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                <title>Devendra Kumar - Samridh Jharkhand</title>
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                <description>Devendra Kumar RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पोटका विधानसभा चुनाव 2024: मीरा के सामने संजीव सरदार का कीर्तिमान धवस्त करने की चुुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पोटका विधानसभा की तीन उस सीट में शामिल है, जहां वर्ष 2019 में झामुमो ने जीत का परचम 50 फीसदी से अधिक मतों से हासिल किया था. बहरागोड़ा में समीर मोहंती को 61.99 फीसदी मतों के साथ जीत मिली थी, सिसई में सुसारण होरो ने भाजपा  के दिनेश उरांव को 57.85  के साथ शिकस्त  देने में कामयाबी हासिल की थी, जबकि पोटका में संजीव सरदार को मेनका सरदार को करीबन 55.6 फीसदी मत के साथ पराजित करने में कामयाबी मिली थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/potka-assembly-elections-2024-challenge-for-meera-to-destroy-sanjeev/article-12438"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(32).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>झारखंड के सियासी संग्राम में झामुमो का किला कोल्हान को भेदना भाजपा की एक बड़ी चुनौती है. यही कारण है कि दोनों ही तरह से जबरदस्त मोर्चेबंदी जारी है. आज कल्पना सोरेन सराईकेला के दौरे पर हैं तो कल अमित शाह  धालभूमगढ़ में चुनावी रैली करेंगे, इसके साथ ही चार नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी चाईबासा में होंगे. यदि हम कोल्हान की बात करें तो भाजपा के लिए इस बार सराईकेला और पोटका सीट प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है, सराईकेला से पूर्व सीएम चंपाई सोरेन अपनी सियासी जिंदगी में पहली बार भाजपा के चुनाव चिह्न पर अखाड़े में हैं, तो भूमिज बहुल पोटका से पहले बार भाजपा ने एक गैर भूमिज चेहरा पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को अखाड़े में उतारा है. </p>
<h3> बदल गया है दल का झंडे का रंग</h3>
<p>सराईकेला की बात करें तो पिछली बार इस सीट से भाजपा उम्मीदवार गणेश महली को झामुमो उम्मीदवार चंपाई सोरेन के हाथों करीबन 16 हजार मतों से मात खानी पड़ी थी, हालांकि वर्ष 2014 चंपाई सोरेन को गणेश महली के हाथों 1,115 मतों से मात खानी पड़ी थी. इस सियासी संग्राम की सबसे मजेदार स्थिति यह है कि इस बार दोनों ने अपना-अपना दल और झंडे का रंग बदल लिया है इस हालत में देखना होगा कि इस बार यह कोशिश कितनी रंग लाती है. लेकिन भाजपा को सबसे कठिन चुनौती पोटका से मिलने की उम्मीद है</p>
<h3><strong>भूमिज के किले को भेदना मीरा मुंडा की चुनौती</strong></h3>
<p> <br />दरअसल पोटका विधानसभा की तीन उस सीट में शामिल है, जहां वर्ष 2019 में झामुमो ने जीत का परचम 50 फीसदी से अधिक मतों से हासिल किया था. बहरागोड़ा में समीर मोहंती को 61.99 फीसदी मतों के साथ जीत मिली थी, सिसई में सुसारण होरो ने भाजपा  के दिनेश उरांव को 57.85  के साथ शिकस्त  देने में कामयाबी हासिल की थी, जबकि पोटका में संजीव सरदार को मेनका सरदार को करीबन 55.6 फीसदी मत के साथ पराजित करने में कामयाबी मिली थी. गौरतलब यह भी है कि सिसई और पोटका दोनों ही विधानसभा में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा है, तो क्या पोटका मीरा मुंडा को महिला मतदाताओं का साथ मिल सकता है. मीरा मुंडा की मुश्किल यह है कि वह खुद मुंडा जनजाति से आती है, जबकि पोटका को भूमिज जनजाति का किला माना जाता है. इस हालत में इस बार पोटका का सियासी रंग क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 19:03:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा को एक और झटका! अब हेमंत के खिलाफ बरहेट से ताल ठोक चुके साइमन मालटो ने छोड़ा साथ</title>
                                    <description><![CDATA[ वर्ष 2019 में साइमन मलटो ने बरहेट विधान सभा से भाजपा के चुनाव चिह्न पर हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव चुनाव लड़ते हुए 47,985 वोट पाया था, जबकि हेमंत सोरेन को 73,725 के साथ जीत मिली थी. साइमन मलटो का आरोप है कि टिकट वितरण में भाजपा उस पहाडिया जनजाति की उपेक्षा कर रही है, जो अब तक उसका परंपरागत वोटर रहा है. साइमन मलटो भी उसी पहाड़िया समुदाय से आते हैं. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/another-blow-to-bjp-now-simon-malto-who-had-fought/article-12432"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/simon-malto1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> कल केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का झारखंड दौरा के ठीक पहले भाजपा को दो करारा झटका लगा है, पहले झारखंड भाजपा उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा ने पार्टी छोड़ने का एलान किया और अब  वर्ष 2019 में बरहेट से हेमंत सोरेन के खिलाफ ताल ठोकने वाले साइमन मालटो ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है. </p>
<h3><strong>पहाड़िया जनजाति का उपेक्षा करने का आरोप</strong></h3>
<p><br />आपको बता दें कि वर्ष 2019 में साइमन मलटो ने बरहेट विधान सभा से भाजपा के चुनाव चिह्न पर हेमंत सोरेन के खिलाफ चुनाव चुनाव लड़ते हुए 47,985 वोट पाया था, जबकि हेमंत सोरेन को 73,725 के साथ जीत मिली थी. साइमन मलटो का आरोप है कि टिकट वितरण में भाजपा उस पहाडिया जनजाति की उपेक्षा कर रही है, जो अब तक उसका परंपरागत वोटर रहा है. साइमन मलटो भी उसी पहाड़िया समुदाय से आते हैं. संताल में संतालियों के बाद पहाडिया जनजाति की एक बड़ी आबादी है. माना जाता है कि पहाड़िया जनजाति के बीच साइमन मलटो का मजबूत सियासी पकड़ है. साइमन मलटो के पहले लुईस मरांडी भी भाजपा छोड़कर झामुमो का दामन साथ चुकी है. लुईस मरांडी को भी संताल में भाजपा का एक बड़ा चेहरा समझा जाता था, वर्ष 2014 में दुमका सीट से हेमंत सोरेन जैसे कद्दवार चेहरे को भी शिकस्त देने का कारनामा भी कर चुकी है. बावजूद इसके इस बार बेटिकट कर दी गयी. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
