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ऊर्जा संरक्षण संशोधन विधेयक क्या है, इससे कैसे बदलेगा ऊर्जा के उपयोग का तरीका?

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ऊर्जा संरक्षण संशोधन विधेयक 2022 को आठ अगस्त 2022 को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस ने असहमतियां प्रकट की थी। वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने इस विधेयक को भविष्य का विधेयक बताया है और कहा है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में हर देश को यह समझ में आ गया है कि उन्हें ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम उठाना होगा। केंद्र सरकार का तर्क है कि यह विधेयक कार्बन उत्सर्जन को कम करने व ऊर्जा के अधिक कुशल उपयोग को बढावा देने के लिए लाया गया है।

Photo Credit - https://cosmosmagazine.com/

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2022 को आठ अगस्त 2022 को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस ने असहमतियां प्रकट की थी। वहीं, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने इस विधेयक को भविष्य का विधेयक बताया है और कहा है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में हर देश को यह समझ में आ गया है कि उन्हें ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम उठाना होगा। केंद्र सरकार का तर्क है कि यह विधेयक कार्बन उत्सर्जन को कम करने व ऊर्जा के अधिक कुशल उपयोग को बढावा देने के लिए लाया गया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस विधेयक को ‘अत्यधिक विवादस्पद’ की संज्ञा देते हुए कहा कि इसका कई राज्यों एवं किसानों ने विरोध किया है। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि कम से कम इस बिल को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है। जयराम रमेश ने उम्मीद जतायी कि परामर्शी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

आरके सिंह ने कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हमें निर्यातक बनना होगा और यह विधेयक उस दिशा में बढाया गया कदम है।

रमेश की इन चिंताओं पर आरके सिंह ने उनके ट्वीट को टैग करते हुए ट्विटर पर ही जवाब दिया। आरके सिंह ने लिखा – “यह विधेयक बिलकुल विवादित नहीं है। विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी वर्ग को दी जाने वाली सब्सिडी को प्रभावित करे। विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसानों को प्रभावित करे। आरके सिंह ने जयराम रमेश को संदर्भित करते हुए यहां तक लिखा कि ऐसा लगता है कि बिल को आपने पढा नहीं है”।

आरके सिंह ने लिखा, “हमने इस विधेयक पर राज्यों से परामर्श किया है और उनके साथ बैठकें भी की हैं। परामर्श प्रक्रिया को आगे बढाने के लिए, विधेयक को पेश करने से पहले मैंने अध्यक्ष को पत्र लिख कर इस प्रक्रिया के दौरान उक्त विधेयक को परखने के लिए स्थायी समिति के पास भेजने के अपने इरादे की सूचना दी थी। तो यह हमारी पहल थी कि विधेयक को स्थायी समिति को भेज दिया गया है”। यानी स्थायी समिति के सुझावों व टिप्पणियों के बाद यह विधेयक फिर संसद में आएगी और उसे दोनों सदनों में पारित कराना होगा। फिलहाल इसने कानून का स्वरूप नहीं लिया है, लेकिन यह चर्चा में है। इसके प्रभाव व नफा-नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच यह राजनीतिक नोक-झोक स्वाभाविक है। लेकिन, हम सामान्य भाषा में यह समझने की कोशिश करते हैं कि इस विधेयक में आखिर है क्या और इससे देश के ऊर्जा क्षेत्र में किस तरह का बदलाव आएगा?

नए विधयेक में क्या है, इससे पुराना कानून क्या बदलेगा?

ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2022 में इस बात को स्पष्ट किया गया है कि क्यों नए कानून को लागू करने के लिए इसे लाया गया। इसमें इससे पहले 2001 के ऊर्जा संरक्षण कानून, और फिर 2010 में उसमें किये गए सुधार का हवाला दिया गया है।

इस नए प्रस्तावित कानून को लाने की जरूरत बताते हुए विधेयक में कहा गया है कि 2001 का कानून ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की स्थापना और निगमन का प्रावधान करता है। और, इसके संरक्षण के उपायों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को कुछ शक्तियां प्रदान करता है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 को 2010 में नए कारकों को एड्रेस करने या उसका हल तलाशने के लिए संशोधित किया गया। इसमें उन तीन प्रमुख जरूरतों को चिह्नित किया गया है – 1. पंचामृत के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इसके लिए सुगम स्थितियां बनाना – ग्लासगो 2021 के सीओपी – 26 में भारत द्वारा प्रस्तुत पांच अमृत तत्वों के रूप में।, 2. जलवायु परिवर्तन या क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निबटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू कार्बन बाजार के विकास को बढ़ावा देना। 3. भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से डीकार्बोनाइजेशन को सुनिश्चित करने और उसे हासिल करने के लिए कार्बन ट्रेडिंग और गैर जीवाश्म स्रोतों के अनिवार्य उपयोग जैसी नई अवधारणाओं को पेश करना, पेरिस समझौते और जलवायु परिवर्तन से संबंधित अन्य आवश्यक कार्रवाई के अनुरूप सतत विकास लक्ष्य को हासिल करना। 4. नामित उपभोक्ताओं द्वारा गैर जीवाष्म ऊर्जा की न्यूनतम खपत को निर्धारित करने के लिए कानूनी प्रावधान की जरूरत है, जिससे जीवाष्म ईंधन आधारित ऊर्जा की खपत को कम करने और वातावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।

