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झारखंड के दुमका में संताल आदिवासियों का धार्मिक अनुष्ठान छटियर संपन्न, जानें इसका महत्व

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दुमका : संताल आदिवासियों का धार्मिक अनुष्ठान छटियर दुमका प्रखंड के टिकापहाड़ी गांव में ग्रामीणों द्वारा बहुत धूमधाम और हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। आदिवासियों की मान्यता है कि छटियर के बिना किसी भी संताल आदिवासी का शादी नहीं हो सकती है। इसके साथ-साथ यह भी मान्यता है अगर किसी महिला व पुरुष का छटियर नहीं हुआ है तो उसकी किसी भी प्रकार की पूजा को इष्ट देवता और पूर्वज ग्रहण नही करते हैं।

छटियर के बिना किसी भी व्यक्ति को सिरमापूरी यानी स्वर्ग में जगह नहीं मिल सकती है। किसी बच्चे या वयस्क की बिना छटियर के किसी कारणवश मृत्यु हो जाती है तो उसका अंतिम संस्कार करने के पहले उसका छटियर करना अति आवश्यक है, क्योंकि ऐसा मान्यता है कि ऐसा नहीं करने पर उस बच्चे या वयस्क को सिरमापूरी यानी स्वर्ग में जगह नहीं मिल पायेगा और उसकी आत्मा की शांति के लिए कोई भी भोग उस मृतक को नहीं मिल पायेगा। छटियर दो तरह के होते हैं: जोनोम छटियर और चाचू छटियर। बच्चे के जन्म के तीन से पांच दिन के अंदर में बच्चों का किया जाने वाला छटियर जोनोम छटियर कहा जाता है। जिन बच्चों का उस समय किसी कारण वश छटियर नहीं हो पाता है, वे शादी के ठीक पहले तक अवश्य रूप से छटियर करा लेते हैं, जिसे चाचू छटियर कहा जाता है। छटियर बच्चा-बच्ची, लड़का-लड़की दोनों का होता है। छटियर में इष्ट देवताओं और पूर्वजों के नाम से विनती बाखेड़ यानी प्रार्थना की जाती है।

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आज का छटियर गुरु बाबा महादेव हेंब्रम के द्वारा संपन्न कराया गया। छटियर में गांव के लिखाहोड़ गांव को चलाने वाले नायकी-मांझी बाबा, जोग मांझी, गुडित, प्राणिक, भक्दो को उनकी धर्म पत्नियों के साथ सबसे पहले उनके शरीर में तेल और उनके माथा, कान में सिंदूर लगाया गया। उसके बाद धय बूढ़ी व गांव के बच्चे के जन्म के समय सहयोग करने वाली महिला, बच्चों को पानी छिड़क कर नहलायां। शुद्धीकरण किया गया है और उन बच्चों को तेललगाया गया है।

धर्मगुरु द्वारा विनती बाखेड़ किया गया। इस पावन अवसर पर मांझी बाबा, बबलू हेंब्रम, नायकी बाबा, सोना लाल हेंब्रम के साथ-साथ प्रेम मुर्मू, पगान हेंब्रम, अशोक हेंब्रम, ओम प्रकाश हेंब्रम, प्रीतम हेंब्रम, शीला हेंब्रम, आशा हेंब्रम, नेहा टुडू, उदिल टुडू, श्रीलाल टुडू, बिटी हेंब्रम, साइमन हेंब्रम, मनोज हेंब्रम, शोले हेंब्रम आदि के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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