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भारत व दुनिया में बढ़ा कोयला उत्पादन, अगले दो साल में एक बिलियन टन का लक्ष्य

कार्बन उत्सर्जन कम करने की चुनौतियों के बीच दुनिया भर में कोयले का उत्पादन और उसका उपयोग नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेजी आने से कोयला उपयोग नए शिखर पर पहुंच गया। वहीं, भारत में भी जारी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका उपयोग बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ में भी प्राकृतिक गैस की महंगी कीमतों की वजह से कोयले पर निर्भरता बढ गयी है।

रामगढ का रजरप्पा कोयला खदान क्षेत्र। Photo - Rahul Singh.

कार्बन उत्सर्जन कम करने की चुनौतियों के बीच दुनिया भर में कोयले का उत्पादन और उसका उपयोग नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेजी आने से कोयला उपयोग नए शिखर पर पहुंच गया। वहीं, भारत में भी जारी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका उपयोग बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ में भी प्राकृतिक गैस की महंगी कीमतों की वजह से कोयले पर निर्भरता बढ़ गयी है।

रांची : भारत अगले दो सालों में अपनी ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर कोयला उत्पादन को बढाना चाहता है। कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 27 जुलाई 2022 को संसद में दिए एक लिखित जवाब में कहा है कि वर्तमान के 600 मिलियन टन की तुलना में भारत 2024-25 तक एक बिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना चाहता है। कोयला मंत्री ने कहा कि कोल इंडिया ने एक बिलियन टन उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए पहले ही अपेक्षित सभी संसाधनों, पर्यावरण मंजूरी-वन मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, निकासी बाधाओं आदि से संबंधित मुद्दों-क्षमताओं की पहचान कर ली है।

कोयला मंत्री के अनुसार, “ऐसा जरूरतों को पूरा करने के लिए और देश में अनावश्यक कोयला आयात को समाप्त करने के लिए किया जा रहा है”। कोयला मंत्री ने अपने जवाब में बताया है कि इसके अलावा कोयला उत्पादन को बढावा देने के लिए कुछ प्रमुख कदम उठाए गए हैं। जैसे – खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2021 को अधिनियमित करना। इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि कैप्टिव खान स्वामी केंद्र सरकार द्वारा तय पद्धति से खान के साथ संबद्ध संयंत्र की आवश्यकता को पूरा करने के बाद 50 प्रतिशत कोयला बिक्री कर सकेगा। सरकार के जवाब में कहा गया है कि यह कदम कोयला उत्पादन में वृद्धि करने के लिए और कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास है।

कोरबा की एक कोयला बिजली उत्पादन इकाई। Photo – Rahul Singh.

 

इसके साथ राजस्व शेयरिंग आधार पर कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी, कोयला ब्लॉकों की नियमित समीक्षा करना और विकास में तेजी लाने के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया गया है, जिसमें संबंधित राज्य के मुख्य सचिव, सचिव एमओइएएफएंडसीसी, कोयला नियंत्रक संगठन और सीएमपीडीआइएल समिति के सदस्य हैं। जवाब में यह भी कहा गया है कि कोयला खानों के संचालन में तेजी लाने के लिए 11 जनवरी 2021 सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल आरंभ किया गया है।

कोयला मंत्री ने अपने जवाब में कहा है कि देश में कोयला की कोई कमी नंहीं है। 2020-21 के 716.083 मिलियन टन की तुलना में वर्ष 2021-22 में देश में कोयला उत्पादन 778.19 मिलियन टन रहा। इसके अलावा जारी वित्त वर्ष में जून 2022 तक पिछले वर्ष की इस अवधि के 156.11 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में 31 प्रतिशत वृद्धि के साथ 204.876 मिलियन टन उत्पादन रह है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अप्रैल 2022 से जून 2022 तक विद्युत मंत्रालय के अनुसार, ऊर्जा आवश्यकता और ऊर्जा आपूर्ति के बीच अंतर मात्र एक प्रतिशत था। ऊर्जा की मांग और आपूर्ति में अंतर देश में विद्युत उपलब्धता की अपर्याप्तता के अलावा अन्य कारकों अर्थात वितरण नेटवर्क में बाधाएं, वित्तीय बाधाएं, वाणिज्यिक कारण, उत्पादन इकाइयों को बंद करने आदि के कारण होती है।

दुनिया में भी कोयले की खपत नए उच्च स्तर पर

उधर, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपने जुलाई 2022 रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक स्तर पर भी कोयला की मांग और उत्पादन बढा है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कोयले की खपत 5.8 प्रतिशत बढ कर 7,947 मिलियन टन हो गयी है। ऐसा वैश्विक अर्थव्यवस्था के कोविड महामारी के शुरुआती झटके से उबरने और प्राकृतिक गैस की उच्च कीमत कोयले बिजली की ओर झुकाव की वजह बनी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में वैश्विक कोयले की खपत 2019 के स्तर से ऊपर उठ गयी है और यह उसे सर्वकालिक उच्च स्तर तक ले गयी है और यह वैश्विक ऊर्जा से संबंधित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में निरपेक्ष रूप से सबसे बड़ी वजह बना है।

Jharia coalfield, Jharkhand. Photo Credit – Wikimedia Commons.

 

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में कोयले की मांग 4.6 प्रतिशत बढकर 4230 मिलियटन टन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेजी की वजह से बिजली उत्पादन में कोयले का उपयोग 8 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि अन्य क्षेत्र में 0.8 प्रतिशत घटा है।

आइइए के अनुसार, भारत ने 2021 में 1053 मिलियन टन कोयले की खपत की जो नया उच्च स्तर है और चीन के बाद उसका दूसरा स्थान है। भारत में कोयले की तीन चौथाई मांग बिजली उत्पादन के लिए है। 2020 की तुलना में भारत में कोयले की खपत 117 मिलियन टन बढी है।

इसके अलावा अमेरिका में 15 प्रतिशत व यूरोपीय संघ में कोयले की खपत में 14 प्रतिशत वृद्धि हुई है। ऐसा बिजली उत्पादन में गैस से कोयले की तरफ जाने से हुआ है। दूसरी छमाही में गैस की कीमत बढने से ऐसा हुआ है। हालांकि अमेरिका व यूरोपीय संघ दोनों में 2019 केे स्तर से कम कोयले की खपत हुई है।

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