व्यक्तित्व में नया निखार आएगा और आत्मबल मजबूत होगा। समाज में आपकी पहचान और दबदबा बढ़ेगा। नौकरी और व्यापार दोनों में ही उत्साहवर्धक बदलाव देखने को मिलेंगे।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>सिंह राशि</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">सिंह राशि के स्वामी खुद सूर्य हैं, इसलिए यह गोचर इस राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य लाभ भाव में प्रवेश करेंगे जिससे आमदनी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। करियर में नई कामयाबियां हासिल होंगी। व्यापार में मुनाफे के योग बनेंगे। जो मेहनत की है उसका मनचाहा नतीजा इसी दौर में मिलेगा। समाज में इज्जत और रुतबा बढ़ने के भी पूरे आसार हैं।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>तुला राशि</strong></p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]">तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर भाग्य भाव में होने जा रहा है। जीवन के हर मोर्चे पर किस्मत आपका साथ देती नजर आएगी। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है। नौकरी करने वाले जातकों को पद और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी हो सकती है। स्वास्थ्य और रिश्तों के मामले में भी हालात पहले से बेहतर रहेंगे। व्यापारियों के लिए नए अवसर दस्तक देंगे। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।</p>
<p class="font-claude-response-body break-words whitespace-normal leading-[1.7]"><strong>डिस्क्लेमर:</strong> यहां दी गई जानकारी सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। इसकी सटीकता और संपूर्णता की कोई गारंटी नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:18:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>17 मई से शुरू होगा अधिकमास, विवाह और मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम</title>
                                    <description><![CDATA[17 मई 2026 से अधिकमास शुरू होने जा रहा है, जिसके कारण 15 जून तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार अधिकमास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/adhikmaas-2026-vivah-muhurat-shani-jayanti-news/article-21477"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-05/74c3a84e-e35d-474d-80fa-755dc984b9db_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p>प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार अधिकमास आता है। इस वर्ष अधिकमास ज्येष्ठ माह में पड़ रहा है। ज्येष्ठ माह अधिकमास होने के कारण शादी-विवाह के लिए बहुत कम लग्न पड़ रहे हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वादशी से अमावस्या तक मासांत दोष रहेगा। मासांत दोष के कारण शादी-विवाह वर्जित माने गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पड़ रही है। अमावस्या में गुरु और शुक्र अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य निषिद्ध माने जाते हैं। इसके अगले दिन 17 मई से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर 15 जून तक अधिकमास रहेगा। विभिन्न हिंदू पंचांगों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिकमास में शादी-विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।</p>
<h3><strong>अधिकमास से 20 दिन आगे खिसकेंगे पर्व-त्योहार</strong></h3>
<p>आचार्य प्रणव मिश्रा ने बताया कि अधिकमास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। अधिकमास के कारण इस बार रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, शारदीय नवरात्र, दीपावली और छठ जैसे प्रमुख पर्व 15 से 20 दिन की देरी से मनाए जाएंगे। इसी वजह से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 इस बार 13 महीने का होगा।</p>
<h3><strong>16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती</strong></h3>
<p>हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 15 मई को रात्रि 3:51 बजे शुरू होगी और 16 मई को रात्रि 1:36 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 16 मई, शनिवार को व्रत, पूजा और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना गया है।</p>
<h3><strong>17 जून से फिर शुरू होंगे विवाह मुहूर्त</strong></h3>
<p>ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार अधिकमास समाप्त होने के बाद 17 जून 2026 से पुनः शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। जून में 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29 और 30 जून को विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त हैं। वहीं जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8 और 11 जुलाई तक विवाह लग्न रहेंगे।</p>