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                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 17:43:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> रघुवर दास के खिलाफ झामुमो का बड़ा आरोप, छत्तीसगढ़ से परिजनों को लाकर टाटा में नौकरी दिलवाने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[हेमंत सरकार ने झारखंड में स्थित कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए 75 फीसदी नौकरी स्थानीय युवाओं को देने का कानून बनाया था. जिसके विरोध में पीआईएल दायर किया गया था. अब इस चुनावी संग्राम के बीच झामुमो इस मामले को उछाल कर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.     ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/jmms-big-allegation-against-raghuvar-das-is-that-he-brought/article-12428"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/jmm-(2).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची: </strong>चुनावी सरगर्मी के बीच झामुमो ने रघुवर दास के खिलाफ एक बार फिर से मोर्चा  खोल दिया है, झामुमो का दावा है कि रघुवर दास ने छतीसगढ़ से अपने परिजनों को थोक भाव में लाकर टाटा कंपनी में नौकरी दिलवाया, जिसके कारण झारखंडी युवाओं की हकमारी हुई.  अपने एक्स एकाउंट पर पूर्व सीएम रघुवर दास के खिलाफ आरोपों की बौछार करते हुए झामुमो ने लिखा है कि “ये हमारा नहीं भाजपा के आम कार्यकर्ताओं की लिस्ट है। रघुबर दास जी ने हाथी उड़ाने के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ बाहरियों को बहुत तरीक़े से Tata कंपनी में बसाने का कार्य किया है। - आख़िर भाजपा झारखंडियों को अपना क्यों नहीं मानती? आख़िर वे हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ लूटने का कार्य क्यों करते हैं ? जब हमने निजी कंपनियों में झारखंडियों के लिए 75% आरक्षण लगाया तो विरोध किसने किया? PIL किसने लगाया? </p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">ये हमारा नहीं भाजपा के आम कार्यकर्ताओं की लिस्ट है। <br /><br />रघुबर दास जी ने हाथी उड़ाने के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ बाहरियों को बहुत तरीक़े से Tata कंपनी में बसाने का कार्य किया है। <br /><br />- आख़िर भाजपा झारखंडियों को अपना क्यों नहीं मानती ? <br /><br />- आख़िर वे हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ लूटने का कार्य… <a href="https://t.co/1o5zMWB4zD">pic.twitter.com/1o5zMWB4zD</a></p>
— Jharkhand Mukti Morcha (@JmmJharkhand) <a href="https://twitter.com/JmmJharkhand/status/1852309182130590122?ref_src=twsrc%5Etfw">November 1, 2024</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<h3><strong>स्थानीय कंपनियोंं ने झारखंडियों के लिए 75 फीसदी आरक्षण</strong></h3>
<p><br />आपको बता दें कि हेमंत सरकार ने झारखंड में स्थित कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए 75 फीसदी नौकरी स्थानीय युवाओं को देने का कानून बनाया था. जिसके विरोध में पीआईएल दायर किया गया था. अब इस चुनावी संग्राम के बीच झामुमो इस मामले को उछाल कर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है.     </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 16:51:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा को एक और झटका! प्रदेश उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा  ने थामा झामुमो का दामन</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी ने अटल-आडवाणी के उस युग से कदम पीछे खींच लिए हैं, और इस बदलाव ने मेरे हृदय में गहरा दर्द पैदा कर दिया है। यह दर्द और गहरा तब हुआ जब मुझे और मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार दरकिनार किया गया। मेरे पिताजी के राजनीतिक और सामाजिक योगदान, मेरे परिवार की विरासत, और मेरे अपने बीस वर्षों के मेहनत और निष्ठा को नजरअंदाज किया गया।मेरी राजनीतिक और सामाजिक पूंजी को समाप्त करने के लिए लगातार षड्यंत्र रचे जाने लगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/another-blow-to-bjp-state-vice-president-pranab-kumar-burma/article-12423"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(31).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong>  विधानसभा चुनाव के दौरान पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के द्वारा भाजपा छोड़ने के सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज प्रदेश उपाध्यक्ष प्रणव कुमार वर्मा ने भाजपा छोड़ने का एलान करते हुए झामुमो का दामन थाम लिया.<br />आपको बता दें कि प्रणव वर्मा कोडरमा संसदीय सीट से पांच बार (1977,1980,1989,1996 और 1998) के सांसद रहे रीतलाल वर्मा के पुत्र हैं.  सियासी गलियारों में प्रणव वर्मा को लेकर कोडरमा विधानसभा से चुनाव लड़ने की खबर थी. लेकिन भाजपा ने इस बार भी डॉ नीरा यादव पर दांव लगाया, और अब प्रणव वर्मा ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए झामुमो की सवारी करने का एलान कर दिया है. <br />इसकी जानकारी साक्षा करते हुए अपने फेसबूक पोस्ट पर प्रणव वर्मा ने लिखा है कि “प्रिय साथियों,<br />मैं भारी मन और गहरे भावुकता के साथ आप सभी के समक्ष कुछ शब्द साझा कर रहा हूँ। जैसा कि आप सब जानते हैं, मेरे पिताजी भूतपूर्व भाजपा सांसद स्व. रीतलाल प्रसाद वर्मा जी ने अपना संपूर्ण जीवन, अपना खून-पसीना इस भाजपा को खड़ा करने में लगा दिया था। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी और आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर झारखंड (तत्कालीन दक्षिण बिहार) में पार्टी को अपने अस्तित्व में लाने में उन्होंने जो योगदान दिया।उनके बलिदान, त्याग और मेहनत का हर कण आज भी हमारे दिलों में बसता है।<br />यह मेरी सौभाग्य की बात थी कि मुझे उस पार्टी की सेवा करने का अवसर मिला जिसके हर कण में मेरे पिताजी की मेहनत की महक है। मैंने भी अपनी हर साँस, अपने तन-मन-धन से पार्टी को सींचने का संकल्प लिया। जो भी दायित्व मुझे सौंपा गया, उसे मैंने निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।</p>
