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एआई से बदलेगी आधी आबादी के काम की सूरत

आयुषी खरे

समृद्ध डेस्क: डिजिटलीकरण ने सरकारी, गैर सरकारी कामकाज से लेकर घर गृहस्थी तक पैर पसार लिए हैं और डिजिटल कार्यप्रणाली ने अपनी उपयोगिता कोविड महामारी के दौर में प्रखर होकर साबित की जब शासकीय व अशासकीय कार्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वेबिनार, फेसबुक लाइव यहां तक कि ई-कैबिनेट डिजिटल माध्यम से किये जाने लगे।

सार्थक उदाहरणों के साथ कामकाज का ई (डिजिटल) स्वरूप कार्यशैली व जीवनशैली में शामिल हो गया है और समय के साथ अब डिजिटल (Digital) रूप को एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा मिलने की संभावना प्रबल होती जा रही है। संस्थाओं में कार्य निष्पादन में एआई जहां काम की सरलता को बढ़ाने में सहायक होगा वहीं निकट भविष्य में आधी आबादी के काम की सूरत भी बदल देगा।

घर गृहस्थी के कामों में साथी बनेगा एआई

घरेलू कामकाज में मशीनों के महती दखल के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस घर गृहस्थी के कामों के सुचारू क्रियान्वयन में सहायक साबित हो सकता है। नज़दीकी भविष्य में घर की साफ सफाई करने वाले रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर, डिजिटल वॉइस असिस्टेंट, मेडिकेशन मैनेजमेंट एवं स्पेशल डाइट फ़ूड तैयार करने वाले रोबोट्स घर के रखरखाव में महिलाओं की सहायता करते पाए जा सकेंगे जिनके उपयोग से आधी आबादी घर के काम सहूलियत से कर सकेगी।

चिकित्सकीय दृश्यों में महिलाओं का सहायक बनेगा एआई

घर में मौजूद सीनियर सिटीजन को होम हेल्थ केअर देने में भी एआई सहायक साबित होगा। सामान्यतः घर में मौजूद प्रौढ़ सदस्य की मानसिक एवं शारीरिक देखभाल की ज़िम्मेदारी घर की महिलाओं पर ही होती है। ऐसे में सीनियर होम हेल्थ केयर में महिलाएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले सकती हैं। एआई पावर्ड चैटबॉट्स एवं कन्वर्सेशन डिवाइसेस बातचीत द्वारा मनोरंजन एवं बेहतर लाइफ क़्वालिटी के लिए उपयोगी होंगे तो वहीं स्टाफिंग क्राइसिस के मद्देनजर असिस्टिव रोबोटिक वाउंड केयर, वर्चुअल नर्स असिस्टेंट एवं रिमोट पेशेंट मोनिटरिंग से घर के बुज़ुर्गों में गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा।

डिजिटल चाइल्डकेअर और एआई पावर्ड पेरेंटिंग से होगी बच्चों के लालन पालन में माँ को मदद

आने वाले समय में बच्चों का पालनपोषण भी डिजिटलीकरण से अछूता नहीं रह सकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्रभावित एवं संचालित कई एप्पलीकेशन जैसे म्यूज़, बॉस्को जहां बच्चों की देखभाल के नमूने तैयार कर सकेंगे और उन्हें डिजिटल खतरों से आगाह कर सकेंगे तो वहीं खिलौने जैसे दिखने वाले नन्हे रोबोट जैसे बीन-क्यू बच्चों को मनोरंजन एवं इंटरैक्टिव इंगेजमेंट दे सकेंगे जब अभिभावक बाहर हों अथवा व्यस्त हों।

समानता की ओर बढ़ेगी कामकाजी महिलाओं की वर्कलाइफ

एआई के समायोजन से कॉरपोरेट सेक्टर में स्त्री-पुरुष कार्यविभाजन में समानता बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। ह्यूमन और टेक्नोलॉजी के कोलैबोरेशन से डेटा मैनेजमेंट व टेक टूल्स के इस्तेमाल से दक्षता, री-स्किलिंग व अप-स्किलिंग से कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं को कार्य के बेहतर विकल्प और अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

(लेखिका आयुषी खरे की 4 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं एवं वे स्वतंत्र लेखन करती हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं)

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