<h3><strong>नवंबर और दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त</strong></h3>
<p><strong>नवंबर:</strong> 20, 21, 24, 25, 26 और 30<br /><strong>दिसंबर:</strong> 1, 2, 3, 4, 5, 7, 9, 10, 11 और 12</p>
<h3><strong>देवशयनी एकादशी से फिर रुकेगा विवाह कार्य</strong></h3>
<p>25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु चतुर्मास के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद चार महीनों तक विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के बाद पुनः विवाह कार्य प्रारंभ होंगे।</p>
<h3><strong>क्यों लगता है अधिकमास?</strong></h3>
<p>हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। सौर और चंद्र वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर 32 महीने, 16 दिन और 8 घंटे बाद एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/news/religion/adhikmaas-2026-vivah-muhurat-shani-jayanti-news/article-21477</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:21:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Acharya Pranav Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चारधाम यात्रा: 10 दिन में 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, केदारनाथ में सबसे ज्यादा भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[चारधाम यात्रा के पहले दस दिनों में 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। राज्य सरकार ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/latest-news/chardham-yatra-2026-four-lakh-devotees-visit-in-10-days-kedarnath-badrinath-yamunotri-gangotri-update/article-20837"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-03/chatgpt-image-mar-7,-2026,-06_55_54-pm.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। राज्य सरकार ने यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। कपाट खुलने से लेकर 28 अप्रैल, 2026 की सायं 7 बजे तक मात्र दस दिन में कुल 4 लाख 8 हजार 401 श्रद्धालु चारो धामों में दर्शन के लिए पहुंचे हैं।<br /><br />चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है। राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 4 लाख 8 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन के लिए पहुंचे हैं।<br /><br />राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार अब तक यमुनोत्री धाम में 57,794, गंगोत्री में 57,863, केदारनाथ धाम में 2,07,452 और बदरीनाथ धाम में 84,942 श्रद्धालु ने दर्शन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं। वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं। राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>ताज़ा खबरें </category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:31:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षय तृतीया 2026: दस शुभ संयोगों के बीच दो दिन मनाया जाएगा पर्व, जानें समय और तिथि </title>
                                    <description><![CDATA[<p>इस बार अक्षय तृतीया दस दुर्लभ शुभ संयोगों के साथ दो दिन मनाई जाएगी। तिथि के कारण लोगों में असमंजस है, लेकिन 19 और 20 अप्रैल को अलग-अलग धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रमों की खास तैयारी की जा रही है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/akshaya-tritiya-2026-two-days-celebration-ten-auspicious-yog-19-and-20-april-wedding-and-rituals/article-20624"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/4875821_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>समृद्ध डेस्क: </strong>वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर इस वर्ष अक्षय तृतीया दो दिन मनाई जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं और आयोजकों में विशेष उत्साह है। 19 अप्रैल को सुबह 10.50 बजे से तृतीया प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 7.28 बजे तक रहेगी।