<h3><strong> जीवन खपाने वाले कार्यकर्ताओं का अब भाजपा में सम्मान नहीं</strong></h3>
<p><br />लेकिन, पार्टी के लिए अपना जीवन खपा देने वाले कार्यकर्ताओं को जब सम्मान नहीं मिलने लगा तो मुझे ऐसा महसूस हुआ कि अब वह पार्टी, वह आदर्श, वह सिद्धांत नहीं बचे हैं जिनके लिए मेरे पिताजी ने अपना सर्वस्व अर्पित किया था। पार्टी ने अटल-आडवाणी के उस युग से कदम पीछे खींच लिए हैं, और इस बदलाव ने मेरे हृदय में गहरा दर्द पैदा कर दिया है। यह दर्द और गहरा तब हुआ जब मुझे और मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार दरकिनार किया गया। मेरे पिताजी के राजनीतिक और सामाजिक योगदान, मेरे परिवार की विरासत, और मेरे अपने बीस वर्षों के मेहनत और निष्ठा को नजरअंदाज किया गया।मेरी राजनीतिक और सामाजिक पूंजी को समाप्त करने के लिए लगातार षड्यंत्र रचे जाने लगे।</p>
<h3><strong>रीतलाल वर्मा और जेपी कुशवाहा के योगदान को धूमिल किया जा रहा</strong></h3>
<p>यह बात मेरे लिए अत्यंत दुखदायी रही है कि जहाँ मेरे पिताजी और बड़े पिताजी स्व. जेपी कुशवाहा जी जैसे महान नेताओं ने हमारे समाज को एक दिशा देने का कार्य किया, वहाँ उनके योगदान को धूमिल करने की कोशिश की गई। इन सब से दुखी होकर भारी मन से मैं पार्टी को छोड़ रहा हूँ और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित तमाम दायित्वों से इस्तीफा दे रहा हूं।<br />मैं पुनः एक नई ऊर्जा, नए विश्वास और नई सोच के साथ आप सबके बीच आ रहा हूँ। मेरा विश्वास है कि जैसे आप मेरे पिताजी के कंधे से कंधा मिलाकर चले थे, जैसे आपने मुझे सदा अपने बेटे या भाई की तरह सहयोग किया वैसे ही मेरे साथ आगे भी इस नए सफर में साथ रहेंगे,आपका यह स्नेह और समर्थन मेरे लिए बहुत मूल्यवान है, और उम्मीद करता हूँ कि आपके आशीर्वाद का यह मोल मैं हमेशा संजो कर रखूँगा। <br /><br /></p>
<h3><strong> झामुमो की सदस्यता ग्रहण करने का एलान</strong></h3>
<p>आज झारखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री और मेरे बड़े भाई माननीय Hemant Soren जी एवं गांडेय विधायक सब भाभी जी श्रीमती कल्पना सोरेन जी की गरिमामय उपस्थिति में बड़े भाई गिरिडीह विधायक श्री Sudivya Kumar Sonu जी व राज्यसभा सांसद श्रीमती महुवा माजी जी के आशीर्वाद से मैने सपरिवार झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ग्रहण कर जल जंगल जमीन और झारखंडी अस्मिता की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस शुभ अवसर पर मेरी आदरणीय माता जी श्रीमती चंपा वर्मा जी, धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा वर्मा जी, जमुआ विधायक श्री केदार हाजरा जी भी उपस्थित रहे। मेरा परिवार सदा से गुरु जी आदरणीय शिबू सोरेन जी के परिवार का हिस्सा रहा है और मृत्यु के पूर्व मेरे पिताजी स्व. रीतलाल प्रसाद वर्मा जी झारखंड की भलाई हेतु झामुमो में शामिल हुए थे और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भी भूमिका अपने अंतिम दिनों में निभाए ये। आज पुनः हमारे दोनों परिवारों का मिलन हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

                <link>https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/another-blow-to-bjp-state-vice-president-pranab-kumar-burma/article-12423</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 15:38:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के विवादित बयान पर मुकदमा, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[परिवाद पत्र में कहा गया है कि झारखंड के हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र में, 23 अक्टूबर 2024 को असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के झारखंड चुनाव प्रभारी, हिमंता बिस्व सरमा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कुछ विवादास्पद बयान दिए.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/palamu/case-against-chief-minister-himanta-biswa-sarmas-controversial-statement-allegation/article-12420"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/himanta-biswa-sarma-jharkhand-visit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पलामू/हुसैनाबाद:</strong> हुसैनाबाद के पूर्व विधायक कुशवाहा शिवपुजन मेहता ने गत 23 अक्टूबर को भाजपा के प्रत्याशी कमलेश कुमार सिंह के नामांकन के दौरान कर्पूरी मैदान, हुसैनाबाद में आयोजित सभा में असम के सीएम एवं भारतीय जनता पार्टी के झारखंड राज्य चुनाव सह प्रभारी हिमंता बिस्व सरमा द्वारा आपत्तिजनक भाषण दिए जाने एवं धार्मिक उन्माद फैलाने के प्रयास करने का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, डालटनगंज की अदालत में एक मामला जिसका परिवाद पत्र संख्या- 3359/2024 है, दर्ज कराया है.</p>
