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TMC MP दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा में ही कर दिए इस्तीफे का ऐलान, BJP में जाने के सवाल पर यह बोले

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नयी दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने आज राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान ही इस्तीफे का ऐलान कर दिया। आम तौर पर सदन में संबोधन के दौरान कोई सदस्य किसी असहमति को लेकर इस्तीफे का ऐलान कर दे ऐसे वाकये कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन त्रिवेदी ने ऐसा ही किया।

दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा में कहा, जिस प्रकार मेरे राज्य में हिंसा हो रही है और हम यहां बस बैठे हुए हैं, कुछ बोल नहीं सकते तो इससे अच्छा है कि मैं अपना त्यागपत्र दे दूं। उन्होंने इसके बाद आसन से कहा कि वे राज्यसभा की सदस्यता से आपना इस्तीफा दे रहे हैं।


बाद में संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने भाजपा में शामिल होने के सवाल पर कहा कि अभी तो पहले हम अपने आप को जाॅइन कर लें, एक मौका ऐसा आता है जब आप मंथन करते हो यह मंथन का समय है। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास रहा है कि हमने हिंसा के खिलाफ बोाला है। हम यहां बात करें किसी के पास समय नहीं है, जब पार्टी कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के हाथ में चली जाती है, जिसको राजनीति का क, ख नहीं पता वो हमारे नेता बन जाते हैं तो क्या करें। समझा जाता है त्रिवेदी ने ऐसा टिप्पणी तृणमूल के चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर के लिए की है।

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दिनेश त्रिवेदी ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद केंद्र यूपीए सरकार में रेल मंत्री भी थे। हालांकि उनके द्वारा रेल किराया बढाये जाने के फैसले से नाराज होकर ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के कोटे से उन्हें मंत्री पद से हटाने की सिफारिश कर दी थी और वे पद से हट गए थे।

उधर, पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि अगर दिनेश त्रिवेदी भाजपा में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि दिनेश त्रिवेदी से साल भर पहले एयरपोर्ट पर भेंट हुई थी तो उन्होंने कहा था कि बहुत खराब स्थिति है और मैं काम नहीं कर पा रहा हूं। उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दिया है और अगर वे भाजपा में आएंगे तो उनका स्वागत करेंगे।

दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे पर तृणमूल सांसद सौगात राय ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, वे जमीनी नेता नहीं थे। उन्होंने कहा कि वे लोकसभा चुनाव हार गए थे और ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजा थां। सौगात राय ने कहा था कि तृणमूल का मतलब ही ग्रासरूट होता है और पार्टी दूसरे जमीनी कार्यकर्ता को आगे बढने का मौका देगी।

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