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महामारी पर नियंत्रण के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ करें काम तो मिलेंगे नतीजे

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डाॅ एसएन झा

डीएचएमएस
होमियोपैथी फिजिशियन
मेडिकल ऑफिसर, देवघर काॅलेज, देवघर
कार्यकारिणी सदस्य, रेडक्रास सोसाइटी, देवघर

विश्व में स्वास्थ्य संकट कोविड19 के कारण आया है और इसका असर आम आदमी पर पड़ा है. इससे मुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग को नयी खोज के साथ पुराने इतिहास को देखना होगा. जब-जब वायरस इन्फेक्शन का शिकार देशवासी हुए हैं, वैसी परिस्थिति में वेद पुराण के अंतर्गत आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं सावधानियां पर ध्यान देते हुए नियंत्रण किया गया है. ऐसी परिस्थिति में वर्तमान ओर भूत के कार्यकलापों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए वायरस पर नियंत्रण किया जा सकता है. इसके लिए सामुदायिक चिकित्सा के अंतर्गत हाइजिन के अंतर्गत नगर निगम, पंचायत, पीएचइडी, पर्यावरण, जलापूर्ति, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं अन्य के साथ स्वास्थ्य विभाग को मिल कर काम करने की आवश्यकता है.

कोई एक विभाग अपनी हैकड़ी हांक कर कोई लाभ नहीं पहुंचा सकता है. ऐसी परिस्थिति में जन स्वास्थ्य की चुनौतियां का सामना करते हुए एकाकी चिकित्सा पद्धति पर निर्भर रहा जा सकता है. इसके लिए आयुष के अंदर जुड़े हुए चिकित्सा पद्धति की आवश्यकता है, जिसमें होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति विश्व स्तर पर विशेष लोकप्रिय हो रही है, जिसमें आण्विक गुण के आधार पर दवा का निर्माण किया जाता है. यह शारीरिक, मानसिक, रोगों से पूर्ण रूप से निरोग करने की क्षमता रखती है. यह शारीरिक के साथ मानसिक संतुलन बनाने व हार्माेन नियंत्रण में भी मददगार है. यह हार्माेन व जिंस पर प्रभाव डालती है जो पुरानी बीमारियों के इलाज में लाभदायक है. यह जिंस को सुधारने की क्षमता रखती है.

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होमियोपैथी टीबी, कैंसर, चेचक, टायफाइड, डेंगू के इलाज में मददगार है. मनुष्य की डिजिज हिस्ट्री जान कर उसकी पुरानी व्याधियों को खत्म करने में यह चिकित्सा प्रणाली मददगार है.

वर्तमान समय में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय एक साथ है. लेकिन, मनुष्य चिकित्सा शिक्षा से दूर रहने की कोशिश करता है. इसके कारण मानव समुदाय स्वास्थ्य के नियमों को भौतिक सुख के साथ भूल जाता है और सावधानियां नहीं रखता है. इससे वह व्याधियों-रोगों की चपेट में आकर दुःखी रहता है.

वर्तमान समय में स्कूल, काॅलेज व टेक्निकल संस्थाएं वायरस न हो और इससे बचने के लिए आवश्यक शिक्षा उपलब्ध कराएं तो यह अच्छा होगा. इसे आवश्यक रूप से अपने संस्थानों में शामिल किया जाना चाहिए. इसके तहत संयुक्त चिकित्सा पद्धति आयुष चिकित्सा पद्धति को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दें.

इसके अतिरिक्त चिकित्सक, एएनएम, लेबोरेटरी टैक्नीशियन की टीम रखने की व्यवस्था करें और हेल्थ कार्ड आवश्यक रूप से अपनी सूची में जोड़ें.

नोट : ऐसी हालत में स्वास्थ्य की नियमावली का पालन नहीं करने वाले को दंडित किया जाए. इसके लिए नैक, एनएसी के सुपरविजन में जो भी टीम हो वह स्वास्थ्य की आवश्यकता को निश्चित रूप से जोड़े. अन्यथा ऐसे संस्थानों पर प्रश्नचिह्न लगाया जाए. प्राइमरी से हाइ स्कूल तक जिला स्तर पर डीएम-डीसी की निगरानी में स्वास्थ्य को शिक्षा से जोड़ा जाए. इसमें सभी चिकित्सा पद्धति को सम्मिलित करते हुए सहयोग लिया जाए. इसमें होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति की भूमिका कम समय में कम खर्च में स्थायी रूप से लाभ देने वाली एकमात्र चिकित्सा पद्धति है, जो मानव स्वास्थ्य का ख्याल रखने में पूर्ण रूप से सहायक है. इसके लिए जिला स्तर पर जवाबदेह चिकित्सकों की सूची संग्रहित की जाए और उनकी मदद ली जाए.

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