<p style="text-align:justify;">परिवाद पत्र में कहा गया है कि झारखंड के हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र में, 23 अक्टूबर 2024 को असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के झारखंड चुनाव प्रभारी, हिमंता बिस्व सरमा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कुछ विवादास्पद बयान दिए. उनके भाषण में हुसैनाबाद शहर का नाम बदलने की बात कही गई. श्री सरमा ने कहा, "ये हुसैन कौन है जिसके नाम पर हुसैनाबाद है? इसका नाम बदल देंगे. ये हुसैन कहाँ से आया? मैं इसका नाम रामकृष्णा के नाम पर करूंगा." कुशवाहा शिवपुजन मेहता, जो पूर्व विधायक और वर्तमान हुसैनाबाद विधानसभा के उम्मीदवार हैं, ने इसे लेकर कड़ा ऐतराज जताया. उनका कहना है कि हुसैनाबाद क्षेत्र में सभी समुदायों के बीच सदियों से आपसी सौहार्द और सौम्यता का संबंध रहा है. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के इस बयान का उद्देश्य दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना था.</p>
<p style="text-align:justify;">कुशवाहा शिवपुजन मेहता ने आरोप लगाया है कि श्री सरमा ने जानबूझकर सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने का प्रयास किया, जिससे समाज में विद्वेष और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसके आधार पर उन्होंने डाल्टनगंज के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में उनके खिलाफ परिवाद दायर किया है. शिवपुजन मेहता ने मांग की है कि श्री हेमंत शर्मा पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के प्रयास का आरोप लगाकर सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही की जाए. कुशवाहा शिवपुजन मेहता ने राज अली और अक्षय मेहता को गवाह के रूप में नामित किया है और आवश्यक होने पर अन्य गवाह भी पेश किए जाएंगे.</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी रैलियों में विवादास्पद बयान देना नेताओं के लिए आम बात होती जा रही है, लेकिन इससे धार्मिक सौहार्द्र पर असर पड़ सकता है. अब अदालत का निर्णय आने पर आगे की कार्यवाही पर सबकी नजर रहेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पलामू</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Nov 2024 14:26:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;बंटोगे तो कटोगे&quot; के बाद अब सरना धर्म कोड का आसरा</title>
                                    <description><![CDATA[क्या वाकई भाजपा आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म कोड देने को तैयार है, या फिर यह महज एक  चुनावी नारा है. यदि भाजपा वास्तव में आदिवासी समाज को सरना धर्म कोड देने का इरादा रखती है तो फिर इसमें देरी क्यों की जा रही है? झारखंड में हेमंत सरकार और बंगाल में ममता बनर्जी तो पहले ही विधानसभा से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेज चुकी है, फिर भाजपा आदिवासी समाज की इस पुरानी मांग पर अपनी मुहर क्यों नहीं लगाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/after-%22if-you-divide-you-will-be-divided%22-now-the/article-12398"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-11/fotojet-(30).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"><strong>रांची: </strong>झारखंड के चुनावी संग्राम में “बंटोगे तो कटोगे” नारे का अभी ठीक से एंट्री भी नहीं हुई कि अचानक भाजपा बैकफूट पर नजर आने लगी है, अब तक हिन्दूओं को एकजूट करने का स्लोगन देती रही भाजपा का अब इस चुनावी संग्राम में सरना धर्म कोड को लेकर आयी है, उसका दावा है कि वह तो सरना धर्म कोड का पैरोकार है, यह तो कांग्रेस है, जिसने इसको हटाने का काम किया है. इसकी राह में अड़चने डालने की कोशिश की है.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>सियासी शिकस्त के बाद योगी आदित्यनाथ ने उछाला था नारा</strong></h3>
<p style="text-align:left;">दरअसल लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली करारी शिकस्त के बाद योगी आदित्यनाथ ने बंटोगे तो कटोगे के नारे के साथ एक बार फिर से हिन्दू मतों का धुर्वीकरण करने की कोशिश की है, ताकि उपचुनाव में लोकसभा चुनाव के समान हिन्दू मतों का विभाजन नहीं हो, और कम से कम उपचुनाव में पार्टी सम्मान जनक सीट हासिल करने में  कामयाब रहे.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>हिन्दू स्वाभिमान यात्रा पर निकल पड़े गिरिराज सिंह</strong> </h3>
<p style="text-align:left;">इधर यूपी में योगी आदित्यनाथ ने यह नारा उछाला और उधर गिरिराज सिंह बिहार के मुस्लिम बहुल इलाके में बंटोगे तो कटोगे के साथ हिन्दू स्वाभिमान यात्रा पर निकल पड़े, लेकिन गिरिराज सिंह के इस पैंतरे का नीतीश कुमार की पार्टी जदयू खुलकर विरोध करने लगी, अब तक साफ सुधरी राजनीति करती आयी जदयू और नीतीश कुमार को इस नारे में अपनी सियासी जमीन का बंटाधार होता नजर आने लगा. दरअसल भाजपा के साथ तमाम गलबहियां के बावजूद नीतीश कुमार की रणनीति अपने चेहरे को गैर सम्प्रादायिक बनाये रखने की रही है, और वह एक हद तक इसमें कामयाब भी होते रहे हैं. मुस्लिम समाज का ठीक ठाक वोट जदयू के हिस्से आता रहा है. लेकिन गिरिराज सिंह के हिन्दू स्वाभिमान यात्रा से उसे अपनी जड़े हिलती नजर आयी और हालत यह हो गयी कि संघ और भाजपा परिवार दोनों ने गिरिराज सिंह के इस हिन्दू स्वाभिमान यात्रा से किनारा कर लिया.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>काम नहीं आया बंटोगे तो कटोगे का नारा!</strong></h3>
<p style="text-align:left;">लेकिन सबसे उलझन भरी स्थिति सूबे झारखंड में नजर आ रही है, अभी ठीक से बंटोगे तो कटोगे के नारे की एंट्री भी नहीं हुई थी कि भाजपा के रणनीतिकारों ने इसका बंटाधार कर दिया. झारखंड चुनाव सह प्रभारी हिमंता विश्व सरमा ने बांग्लादेशी घुसपैठ और “बंटोगे तो कटोगे” से किनारा करते हुए अब इस चुनावी संग्राम में सरना धर्म कोड की एंट्री करवा दी है. और इसके साथ ही यह सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या बांग्लादेशी घुसपैठिया के तीर से साथ ही क्या ‘बंटोगे तो कटोगे’ का ब्रह्माशास्त्र भी फेल हो गया. आखिर क्या कारण है कि अब तक हिन्दूओं को एकजूट रहने का नारा लगाने वाली भाजपा अब सरना धर्म कोड की बात करने लगी है, क्या आदिवासी-मूलवासी बहुल झारखंड की जमीन पर बांग्लादेशी घुसैपैठिया के साथ ही ‘बंटोगे तो कटोगे’ की नारा भी अप्रभावी हो गया. और इस चुनावी बेचैनी में सरना धर्म कोड का कार्ड खेलने की मजबूरी आ पड़ी है, </p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>क्या सरना धर्म से खंडित नहीं होगी हिन्दू एकता?</strong></h3>