<br /><br />दुर्लभ योगों के चलते शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अबूझ मुहूर्त मानते हुए बड़े स्तर पर आयोजन किए जा रहे हैं। अनुमान है कि इस दौरान पांच सौ से अधिक विवाह समारोह संपन्न होंगे, जिससे 20 अप्रैल को शादियों की खास धूम रहेगी। तृतीया तिथि दो दिनों में पडऩे के कारण आमजन में तिथियों को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, परंपराओं के अनुसार 19 अप्रैल को पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और मंदिरों में विशेष दर्शन किए जाएंगे। वहीं 20 अप्रैल को विवाह, यज्ञोपवीत संस्कार और सामूहिक मांगलिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 18:03:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Samridh Media Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dumka News: मयूरनाथ में भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[रामगढ़ प्रखंड के मयूरनाथ में राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ हुआ। करीब 1551 महिलाओं और कन्याओं ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश धारण कर 3 किलोमीटर लंबी यात्रा निकाली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/dumka/dumka-news-inauguration-of-seven-day-shrimad-bhagwat-katha-with-grand/article-20502"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/752269d4-49b4-407e-9580-2db333467a5d_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>दुमका:</strong> रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत मयूरनाथ में राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ शनिवार को हुआ। यह आयोजन भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ शुरू हुआ, जिसमें सैकड़ों महिलाओं और कन्याओं ने भाग लिया। गांव के युवाओं के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया।</p>
<p>कलश शोभा यात्रा की शुरुआत मयूरनाथ राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण से हुई। यहां से पारंपरिक वेशभूषा में करीब 1551 महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर कलश धारण कर पूरे रामगढ़ मुख्य बाजार का भ्रमण किया। यह शोभा यात्रा राधा-कृष्ण मंदिर से प्रारंभ होकर जोगिया, रामगढ़ मुख्य चौक होते हुए प्रखंड मुख्यालय से लगभग 100 मीटर दूर सारमी के पवित्र सरोवर पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश में अभिमंत्रित जल भरा गया।</p>
<p>इसके बाद शोभा यात्रा लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पुनः राधा-कृष्ण मंदिर परिसर स्थित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ स्थल पर समाप्त हुई। इस दौरान ‘राधे-राधे’ के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा।</p>
<p>शोभा यात्रा के दौरान युवाओं ने कलश लेकर चल रही महिलाओं और कन्याओं के लिए पेयजल तथा शरबत की व्यवस्था की थी। श्रद्धालु भी पूरे मार्ग में शोभा यात्रा के साथ चलते रहे, जिससे दृश्य अत्यंत आकर्षक और भक्तिमय बन गया।</p>
<p>बग्गी पर विराजमान कथा वाचिका के रूप में पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी माँ ध्यानमूर्ति गिरी जी महाराज (श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी) श्रद्धालुओं का अभिवादन कर रही थीं। मुख्य यजमान के रूप में जयप्रकाश राय एवं उनकी धर्मपत्नी उपस्थित रहे।</p>
<p>कलश शोभा यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों ने शोभा यात्रा में शामिल माताओं और बहनों को शीतल पेयजल, नींबू पानी, रसना और फ्रूटी वितरित किए।</p>
<p>भागवत कथा पंडाल पहुंचने के बाद, कलश यात्रा में शामिल महिलाओं और कन्याओं को मंच पर उपस्थित पंडित द्वारा अक्षत प्रदान कर मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा कराई गई। इसके बाद सभी कलशों को मंच के समीप स्थापित किया गया।</p>
<p>पुरोहित की उपस्थिति में यजमान द्वारा वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना संपन्न हुई। भागवत कथा 11 अप्रैल शनिवार से 17 अप्रैल तक प्रतिदिन संध्या 7 बजे से आयोजित की जाएगी। वहीं, 18 अप्रैल को हवन, पूर्णाहुति एवं भंडारा के साथ कथा का समापन होगा।</p>
<p>इस आयोजन को लेकर पूरे प्रखंड क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। शोभा यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल की गश्ती भी देखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>दुमका</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 15:55:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mohit Sinha]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमान जयंती हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भक्ति, शक्ति, समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है। हनुमान जी का जीवन हमें साहस, सेवा और विनम्रता का संदेश देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/news/religion/hanuman-jayanti-bhakti-shakti-samarpan-mahatva/article-19780"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2026-04/images_samridh_1200x720.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>महेन्द्र तिवारी</strong></p>