विधेयक में जिक्र है कि इसी तरह निजी क्षेत्रों द्वारा स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए उत्सर्जन में कमी के लिए कार्याें को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्बन बाजार के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करने की भी आवश्यकता महसूस की जाती है।

ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2022 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान इस प्रकार हैं –

गैर जीवाष्म ऊर्जा स्रोतों का अनिवार्य उपयोग, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, बायोमास और इथेनॉल शामिल है।
कार्बन मार्केट की स्थापना।
बड़े आवासीय भवनों को ऊर्जा संरक्षण दायरे में लाना।
ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता का दायरा बढाना।
दंड प्रावधानों में संशोधन।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के शासी परिषद गवर्ननिंग काउंसिल में सदस्यों की वृद्धि करना।
अपने कार्याें के सुचारू निर्वहन के लिए विनियमन बनने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोगों को सशक्त बनाना।

 

ऊर्जा समवर्ती सूची में, लेकिन क्या इससे केंद्र की बढेगी ताकत या नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बढेगी जिम्मेवारी

यह नया प्रस्तावित कानून ऊर्जा के कुशल उपयोग और इसके संरक्षण को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को शक्ति प्रदान करता है। ध्यान रहे कि ऊर्जा संविधान की समवर्ती सूची में है। यानी इसको लेकर संघीय या केंद्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों के अधिकारों को वर्णित किया गया है। प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के परामर्श से, अधिसूचना के द्वारा कई कदम उठाने का अधिकार देगा। यह प्रस्तावित कानून उपकरण के निर्माण, बिक्री, आयात या खरीद को प्रतिबंधित कर पाने का अधिकार भी देगा, अगर वह ऊर्जा खपत मानकों को पूरा नहीं करता हो तो। अनुसूची में निर्दिष्ट ऊर्जा गहन उद्योगों की सूची में परिवर्तन। ऊर्जा के कुशल उपयोग के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन कोड निर्धारित करना और उस बिल्डिंग कांप्लेक्स में उसके संरक्षण को लागू करना। क्षेत्रीय व स्थानीय स्तर पर उसमें बदलाव कर पाना। उस बिल्डिंग कांल्पलेक्स में ऊर्जा के कुशल उपयोग और उसके संरक्षण ऊर्जा सरंक्षण संहिता का पालन करना। यह प्रस्तावित कानून ऊर्जा को बचाने संबंधी प्रमाणपत्र भी केंद्र को जारी करने का अधिकार देता है। जो मानक से कम खपत करते हैं उन्हें प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो तय मानक से अधिक खपत करेंगे उन्हें प्रमाणपत्र खरीदना होगा। यानी एक प्रकार से शुल्क चुकाना होगा, जिससे उपभोक्ता पर नवीकरणीय स्रोतों को अपनाने का भी दबाव होगा। 100 किलोवाट या उससे ज्यादा के इलेक्ट्रिसिटी लोड वाले या 120 किलोवोल्ट एम्पीयर से अधिक की संविदात्मक मांग वाले उपकरण, औद्योगिक उपकरण या ,परिसर इसके दायरे में आएंगे।

कानून राज्य को ऊर्जा के कुशल उपयोग और संरक्षण को लागू करने की भी शक्तियां प्रदान करता है। क्षेत्रीय और स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा संरक्षण बिल्डिंग कोड में संशोधन करना, उसे अधिसूचित कर पाना। साथ ही उस बिल्डिंग, परिसर के मालिकों या कब्जाधारकों को उसके पालन के लिए निर्देशित कर पाना। राज्य सरकार ऊर्जा के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य ऊर्जा संरक्षण कोष नामक एक कोष का गठन कर सकेगा ताकि ऊर्जा के कुशल उपयोग और उसके संरक्षण को बढावा दिया जा सके।

इस कानून के उद्देश्य के लिए राज्य या केंद्र सरकार या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति द्वारा जारी किए जाने वाले सभी अनुदान या ऋण इस निधि में जमा किया जाएगा। कानून के प्रावधानों को लामू करने के लिए किए गए खर्च को पूरा करने के लिए फंड का उपयोग किया जा सकेगा। नियम के पालन में विफल रहने पर जुर्माना लगाने जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। यह जुर्माना 10 लाख रुपये तक हो सकता है। सरकार अपने इस नए प्रस्तावित कानून के जरिए 2030 तक कुल ऊर्जा में 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करना चाहती है। साथ ही इस कानून के जरिए भारत 2030 तक 2005 के स्तर से अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 45 प्रतिशत तक कम करना चाहता है।

 

 

 

 

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