<p style="text-align:left;">इसके साथ ही अब यह सवाल भी खड़ा होने लगा है कि आखिर जिस सरना धर्म कोड की बात भाजपा कर रही है, क्या उससे हिन्दूओं की एकता खंडित नहीं होगी, तो क्या हिन्दूओं टूकड़े टुकड़े करने की शर्त पर भी भाजपा सत्ता को अपने पास रखना चाहती है, तो क्या हिन्दू एकजूटता का नारा महज एक छलावा था.</p>
<h3 style="text-align:left;"><strong>क्या वाकई सरना धर्म कोड देने जा रही है भाजपा? </strong></h3>
<p style="text-align:left;">और सबसे बड़ा सवाल क्या वाकई भाजपा आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म कोड देने को तैयार है, या फिर यह महज एक  चुनावी नारा है. यदि भाजपा वास्तव में आदिवासी समाज को सरना धर्म कोड देने का इरादा रखती है तो फिर इसमें देरी क्यों की जा रही है? झारखंड में हेमंत सरकार और बंगाल में ममता बनर्जी तो पहले ही विधानसभा से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेज चुकी है, फिर भाजपा आदिवासी समाज की इस पुरानी मांग पर अपनी मुहर क्यों नहीं लगाती? हिमंता किस आधार पर यह दावा करते हैं कि यह तो कांग्रेस है जो सरना धर्म कोड की राह में रोड़ा अटका रही है. क्यों नहीं भाजपा लोकसभा में इस आशय का बिल लाती है, साफ हो जायेगा कि कौन सा राजनीतिक दल इसके समर्थन और कौन विरोध में है? हकीकत है कि कांग्रेस पहले ही यह साफ कर चुकी है कि यदि वह सत्ता में आती है तो जातीय जनगणना का फैसला कैबिनेट की पहली बैठक में लिया जायेगा और इसके साथ ही आदिवासी समुदाय की चिर प्रतिक्षित मांग को सरना धर्म कोड पर भी मुहर लगायी जायेगी. जबकि भाजपा सत्ता में है, उसके पास वादे करने का कोई विकल्प नहीं है, भाजपा ने सरना धर्म का वादा 2014 में भी किया था, लेकिन डबल इंजन की सरकार बनने के बावजूद उस वादे को पूरा नहीं किया, फिर आदिवासी समाज  भाजपा के इस नये वादे पर विश्वास क्यों करेगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Nov 2024 13:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> भाजपा के साथ लुईस मरांडी का सीधा मुकाबला, जयश्री सोरेन ने जामा से दाखिल नहीं किया नामांकन</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा के चुनाव चिह्न पर जयश्री सोरेन का चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने सीता सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे अपने पुराने कार्यकर्ता सुरेश मुर्मू को ही एक बार फिर से अखाड़े में उतारने का फैसला किया. जिसके बाद जयश्री सोरेन की नाराजगी की खबर सामने आ रही थी, जामा वही सीट है, जहां से सीता सोरेन वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार जीत दर्ज करती रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/badi-khabar/lewis-marandis-direct-contest-with-bjp-jayashree-soren-did-not/article-12380"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>रांची: सीएम हेमंत की भतीजी और सीता सोरेन की बेटी जयश्री सोरेन ने अपना नामांकन दाखिल नहीं करने का फैसला किया है, जिसके बाद अब जामा विधानसभा में लुईस मरांडी का भाजपा उम्मीदवार सुरेश मुर्मू के साथ सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है<br />आपको बता दें कि जयश्री सोरेन जामा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थी, नामांकन दाखिल करने के लिए मंगलवार को पर्चा भी खरीदा गया था, लेकिन अब जो खबर आ रही है कि भाजपा की ओर से जयश्री सोरेन को मना लिया गया है, दावा किया जा रहा है कि अब जयश्री सोरेन सुरेश मुर्मू के लिए प्रचार प्रसार करेगी. </p>
<h3><strong>जामा पर अपनी दावेदारी ठोक रही थी जयश्री सोरेन</strong></h3>
<p>आपको यह भी बता दें कि पहले भाजपा के चुनाव चिह्न पर जयश्री सोरेन का चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने सीता सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे अपने पुराने कार्यकर्ता सुरेश मुर्मू को ही एक बार फिर से अखाड़े में उतारने का फैसला किया. जिसके बाद जयश्री सोरेन की नाराजगी की खबर सामने आ रही थी, जामा वही सीट है, जहां से सीता सोरेन वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार जीत दर्ज करती रही है. जयश्री सोरेन के पिता दुर्गा सोरेन को 1995 और 2000 में जीत मिली थी तो दादा शिबू सोरेन 1985 में जीत दर्ज  करने में कामयाब रहे थें, और यही कारण है कि जामा को झामुमो का अभेद किला माना जाता है. दावा किया जाता है कि जयश्री सोरेन इस सीट पर किसी बाहरी चेहरे को एंट्री देने को तैयार नहीं थी, जयश्री सोरेन का मानना था कि जब भाजपा के दूसरे नेताओं के बेटे बेटियों और बहूओं को  टिकट मिल सकता है तो फिर सोरेन परिवार की इस परंपरागत सीट से उन्हे उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया जा सकता है. जयश्री सोरेन की मां सीता सोरेन को भाजपा जामा के बदले जामताड़ा से उम्मीदवार बनाया है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 15:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कल्पना सोरेन, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और लालू यादव होंगे महागठबंधन का  स्टार प्रचारक</title>