<p>हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो शक्ति, भक्ति, निष्ठा और त्याग के प्रतीक हैं। यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, और वर्ष 2026 में यह 2 अप्रैल को है। हनुमान जी का चरित्र अद्भुत है, क्योंकि वे एक ओर असीम बल के स्वामी हैं तो दूसरी ओर विनम्रता की प्रतिमूर्ति। वे शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं, जिनका जन्म पवन देव के आशीर्वाद से हुआ, इसलिए वे पवनपुत्र कहलाए। उनके जन्म की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है, जिसमें माता अंजना की तपस्या और भगवान शिव का वह अंश समाहित है जो संसार को बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए अवतरित हुआ। हनुमान जी के बचपन की वह कथा आज भी बच्चों से लेकर वृद्धों तक के मन में रोमांच भर देती है, जब उन्होंने सूर्य देव को एक लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया था। यह घटना उनके उस अदम्य साहस और अलौकिक क्षमता का प्रतीक है, जो सीमाओं से परे है। इंद्र के वज्र प्रहार से उनकी ठुड्डी पर लगी चोट ने उन्हें 'हनुमान' नाम दिया, लेकिन उसी क्षण देवताओं द्वारा मिले वरदानों ने उन्हें अपराजेय बना दिया। ब्रह्मा जी ने उन्हें लंबी आयु का वरदान दिया, तो अग्नि ने उन्हें आग से न जलने का और वरुण ने जल से सुरक्षित रहने का आशीष दिया। ये वरदान केवल व्यक्तिगत सिद्धियाँ नहीं थीं, बल्कि भविष्य में होने वाले धर्म और अधर्म के युद्ध की तैयारी थी। हनुमान जयंती पर जब हम उनके जीवन का स्मरण करते हैं, तो उनकी शिक्षा-दीक्षा का प्रसंग भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने सूर्य देव से वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और व्याकरण में इतनी निपुणता हासिल की कि वे 'महाव्याकरण' कहलाए। उनका व्यक्तित्व बल और बुद्धि के विलक्षण समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।</p>
<p>रामचरितमानस और रामायण में हनुमान जी की भूमिका एक ऐसे सेतु की तरह है, जो विरक्त को अनुराग से और भक्त को भगवान से जोड़ती है। ऋष्यमूक पर्वत पर जब उनकी भेंट श्री राम से हुई, तो वह मिलन इतिहास का सबसे पवित्र मिलन बन गया। एक साधारण वानर के वेश में वे अपने प्रभु के पास गए, लेकिन राम की पारखी नजरों ने पहचान लिया कि यह कोई साधारण जीव नहीं है। इसके बाद हनुमान जी का पूरा जीवन राममय हो गया। हनुमान जयंती के इस अवसर पर उनके द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों का विश्लेषण करना आवश्यक है। समुद्र लांघने की उनकी क्षमता हमें सिखाती है कि यदि आत्मविश्वास दृढ़ हो, तो सौ योजन का विशाल सागर भी छोटा पड़ जाता है। लंका में अशोक वाटिका के भीतर माता सीता की खोज करना और उन्हें प्रभु राम की मुद्रिका देना उनके धैर्य और बुद्धिमानी की पराकाष्ठा थी। उन्होंने लंका दहन के माध्यम से रावण के अहंकार की लंका को भस्म किया, जो यह संदेश देता है कि अधर्म कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य की एक लौ उसे राख करने के लिए पर्याप्त है। हनुमान जी का 'सुंदरकांड' केवल एक अध्याय नहीं है, बल्कि वह जीवन के हर मोड़ पर हार रहे मनुष्य के लिए विजय का मंत्र है। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए जब वे द्रोणागिरि पर्वत उठाने गए, तो वे केवल एक जड़ी-बूटी नहीं लाए, बल्कि उन्होंने सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा के मार्ग पर असंभव शब्द का कोई स्थान नहीं है। यदि औषधि की पहचान नहीं हो सकी, तो उन्होंने पूरे पर्वत को ही उठा लिया—यह उनके निर्णय लेने की क्षमता और कार्य के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।</p>
<p>हनुमान जयंती की पूजा विधि और इसमें निहित प्रतीकों का भी गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। भक्त मंदिरों में जाकर हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करते हैं। इसके पीछे वह प्रसिद्ध कथा है जिसमें उन्होंने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा था और जब उन्हें पता चला कि यह श्री राम की लंबी आयु के लिए है, तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर मल लिया। यह निश्छल भक्ति का वह स्वरूप है जहाँ भक्त अपने आराध्य की प्रसन्नता के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर देता है। हनुमान चालीसा का पाठ, जो गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है, आज दुनिया के कोने-कोने में गूंजता है। इसकी हर पंक्ति में एक विशेष ऊर्जा है। 'भूत पिशाच निकट नहीं आवै' जैसी पंक्तियाँ मनुष्य को अज्ञात भय से मुक्ति दिलाती हैं। हनुमान जयंती पर भंडारों का आयोजन और 'बूंदी के लड्डू' का भोग सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जहाँ समाज के हर वर्ग के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि शक्ति का उपयोग सदैव रक्षा और सेवा के लिए होना चाहिए। हनुमान जी चाहते तो स्वयं रावण का वध कर सकते थे, उनमें इतनी सामर्थ्य थी, लेकिन उन्होंने सदैव अपने प्रभु की आज्ञा का पालन किया और खुद को एक सेवक के रूप में ही प्रस्तुत किया। उनकी यह विनम्रता आज के आधुनिक युग के लिए एक बहुत बड़ी सीख है, जहाँ थोड़े से अधिकार मिलते ही मनुष्य अहंकार से भर जाता है।</p>
