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झारखंड में जस्ट ट्रांजिशन को गति देने के लिए टास्क फोर्स का गठन जरूरी : विशेषज्ञ

सस्टेनेबल ट्रांजिशन पर नीतिगत पहल से झारखंड बनेगा देश का अग्रिम राज्य

रांची : सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट सीड द्वारा बुधवार को एक स्टेकहोल्डर्स कान्फ्रेंस इनेबलिंग जस्ट ट्रांजिशन इन झारखंड का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जस्ट ट्रांजिशन से जुड़ी संभावित नीतिगत पहल की जरूरत पर व्यापक विचार.विमर्श करना था। कान्फ्रेंस में इस बात को रेखांकित किया गया कि सस्टेनेबल ट्रांजिशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष टास्क फोर्स का जल्द गठन किया जाना चाहिए, जिसमें सरकार के अलावा निजी क्षेत्र, अकादमिक जगत तथा सिविल सोसाइटी का प्रतिनिधित्व हो, ताकि झारखंड में भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था का रोडमैप तैयार किया जा सके।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एके रस्तोगी, पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और पूर्व अध्यक्ष झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि राज्य सरकार भावी चुनौतियों से निपटने के लिए तत्पर है और सस्टनेबल ट्रांजिशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। झारखंड इस दिशा में अग्रणी राज्य बन रहा है। राज्य में कार्बन न्यूट्रल और फ्यूचर रेडी इकोनॉमी के लक्ष्य के लिए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन से जुड़े दूरदर्शी योजनाओं का निर्माण आवश्यक है।

क्लाइमेट चेंज और जीवाश्म ईंधन आधारित अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के समाधान के लिए वर्ष 2021 में ग्लासगो में आयोजित सम्मलेन में भारत सरकार ने संकल्प लिया है कि वह 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो एमिशन) के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। दरअसल नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जस्ट एनर्जी ट्रांज़िशन जरूरी है और इस कड़ी में झारखंड जैसे राज्य की भूमिका बेहद अहम होगी।

कान्फ्रेंस के व्यापक उद्देश्य और संदर्भ के बारे में सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि नेटजीरो टारगेट एवं क्लाइमेट मिटिगेशन संबंधी लक्ष्यों के संदर्भ में राज्य में भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स या कमीशन के गठन की आवश्यकता है। यह टास्क फोर्स दुनिया के बेस्ट प्रैक्टिसेज के शोध अध्ययन के जरिए राज्य सरकार को नीतिगत सलाह प्रदान करे और सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद करके भावी नीति निर्धारण के लिए विजनरी रोडमैप तैयार करे, ताकि राज्य सततशील एवं समावेशी विकास के मोर्चे पर देश का अग्रणी राज्य बन सके।

इस मौके पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड में सेन्टर फॉर ग्रीन इनर्जी और एफिसिएन्ट टेक्नॉलाजी के निदेशक प्रो एसके समदर्शी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे निकलकर अब क्लीन और ग्रीन इकोनॉमी के रास्ते पर चलना जरूरी है। जस्ट ट्रांजिशन की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव होंगे, इसलिए झारखंड को टास्क फ़ोर्स गठन जैसे ठोस पहल लेना चाहिए, जो व्यापक शोध.अध्ययन के जरिए नये आर्थिक दृष्टिकोण, जरूरी कौशल और रोजगार क्षेत्रों की पहचान कर सकता है, जो न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में मदद कर सकता है।

इस कांफ्रेंस में विभिन शोध संस्थानों और थिंकटैंक के प्रतिनिधि जैसे अश्विनी अशोक (पावर फॉर ऑल), चैतन्य साहनी (स्वनीति इनिशिएटिव), देबनाथ बेरा (रांची पार्टनर्स मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स), गौरव पांडेय (क्लाइमेटएक्स) आदि के प्रतिनिधि शामिल थे। कांफ्रेंस में कई विचारणीय बिंदु भी सामने रखे गये, जिसमें से प्रमुख हैं, अर्थव्यवस्था की विविधता और उसका पुनर्गठन, नये उभरते क्षेत्रों की पहचान, खनन क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन, ट्रांजिशन के लिए डिजिटल और तकनीकी सक्षमता का आकलन, प्रभावित क्षेत्रों में कमजोर वर्गों के जीवनयापन के लिए वैकल्पिक माध्यमों की पहचान, इत्यादि।

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