                                    <description><![CDATA[झामुमो ने शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन के साथ ही कल्पना सोरेन को अपना स्टार प्रचारक बनाया है. इसके साथ ही एन चुनाव के वक्त भाजपा छोड़ झामुमो की सवारी करने वाली लुईस मरांडी को भी जगह मिली है. जबकि राजद ने तेजस्वी यादव, लालू यादव के साथ ही पार्टी के दूसरे नेताओं को अपना स्टार प्रचारक बनाया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/kalpana-soren-priyanka-gandhi-rahul-gandhi-and-lalu-yadav-will/article-12378"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(28).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस राजद और झामुमो ने अपने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है. कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी को अपना स्टार प्रचारक बनाया है, जबकि झारखंड की आईरन लेडी दयामणि बारला को भी जगह मिली है. इसके साथ ही इमरान प्रतापगढ़ी, केसी वेणुगोपाल, गुलाम अहमद मीर, भूपेश बघेल, सलमान खुर्शीद, तारीक अनवर, अधीर रंजन चौधरी, मल्लू भाटी विक्रमाकर, बीके हरि प्रसाद, गौरव गोगई, किशोरी लाल शर्मा, , पवन खेरा, सुप्रिया श्रीनेत, जीगनेश मेवानी, अलका लंबा, शाजिद अनवर, उदय भानू के साथ ही झारखंड प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, डॉ रामेश्वर उरांव, सुबोधकांत सहाय, प्रणव झा, प्रदीप बलमुचु, राजेश ठाकुर, सुखदेव भगत, कालीचरण मुंडा, फुरकान अंसारी, चंद्रशेखर दुबे, बंधु तिर्की, योगेंद्र साव, प्रदीप यादव, मणिशंकर, भीम कुमार, अनवर अहमद अंसारी, रिजायुल अंसारी, राजेश सिन्हा सन्नी को भी जगह मिली है.</p>
<h3><strong>अब लुईस मरांडी के निशाने पर होगी भाजपा</strong></h3>
<p>झामुमो ने शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन के साथ ही कल्पना सोरेन को अपना स्टार प्रचारक बनाया है. इसके साथ ही एन चुनाव के वक्त भाजपा छोड़ झामुमो की सवारी करने वाली लुईस मरांडी को भी जगह मिली है. जबकि राजद ने तेजस्वी यादव, लालू यादव के साथ ही पार्टी के दूसरे नेताओं को अपना स्टार प्रचारक बनाया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 13:18:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मांडर विधानसभा 2024: बंधू तिर्की का कारवां बढ़ायेगी शिल्पी नेहा तिर्की या सन्नी टोप्पो खिलायेंगे कमल</title>
                                    <description><![CDATA[सन्नी टोप्पो कितनी मजबूत चुनौती पेश कर सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी. हालांकि शिल्पी नेहा तिर्की और बंधू तिर्की अपनी जीत को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आ रहे हैं, बंधू तिर्की का दावा है कि कहीं कोई मुकाबला नहीं है, कांग्रेस की जीत महज औपचारिकता है, लेकिन अंतिम फैसला तो मतपटियों से ही निकल कर सामने आयेगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/mandar-assembly-2024-shilpi-neha-tirkey-or-sunny-toppo-will/article-12356"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(27).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची:</strong> लोहरदगा लोकसभा का हिस्सा मांडर विधानसभा में वर्ष 2005,2009 और 2019 में बंधू तिर्की अलग अलग पार्टियों के बनैर तले जीत दर्ज कर चुके हैं.  वर्ष 2005 में बंधू तिर्की ने गोवा डमोक्रैटिक पार्टी, वर्ष 2009 में झारखंड जनाधिकार मंच और वर्ष 2019 में झाविमो के टिकट पर जीत दर्ज की थी. हालांकि आय से अधिक मामले में उनकी विधायकी जाने के बाद बेटी शिल्पी नेहा तिर्की ने मोर्चा संभाला और 2022 के उपचुनाव में जीत दर्ज करने में सफल भी रही, इस बार कांग्रेस ने शिल्पी नेहा तिर्की पर एक बार फिर से दांव लगाया है, जबकि भाजपा ने सन्नी टोप्पो को मोर्चे पर तैनात किया है. वर्ष 2014 में कमल खिलाने वाले गंगोत्री कुजूर पर इस बार पार्टी ने दांव लगाना बेहतर नहीं समझा, दरअसल वर्ष 2022 के उपचुनाव में पार्टी ने एक बार फिर से गंगोत्री कुजूर पर दांव लगाया था, लेकिन गंगोत्री कुजूर शिल्पी नेहा तिर्की का मुकाबला सफलता का परचम फहराने में सफल नहीं हो सकी, इस हालत में देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी ने सन्नी टोप्पो जैसे युवा चेहरा पर जो दांव खेला है, कितना कामयाब रहता है. </p>
<h3><strong>वर्ष 2014 में गंगोत्री को हाथों खिला था कमल</strong></h3>
<p>यदि मांडर के पुराने इतिहास को खंगाले तो इस सीट से वर्ष 2000 में देवकुमार धान ने पंजा को जीत दिलाई थी, जबकि वर्ष 2005 और 2009 में बंधू तिर्की ने जीत का सेहरा बांधा, लेकिन वर्ष 2014 में गंगोत्री कुजूर कमल खिलाने में कामयाब रही. वर्ष 2022 के उप चुनाव में शिल्पी नेहा तिर्की के हिस्से 95,486 तो गंगोत्री कुजूर के खाते में 71,796 वोट आया था, जबकि पूर्व विधायक देव कुमार धान ने निर्दलीय अखाड़े में कूदते हुए 22,424 वोट पाने में कामयाब हुए थें. जबकि वर्ष 2019 में बंधू तिर्की के हिस्से 92,491 तो देव कुमार धन भाजपा की ओर से बैटिंग करते हुए महज 69,364 पर सिमट गये थें, जबकि उस वक्त के कांग्रेस उम्मीदवार सन्नी टोप्पो 8,840 के साथ  चौथे स्थान पर थें.<br />हार जीत का अंतर करीबन 23 हजार का था. इस हालत में इस बार सन्नी टोप्पो कितनी मजबूत चुनौती पेश कर सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी. हालांकि शिल्पी नेहा तिर्की और बंधू तिर्की अपनी जीत को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आ रहे हैं, बंधू तिर्की का दावा है कि कहीं कोई मुकाबला नहीं है, कांग्रेस की जीत महज औपचारिकता है, लेकिन अंतिम फैसला तो मतपटियों से ही निकल कर सामने आयेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 15:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदिवासी समाज के अस्तित्व  के लिए एनआरसी जरुरी: बाबूलाल मरांडी</title>