<p>आधुनिक संदर्भ में हनुमान जयंती की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। आज का मनुष्य मानसिक तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहा है। हनुमान जी का व्यक्तित्व हमें आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाता है। जामवंत जी द्वारा हनुमान जी की सोई हुई शक्ति को याद दिलाना इस बात का प्रतीक है कि हम सबके भीतर अनंत शक्तियाँ छिपी हैं, बस हमें एक सही दिशा और आत्मबोध की आवश्यकता है। हनुमान जयंती पर अखाड़ों में होने वाले आयोजन हमें शारीरिक स्वास्थ्य और अनुशासन के प्रति सचेत करते हैं। वे ब्रह्मचर्य के पालक हैं, जो इंद्रिय निग्रह और मानसिक एकाग्रता का मार्ग है। विद्यार्थी जीवन के लिए हनुमान जी का चरित्र आदर्श है क्योंकि वे एक कुशल वक्ता, चतुर कूटनीतिज्ञ और एकाग्रचित्त साधक हैं। उनकी पूजा करने से व्यक्ति को केवल धार्मिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि उसे अनुशासन, समयबद्धता और निष्ठा की भी प्रेरणा मिलती है। हनुमान जी 'अष्टसिद्धि और नवनिधि' के दाता हैं, लेकिन वे ये सिद्धियाँ केवल उसे प्रदान करते हैं जो धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है। वे 'चिरंजीवी' हैं, जिसका अर्थ है कि वे हर युग में विद्यमान हैं। ऐसी मान्यता है कि जहाँ भी रामकथा होती है, वहाँ हनुमान जी किसी न किसी रूप में अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। यह अटूट विश्वास ही भक्तों को कठिन से कठिन समय में भी संबल प्रदान करता है।</p>
<p>हनुमान जयंती का उत्सव भारत के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। उत्तर भारत में जहाँ चैत्र पूर्णिमा का महत्व है, वहीं दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में इसे मार्गशीर्ष माह में मनाया जाता है। तमिलनाडु और केरल में इसे 'हनुमत जयंती' के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। तिथियों के भेद के बावजूद, भाव एक ही है उस महाशक्ति की वंदना करना जिसने मानवता को सेवा का नया अर्थ दिया। इस दिन मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जाता है, प्रभात फेरियाँ निकाली जाती हैं और केसरिया ध्वजों से आकाश पट जाता है। 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठता है। यह पर्व केवल हिंदुओं का नहीं, बल्कि उन सभी का है जो वीरता और सदाचार का सम्मान करते हैं। हनुमान जी का चरित्र संकीर्णताओं से ऊपर उठकर है। वे सुग्रीव जैसे मित्र के प्रति वफादार हैं, विभीषण जैसे शरणागत के रक्षक हैं और श्री राम के अनन्य दास हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि रिश्ते कैसे निभाए जाते हैं और संकट के समय अपनों के साथ कैसे खड़ा रहा जाता है।</p>
<p>निष्कर्षतः, हनुमान जयंती का यह पावन अवसर हमें आत्म-मंथन के लिए प्रेरित करता है। क्या हम अपने भीतर के डर को जीत पा रहे हैं? क्या हम समाज की सेवा के लिए तत्पर हैं? क्या हमारी शक्ति दूसरों की भलाई के लिए प्रयुक्त हो रही है? हनुमान जी का पूरा जीवन 'परोपकाराय पुण्याय' का जीवंत दस्तावेज है। उनकी भक्ति में कोई शर्त नहीं थी, कोई मांग नहीं थी। उन्हें जब विदा करते समय कीमती मोतियों की माला दी गई, तो उन्होंने उन्हें दांतों से तोड़कर फेंक दिया क्योंकि उनमें 'राम' नहीं दिख रहे थे। ऐसी अनन्य भक्ति ही मनुष्य को साधारण से असाधारण और जीव से शिव बनाती है। आज के दौर में जब विश्व अनेक चुनौतियों से घिरा है, हनुमान जी का 'बजरंग' रूप हमें साहस देता है और उनका 'शांत' रूप हमें धैर्य। हनुमान जयंती हमें विश्वास दिलाती है कि यदि हम निष्ठापूर्वक अपने मार्ग पर चलते रहें, तो बाधाएँ चाहे कितनी ही विकट क्यों न हों, विजय अंततः हमारी ही होगी। इस दिन हमें केवल दीये नहीं जलाने चाहिए, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान हनुमान की कृपा हम सब पर बनी रहे और हम उनके पदचिह्नों पर चलते हुए एक बेहतर समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकें, यही इस जयंती की सच्ची सार्थकता होगी। अंत में यही कहा जा सकता है कि हनुमान जी की महिमा अपार है, वे बुद्धिमानों में अग्रगण्य हैं, बलवानों में श्रेष्ठ हैं और भक्तों के हृदय में सदैव निवास करने वाले प्राणस्वरूप हैं। उनकी जयन्ती हमें उस शाश्वत सत्य की याद दिलाती रहती है कि ईश्वर के प्रति समर्पण ही वह एकमात्र चाबी है जिससे मोक्ष और सांसारिक सफलता दोनों के द्वार खुलते हैं।</p>
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लेखक: महेन्द्र तिवारी(फाइल फोटो)

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:21:39 +0530</pubDate>
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