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2030 तक तय इलेक्ट्रिक व्हीकल लक्ष्य हासिल करने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी : रिपोर्ट

Photo Credit -https://www.lboro.ac.uk/

रांची : एनर्जी सेक्टर व पर्यावरण पर शोघ आधारित काम करने वाली संस्था क्लाइमेट ट्रेंड और जेएमके रिसर्च एंड एनालिसिस के भारत में वाहनों की इ-मोबिलिटी पर संयुक्त अध्ययन व शोध पर आधारित एक रिपोर्ट 28 जुलाई 2022 को जारी की गयी है। इस रिपोर्ट में 2030 तक 40 प्रतिशत ई-व्हीकल लक्ष्य हासिल करने को लेकर कई अहम सुझाव दिए गए हैं और चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।

एक्सीलिरेशन ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन इन इंडिया 2030 (Accelerating transport electrification in India by 2030) नामक 21 पेज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी देश में और अधिक समन्वित ढंग से काम करने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2022 में जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का चौथा बड़ा ऑटोमोटिव मार्केट बन गया। इस रिपोर्ट में 25 राज्यों द्वारा ईवी पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करना, बिक्री विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और निवेश में तेजी लाने के लिए मांग और आपूर्ति पक्ष प्रोत्साहन जैसे उपायों को सार्थक बताया गया है। कहा गया है कि इन कोशिशों के अच्छे परिणाम मिले और 2021 में ईवी की ब्रिकी 163 प्रतिशत बढी। आंकड़ों व तथ्यों को संयोजित करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गति से 2030 तक भारत में पांच करोड़ ईवी की बिक्री हो पाएगी। जबकि नीति आयोग की रॉकी माउंटिंग थिंकटैंक के द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार, 2030 तक भारत में 30 प्रतिशत प्राइवेट कार, 70 प्रतिशत कॉमर्सियल कार, 40 प्रतिशत बसें और 80 प्रतिशत दो पहिया व तिपहिया वाहन इवी होने चाहिए। भारत के सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा भी इस संख्या का हवाला दिया जाता है और इसे संख्या में परिवर्तित करने पर यह आठ करोड़ होगा। ऐेसे में इस गैप को भरने के लिए अधिक कारगर कार्ययोजना अपनानी होगी।

लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक सुझाव पर अमल जरूरी

इस अध्ययन में गैप को भरने व लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सभी राज्यों की इवी पॉलिसी केंद्रीय अनुमान व प्रोत्साहन के अनुरूप होना चाहिए। सरकारी और वाहन एग्रीगेटर के बेड़े में 100 प्रतिशत इवी वाहन 2030 तक होना चाहिए।

चार्जिंग स्टेशनों के लिए स्पष्ट लक्ष्य को परिभाषित किया जाना चाहिए, जो विभिन्न स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता हो, जैसे – पेट्रोल पंप, मॉल, हाइवे, कार्यस्थल, आवासीय अपार्टमेंट, सार्वजनिक चार्जिग स्टेशनों के लिए किराये की लागत को सीमित करना, घर व कार्यस्थल का कुछ प्रतिशत इवी रेडी के रूप में तय करना।

इस अध्ययन के आधार पर यह सुझाव दिया गया है कि बैंक, एनबीएफसी, राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक व्हीकल समावेशन को प्राथमिक क्षेत्र में रखते हुए वित्त पोषण को प्रोत्साहित करें। वाणिज्यिक और सरकारी बेड़ों में कुछ प्रतिशत शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को अपनाने को अनिवाय किया जाना चाहिए। इसके लिए उद्योग, केंद्र एवं राज्य सरकारों को की-रिसोर्स जुटाने की जरूरत है। आत्मनिर्भर या स्वतः संचालित इवी इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए तकनीक, वित्त पोषण की जरूरत है।

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि 2030 तक पांच करोड़ इवी के लिए भारत को 20.5 लाख और आठ करोड़ इवी के लिए 39 लाख चार्जिंग स्टेशन चाहिए। राज्यों की इवी नीति में लक्ष्य को परिभाषित करने की जरूरत है ताकि देश के लक्षित इवी बिक्री को हासिल करने के लिए समन्वित प्रयास किया जा सके।

राज्यों की इवी नीतियों में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को परिभाषित करने की जरूरत है। इवी प्रोत्साहन के लिए टैक्स में छूट की भी बात रिपोर्ट में कही गयी है। इसमें कहा गया है कि जुलाई 2021 तक सिर्फ कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित केवल छह राज्यों ने इवी पर टैक्स छूट दिया था। वहीं, अधिक प्रदूषण क्रने वाले वाहनों पर अतिरिक्त कर व सेस लगाने का सुझाव दिया गया है।

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