                                    <description><![CDATA[1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर 88% से 81% पर पहुँच गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/nrc-is-necessary-for-the-survival-of-tribal-society-babulal/article-12354"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/babulal-marandi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p>रांची: झारखंड में आदिवासी समाज के अस्तिव को बचाने के लिए एनआरसी जरुरी है, बगैर इसके आदिवासी समाज की अस्मिता, उनकी पहचान और उनकी सांस्कृतिक परंपरा को बचाया नहीं जा सकता. यह दावा पूर्व सीएम बाबूलाल की ओर से किया गया है, अपने एक्स एकाउंट पर एनआरसी की जरुरत को रेखांकित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि “झारखंड में आदिवासी समाज के अस्तित्व को बचाने और घुसपैठ पर नकेल कसने के लिए एनआरसी लागू करना बेहद जरूरी है। जिस प्रकार से झामुमो कांग्रेस के संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देकर उनके अवैध दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, ये भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा व जामताड़ा समेत 6 जिलों से 16% जनजातीय समुदाय के लोग घटे हैं। जबकि मुस्लिमों की आबादी में 13% की वृद्धि हुई है। संथाल परगना के दो जिले साहिबगंज और पाकुड़ में तो मुस्लिमों की संख्या 35% बढ़ी है।</p>
<p>1951 36 फीसदी थी आदिवासियों की आबादी, 2011 में  26 फीसदी रह गयी</p>
<p>बाबूलाल  ने आगे लिखा है कि “1951 के जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुँची है। इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर 88% से 81% पर पहुँच गई है। झारखंड में आदिवासियों की घटती आबादी का बुरा असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी और सरकारी नौकरियों में घटते अवसर के रूप में पड़ने वाला है। यदि अवैध घुसपैठ की स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आदिवासी समाज के सांसदों, विधायकों की संख्या भी कम हो जाएगी। संथाल परगना के क्षेत्र में मुस्लिम युवक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधियों से विवाह कर डेमोग्राफी बदलने का प्रयास कर रहे हैं।झारखंड में भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठ विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी और एनआरसी लाकर सारे बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें चुन-चुनकर राज्य की सीमा से बाहर किया जाएगा</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
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                <link>https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/nrc-is-necessary-for-the-survival-of-tribal-society-babulal/article-12354</link>
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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 14:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Devendra Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हटिया का किंग कौन! नवीन जायसवाल का चौका या अजयनाथ शाहदेव रोक लेंगे कारवां</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा एक बार फिर से पूरे शबाब में नजर आ रही है, उसकी तुलना में कांग्रेस प्रचार प्रसार के मोर्चे अत तक कुछ पीछे नजर आ रही है, हालांकि अभी वक्त है, इस हालत में देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कितनी मजबूत चुनौती दे पाती है. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/assembly-elections-2024/who-will-be-the-king-of-hatiya-naveen-jaiswals-chowka/article-12353"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/fotojet-(26).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रांची</strong>: हटिया विधानसभा में एक बार फिर से कांग्रेस ने अजयनाथ शाहदेव पर दांव लगाया है, हालांकि टिकट मिलने के पहले तक अजयनाथ शाहदेव के बारे में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की खबर थी. करीबन एक सप्ताह तक यह खबर सियासी गलियारों में तैरती रही, बावजूद इसके अजयनाथ शाहदेव की ओर इसका कोई खंडन सामने नहीं आया. लेकिन जैसे ही भाजपा की ओर से नवीन जायसवाल की उम्मीदवारी का एलान हुआ, अजयनाथ शाहदेव सामने आयें और भाजपा में शामिल होने की तमाम खबरों का खंडन किया. अ्जयनाथ शाहदेव की इस रणनीति के कारण अभी भी कांग्रेस समर्थकों के बीच भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है. दावा किया जा रहा है कि अजयनाथ शाहदेव की पहली चाहत तो भाजपा ही थी, लेकिन जब सीपी सिंह को सातवीं बार रांची के अखाड़े से उतारने का एलान हो गया, उसके बाद  नवीन जायसवाल का एक बार फिर से हटिया से चुनाव लड़ना तय हो गया, अब अजयनाथ शाहदेव के पास कोई दूसरा  विकल्प नहीं था और आखिरकार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. यदि इसके बावजूद भी कांग्रेस को अजयनाथ शाहदेव पर दांव लगाना पड़ा तो समझा जा सकता है कि हटिया कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती है.</p>
<h3><strong>तीन बार जीत कांग्रेस का परचम फहरा चुके हैं सुबोधकांत सहाय</strong></h3>
<p>आपको बता दें कि हटिया विधानसभा का गठन वर्ष 1977 में हुआ था, सुबोधकांत सहाय तीन बार हटिया से जीत दर्ज कर चुके हैं. 1990 में इस सीट पर संघ का पुराना चेहरा रहे रामजी लाल सारडा ने भाजपा का कमल खिलाया था, वर्ष 2005 और 2009 में कांग्रेस के गोपलनाथ शाहदेव ने कांग्रेस की झोली में जीत का तोहफा डाला, लेकिन वर्ष 2012 के उपचुनाव में मौजूदा विधायक नवीन जायसवाल ने आजसू के टिकट पर जीत दर्ज की, जिसके बाद वर्ष 2014 में नवीन जायसवाल ने झाविमो और 2019 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की, इस बार भाजपा आलाकमान ने एक बार फिर से नवीन जायसवाल पर भरोसा जताया है. <br /> </p>
<h3><strong>अभी तक नहीं चढ़ा है कांग्रेस पर चुनावी रंग</strong></h3>
<p>यदि सामाजिक समीकरणों की बात करें तो हटिया में 4फीसदी दलित, 28 फीसदी आदिवासी, 15 फीसदी मुस्लिम, तीन फीसदी महतो और तीन फीसदी के आसपास तेली जाति के मतदाता हैं. जहां तक मौजूदा सियासी जंग का सवाल है, भाजपा एक बार फिर से पूरे शबाब में नजर आ रही है, उसकी तुलना में कांग्रेस प्रचार प्रसार के मोर्चे अत तक कुछ पीछे नजर आ रही है, हालांकि अभी वक्त है, इस हालत में देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस कितनी मजबूत चुनौती दे पाती है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>समाचार</category>
