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ज्यादातर लोग जानते हैं कि वन्य जीव संरक्षण में काले हिरण की कितनी अहमियत है. इस लुप्तप्राय जानवर को बचाने के लिए सरकारी स्तर पर भी काफी प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन इन प्रयासों के इतरगंजम जिले के गांव भारतीय मृग के संरक्षण की कहानी में बदलाव की एक नई शुरुआत लेकर आए हैं, जिसके साथ वो अपने जीवन को भी बदलना चाहते हैं..

मो. असगर खान राज्य में वन अधिकार एक संवेदनशील विषय है. साइनबोर्ड अब आदिवासी समुदायों के लिए अपने बकायों का दावा करने का एक नया तरीका बनते जा रहे हैं. रांची: सामाजिक कार्यकर्ता सुनील मिंज ने बताया, “तीन गांवों में लगे साइनबोर्ड बताते है कि गांव वालों के पास वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 1,100

कालिदास मुर्मू, दुमका आज नौ अगस्त को देश और दुनिया के आदिवासी अपनी अस्मिता एवं पहचान को जीवित रखने के लिए विश्व आदिवासी दिवस मनाते हैं। दरअसल इस आयोजन का मुख्य स्रोत संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ा है। विश्व इतिहास के घटनाक्रमों से ज्ञात होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध के

भारत में नगरनार, नेतरहाट, नियामगिरी और नगरौला से विकास और समृद्धि के नाम पर खदेड दिये गये लाखों ‘आदिवासियों’ और अमरीका में मिसिसिपी के तटों से उखाडे गये ‘इंडियन’ के मध्य सबसे बड़ी समानता यही है कि – उनमें से कोई भी फिर कभी ‘अपनी मूल-आदिवासी अस्मिता’ अर्थात आदिवासियत को वापस नहीं पा सका।

मानव तस्कर पन्नालाल के कार्यक्रमों में झारखंड के नेता व मंत्री भी शामिल होते थे। पन्नालाल जिन परिवारों को घरेलू काम के लिए लड़कियां देता था, उससे 40 से 50 हजार रुपये वार्षिक कमीशन वसूलता था। प्रभात खबर अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, उससे की जा रही पूछताछ के दौरान ये जानकारियां मिली हैं।

बॉलीवुड की बड़ी एक्ट्रेस रही प्रीटि जिंटा ने गुरुवार, 18 नवंबर 2021 को एक ट्वीट के जरिए ऐलान किया कि वे और उनके पति जीन जुड़वा बच्चों के माता-पिता बने हैं। प्रीटि जिंटा ने इसके लिए लोगों और अपनी सरोगेट का जिन्होंने उनके बच्चे को जन्म दिया उनका आभार व्यक्त किया। हालांकि अबतक प्रीटि जिंटा सरोगेसी की वजह नहीं बतायी है। मालूम हो कि भारत में सरोगेसी को लेकर अक्सर बहस होती रहती है और यह भी सवाल उठाया जाता है कि क्या यह अमीरों का पैसों के दम पर बिना जायज कारण के माता-पिता बनने का माध्यम है।

दुमका : डायन कुप्रथा उत्तर भारत के बड़े हिस्से में व्याप्त है। यह कुप्रथा मध्ययुगीन सती प्रथा की तरह ही खतरनाक है। आदिवासी सेंगल अभियान ने शुक्रवार, 12 नवंबर को इसके खिलाफ दुमका में एक दिवसीय धरना दिया और लोगों से अपील की कि वे इससे बचें और इसके खिलाफ खड़े हों।

झारखंड की छुटनी महतो को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। छुटनी महतो को यह सम्मान उनके द्वारा डायन कुप्रथा के लिए किए गए संघर्ष और जागरूकता के लिए दिया गया। छुटनी महतो खुद इस कुप्रथा की शिकार रही ंहैं और उन्हें घर से बाहर कर दिया गया था व उनकी देह पर मैला फेका गया था जिसका अंश उनके मुंह के अंदर भी चला गया था।

दुमका : दुमका जिले के दुमका प्रखंड की भुरकुंडा पंचायत के अंतर्गत लेटो गांव में दिसोम मारंग बुरु युग जाहेर अखड़ा और ग्रामीणों ने बेलबोरोन पूजा हर्षोल्लास के साथ मनाया। बेलबोरोन पूजा के एक महीने पहले से गुरु-शिष्य गांव में आखड़ा बांधते हैं, जहां गुरु शिष्यों को मंत्र की सिद्धी, परंपरागत चिकित्सा विधि आदि का

दुमका : दुमका जिले के बड़तल्ली पंचायत के एक गांव में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना घटी है। यह ग्राम प्रधान के फैसले के बाद एक महिला व पुरुष को निर्वस्त्र कर गांव में एक किलोमीटर तक घुमाया गया। ग्राम प्रधान ने अन्य ग्रामीणों के साथ एक महिला को अन्य पुरुष के साथ