                                            <category>विधानसभा चुनाव 2024</category>
                                            <category>बड़ी खबर</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>रांची</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 13:23:27 +0530</pubDate>
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                <title>डुमरी की बाजी किसके हाथ! जयराम की आंधी रोकेंगे सुदेश या फिर से फहरेगा बेबी देवी का परचम</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://samridhjharkhand.com/state/jharkhand/giridih/the-battle-of-dumri-who-will-stop-jairams-storm-sudesh/article-12287"><img src="https://samridhjharkhand.com/media/400/2024-10/d0ab7fab-500d-49dc-8f99-2cc98955e754.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची:</strong> झारखंड सूबे में चुनावी संग्राम अपने शबाब की ओर है. हर गुजरते दिन के साथ चुनावी रंग और भी गाढ़ा होता जा रहा है. लेकिन डुमरी को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है, दरअसल झामुमो की ओर से एक बार फिर से टाइगर जगरनाथ मंत्री की पत्नी और हेमंत कैबिनेट की हिस्सा रही बेबी देवी को एक बार फिर से अखाड़े में उतारने का फैसला किया तो टायगर जयराम ने भी जंगे मैदान में कूदने का एलान कर दिया है, लेकिन आजसू का चेहरा कौन होगा, इसको लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है, दावा किया जा रहा है कि इस सीट पर आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की भी नजर लगी है, और यदि वह अपने आप को सिल्ली के अखाड़े में कमजोर पाते हैं तो फिर डुमरी के चुनावी जंग में कूदने का फैसला कर सकते हैं</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सिल्ली की सियासत में उलझे सुदेश महतो</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, इस बार सुदेश महतो सिल्ली की सियासत में उलझे नजर आ रहे हैं, जिस तरीके से जयराम महतो ने देवेन्द्रनाथ महतो की तैनाती की है, और झामुमो ने अमित महतो की घर वापसी करवाते हुए एक बार फिर से अखाडे में उतार दिया है, उसके बाद मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है. जिसके बाद सुदेश महतो किसी विकल्प की तलाश में है, उनके बारे में डुमरी से चुनाव लड़ने की चर्चा तेज है, लेकिन मुश्किल यह है कि टाइगर जयराम ने पहले ही डुमरी के अखाड़े में कूदने का एलान कर दिया है. </p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>डुमरी में त्रिकोणीय मुकाबला </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यदि बात हम 2019 की करें तो उस वक्त डुमरी में आजसू और भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, जिसका लाभ भी जगरनाथ महतो को मिला था. वर्ष 2019 में जगरनाथ महतो के हिस्से 37 फीसदी वोट आया था तो आजसू की यशोदा देवी के हिस्से 19.56 फीसदी वोट आया था, जबकि भाजपा की ओर से बैटिंग करने उतरे प्रदीप साहू के हिस्से 18.93 फीसदी वोट आया था. कुल मिलाकर भाजपा-36013 और आजसू-36,840 को 72 हजार वोट मिला था, जबकि71,128 के साथ जगरनाथ महतो को चौथी बार जीत का परचम फहराने में सफल रहे थे. इस बार दोनों की संयुक्त ताकत साथ होगी, और यहीं से बेबी देवी के सामने मुश्किल खड़ी होती नजर आती है, लेकिन इसमें पेच यह है कि टाइगर जयराम महतो अपनी उम्मीदवारी का एलान कर एक बार फिर से डुमरी में त्रिकोणीय मुकाबला के हालात बना दिये हैं.</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>डुमरी का सियासी इतिहास</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यदि हम बात डुमरी के सियासी इतिहास को समझने की कोशिश करें तो 2014 में 77,984 के साथ जगरनाथ महतो के हिस्से जीत आयी थी तो 45,503 के साथ लालचंद महतो दूसरे स्थान पर रहे थें, जबकि जदयू उम्मीदवार मौलाना मोबिन 16,730 के साथ चौथे स्थान पर रहे थे. इसके पहले वर्ष 2009 में झामुमो की ओर से बैटिंग करते हुए जगरनाथ महतो ने जीत दर्ज की थी, जबकि जदयू के दामोदर प्रसाद महतो को 20,292 के साथ दूसरा स्थान मिला था. जबकि 19,084 के साथ लालचंद महतो तीसरे स्थान पर खिसक गये थे. वर्ष 2005 में दामोदर महतो ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था तथा 16,917 मत लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे. दूसरे स्थान पर रहे राजद प्रत्याशी लालचंद महतो ने 23,474 मत प्राप्त किया था. इस चुनाव में पहली बार जीत दर्ज करने वाले झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो को 41,784 मत मिले थे.</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>डुमरी की सियासत में एक और टाइगर की एंट्री</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आपको यह भी बता दें कि जगरनाथ महतो को पहले डुमरी को लालचंद महतो का किला माना जाता था, उनके नाम डुमरी से तीन बार जीत दर्ज करने का रिकार्ड है. इस बार के सियासी संग्राम की विशेष बात यह है कि लालचंद महतो और जगरनाथ महतो दोनों की ही मौत हो चुकी है, हालांकि जगरनाथ महतो की ओर से उनकी पत्नी बेबी देवी ने मोर्चा संभाल रखा है, लेकिन इस बीच डुमरी की सियासत में एक और टाइगर की एंट्री हो चुकी है, जिसके निशाने पर लालचंद महतो और जगरनाथ महतो का सियासी किला है.</p>
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<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>गिरिडीह</category>
                                            <category>झारखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 15:52:37 +0530</pubDate>
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